वाराणसी के घाटों की गाइड | दशाश्वमेध, अस्सी, मणिकर्णिका और सही घाट सर्किट
एक लाइन में: वाराणसी के ~84 घाटों में से ज़रूरी हैं दशाश्वमेध (गंगा आरती), अस्सी (सुबह-ए-बनारस), मणिकर्णिका (मोक्ष स्थल)। सुबह नाव, शाम आरती, दिन में पैदल।
घाट ही वाराणसी की आत्मा हैं। पर ~84 घाटों में पहली बार आने वाला अक्सर भटक जाता है — कौन-सा देखें, कब देखें, नाव से या पैदल। यह गाइड उसी को आसान बनाता है।
प्रमुख 7 घाट और नौका परिपथ मैप

गंगा के अर्धचंद्राकार घुमाव को समझना घाटों के भ्रमण को बेहद आसान बना देता है। दक्षिण में अस्सी से लेकर उत्तर में नमो घाट तक, नावें इस पूरे परिपथ को 25 से 60 मिनट में जोड़ती हैं।
दशाश्वमेध घाट — मुख्य आकर्षण
शहर का सबसे जीवंत घाट, जहाँ हर शाम भव्य गंगा आरती होती है — सात पुजारी, पीतल के दीप, समवेत मंत्र। नाव से देखना सबसे अच्छा।
अस्सी घाट — दक्षिणी केंद्र
अपेक्षाकृत खुला और शांत। सुबह सुबह-ए-बनारस (योग, संगीत, आरती) का अनुभव यहीं। पर्यटकों और बैकपैकर्स में लोकप्रिय।
पहली बार के लिए ज़रूरी 10 घाट
- दशाश्वमेध — गंगा आरती।
- अस्सी — सुबह-ए-बनारस एवं मार्गशीर्ष में श्री राम-जानकी मठ की पारंपरिक मटकोर रस्म व विवाह पंचमी उत्सव।
- मणिकर्णिका — मोक्ष/दाह संस्कार स्थल (श्रद्धा से देखें; फाल्गुन में विश्वप्रसिद्ध मसान होली और देव दीपावली की पूर्व संध्या पर चक्रपुष्करिणी कुंड में बैकुंठ चतुर्दशी स्नान का विशेष महत्व है)।
- हरिश्चंद्र — प्राचीन दाह घाट।
- पंचगंगा — पूरे कार्तिक मास आकाशदीप व कार्तिक स्नान, पौष पूर्णिमा व माघ स्नान संकल्प तथा मौनी अमावस्या मौन स्नान का विशेष महत्व।
- केदार व हनुमान घाट — दक्षिण भारतीय शैली का लाल-सफेद धारीदार गौरी केदारेश्वर मंदिर, 17वीं सदी का कुमारस्वामी मठ, सुब्रमण्यम भारती आवास व काशी तमिल संगमम हेरिटेज सर्किट।
- सिंधिया व दत्तात्रेय घाट — झुका हुआ रत्नेश्वर शिव मंदिर तथा मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर दत्त चरण पादुका अभिषेक व दत्तात्रेय जयंती का पावन तीर्थ।
- जैन घाट (भदैनी) — 7वें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ की पावन जन्मभूमि, ऐतिहासिक स्याद्वाद महाविद्यालय व 4 तीर्थंकर जैन यात्रा का गंगातटीय तीर्थ।
- तुलसी — तुलसीदास जी की ऐतिहासिक कर्मस्थली, लोलार्क कुंड (रथ सप्तमी स्नान) तथा विवाह पंचमी पर मानस पाठ की पावन परंपरा।
- राजेंद्र प्रसाद — देव दीपावली दीप दर्शन।
- ललिता घाट (गंगा द्वार) — श्री काशी विश्वनाथ धाम का भव्य नदी प्रवेश द्वार। एस्केलेटर, लिफ्ट व रैंप से सीधे मंदिर चौक तक पहुंच; नाव से आगमन पर शहर के संकरे जाम से पूरी मुक्ति। गंगा आदित्य मंदिर (रथ सप्तमी द्वादश आदित्य यात्रा) तथा 11–13 दिसंबर को काशी विश्वनाथ धाम वार्षिकोत्सव का मुख्य नदी केंद्र।
- नमो घाट — सबसे नया, चौड़ा फोर-लेन मार्ग व विशाल पार्किंग।
पहली यात्रा के लिए सही सर्किट
(नाव के समय और रूट के लिए ऊपर दिया गया प्रमुख घाट व नौका परिपथ मैप देखें)।
सुबह: अस्सी घाट से सूर्योदय नाव → मणिकर्णिका तक पूरे घाटों का नज़ारा।
शाम: दशाश्वमेध की गंगा आरती (नाव या घाट से)।
दिन: केदार/तुलसी जैसे घाट पैदल घूमकर गलियों का अनुभव।
नाव बनाम पैदल — क्या बेहतर?
छठ पूजा के समय ताजा आधिकारिक योजना ही मानें
13–16 नवंबर 2026 के लिए सामान्य घाट सर्किट को प्रवेश की गारंटी न समझें। छठ में पैदल प्रवाह, बाहरी ड्रॉप और नदी संचालन के लिए प्रशासन तथा पुलिस की ताजा सूचना मानें। छठ पूजा 2026 वाराणसी गाइड में पक्की तारीखें और परिवार के साथ पहुंचने की योजना है; उसमें काल्पनिक डायवर्जन या गारंटीड घाट नहीं बताए गए हैं।
- नाव: सूर्योदय और गंगा आरती के लिए सबसे अच्छी — पूरे घाटों का पैनोरमा।
- पैदल: गलियों, मंदिरों और घाट की ज़िंदगी को नज़दीक से महसूस करने के लिए।
- सबसे अच्छा अनुभव — दोनों का मेल।
आरामदायक यात्रा की प्लानिंग
- बुज़ुर्गों के लिए: घाट की सीढ़ियाँ ढलान वाली और भीड़भरी — हम नाव चढ़ने का सबसे आसान घाट चुनते हैं और सीढ़ियों पर सहारा देते हैं।
- पुराने शहर में: गाड़ी एक हद तक जाती है; हम सबसे नज़दीकी ड्रॉप पॉइंट तक छोड़ते हैं।
- महिला और अकेले यात्री: ड्राइवर डिटेल और लाइव ट्रैकिंग पहले से; महिलाओं के लिए सुरक्षित टैक्सी सेवा।
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बुकिंग कैसे करें
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