मकर संक्रांति 2027 वाराणसी: 14–15 जनवरी खिचड़ी पर्व, गंगा स्नान व कैब गाइड

काशी में मकर संक्रांति को किताबी नामों से नहीं, सीधे "खिचड़ी" (Khichdi Parv) के नाम से पुकारा जाता है।

जनवरी के मध्य में बनारस का गंगा तट आस्था, परंपरा और अड़भंग मस्ती का अनूठा संगम बन जाता है। एक ओर कड़ाके की शीत लहर और घने कोहरे के बीच भोर में 84 घाटों पर लाखों श्रद्धालु पवित्र गंगा में डुबकी लगाकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और तिल-गुड़ का दान करते हैं। वहीं दूसरी ओर, जैसे ही धूप खिलती है, गंगा के उस पार फैली मीलों लंबी रेती पर 'बो काटा' के शोर के साथ पतंगों के ऐतिहासिक पेंच लड़ते हैं। दोपहर में स्वयं देवाधिदेव महादेव यानी बाबा विश्वनाथ को देसी घी और मेवों से लदी काली उड़द दाल की खिचड़ी का शाही भोग अर्पित किया जाता है।

यदि आप जनवरी 2027 में काशी आने का विचार कर रहे हैं, तो इस बार की तिथि व्यवस्था को समझना अत्यंत आवश्यक है। वर्ष 2027 में सूर्य का मकर राशि में प्रवेश सूर्यास्त के बाद होने के कारण शास्त्रसम्मत पुण्यकाल शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 को है।

नीचे मकर संक्रांति 2027 की संपूर्ण जमीनी हकीकत, स्नान के सटीक मुहूर्त, रेती पर नाव से जाने की व्यवस्था, पुलिस के ट्रैफिक नियम और भरोसेमंद फिक्स्ड-किराया कैब का पूरा विवरण प्रस्तुत है।


1. यात्रा योजना हेतु त्वरित तथ्य

विवरणजमीनी वास्तविकता
त्यौहार का नाममकर संक्रांति, खिचड़ी पर्व, उत्तरायण
मुख्य 2027 तिथियां14 एवं 15 जनवरी 2027
संक्रांति क्षण (सूर्य गोचर)गुरुवार, 14 जनवरी 2027, रात्रि 09:06 बजे (सूर्यास्त उपरांत)
मुख्य पुण्यकाल (स्नान व दान)शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 (सुबह 06:46 से शाम 05:29 तक)
महापुण्यकाल (अति शुभ मुहूर्त)शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 (सुबह 06:46 से 08:46 तक)
प्रमुख मंदिरश्री काशी विश्वनाथ धाम, गौरी केदारेश्वर मंदिर, खिचड़ी बाबा मंदिर
प्रमुख स्नान घाटदशाश्वमेध घाट, पंचगंगा घाट, अस्सी घाट, राजघाट
पतंगबाजी केंद्रगंगा पार की रेती (Sandbed), पुराने शहर की छतें (गोदौलिया, चौक, सोनारपुरा)
मौसम व तापमानभोर में 7°C से 10°C; सुबह 09:30 बजे तक घना कोहरा संभावित
निकटतम वाहन ड्रॉप पॉइंटबेनियाबाग अंडरग्राउंड पार्किंग (850 मी पैदल) या गिरजाघर चौराहा (600 मी पैदल)

2. 2027 की तिथि पहेली: 15 जनवरी को मुख्य पर्व क्यों?

अमूमन हर साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती है, लेकिन 2027 में यह धारणा आपके कार्यक्रम को बिगाड़ सकती है।

ऋषिकेश पंचांग एवं दृक पंचांग के अनुसार, सूर्य देव गुरुवार, 14 जनवरी 2027 की रात्रि 09:06 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। शास्त्रों और काशी के विद्वानों का स्पष्ट निर्णय है कि जब संक्रांति सूर्यास्त के बाद लगे, तो उसका धार्मिक पुण्यकाल (स्नान, जप, तप और दान) अगले दिन सूर्योदय के साथ शुरू होता है।

दोनों दिनों की वास्तविक रूपरेखा:

  • गुरुवार, 14 जनवरी 2027 (उत्सव की पूर्व संध्या):
    पुराने शहर के बाजारों (थठेरी बाजार, दालमंडी, गोदौलिया) में तिलकुट, गुड़ और पतंगों की भारी खरीदारी। दोपहर से छतों पर पतंगबाजी शुरू हो जाती है। शाम को नियमित गंगा आरती होगी।
  • शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 (मुख्य शास्त्रसम्मत खिचड़ी पर्व):
    यह दिन मुख्य धार्मिक आयोजनों का है। लाखों श्रद्धालु सुबह 06:46 से गंगा स्नान करेंगे। सुबह 06:46 से 08:46 बजे का महापुण्यकाल स्नान व दान हेतु सर्वश्रेष्ठ है। इसी दिन काशी विश्वनाथ में विशेष खिचड़ी श्रृंगार होगा और गंगा पार रेती पर पतंग उत्सव अपने चरम पर पहुंचेगा।

यात्री परामर्श: यदि आप गंगा स्नान, ब्राह्मण दान और मंदिर में खिचड़ी भोग दर्शन हेतु आ रहे हैं, तो अपना मुख्य कार्यक्रम शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 को ही रखें।


3. काशी के खिचड़ी पर्व के तीन प्रमुख आयाम

┌─────────────────────────────────────────────────────────────┐
│                काशी खिचड़ी पर्व: तीन प्रमुख आयाम              │
├──────────────────────────────┬──────────────────────────────┤
│ 1. आध्यात्मिक: गंगा स्नान     │ 2. मनोरंजक: रेती पर पतंगबाजी │
│ • घाटों पर भोर का पावन स्नान │ • नाव द्वारा गंगा पार रेती जाना│
│ • तांबे के लोटे से सूर्य अर्घ्य│ • आसमान में पेंच लड़ाना      │
│ • तिल, उड़द दाल व वस्त्र दान │ • सूती सदी व मांझे का उपयोग  │
├──────────────────────────────┴──────────────────────────────┤
│ 3. मंदिर परंपरा व खान-पान                                   │
│ • काशी विश्वनाथ में बाबा का खिचड़ी श्रृंगार व राजभोग        │
│ • केदारेश्वर मंदिर में ऐतिहासिक खिचड़ी प्रकटीकरण उत्सव        │
│ • सुबह चूड़ा-दही व गुड़, दोपहर में 'चार यार' वाली उड़द खिचड़ी │
└─────────────────────────────────────────────────────────────┘

पहला आयाम: पावन गंगा स्नान व सूर्य अर्घ्य

कड़ाके की ठंड में भोर में 04:30 बजे से ही घाटों की सीढ़ियों पर श्रद्धालुओं का तांता लग जाता है।

  • दशाश्वमेध घाट: काशी का हृदय स्थल; यहां हजारों लोग एक साथ कमर तक जल में खड़े होकर पूर्वाभिमुख होकर भगवान भास्कर को अर्घ्य देते हैं।
  • पंचगंगा घाट: संक्रांति स्नान के लिए पंचगंगा का पौराणिक महत्व अद्वितीय है। कार्तिक से माघ तक चलने वाले पवित्र स्नान का यह प्रमुख तीर्थ है।
  • अस्सी घाट: दक्षिणी बनारस में ठहरने वाले परिवारों के लिए खुला और सुलभ घाट।

स्नान के उपरांत श्रद्धालु घाट पर बैठे ब्राह्मणों को सीधा (कच्चा अन्न) दान करते हैं, जिसमें नए चावल, काली उड़द दाल, काला व सफेद तिल, हल्दी, नमक, गर्म ऊनी वस्त्र और सामर्थ्यानुसार दक्षिणा दी जाती है।

दूसरा आयाम: मंदिरों में खिचड़ी भोग व श्रृंगार

  • श्री काशी विश्वनाथ धाम: 15 जनवरी को मध्याह्न भोग आरती (दोपहर 11:30 से 12:30 बजे) के अवसर पर बाबा विश्वनाथ का मनोहारी खिचड़ी श्रृंगार किया जाता है। बाबा को शुद्ध गाय के घी, काजू, किशमिश और मसालों से युक्त काली उड़द दाल की खिचड़ी का महाभोग लगाया जाता है। मंदिर के गेट नंबर 1 के समीप स्थित ऐतिहासिक खिचड़ी बाबा मंदिर में निरंतर विशाल भंडारा चलता है, जहां पत्तलों (दोना) में गरमा-गरम खिचड़ी बांटी जाती है।
  • गौरी केदारेश्वर मंदिर (केदार घाट): काशी खंड के अनुसार, भगवान शिव अपने परम भक्त वशिष्ठ द्वारा अर्पित खिचड़ी के कटोरे से ही ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए थे। केदारेश्वर महादेव के विग्रह का स्वरूप भी खिचड़ी के पिंड जैसा प्रतीत होता है। मकर संक्रांति पर यहां भव्य केदारेश्वर खिचड़ी महोत्सव मनाया जाता है।
  • बाबा महाश्मशान नाथ (मणिकर्णिका घाट): मणिकर्णिका स्थित श्मशान नाथ महादेव को भी इस दिन गेंदे के फूलों और सूखे मेवों से सजाकर खिचड़ी का भोग लगाया जाता है।

4. गंगा पार 'रेती' पर पतंगबाजी (The Sandbed Kite Wars)

बनारस की तंग गलियों और छतों के घने बिजली के तारों से अलग, मकर संक्रांति का असली रोमांच गंगा के उस पार फैली मीलों लंबी रेती (विशाल रेतीला किनारा) पर दिखाई देता है।

रेती तक नाव से जाने की व्यवस्था:

  • नाव चढ़ने के घाट: दशाश्वमेध घाट, राजेंद्र प्रसाद घाट, अस्सी घाट या सिंधिया घाट।
  • नावों के विकल्प:
    • शेयरिंग नौका (हाथ वाली या छोटी मोटर बोट): ₹50 से ₹100 प्रति व्यक्ति (एक तरफ)।
    • निजी बजरा / नाव (2–3 घंटे रुकने सहित): ₹1,500 से ₹3,000।
  • समय: जल पुलिस के कड़े नियमों के अनुसार, सुबह घना कोहरा छंटने के बाद (लगभग 09:30–10:00 बजे) ही नावें रेती की ओर जाती हैं और सूर्यास्त से पहले (शाम 05:00 बजे तक) सभी को वापस लौटना अनिवार्य होता है।

सुरक्षा एवं कानूनी नियम:

  1. चीनी मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध: वाराणसी प्रशासन और एनजीटी (NGT) के आदेशानुसार धारा 144 के तहत सिंथेटिक, नायलॉन या शीशे की परत वाले 'चाइनीज मांझे' की बिक्री और उपयोग पर सख्त कानूनी रोक है। राजघाट (मालवीय पुल) और सामने घाट पुल पर यह दोपहिया चालकों और प्रवासी पक्षियों के लिए जानलेवा साबित होता है। पतंगबाजी हेतु केवल पारंपरिक सूती सदी और बरेली/बनारसी मांझे का ही प्रयोग करें।
  2. लाइफ जैकेट अनिवार्य: नाव पर सवार प्रत्येक यात्री को जल पुलिस द्वारा लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य है।
  3. रेती पर दलदल से बचाव: रेती के किनारों पर नदी का बहाव तेज और रेत धंसने वाली होती है। बच्चों को पानी के एकदम किनारे न जाने दें।

5. शीतकालीन कोहरा व यात्रा सावधानियां

जनवरी बनारस का सबसे ठंडा और कोहरे वाला महीना होता है:

  • तापमान: रात और भोर का तापमान 7°C से 10°C तक गिर जाता है, जबकि दोपहर में खिली धूप में यह 20°C से 23°C रहता है।
  • घना कोहरा: भोर 04:00 से सुबह 09:30 बजे तक दृश्यता (विजिबिलिटी) 50 मीटर से भी कम हो जाती है।
✈️ मकर संक्रांति पर फ्लाइट व ट्रेन रणनीति:

• फ्लाइट बुकिंग समय ──► दोपहर 12:00 से 03:30 के बीच की फ्लाइट चुनें (कोहरा छंटने के बाद)
• एयरपोर्ट वापसी बफर ──► प्रस्थान से 3.5 घंटे पहले होटल से निकलें (रिंग रोड पर धीमी गति)
• ट्रेन विलंब अनुमान  ──► उत्तर भारत (दिल्ली/कानपुर) से आने वाली ट्रेनें 2–5 घंटे लेट हो सकती हैं
• भोर स्नान सुरक्षा   ──► बुजुर्ग व बच्चे 08:30 बजे धूप खिलने के बाद ही स्नान करें
  • बाबतपुर एयरपोर्ट (VNS): सुबह 10:30 बजे से पहले उतरने वाली उड़ानों में कोहरे के कारण देरी की प्रबल आशंका रहती है।
  • वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल: 8°C की हवा में 15°C के ठंडे पानी में अचानक डुबकी लगाने से बचें। सूर्य की किरणें सीढ़ियों पर आने के बाद ही स्नान करें या केवल आचमन/मार्जन करें।
🪁 मकर संक्रांति व खिचड़ी पर्व 2027 — गंगा स्नान, रेती पतंगबाजी नाव व कैब सेवा
मकर संक्रांति एवं बाबा विश्वनाथ खिचड़ी महोत्सव (14–15 जनवरी 2027) पर काशी दर्शन की योजना बना रहे हैं? कड़ाके की ठंड, घने कोहरे और गोदौलिया-दशाश्वमेध के नो-व्हीकल जोन से बचने के लिए बुक करें भोर में 04:30 बजे घाट स्नान पिकअप, बाहरी ड्रॉप पॉइंट (बेनियाबाग, गिरजाघर, मैदागिन), कैंट/बाबतपुर एयरपोर्ट ट्रांसफर व रेती पतंगबाजी नौका व्यवस्था बिना किसी सर्ज के।
📲 WhatsApp पर मकर संक्रांति कैब बुक करें या 📞 +91 99354 74730
🪁 गंगा पार रेती पतंगबाजी नौका व्यवस्था 🌅 भोर में 04:30 बजे पवित्र स्नान पिकअप 🚗 बेनियाबाग व गिरजाघर आउटर ड्रॉप ❄️ शीतकालीन कोहरा बफर व स्टेशन स्टैंडबाय

6. पुलिस ट्रैफिक डायवर्जन व गाड़ियों के रुकने के स्थान

14 और 15 जनवरी को भोर 04:00 बजे से वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस पुराने शहर में चार पहिया वाहनों का प्रवेश रोक देती है।

नो-व्हीकल जोन (पैदल क्षेत्र):

  • गोदौलिया ⇄ दशाश्वमेध घाट: सभी प्रकार के वाहनों (ऑटो, ई-रिक्शा, कार) के लिए पूरी तरह बंद।
  • मैदागिन ⇄ चौक ⇄ बांसफाटक: चार पहिया वाहनों का प्रवेश वर्जित।
  • सोनारपुरा ⇄ गोदौलिया: केवल पैदल आवागमन।

4 सुरक्षित व व्यावहारिक आउटर कैब ड्रॉप गेट:

  1. बेनियाबाग अंडरग्राउंड पार्किंग:
    पश्चिम दिशा से आने वाली गाड़ियों के लिए सबसे आदर्श। टैक्सी आपको सीधे पार्किंग में छोड़ेगी। यहां से नई सड़क होते हुए गोदौलिया चौराहा व विश्वनाथ मंदिर गेट 4 मात्र 850 मीटर (10–12 मिनट पैदल) है।
  2. गिरजाघर चौराहा (लक्सा रोड):
    दशाश्वमेध घाट जाने वालों के लिए सबसे सुगम ड्रॉप। बैरिकेडिंग से गोदौलिया चौराहे की दूरी मात्र 600 मीटर (7–9 मिनट सीधी सड़क) है।
  3. मैदागिन टाउन हॉल:
    उत्तरी छोर। चौक मार्ग से मंदिर गेट 4 जाने तथा पंचगंगा या मणिकर्णिका घाट जाने वालों के लिए उत्तम ड्रॉप (लगभग 900 मीटर पैदल)।
  4. भेलूपुर जलकल संस्थान:
    दक्षिणी प्रवेश द्वार। शहर के भीषण जाम से बचते हुए यहां गाड़ी छोड़कर साइकिल रिक्शा से सोनारपुरा (800 मीटर) तक पहुंचा जा सकता है।

7. बनारसी खिचड़ी खान-पान परंपरा (स्वाद का सफर)

बनारस में खिचड़ी केवल पूजा नहीं, एक संपूर्ण खान-पान उत्सव है:

🥣 खिचड़ी पर्व पर बनारसी खान-पान का क्रम:

सुबह 07:30 ──► कुल्हड़ का गाढ़ा दही, नया चूड़ा और सोनभद्र का गुड़
सुबह 10:30 ──► थठेरी बाजार का खस्ता तिलकुट व करारी लइया के लड्डू
दोपहर 01:30 ──► 'चार यार' (दही, पापड़, घी, अचार) से सजी उड़द दाल खिचड़ी
शाम 04:30  ──► चौखंभा की गलियों में ओस में पका केसरिया मलइयो
  1. सुबह का नाश्ता: चूड़ा-दही व नया गुड़:
    हल्का भिगोया हुआ नया चूड़ा (पोहा), मिट्टी के कुल्हड़ में जमा गाढ़ा मीठा दही और मिर्जापुर-सोनभद्र का ताजा नया गुड़।
  2. मिठाइयों की महक: तिलकुट और लइया:
    थठेरी बाजार या राजा दरवाजा में पारंपरिक कारीगरों द्वारा कूटकर बनाया गया सफेद व काले तिल का खस्ता तिलकुट, रामदाना और लइया के गुड़ वाले गोल लड्डू।
  3. दोपहर का महाभोज: खिचड़ी के चार यार:
    बनारसी कहावत है—"खिचड़ी के चार यार: दही, पापड़, घी, अचार"। सुगंधित छोटे चावल और छिलके वाली काली उड़द दाल की बराबर मात्रा, हींग-जीरे का छौंक और साथ में ताजी दही, भुना पापड़, गाय का शुद्ध घी और तीखा आम का अचार।
  4. सर्दियों का तोहफा: मलइयो:
    शाम को चौखंभा या गोपाल मंदिर की गलियों में जाएं और सर्दियों की ओस से बनने वाला हल्का, झागदार केसरिया मलइयो जरूर चखें।
🏨 सही इलाके में ठहरें — डोर-टू-डोर ट्रांसफर के साथ
हमें अपनी पसंद (घाट किनारे, शांत बाहरी इलाका, या साफ-सुथरा कैंट) व बजट बताएं। हम भरोसेमंद होटल चुनते हैं और फिक्स्ड किराए वाला एयरपोर्ट/स्टेशन पिकअप जोड़ते हैं ताकि गलियों में सामान न घसीटना पड़े।
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✅ भरोसेमंद होटल, सही इलाके 🧳 डोर-टू-डोर ट्रांसफर 📍 घाट / शांत / साफ ज़ोन 🛡️ कोई कमीशन झटका नहीं

8. कहां ठहरें: क्षेत्रों की तुलना

ठहरने का क्षेत्रघाटों से दूरीलाभसीमाएंकिनके लिए उपयुक्त
पुराने शहर के घाट व हवेलियां50–300 मी पैदलसुबह सीधे स्नान हेतु सीढ़ियों पर; छतों से पतंगबाजी का दृश्य।गाड़ियों का प्रवेश शून्य; संकरी गलियों में पैदल चलना होगा।युवा, फोटोग्राफर, अकेले यात्री।
लंका व रवींद्रपुरी2–3.5 किमीअस्सी घाट के निकट; शांत माहौल और अच्छे पारिवारिक रेस्तरां।सोनारपुरा पर वाहन रुकेंगे; 15 मिनट पैदल चलना होगा।परिवार व मध्यम आयु वर्ग के यात्री।
कैंटोनमेंट (कैंट)5–7 किमी4/5 सितारा होटल सुविधाएं (सेंट्रल हीटिंग, लिफ्ट, पार्किंग)।घाट जाने हेतु सुबह 04:30 बजे प्री-बुक्ड कैब अनिवार्य होगी।वरिष्ठ नागरिक, एनआरआई, लग्जरी यात्री।

9. मकर संक्रांति फिक्स्ड-किराया वाहन दर तालिका (जनवरी 2027)

मकर संक्रांति के दौरान कड़ाके की ठंड में भोर में 04:30 बजे सड़क पर ऑटो या टैक्सी खोजना कठिन होता है और चालक मनमाना सर्ज वसूलते हैं। काशी टैक्सी बिना किसी सर्ज के तयशुदा दरों पर अनुभवी स्थानीय चालकों के साथ वाहन उपलब्ध कराती है:

सेवा / पैकेजAC सेडान (Dzire/Etios)फैमिली SUV (Ertiga/Carens)प्रीमियम SUV (Innova Crysta)12-सीटर टेंपो17-सीटर टेंपो26-सीटर टेंपोरूट व नियम विवरण
बाबतपुर एयरपोर्ट (VNS) से आउटर ड्रॉप₹899₹1,299₹1,799₹2,500₹3,000₹4,200रिंग रोड से सीधे बेनियाबाग/गिरजाघर ड्रॉप। 60 मिनट कोहरा विलंब बफर शामिल।
वाराणसी कैंट (BSB) / बनारस स्टेशन ड्रॉप₹599₹899₹1,199₹1,699₹1,999₹2,800स्टेशन प्लेटफॉर्म पिकअप व सामान में सहायता। आउटर ड्रॉप बैरिकेडिंग तक।
पीडीडीयू जं. (मुगलसराय) ट्रांसफर₹1,199₹1,599₹2,199₹2,899₹3,499₹4,800एनएच-19 बाईपास होते हुए सीधा व सुरक्षित ट्रांसफर।
भोर स्नान पिकअप (सुबह 04:30 से 09:30)₹1,499₹1,999₹2,699₹3,200₹3,800₹5,200चालक 04:30 बजे होटल पहुंचेगा ➔ गिरजाघर/बेनियाबाग ड्रॉप ➔ गर्म गाड़ी स्टैंडबाय ➔ स्नान बाद सुरक्षित वापसी।
पूरे दिन का पैकेज (8 घंटे / 80 किमी)₹2,499₹3,399₹4,299₹4,599₹5,299₹7,499सुबह स्नान व मंदिर दर्शन ➔ दोपहर सारनाथ भ्रमण ➔ शाम को गंगा आरती व होटल वापसी।

स्पष्ट नीति: सभी दरों में ईंधन, चालक भत्ता, टोल टैक्स व पार्किंग शुल्क शामिल हैं। कोई छिपा हुआ नाइट चार्ज या त्यौहार सर्ज नहीं। अतिरिक्त चलने पर: ₹12/किमी (सेडान), ₹15/किमी (SUV), ₹22/किमी (टेंपो)।


10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

वाराणसी में मकर संक्रांति 2027 कब मनाई जाएगी?

मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी 2027 दोनों दिन रहेगी। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 09:06 बजे होने के कारण धर्मशास्त्रीय पुण्यकाल शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 को सुबह 06:46 से शाम 05:29 तक रहेगा। मुख्य स्नान व दान 15 जनवरी को ही होगा।

महापुण्यकाल का समय क्या है?

शुक्रवार, 15 जनवरी 2027 को महापुण्यकाल सुबह 06:46 से 08:46 बजे तक रहेगा। यह दो घंटे का समय गंगा स्नान और सूर्य अर्घ्य हेतु सर्वोत्तम माना गया है।

रेती पर पतंगबाजी देखने कैसे जाएं?

दशाश्वमेध या अस्सी घाट से सुबह 10:00 बजे के बाद (कोहरा हटने पर) नाव लें। शेयरिंग नाव ₹50–₹100 तथा निजी नाव ₹1,500–₹3,000 में उपलब्ध होती है।

क्या गाड़ियां गोदौलिया तक जा सकती हैं?

नहीं। पुलिस द्वारा गोदौलिया-दशाश्वमेध मार्ग पर वाहनों का प्रवेश पूर्णतः बंद रहता है। टैक्सियां बेनियाबाग पार्किंग (850 मी पैदल) या गिरजाघर चौराहे (600 मी पैदल) पर ही छोड़ती हैं।

बुजुर्गों के लिए क्या सावधानी जरूरी है?

जनवरी की सुबह तापमान 7°C से 9°C रहता है। बुजुर्गों को सूर्य निकलने (सुबह 08:30 बजे) के बाद ही स्नान कराना चाहिए। साथ ही ऊनी वस्त्र और गर्म पानी का थर्मस साथ रखें।


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