वाराणसी में नवरात्रि 2026: काशी नवदुर्गा यात्रा, 9 मंदिर रूट और दर्शन गाइड
सत्यापित 2026 उत्सव कैलेंडर: शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ रविवार, 11 अक्टूबर 2026 (घटस्थापना) से होगा और समापन सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 (महानवमी) को होगा। दशहरा (विजयादशमी / रावण दहन) मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को और नाटी इमली का ऐतिहासिक लक्खा मेला भरत मिलाप बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा।
शरद ऋतु के आगमन के साथ ही काशी नगरी एक अनूठी आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर हो जाती है। देश के अन्य शहरों में जहाँ नवरात्रि मुख्यतः अस्थायी पूजा पंडालों तक सीमित रहती है, वहीं काशी में इसका स्वरूप जीवंत, सदियों पुरानी तीर्थ परिक्रमा का होता है जिसे काशी नवदुर्गा यात्रा कहा जाता है।
स्कंद पुराण के काशी खंड में वर्णित है कि देवाधिदेव महादेव की नगरी की दसों दिशाओं से रक्षा स्वयं आदिशक्ति के नौ स्वरूप करते हैं। ये नौ स्वरूप काशी के अलग-अलग मोहल्लों में प्राचीन पाषाण मंदिरों में प्रतिष्ठित हैं। नवरात्रि के पावन नौ दिनों में लाखों भक्त इन नौ विग्रहों के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
परंतु स्थानीय भौगोलिक समझ के बिना नवदुर्गा यात्रा करना अत्यंत कष्टकारी हो सकता है। त्योहार के दौरान पुलिस बैरिकेडिंग, 'नो-व्हीकल जोन', भारी भीड़ और पक्के महाल की भूलभुलैया जैसी संकरी गलियों में सामान्य मैप काम नहीं करते। यह गाइड आपको देती है वास्तविक स्थानीय जानकारी: मंदिरों की सही स्थिति, गाड़ी कहाँ तक जाएगी, नाव का जादुई शॉर्टकट, व्रत का भोजन और पारदर्शी फिक्स्ड किराए वाला ट्रांसपोर्ट।
काशी के 9 नवदुर्गा मंदिर: आधिकारिक दैनंदिन विवरण
यहाँ नौ देवियों के मंदिर, उनकी सही अवस्थिति, निकटतम वाहन ड्रॉप पॉइंट और वास्तविक पैदल दूरी का प्रामाणिक विवरण दिया गया है:
| दिन व स्वरूप | 2026 तिथि | मंदिर व इलाका | गाड़ी कहाँ तक जाएगी? | जमीनी हकीकत व दूरी |
|---|
| प्रथम दिन: माँ शैलपुत्री | रवि, 11 अक्टू | मढ़िया घाट, जलालीपुरा / अलाईपुरा (उत्तरी वाराणसी) | मढ़िया घाट सड़क (वरुणा नदी तट) | 200 मीटर समतल पैदल मार्ग। पहले दिन अत्यधिक भीड़; कतारें भोर में 3:30 बजे से लगती हैं। |
| द्वितीय दिन: माँ ब्रह्मचारिणी | सोम, 12 अक्टू | घासी टोला, बालाजी घाट (पंचगंगा घाट के ऊपर) | सड़क से: मछोदरी पार्क / गंगा से: पंचगंगा घाट | सड़क मार्ग से 800 मीटर गलियों में चलना पड़ता है। अस्सी या दशाश्वमेध से नाव लेकर सीधे पंचगंगा घाट उतरना 10 गुना आसान है। |
| तृतीय दिन: माँ चंद्रघंटा | मंगल, 13 अक्टू | चंद्रघंटा गली, चौक | मैदागिन चौराहा या बेनियाबाग पार्किंग | पूर्णतः पैदल क्षेत्र। चौक की घनी बाजार गलियों में 500 मीटर पैदल चलना होगा। |
| चतुर्थ दिन: माँ कुष्मांडा | बुध, 14 अक्टू | दुर्गा कुंड मंदिर, दुर्गाकुंड रोड (दक्षिणी वाराणसी) | कबीर नगर / दुर्गा कुंड मोड़ | चौड़ी सड़क। मुख्य द्वार से 100 मीटर पहले गाड़ी छोड़ेगी। नवरात्रि मेले के कारण कड़े सुरक्षा घेरे रहते हैं। |
| पंचम दिन: माँ स्कंदमाता | गुरु, 15 अक्टू | जैतपुरा (बागेश्वरी देवी मंदिर के समीप) | जैतपुरा मुख्य मार्ग / थाना | मुख्य सड़क से मोहल्ले की गली में केवल 150 मीटर पैदल मार्ग। ऑटो/कैब आसानी से पहुँचती है। |
| षष्ठ दिन: माँ कात्यायनी | शुक्र, 16 अक्टू | आत्मावीरेश्वर मंदिर परिसर, सिंधिया घाट | सिंधिया घाट (नदी मार्ग) या ब्रह्मा नाल (सड़क) | कोई वाहन नहीं। नाव से सिंधिया घाट उतरकर लगभग 100 सीढ़ियाँ चढ़ें, या चौक से 15 मिनट पैदल चलें। |
| सप्तम दिन: माँ कालरात्रि | शनि, 17 अक्टू | डी.8/17 कालिका गली (दशाश्वमेध व मीर घाट के बीच) | गिरजाघर चौराहा / बेनियाबाग पार्किंग | कार ड्रॉप से गोदौलिया होकर 1.2 किमी पैदल, या दशाश्वमेध घाट से नाव द्वारा उतरकर 250 मीटर की चढ़ाई। |
| अष्टम दिन: माँ महागौरी | रवि, 18 अक्टू | माँ अन्नपूर्णा मंदिर, विश्वनाथ गली (गेट 4) | मैदागिन गेट 4 कॉरिडोर प्रवेश द्वार | सुरक्षा जांच कॉरिडोर। अष्टमी के दिन अपार भीड़ रहती है। सुबह 5:00 से 7:00 बजे के बीच दर्शन सर्वोत्तम। |
| नवम दिन: माँ सिद्धिदात्री | सोम, 19 अक्टू | सिद्धमाता गली, गोलघर (मैदागिन के समीप) | मैदागिन गोलचक्कर | मैदागिन से गोलघर की गली में मात्र 200 मीटर का आसान पैदल रास्ता। परिक्रमा का पूर्णाहुति स्थल। |
🌸 काशी नवदुर्गा दर्शन — कैब, नाव व लोकल गाइड समन्वय
नवरात्रि में 9 नवदुर्गा मंदिरों के दर्शन की योजना बना रहे हैं? गलियों के जाम और पार्किंग के झंझट से बचें। हम बाहरी मंदिरों (शैलपुत्री, स्कंदमाता, दुर्गा कुंड) हेतु फिक्स्ड किराए वाली AC कैब, जाम से बचने हेतु प्राइवेट नाव और अनुभवी स्थानीय सहायता उपलब्ध कराते हैं।
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"गाड़ी मंदिर के दरवाजे तक जाएगी" का भ्रम और हकीकत
बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी परेशानी उन दलालों या ड्राइवरों के बहकावे में आना है जो दावा करते हैं कि "गाड़ी आपको सातों-नौ मंदिरों के मुख्य द्वार पर उतारेगी"।
सच्चाई समझिए:
- बाहरी वृत्त (गाड़ी सुगम क्षेत्र):
- माँ शैलपुत्री (जलालीपुरा), माँ स्कंदमाता (जैतपुरा), और माँ कुष्मांडा (दुर्गा कुंड) चौड़ी सड़कों से जुड़े हैं। यहाँ सेडान कार, इनोवा या टेम्पो ट्रैवलर मंदिर से 100 से 250 मीटर की दूरी तक छोड़ सकते हैं।
- पक्का महाल (पूर्णतः पैदल गलियाँ):
- माँ चंद्रघंटा, माँ कालरात्रि, माँ महागौरी (अन्नपूर्णा), और माँ सिद्धिदात्री पुरानी काशी की ऐतिहासिक गलियों में स्थित हैं।
- नवरात्रि के दौरान वाराणसी ट्रैफिक पुलिस सुबह 9:00 बजे से रात 11:00 बजे तक गोदौलिया-दशाश्वमेध और मैदागिन-चौक मार्ग को पूर्णतः "नो-व्हीकल जोन" घोषित कर देती है। यहाँ किसी भी चार पहिया या तीन पहिया वाहन का प्रवेश वर्जित होता है।
- गंगा तट के मंदिर (नाव से सबसे सुगम):
- माँ ब्रह्मचारिणी (पंचगंगा घाट) और माँ कात्यायनी (सिंधिया घाट) गंगा किनारे सीढ़ियों पर हैं। शहर के भीषण ट्रैफिक में फंसने के बजाय अस्सी या दशाश्वमेध घाट से प्राइवेट नाव लेना समय और ऊर्जा दोनों बचाता है।
1-दिवसीय एक्सप्रेस परिक्रमा बनाम 9-दिवसीय पारंपरिक दर्शन
स्थानीय बनारसी लोग प्रतिदिन तिथि के अनुसार एक देवी के दर्शन करते हैं। परंतु यदि आप सप्ताहांत (वीकेंड) या 1-2 दिन के प्रवास पर वाराणसी आए हैं, तो इस व्यावहारिक क्रम से संपूर्ण नवदुर्गा परिक्रमा कर सकते हैं:
[प्रातः 05:00 - 07:00 बजे: बाहरी उत्तरी मंदिर (कैब द्वारा)]
होटल पिकअप ➔ माँ शैलपुत्री (जलालीपुरा) ➔ माँ स्कंदमाता (जैतपुरा)
│
▼ (मैदागिन या अस्सी घाट पर ड्रॉप)
[प्रातः 07:30 - 10:00 बजे: नाव द्वारा गंगा शॉर्टकट]
नाव से पंचगंगा घाट (माँ ब्रह्मचारिणी) ➔ घाट से सिंधिया घाट (माँ कात्यायनी)
│
▼ (घाट की सीढ़ियों से पुरानी गलियों में प्रवेश)
[प्रातः 10:15 - दोपहर 01:00 बजे: पक्का महाल मंदिर (पैदल)]
चौक (माँ चंद्रघंटा) ➔ विश्वनाथ कॉरिडोर (माँ महागौरी / अन्नपूर्णा)
➔ कालिका गली (माँ कालरात्रि) ➔ गोलघर (माँ सिद्धिदात्री)
│
▼ (मैदागिन या बेनियाबाग से कैब पिकअप)
[दोपहर 01:30 - शाम 04:00 बजे: फलाहारी भोजन व विश्राम]
भेलूपुर या सिगरा में शुद्ध सात्विक भोजन ➔ दोपहर की धूप में होटल विश्राम
│
▼ (दक्षिणी वाराणसी की ओर कैब)
[शाम 04:30 - 06:30 बजे: दक्षिणी पड़ाव]
माँ कुष्मांडा (दुर्गा कुंड मंदिर दर्शन व मेला) ➔ शाम की भव्य गंगा आरती
भीड़ प्रबंधन, दर्शन समय व दलालों से बचाव
- अमृत बेला (प्रातः 04:30 AM – 06:30 AM):
- सभी मंदिरों के पट मंगला आरती हेतु सुबह 4:00 बजे खुल जाते हैं।
- यदि आप सुबह 4:30 से 6:30 बजे के बीच पहुँचते हैं, तो दर्शन 15–20 मिनट में हो जाते हैं। सुबह 8:30 बजे के बाद शैलपुत्री (प्रथम दिन) और अन्नपूर्णा (अष्टमी) पर कतारें 500 मीटर लंबी हो जाती हैं और 2 से 3 घंटे लग सकते हैं।
- दोपहर में पट बंदी (भोग समय):
- गलियों के अधिकांश मंदिरों में दोपहर 12:30 से 1:30 या 2:00 बजे तक मध्याह्न भोग व विश्राम हेतु पट बंद रहते हैं। अपने रूट की योजना इस प्रकार बनाएं कि इस दौरान आप भोजन या विश्राम कर रहे हों।
- गलियों के "VIP दर्शन" झांसे से बचें:
- स्थानीय मोहल्ला मंदिरों (कालरात्रि, चंद्रघंटा, शैलपुत्री) में कोई आधिकारिक सशुल्क VIP टिकट नहीं होता। कोई भी व्यक्ति जो गली में ₹500–₹1,500 लेकर "आगे से दर्शन" कराने का वादा करे, वह अनाधिकृत दलाल है। सदैव सामान्य कतार में लगें। श्री काशी विश्वनाथ / अन्नपूर्णा हेतु केवल आधिकारिक मंदिर ट्रस्ट काउंटर पर ही भरोसा करें।
नवदुर्गा से आगे: दुर्गा कुंड मेला और बंगाली टोला की दुर्गा पूजा
नवरात्रि के दौरान काशी में दो अन्य सांस्कृतिक आकर्षण अवश्य देखें:
1. ऐतिहासिक दुर्गा कुंड नवरात्रि मेला
18वीं शताब्दी के लाल पाषाण निर्मित माँ कुष्मांडा मंदिर (दुर्गा कुंड) के चारों ओर नौ दिनों तक विशाल मेला लगता है। यहाँ लाल चुनरी, सिंदूर, रामनगर के लकड़ी के खिलौने, पीतल के पूजा बर्तन और गरमा-गरम बनारसी जलेबी-कचौड़ी की सैकड़ों दुकानें सजती हैं।
2. बंगाली टोला व पांडेय घाट की पारंपरिक दुर्गा पूजा
वाराणसी में 18वीं सदी से रह रहे बंगाली समुदाय का केंद्र बंगाली टोला, सोनारपुरा और भेलूपुर है। षष्ठी से नवमी (16–19 अक्टूबर 2026) के दौरान यहाँ पारंपरिक मिट्टी की प्रतिमाएं, ढाक की गूंज और प्रामाणिक धुनुची नाच देखने को मिलता है:
- सनातन धर्म इंटर कॉलेज (नई सड़क): काशी की सबसे पुरानी व भव्य पारंपरिक पूजा।
- प्रीमियर क्लब (सिगरा): अपनी कलात्मक थीम और मनोहारी प्रकाश सज्जा के लिए प्रसिद्ध।
- बंगाली टोला कम्युनिटी पूजा: शांत, शुद्ध और पारंपरिक विधि-विधान से परिपूर्ण।
वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं व बच्चों के लिए आवश्यक सावधानियाँ
- जूते-चप्पल: मंदिरों के बाहर जूते उतारने पड़ते हैं। गलियाँ कभी-कभी नम हो सकती हैं। जूते रखने की थैली साथ रखें और आसानी से उतरने वाली चप्पल पहनें।
- व्हीलचेयर की सीमा: व्हीलचेयर केवल दुर्गा कुंड और जैतपुरा की बाहरी सड़क तक काम आ सकती है। सिंधिया घाट, ब्रह्मचारिणी या कालिका गली में प्राचीन सीढ़ियों और ऊँची देहरियों के कारण व्हीलचेयर नहीं जा सकती।
- साइकिल रिक्शा: जिन बैरिकेड वाले क्षेत्रों (जैसे मैदागिन से चौक या गिरजाघर से गोदौलिया) में कारें बंद रहती हैं, वहाँ वरिष्ठ नागरिकों के लिए साइकिल रिक्शा ₹50–₹100 में सबसे उपयुक्त साधन है।
- थकान से बचाव: 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों के साथ एक ही दिन में सभी 9 मंदिर करने की जिद न करें। यात्रा को दो या तीन सुबहों में विभाजित करें।
🚕 एक ही आराम भरे दिन में सभी घाट व मंदिर
फिक्स्ड किराए वाली फुल-डे वाराणसी सिटी टूर कैब — लोकल ड्राइवर जो वन-वे गलियां, पार्किंग व दर्शन समय जानता है, ताकि आप काशी विश्वनाथ, घाट, सारनाथ हर जगह बिना मोलभाव घूम सकें।
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✅ फिक्स्ड किराया, ड्राइवर रुकेगा·
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कहाँ ठहरें (और किन गलतियों से बचें)
नवरात्रि में होटल का चुनाव आपके पूरे सफर को आसान या कठिन बना सकता है:
- ❌ भारी सामान के साथ गोदौलिया/दशाश्वमेध की भीतरी गलियों में होटल न लें:
चार पहिया वाहन बेनियाबाग या गिरजाघर पर रोक दिए जाते हैं। आपको 1 से 1.5 किमी तक भारी सूटकेस घसीटते हुए भीड़ में पैदल चलना पड़ेगा।
- ✅ अस्सी घाट व भेलूपुर (आराम और सुविधा के लिए सर्वोत्तम):
यहाँ तक गाड़ियाँ सीधे पहुँचती हैं। दुर्गा कुंड (चतुर्थ दिन) पास है और अस्सी घाट से उत्तरी मंदिरों के लिए नाव लेना बेहद आसान है।
- ✅ मैदागिन व विशेश्वरगंज (पक्का महाल पहुँचने के लिए उत्तम):
पुरानी काशी के उत्तरी छोर पर स्थित है। यहाँ मैदागिन तक कैब आती है और विश्वनाथ कॉरिडोर के गेट 4 व सिद्धिदात्री मंदिर में तुरंत प्रवेश मिलता है।
- ✅ कैंटोनमेंट (कैंट) (बुजुर्गों और लग्जरी होटल प्रेमियों के लिए):
विशाल होटल, शांत माहौल और सुरक्षित पार्किंग। सुबह मंदिर पहुँचने के लिए बस 25–30 मिनट का कैब समय अतिरिक्त रखें।
🏨 सही इलाके में ठहरें — डोर-टू-डोर ट्रांसफर के साथ
हमें अपनी पसंद (घाट किनारे, शांत बाहरी इलाका, या साफ-सुथरा कैंट) व बजट बताएं। हम भरोसेमंद होटल चुनते हैं और फिक्स्ड किराए वाला एयरपोर्ट/स्टेशन पिकअप जोड़ते हैं ताकि गलियों में सामान न घसीटना पड़े।
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काशी में फलाहारी (व्रत का) भोजन
नवरात्रि का उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए वाराणसी में शुद्ध सात्विक और फलाहारी भोजन की बेहतरीन व्यवस्था रहती है:
- बनारसी व्रत थाली में क्या मिलता है: कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की पूड़ियाँ, सेंधा नमक वाला जीरा आलू, साबूदाना खिचड़ी या वड़ा, मीठा दही, ताजे फल और मखाने की खीर।
- विश्वसनीय प्रतिष्ठान:
- केशरी रुचिकर व्यंजन (दशाश्वमेध के समीप) – शुद्ध सात्विक फलाहारी थाली हेतु प्रसिद्ध।
- सिगरा व भेलूपुर के पारिवारिक रेस्टोरेंट – नवरात्रि के 9 दिनों में अलग रसोई में शुद्ध व्रत भोजन तैयार करते हैं।
- अस्सी घाट के कैफे – ताजे फलों का सलाद, नारियल पानी, लस्सी और छाछ के लिए उत्तम।
पारदर्शी फिक्स्ड-किराया ट्रांसपोर्ट टैरिफ
त्योहार के समय सड़क पर मोलभाव और मनमाने सर्ज चार्ज से बचें। हमारे सेंट्रल डिस्पैच डेस्क द्वारा संचालित फिक्स्ड और सत्यापित दरें:
1. डेडिकेटेड फेस्टिवल कैब व टेम्पो ट्रैवलर
| पैकेज / वाहन | AC सेडान (डिजायर / ऑरा) | फैमिली SUV (अर्टिगा / इनोवा) | 12-सीटर टेम्पो ट्रैवलर | 17-सीटर टेम्पो ट्रैवलर | सुविधाएँ व विवरण |
|---|
| बाहरी नवदुर्गा सर्किट (4 घंटे / 40 किमी) | ₹1,299 | ₹1,799 | ₹2,500 | ₹3,000 | शैलपुत्री, स्कंदमाता व दुर्गा कुंड मंदिर। ड्राइवर प्रतीक्षा, ईंधन व पार्किंग शामिल। |
| फुल-डे फेस्टिवल समर्पित (8 घंटे / 80 किमी) | ₹2,499 | ₹3,499 | ₹3,800 | ₹4,500 | पूरे दिन गाड़ी आपके साथ उपलब्ध; सड़क से सुगम मंदिर, सारनाथ व रामनगर। |
| 12-घंटे विस्तारित यात्रा (12 घंटे / 120 किमी) | ₹3,200 | ₹4,500 | ₹5,200 | ₹6,000 | भोर 4:30 बजे दर्शन से लेकर रात की गंगा आरती व दुर्गाकुंड मेले से वापसी तक। |
| विंध्याचल शक्तिपीठ डे-ट्रिप (राउंड ट्रिप) | ₹3,200 | ₹4,500 | ₹5,800 | ₹6,800 | वाराणसी ⇄ विंध्यवासिनी मंदिर (मिर्जापुर, 150 किमी राउंड ट्रिप)। टोल शामिल। |
अतिरिक्त दूरी: ₹12/किमी (सेडान), ₹15/किमी (SUV), ₹22/किमी (टेम्पो ट्रैवलर)। कोई अदृश्य चार्ज या त्योहारी सर्ज नहीं।
2. प्राइवेट गंगा नौका सेवा (ट्रैफिक बाईपास)
| नौका प्रकार | क्षमता | रूट | किराया | विशेषता |
|---|
| प्राइवेट चप्पू वाली लकड़ी की नाव | 4 व्यक्ति तक | अस्सी / दशाश्वमेध ⇄ पंचगंगा / सिंधिया घाट | ₹800 – ₹1,200 | शांत सुबह की सैर, लाइफ जैकेट शामिल, सीधे ब्रह्मचारिणी व कात्यायनी की सीढ़ियों तक। |
| प्राइवेट मोटर बोट | 8 व्यक्ति तक | राउंड ट्रिप (1 घंटे मंदिर प्रतीक्षा सहित) | ₹2,500 – ₹3,500 | बिना किसी सड़क जाम के दोनों तटवर्ती मंदिरों के दर्शन कर वापस अपने घाट लौटें। |
| शाम की आरती दर्शन नाव | 6 व्यक्ति तक | 1.5 घंटे गंगा सैर + नाव से लाइव आरती | ₹1,999 (फ्लैट) | शाम 7:00 बजे दशाश्वमेध घाट के ठीक सामने स्थिर नौका से आरती का मनोरम दृश्य। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्या हम अपने पूरे 9 दिनों के प्रवास के लिए एक ही वाहन बुक कर सकते हैं?
हाँ। हमारे पास मल्टी-डे पैकेज उपलब्ध हैं जिसमें पूरे प्रवास के लिए एक ही वेरिफाइड ड्राइवर और स्वच्छ वाहन आवंटित किया जाता है। इससे प्रतिदिन सुबह 4:30 बजे समय पर पिकअप सुनिश्चित होता है और रोज मोलभाव का झंझट खत्म हो जाता है।
क्या नवदुर्गा मंदिरों के गर्भगृह में फोटोग्राफी की अनुमति है?
अन्नपूर्णा, चंद्रघंटा और कालरात्रि जैसे प्राचीन गर्भगृहों में विग्रहों की फोटोग्राफी सख्त वर्जित है। आप मंदिर प्रांगण और बाहरी स्थापत्य की तस्वीरें ले सकते हैं। पुजारियों और सुरक्षाकर्मियों के निर्देशों का सदैव पालन करें।
दशहरे पर रावण दहन का कार्यक्रम कैसे रहता है?
दसवें दिन (मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026) विजयादशमी मनाई जाती है। लंका मैदान, सिगरा और रामनगर में विशाल रावण दहन होता है। शाम 4:00 बजे के बाद दक्षिणी वाराणसी में भारी भीड़ उमड़ती है, अतः अपनी कैब का पिकअप पॉइंट मुख्य मैदानों से थोड़ी दूरी पर तय करें।
2026 काशी नवदुर्गा यात्रा की योजना बनाएं
चाहे आपको माँ शैलपुत्री के दर्शन हेतु भोर 4:30 बजे की कैब चाहिए, पुराने शहर के जाम से बचने के लिए प्राइवेट नाव चाहिए, या सुगम घाटों के पास होटल बुकिंग में मदद चाहिए—हमारी स्थानीय बनारसी टीम आपकी सेवा में तत्पर है।