चेतगंज नक्कटैया लक्खा मेला 2026 वाराणसी: तारीख, रात का रूट, लाग-विमान व कैब गाइड
2026 की पक्की तारीख: चेतगंज नक्कटैया करवा चौथ की रात (गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026) को शुरू होकर शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 की सुबह तक चलेगी। चेतगंज थाने के पास रामलीला मंच पर नक्कटैया प्रसंग रात 10:30 बजे होगा, और बहुचर्चित लाग-विमान व चौकियों का जुलूस आधी रात (12:00 AM) से निकलकर सुबह 06:00 बजे तक लगातार चलेगा।
बनारस में किसी पुराने बाशिंदे से पूछिए कि शहर का सबसे गजब मेला कौन सा है, तो वह पान चबाते हुए सीधा कहेगा—"गुरु, कभी चेतगंज की नक्कटैया देखे हो?"
बाहर से आने वाले ज्यादातर लोगों को लगता है कि बनारस का मतलब बस सुबह अस्सी घाट पर चाय और शाम को दशाश्वमेध की गंगा आरती है। लेकिन करवाचौथ की रात को जो यहाँ होता है, वो पूरे देश में कहीं और देखने को नहीं मिलेगा। उस रात आधा बनारस सोता ही नहीं है। रात 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक मलदहिया से लेकर चेतगंज तक की सड़क पर 4 से 5 लाख लोग उतर आते हैं। इसे बनारस में असली लक्खा मेला कहते हैं—यानी ऐसा मेला जहाँ भीड़ लाखों में गिनी जाती है।
रास्ते पर 40-40 फीट ऊंची चलती-फिरती झांकियां, आमने-सामने ढोल-ताशे बजाते ब्रास बैंड, अखाड़े के पहलवानों की आग वाली बानेठी, और लोहे की कमानी पर हवा में 20 फीट ऊपर लटके बच्चे जो देवी-देवता बनकर साक्षात हवा में उड़ते दिखाई देते हैं।
हर साल हम बाहर से आए मुसाफिरों को वही तीन गलतियां करते देखते हैं:
- दोपहर में 3 बजे पहुंच जाना: यह सोचकर कि दिन का मेला होगा। वहां दुकानें बंद मिलती हैं तो लोग सोचते हैं कि शायद तारीख ही गलत पढ़ ली!
- रात 9 बजे ओला या ऑटो लेकर सीधे चेतगंज घुसने की कोशिश करना: पुलिस 2 किलोमीटर पहले ही बैरिकेड लगाकर रोक देती है, और रात 2 बजे वापसी की कोई सवारी नहीं मिलती।
- चेतगंज या नई सड़क के अंदर होटल बुक कर लेना: शाम 6 बजे के बाद जब पूरी सड़क सील होती है, तो सूटकेस सिर पर उठाकर 2 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
यह गाइड आपको बिना किसी लाग-लपेट के सीधी ज़मीनी बात बताने के लिए लिखी गई है: मेला कितने बजे कहाँ होता है, 1887 में अंग्रेजों को चिढ़ाने वाला इसका इतिहास, पुलिस आपकी गाड़ी कहाँ रोकेगी, और रात भर जागने के बाद सुबह 4:30 बजे कहाँ की गरम कचौड़ी-जलेबी खानी है।
रात भर का असली कार्यक्रम: घंटे-दर-घंटे क्या होता है
बनारस में समय को लेकर 15-20 मिनट आगे-पीछे होना स्वाभाविक है, लेकिन आमतौर पर रात इसी क्रम में आगे बढ़ती है:
| समय (2026) | कहाँ | ज़मीन पर असल में क्या होता है |
|---|
| शाम 06:00 बजे (29 अक्टूबर) | मलदहिया से नई सड़क | रास्ता सील: पुलिस लोहे के बैरिकेड लगा देती है। कार, टैक्सी, ऑटो, ई-रिक्शा सब बंद। इसके बाद सिर्फ पैदल ही चला जा सकता है। |
| रात 09:00 – 10:30 बजे | पटेल चौक (मलदहिया) व लहुराबीर | झांकियों का जमावड़ा: करीब 40 से 50 बड़ी चौकियां और लाग-विमान सड़क किनारे कतार में खड़े होते हैं। जनरेटर चालू होते हैं और चंदननगर की लाइटें जल उठती हैं। अगर आपके साथ बुजुर्ग या बच्चे हैं, तो भीड़ बढ़ने से पहले झांकियां देखने का यही सबसे बढ़िया समय है। |
| रात 10:30 – 11:30 बजे | चेतगंज रामलीला चबूतरा (थाने के पास) | मंच पर नक्कटैया: लक्ष्मण जी द्वारा शूर्पणखा की नाक काटने का पारंपरिक अभिनय होता है। जैसे ही नाक कटती है, पूरा चेतगंज "हर हर महादेव" के जयकारों से गूंज उठता है। |
| रात 11:45 – 12:15 बजे | चेतगंज चौराहा | नारियल फोड़ना: ज़िलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर आकर नारियल फोड़ते हैं और मध्यरात्रि की शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाते हैं। |
| रात 12:30 – भोर 04:30 बजे | मलदहिया ➔ लहुराबीर ➔ चेतगंज ➔ चौरछठवा ➔ बेनिया | चरम माहौल: जुलूस धीरे-धीरे आगे बढ़ता है। कमानी पर हवा में तैरते बच्चे, तलवारबाजी, आग की बानेठी और बैंड-बाजों की प्रतियोगिता। सड़क से लेकर छतों तक पैर रखने की जगह नहीं बचती। |
| सुबह 05:00 – 06:00 बजे (30 अक्टूबर) | बेनिया तिराहा व सेनपुरा | सुबह का समापन: अंतिम झांकियां बेनिया पहुंचती हैं। सुबह की आरती होती है और भीड़ सीधे नाश्ते की दुकानों की तरफ मुड़ जाती है। |
🎭 चेतगंज नक्कटैया लक्खा मेला 2026 — नाइट कैब व पेरीमीटर ड्रॉप सेवा
करवाचौथ की रात (29–30 अक्टूबर 2026) काशी के 139 वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक लक्खा मेले में शामिल हो रहे हैं? मलदहिया से नई सड़क तक पूरा मार्ग शाम 6:00 बजे से भोर 6:00 बजे तक सख्त नो-व्हीकल जोन रहता है। हम उपलब्ध कराते हैं रात भर स्टैंडबाय फिक्स्ड कैब, इंग्लिशिया लाइन व सिगरा चौराहा निकटतम ड्रॉप, एयरपोर्ट/स्टेशन पिकअप और बिना किसी सर्ज प्राइस के सुरक्षित पारिवारिक टेम्पो ट्रैवलर।
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👵 बुजुर्गों व परिवारों हेतु सुगम सेवा·
🚕 बिना सर्ज फिक्स्ड किराया
छुपा हुआ इतिहास: 1887 में कैसे एक बाबा ने अंग्रेजों की 'नाक' काट दी
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि नक्कटैया सिर्फ एक धार्मिक रामलीला जुलूस है। लेकिन सच्चाई यह है कि इसकी शुरुआत अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक तीखे राजनीतिक विरोध से हुई थी।
1857 की क्रांति के 30 साल बाद, 1887 के आसपास अंग्रेजों ने पूर्वांचल में भारतीयों के किसी भी राजनीतिक जमावड़े, सभा या भाषण पर कड़ा पहरा लगा रखा था। कोई भी देशभक्ति की बात करता तो पुलिस उसे तुरंत राजद्रोह में जेल में डाल देती थी।
उस समय काशी के एक मस्तमौला संत और चतुर अगुवा थे—बाबा फतेह राम। उन्होंने देखा कि अंग्रेज बाकी सब पर तो पाबंदी लगा सकते हैं, लेकिन हिंदू धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं फिर से गदर न हो जाए।
बाबा फतेह राम ने रामकथा के शूर्पणखा नक्कटैया प्रसंग को पकड़ा और उसे अंग्रेजों के खिलाफ प्रतीक बना दिया:
घमंडी राक्षसी शूर्पणखा की नाक काटना दरअसल ब्रिटिश हुकूमत के औपनिवेशिक घमंड और अकड़ की 'नाक' काटने का सरेआम मजाक था।
भीड़ में छिपे क्रांतिकारी
देखते ही देखते यह रात भर चलने वाला मेला क्रांतिकारियों का सबसे सुरक्षित ठिकाना बन गया:
- लाखों की अनियंत्रित भीड़, गूंजते ढोल-नगाड़ों और पुलिस की अफरातफरी के बीच चंद्रशेखर आज़ाद, शचींद्रनाथ सान्याल और क्रांतिकारी साथी साधारण धोती-कुर्ता पहनकर इसी भीड़ में मिलते थे।
- अंग्रेजी पुलिस के सामने ही क्रांतिकारी पर्चे हाथों-हाथ बांटे जाते थे और कोई किसी को पहचान नहीं पाता था।
- वह बगावती मिजाज आज भी इस मेले में दिखता है। आज भी देवी-देवताओं के साथ-साथ आपको सीमा पर लड़ते भारतीय सेना के जवान, इसरो के रॉकेट, और भ्रष्ट नेताओं पर व्यंग्य करती चौकियां देखने को मिलेंगी।
यह "लाग-विमान" का चक्कर क्या है?
अगर आपने कभी अपनी आंखों से नहीं देखा, तो शायद यकीन करना मुश्किल होगा।
'विमान' तो एक बड़ा सजा-धजा मंच होता है जो ट्रक या ट्रैक्टर-ट्रॉली पर बनाया जाता है। लेकिन असली जादू होता है लाग (Laag) में।
[ बाल कलाकार: काली, शिव या दुर्गा के रूप में ]
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[ गद्देदार बॉडी बेल्ट ]
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[ लोहे की लचीली कमानी (Kamani Rod) ] <--- बादलों व कपड़ों में छिपी हुई
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[ भारी काउंटर-वेट ]
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[ 10,000 बल्बों से जगमगाता हुआ ट्रक का चबूतरा ]
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मलदहिया, चेतगंज और लल्लापुरा के पुराने लोहार ट्रकों के शॉक-एब्जॉर्बर में लगने वाली मजबूत कमानीदार स्प्रिंग वाली लोहे की रॉड को खास तरीके से मोड़ते हैं।
इस रॉड पर छोटे बाल कलाकारों (जो देवी काली, शिव, दुर्गा या हनुमान का रूप धरे होते हैं) को बेल्ट से कसकर बांधा जाता है। फिर इस रॉड को मखमली कपड़ों, रुई के नकली बादलों और फूलों से ऐसे ढक दिया जाता है कि नीचे से देखने पर लोहा बिल्कुल नहीं दिखता।
रात के अंधेरे में जब नीचे से तेज रंग-बिरंगी लाइटें जलती हैं, तो सड़क से 15-20 फीट की ऊंचाई पर बच्चा बिल्कुल हवा में तैरता हुआ दिखता है और हाथ में त्रिशूल या खड्ग लेकर भाव-भंगिमाएं बनाता है। इसे देखने के लिए सचमुच सांसें थम जाती हैं।
मेले में और क्या दिखता है:
- अखाड़ों की बानेठी: झांकियों के आगे बनारस के अखाड़ों के पहलवान चलते हैं। युवा मिट्टी के तेल में भीगे जलते हुए गोलों और रस्सियों को दोनों हाथों से चक्राकार घुमाते हैं, जिसे बानेठी कहते हैं। रात के अंधेरे में आग के घूमते वृत्त बहुत सुंदर दिखते हैं।
- ब्रास बैंडों का मुकाबला: दो अलग-अलग झांकियों के बैंड जब आमने-सामने आते हैं, तो दोनों के वादक एक-दूसरे से ज्यादा तेज और सुरीली धुन बजाने की होड़ में लग जाते हैं।
पुलिस की नाकेबंदी व कैब के 4 असली ड्रॉप पॉइंट्स
करवा चौथ की शाम को अपनी गाड़ी लेकर चेतगंज जाने की जिद बिल्कुल मत कीजिएगा। पुलिस घुसने ही नहीं देगी।
सख्त नो-व्हीकल जोन
- समय: गुरुवार, 29 अक्टूबर शाम 06:00 बजे से शुक्रवार, 30 अक्टूबर सुबह 06:00 बजे तक।
- बंद मार्ग: पटेल चौक (मलदहिया) ➔ लहुराबीर ➔ चेतगंज थाना ➔ चौरछठवा ➔ बेनिया तिराहा ➔ नई सड़क।
- कोई कार, टैक्सी, ऑटो, बाइक अंदर नहीं जा सकती। केवल पैदल चलना होगा।
[ कैंट रेलवे स्टेशन व कैंटोनमेंट के बड़े होटल ]
|
v
ड्रॉप 1: इंग्लिशिया लाइन / विद्यापीठ मार्ग
| लगभग 800 मीटर पैदल
v
+-------------------------------------------------------------+
| चेतगंज नक्कटैया मेला पैदल क्षेत्र |
| पटेल चौक (मलदहिया) ---> लहुराबीर चौराहा ---> चेतगंज थाना |
| [गाड़ियां पूरी तरह बंद - सिर्फ पैदल] |
+-------------------------------------------------------------+
^ ^
लगभग | लगभग |
1 किमी | 1.2 किमी|
पैदल | पैदल |
ड्रॉप 2: सिगरा चौराहा (आईपी मॉल के पास) ड्रॉप 3: अंधरापुल / तेलियाबाग
टैक्सियों के 4 अधिकृत ड्रॉप पॉइंट्स:
यदि आप हमारी काशी टैक्सी सर्विस से आते हैं, तो हमारे स्थानीय चालक आपको बैरिकेड के ठीक बाहर सुरक्षित छोड़ते हैं जहाँ से पैदल जाना सबसे आसान हो:
- इंग्लिशिया लाइन / कैंट स्टेशन साइड (विद्यापीठ मार्ग):
- पैदल दूरी: मलदहिया पटेल चौक तक लगभग 800 मीटर।
- किसके लिए सही: कैंटोनमेंट के होटलों (ताज, रेडिसन, रामादा) में ठहरे लोगों या वाराणसी जंक्शन स्टेशन से आने वाले यात्रियों के लिए।
- सिगरा चौराहा (आईपी मॉल के पास):
- पैदल दूरी: लहुराबीर तक लगभग 1.0 किमी।
- किसके लिए सही: सिगरा, रथयात्रा या महमूरगंज के परिवारों के लिए। चौड़ी चार-लेन सड़क है, इसलिए रात को वापसी में गाड़ी मिलने में कोई दिक्कत नहीं होती।
- अंधरापुल / तेलियाबाग चौराहा:
- पैदल दूरी: मलदहिया तक लगभग 1.2 किमी।
- किसके लिए सही: जो लोग सीधे बाबतपुर एयरपोर्ट से रिंग रोड होते हुए आ रहे हों।
- बेनियाबाग मल्टी-लेवल पार्किंग:
- पैदल दूरी: नई सड़क होते हुए चेतगंज तक लगभग 600 मीटर।
- चेतावनी: गाड़ी तभी पार्क करें जब आप शाम 5:00 बजे से पहले पहुँच रहे हों। भीड़ भर जाने के बाद पुलिस सुबह 5:30 बजे से पहले गाड़ी बाहर नहीं निकलने देती।
बुजुर्गों या बच्चों को साथ ला रहे हैं? ये बातें गांठ बांध लें
अगर आपके साथ बुजुर्ग माता-पिता या छोटे बच्चे हैं, तो थोड़ी सावधानी जरूरी है। रात 1:00 बजे सड़क पर प्रैम या व्हीलचेयर लेकर उतरने की गलती मत कीजिएगा—भीड़ में चलना असंभव हो जाएगा।
इन 2 जगहों पर भीड़ से बचें
- ❌ रात 12:30 से 3:30 बजे के बीच चेतगंज थाने और चौरछठवा मोड़ के पास सड़क पर खड़े न हों। यहाँ सड़क संकरी है और जब 40 फीट लंबी ट्रैक्टर वाली झांकी मुड़ती है, तो जनसैलाब का धक्का बहुत तेज होता है।
- ❌ चप्पल या स्लीपर पहनकर न जाएं। अच्छे जूते पहनकर जाएं। 4 लाख की भीड़ में अगर किसी का पैर आपकी चप्पल के पिछले हिस्से पर पड़ गया, तो चप्पल छूट जाएगी और रात भर नंगे पांव घूमना पड़ेगा।
परिवारों के लिए 3 समझदारी भरे तरीके:
- शाम को पटेल चौक पर जल्दी देख लेना (रात 9:30 से 10:30 बजे):
स्थानीय समझदार परिवार यही करते हैं। सारी झांकियां मलदहिया पटेल चौक के पास सड़क किनारे पहले से खड़ी होती हैं। लाइटें जल रही होती हैं, जनरेटर चल रहे होते हैं, लेकिन मध्यरात्रि की भीड़ नहीं होती। आप बच्चों और बुजुर्गों के साथ आराम से टहलकर झांकियां देख सकते हैं, कलाकारों के साथ फोटो खिंचवा सकते हैं, और रात 11 बजे से पहले आराम से होटल लौट सकते हैं।
- छत या बालकनी का इंतजाम:
चेतगंज मुख्य सड़क के किनारे कई स्थानीय परिवार और गेस्ट हाउस यात्रियों को अपनी बालकनी या छत पर सशुल्क बैठने का स्थान देते हैं। सड़क की धक्का-मुक्की से दूर, ऊंचाई से पूरी शोभायात्रा देखने का यह सबसे शांत और सुरक्षित तरीका है।
- बिछड़ने पर मिलने की जगह तय कर लें:
रात 1:00 बजे के आसपास मोबाइल नेटवर्क बहुत धीमा हो जाता है क्योंकि लाखों लोग एक साथ वीडियो और फोटो अपलोड कर रहे होते हैं। अगर परिवार का कोई सदस्य बिछड़ जाए तो फोन नहीं लगेगा। इसलिए पहले ही तय कर लें कि अगर कोई अलग हो जाए तो मलदहिया की पटेल प्रतिमा के पास मिलेगा।
ठहरने के लिए सही और गलत इलाके
होटल चुनते समय यह गलती बिल्कुल न करें:
- ❌ चेतगंज, लहुराबीर, नई सड़क या गोदौलिया के अंदर होटल न लें:
शाम 6:00 बजे से ही गाड़ियां बंद हो जाती हैं। अगर आपकी ट्रेन या फ्लाइट देर से आई, तो आपको 2 किलोमीटर तक भारी सूटकेस सिर पर ढोना पड़ेगा।
- ✅ कैंटोनमेंट (कैंट स्टेशन रोड) में ठहरें — सबसे बढ़िया:
यह पूरा इलाका नो-व्हीकल जोन से बाहर है। ताज, रेडिसन और स्टेशन रोड के बजट होटलों तक गाड़ियां 24 घंटे आती-जाती हैं, और हमारे ड्राइवर 7 से 10 मिनट में आपको इंग्लिशिया लाइन ड्रॉप तक पहुंचा देते हैं।
- ✅ सिगरा या रथयात्रा में ठहरें:
मेले से सिर्फ 1.5 किमी दूर। चौड़ी सड़कें हैं, अच्छे शाकाहारी भोजनालय हैं और आसानी से रिक्शा या टैक्सी मिल जाती है।
🏨 सही इलाके में ठहरें — डोर-टू-डोर ट्रांसफर के साथ
हमें अपनी पसंद (घाट किनारे, शांत बाहरी इलाका, या साफ-सुथरा कैंट) व बजट बताएं। हम भरोसेमंद होटल चुनते हैं और फिक्स्ड किराए वाला एयरपोर्ट/स्टेशन पिकअप जोड़ते हैं ताकि गलियों में सामान न घसीटना पड़े।
📲 WhatsApp पर होटल ढूंढें
या 📞 +91 99354 74730
✅ भरोसेमंद होटल, सही इलाके·
🧳 डोर-टू-डोर ट्रांसफर·
📍 घाट / शांत / साफ ज़ोन·
🛡️ कोई कमीशन झटका नहीं
रात भर जागने वाला खान-पान: सुबह 4:30 बजे तक क्या खाएं
नक्कटैया की रात बनारसी स्वाद का भी जलसा होता है। हलवाई और चाट वाले रात भर चूल्हा जलाए रखते हैं:
- मध्यरात्रि की बनारसी टमाटर चाट:
मिट्टी के कुल्हड़ में भुने हुए टमाटर, उबले आलू, जीरा-हींग का तड़का, काजू और ऊपर से चाशनी व सेव। लक्सा रोड पर दीना चाट भंडार या लहुराबीर के ठेलों पर यह रात 12 बजे तक मिलती है।
- सर्दियों का पहला मलइयो (Malaiyo):
अक्टूबर के अंत में पड़ने वाली नक्कटैया की रात ही काशी में मलइयो का पहला औपचारिक दिन होता है। रात भर ओस की बूंदों में मथा हुआ केसरिया दूध का झाग, ऊपर से पिस्ता-बादाम। नक्कटैया की रात 2:00 बजे के आसपास सड़कों पर पहली बार मलइयो के मिट्टी के कुल्हड़ बिकना शुरू होते हैं।
- भोर में 4:30 बजे की कचौड़ी-जलेबी:
जब अंतिम झांकी सुबह बेनिया पहुंचती है, तो सारा बनारस ठठेरी बाजार के राम भंडार, कचौड़ी गली के श्री राजबंधु, या लहुराबीर की दुकानों की ओर बढ़ जाता है। ताजी छनती हुई हींग वाली छोटी कचौड़ी, तीखी चना-आलू की सब्जी और शुद्ध देसी घी की कुरकुरी जलेबी का स्वाद रात भर की थकान मिटा देता है।
- ठंडाई और मगही मीठा पान:
सुबह की धूप निकलने से पहले गोदौलिया चौराहे पर केसर-पिस्ते वाली ठंडी ठंडाई पीजिए और मुंह में रखते ही घुल जाने वाला बनारसी मगही मीठा पान खाइए।
फिक्स्ड-किराया फेस्टिवल कैब व टेम्पो ट्रैवलर दरें (अक्टूबर 2026)
रात 2:00 बजे सड़क पर ऑटो वालों से ₹1,000 के लिए मोलभाव करने की जरूरत नहीं है। हमारा संचालन कार्यालय स्थानीय ड्राइवरों के साथ पहले से तय फिक्स्ड दरों पर गाड़ियां उपलब्ध कराता है:
| सेवा व अवधि | AC सेडान (Dzire / Etios) | फैमिली SUV (Ertiga / Carens) | लग्जरी SUV (Innova Crysta) | 12-सीटर टेम्पो ट्रैवलर | 17-सीटर टेम्पो ट्रैवलर | रूट व बुकिंग शर्तें |
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| नाइट मेला स्टैंडबाय कैब (8 घंटे / 80 किमी) | ₹2,499 | ₹3,399 | ₹4,299 | ₹4,599 | ₹5,299 | रात 10:00 बजे होटल पिकअप ➔ इंग्लिशिया लाइन ड्रॉप ➔ ड्राइवर रात भर AC चालू रखकर स्टैंडबाय रहेगा ➔ सुबह 06:00 बजे नाश्ते के बाद होटल वापसी। |
| शाम ड्रॉप व सुबह पिकअप (टू-वे ट्रांसफर) | ₹1,499 | ₹1,999 | ₹2,599 | ₹3,199 | ₹3,799 | रात 09:30 बजे तय ड्रॉप पॉइंट पर छोड़ना + सुबह 05:30 बजे तय जगह से सुरक्षित होटल वापसी। |
| एयरपोर्ट ट्रांसफर (बाबतपुर ⇄ सिगरा / कैंट) | ₹899 | ₹1,299 | ₹1,799 | ₹2,499 | ₹2,999 | एयरपोर्ट पिकअप या ड्रॉप। टोल व 45 मिनट फ्लाइट प्रतीक्षा शामिल। कोई त्योहारी सर्ज नहीं। |
| रेलवे ट्रांसफर (वाराणसी जंक्शन BSB / बनारस BSBS) | ₹599 | ₹899 | ₹1,199 | ₹1,699 | ₹1,999 | स्टेशन प्लेटफॉर्म पर सहायता, सामान प्रबंधन और होटल लॉबी तक सीधी गाड़ी। |
| फुल-डे सिटी टूर + नाइट मेला ड्रॉप (12 घंटे / 100 किमी) | ₹3,299 | ₹4,399 | ₹5,499 | ₹6,199 | ₹7,299 | दिन में सारनाथ व विश्वनाथ कॉरिडोर ➔ शाम की गंगा आरती ➔ डिनर ➔ देर रात चेतगंज नक्कटैया ड्रॉप। |
पारदर्शी नीति: सभी किरायों में ईंधन, ड्राइवर का नाइट चार्ज और टैक्स शामिल हैं। कोई छिपा हुआ सर्ज नहीं। अतिरिक्त चलने पर: ₹12/किमी (सेडान), ₹15/किमी (SUV), ₹22/किमी (टेम्पो ट्रैवलर)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या मेले में जाने का कोई टिकट लगता है?
नहीं, यह बिल्कुल मुफ्त का सार्वजनिक लोक-मेला है। सड़क पर खड़े होकर शोभायात्रा देखने का कोई पैसा या टिकट नहीं लगता। केवल यदि आप किसी स्थानीय मकान की बालकनी या छत पर बैठना चाहते हैं, तो वे थोड़ा-बहुत शुल्क लेते हैं।
अगर बारिश हो गई तो क्या होगा?
अक्टूबर के अंत में बनारस में मौसम सुहावना और सूखा रहता है (रात का तापमान लगभग 20°C)। बारिश की संभावना न के बराबर होती है। फिर भी अगर बूंदाबांदी हो जाए, तो सभी बड़ी झांकियों और साउंड सिस्टम पर बड़े वाटरप्रूफ तिरपाल लगे होते हैं।
क्या फोटो और वीडियो बना सकते हैं?
बिल्कुल। झांकियों पर बैठे कलाकार खुशी-खुशी पोज देते हैं और लोग हजारों रील बनाते हैं। एक टिप: अगर साफ रोशनी में फोटो खींचना चाहते हैं, तो पटेल चौक या लहुराबीर पर चंदननगर की बड़ी लाइटों के पास खड़े हों।
भरत मिलाप और नक्कटैया में क्या फर्क है?
दोनों काशी के प्रसिद्ध लक्खा मेले हैं। नाटी इमली भरत मिलाप दशहरे के अगले दिन (21 अक्टूबर 2026) दोपहर में होता है, जो राम-भरत मिलाप का भावुक प्रसंग है। चेतगंज नक्कटैया उसके 8 दिन बाद करवा चौथ की रात (29 अक्टूबर 2026) को होती है, जो शूर्पणखा के दंभ और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ काशी के प्रतिरोध का प्रतीक है।
नक्कटैया मेले की यात्रा में सहायता चाहिए?
बंद रास्तों और रात की भीड़ की चिंता में इस अनोखे मेले को देखने से मत चूकिए। चाहे आपको इंग्लिशिया लाइन पर रात भर खड़ी रहने वाली स्टैंडबाय कैब चाहिए, एयरपोर्ट पिकअप चाहिए, या पूरे परिवार के लिए 17-सीटर टेम्पो ट्रैवलर—हमारा स्थानीय डेस्क 24 घंटे हाजिर है।