संगीत और अध्यात्म

महिंद्रा कबीर फेस्टिवल 2026 वाराणसी | तारीख, कलाकार सूची व शिवाला घाट गाइड

10वां महिंद्रा कबीर उत्सव 4–6 दिसंबर 2026 को शिवाला घाट व गुलेरिया कोठी पर। पक्की कलाकार सूची, फ्री एंट्री बनाम डेलीगेट पास, घाट ड्रॉप गेट व फिक्स्ड कैब किराया।

महिंद्रा कबीर उत्सव 2026 वाराणसी: 10वां संस्करण, कलाकार सूची व घाट यात्रा गाइड

वाराणसी के पावन गंगा तट पर महिंद्रा कबीर उत्सव अपने ऐतिहासिक 10वें वार्षिकोत्सव (10th Milestone Edition) के साथ लौट रहा है। महिंद्रा ग्रुप और टीमवर्क आर्ट्स द्वारा प्रस्तुत यह 3-दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव शुक्रवार, 4 दिसंबर से रविवार, 6 दिसंबर 2026 तक आयोजित होगा।

किसी आधुनिक ऑडिटोरियम या स्टेडियम के विपरीत, कबीर फेस्टिवल काशी की प्राचीन बलुआ पत्थर की सीढ़ियों पर साकार होता है। 15वीं सदी के क्रांतिकारी संत कबीर की निर्गुण वाणी, सामाजिक समरसता और प्रेम के संदेश को शास्त्रीय संगीत, रहस्यवादी लोक गायन, सूफ़ी धुनें और समकालीन लोक-रॉक बैंड जीवंत करते हैं।

यदि आप इस उत्सव के लिए बनारस आने की योजना बना रहे हैं, तो केवल यह जानना काफी नहीं है कि कौन से कलाकार आ रहे हैं। आपको यह समझना होगा कि क्या वाकई महंगे पास की जरूरत है या घाट की सीढ़ियों पर मुफ्त बैठा जा सकता है, गाड़ी आपको कहाँ छोड़ेगी और कितना पैदल चलना पड़ेगा, सुबह 10°C की सर्द हवा में कैसे बैठें, और रात 10 बजे कॉन्सर्ट खत्म होने के बाद होटल लौटने का पक्का साधन क्या होगा।

यह गाइड 2026 संस्करण के लिए बिल्कुल जमीनी और जांची-परखी जानकारियां प्रस्तुत करती है।


उत्सव का त्वरित विवरण: 2026 संस्करण

मुख्य बिंदु2026 संस्करण का विवरण
सत्यापित तिथियां4 से 6 दिसंबर 2026 (शुक्रवार, शनिवार, रविवार)
संस्करण का महत्व10वीं वर्षगांठ का ऐतिहासिक संस्करण (पूर्व संस्करणों के शीर्ष कलाकारों का समागम)
मुख्य आयोजन स्थलशिवाला घाट (शाम के मुख्य कॉन्सर्ट) एवं गुलेरिया कोठी / दरभंगा घाट (प्रातःकालीन राग व साहित्य सत्र)
विरासत स्थलकबीर चौरा मठ (संत कबीर की ऐतिहासिक साधना स्थली, नीरू टीला व समाधि)
सामान्य प्रवेशपूर्णतः निःशुल्क — घाट की खुली सीढ़ियों पर 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर
डेलीगेट पैकेजसशुल्क आवासीय (₹44,000+) व दैनिक पैकेज mahindrakabira.com के माध्यम से
मौसम की स्थितिसुबह हल्की धुंध व गुलाबी ठंड (10°C–13°C), दोपहर सुहावनी धूप (25°C), रात 15°C
निकटतम हवाई अड्डालाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट, बाबतपुर (28 किमी / 50–65 मिनट)
निकटतम रेलवे स्टेशनवाराणसी कैंट (BSB, 5.5 किमी), बनारस (BSBS, 4.5 किमी), पं. दीनदयाल उपाध्याय (DDU, 18 किमी)

आयोजन स्थल एवं दिनचर्या का स्वरूप

उत्सव मुख्य रूप से दो प्रमुख घाटों पर केंद्रित रहता है, जो नदी मार्ग से लगभग 1.8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं:

[उत्तरी छोर: मध्य घाट]                          [दक्षिणी छोर: दक्षिणी घाट]
गुलेरिया कोठी (गणेश/दरभंगा घाट)  <=== 1.8 किमी ===>  शिवाला घाट (मुख्य मंच)
- प्रातःकालीन राग (सुबह 06:30)    (नाव: 12 मिनट)      - शाम के भव्य कॉन्सर्ट (05:30 - 10:00)
- कबीर बैठक (सुबह 11:00)         (सड़क: 35 मिनट)     - खुली बलुआ पत्थर की सीढ़ियां
- क्यूरेटेड डेलीगेट दोपहर भोज                        - चेत सिंह किले का ऐतिहासिक परकोटा

1. शिवाला घाट (शाम का मुख्य मंच)

शिवाला घाट दक्षिणी बनारस में चेत सिंह घाट के ठीक बगल में स्थित है। शाम का मुख्य मंच सीधे गंगा किनारे तैयार किया जाता है, जिसके पीछे 18वीं सदी में महाराजा चेत सिंह और अवध के नवाबों द्वारा निर्मित विशाल पत्थर का किला रोशनी से जगमगाता है।

  • समय: प्रतिदिन शाम 05:30 बजे से रात 10:00 बजे तक।
  • माहौल: भव्य रोशनी, पानी पर गूंजता उच्चस्तरीय साउंड सिस्टम और ठंडी नदी की बयार। आगे का हिस्सा डेलीगेट बैज धारकों के लिए कुशन कुर्सियों से आरक्षित रहता है, जबकि पीछे की उठती हुई पत्थर की सीढ़ियों पर आम दर्शक बैठकर पूरा आनंद ले सकते हैं।

2. गुलेरिया कोठी (गणेश घाट / दरभंगा घाट)

दशाश्वमेध घाट से थोड़ा दक्षिण में स्थित गुलेरिया कोठी बलुआ पत्थर की एक बहाल 18वीं सदी की ऐतिहासिक हवेली है।

  • मॉर्निंग म्यूजिक (सूर्योदय राग): सुबह 06:30 से 08:30 बजे। जब सूरज पूर्वी रेती के पार से निकलता है, तब भैरव और तोड़ी जैसे प्रातःकालीन रागों की शांत प्रस्तुति।
  • कबीर बैठक (दोपहर का सत्र): सुबह 11:00 से दोपहर 01:00 बजे। हवेली के खुले प्रांगण में कबीर के पदों, उनकी सामाजिक दर्शन, जाति-भेद पर प्रहार और रूढ़िवाद के विरोध पर बौद्धिक चर्चाएं।

3. कबीर चौरा मठ

पारंपरिक बुनकर बहुल इलाके कबीर चौरा में स्थित यह 500 वर्ष पुराना मठ संत कबीर का साधना स्थल है। यहीं 'नीरू टीला' है (जहां बुनकर दंपत्ति नीरू-नीमा ने कबीर का पालन-पोषण किया था), कबीर का ऐतिहासिक हथकरघा और उनकी समाधि स्थली। डेलीगेट हेरिटेज वॉक के तहत दोपहर में यहां भ्रमण कराया जाता है।


10वें ऐतिहासिक संस्करण की पुष्ट कलाकार सूची

10वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजकों ने पिछले नौ वर्षों में सबसे अधिक सराहे गए कलाकारों की एक विशेष 'रेट्रोस्पेक्टिव' सूची तय की है:

  1. अरुणा साईराम (कर्नाटक शास्त्रीय गायन): पद्मश्री से सम्मानित कर्नाटक संगीत की शिखर गायिका। अपने ओजस्वी स्वर, भक्ति पदों और मराठी अभंगों के अनूठे संलयन के लिए प्रसिद्ध।
  2. शबनम विरमानी (रहस्यवादी लोक गायन एवं तंबूरा): 'द कबीर प्रोजेक्ट' की संस्थापक और फिल्मकार। मालवा, राजस्थान और कच्छ की लोक कबीर परंपरा को अपने पंचतार तंबूरे और गहरी दार्शनिक समझ के साथ प्रस्तुत करती हैं।
  3. नीरज आर्य का कबीर कैफे (लोक-रॉक बैंड): युवाओं का पसंदीदा बैंड, जो कबीर के दोहों को ड्रम्स, बेस, ध्वनिक गिटार और मैंडोलिन की ऊर्जावान ताल में पिरोता है।
  4. कलापिनी कोमकली (शास्त्रीय ख्याल व निर्गुण): संगीत मार्तंड पंडित कुमार गंधर्व की सुपुत्री और शिष्या। ग्वालियर घराने की शुद्धता और कबीर के निर्गुणी भजनों की गहरी विरासत को आगे बढ़ाती हैं।
  5. फकीरा (बाउल-रॉक एवं लोक समूह): बंगाल का प्रसिद्ध संगीत समूह, जो प्राचीन बाउल दर्शन को समकालीन वाद्ययंत्रों और भावपूर्ण गायन के साथ मंच पर उतारता है।
  6. द आह्वान प्रोजेक्ट (लोक कथावाचन व संगीत): लोक वाद्ययंत्रों और जनगीतों के माध्यम से कबीर के समतावादी दर्शन को वर्तमान सामाजिक संदर्भों से जोड़ने वाला सांस्कृतिक दल।
  7. महाराज त्रयो (बनारस घराना वादन परंपरा): पंडित सूरज महाराज और उनके परिवार की तीन पीढ़ियां, जो सितार, सरोद और तबले पर बनारस घराने की दुर्लभ परंपरा पेश करती हैं।
  8. विदुषी डॉ. कमला शंकर (शंकर गिटार): अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित शास्त्रीय स्लाइड गिटार वादक, जिन्होंने शास्त्रीय गायकी अंग को गिटार के तारों पर साधे रखने के लिए 'शंकर गिटार' का आविष्कार किया।
  9. श्वेता हट्टंगड़ी किलपडी (हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायन): ख्याल और गंभीर भक्ति पदों की सधी हुई शास्त्रीय गायिका।
  10. उमेश कबीर (पारंपरिक कबीर पंथी लोक भजन): कबीर पंथ की ग्रामीण मौखिक परंपरा में रचे-बसे प्रामाणिक लोक गायक।

मुफ्त सीढ़ी प्रवेश बनाम सशुल्क डेलीगेट पास: असली स्थिति

यात्रियों के बीच सबसे बड़ा भ्रम यह रहता है कि क्या कबीर उत्सव में जाने के लिए हजारों रुपये का पास लेना अनिवार्य है:

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|                         प्रवेश विकल्पों का सच                          |
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|       निःशुल्क सामान्य प्रवेश       |         सशुल्क डेलीगेट पैकेज       |
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| • घाट की खुली सीढ़ियों पर मुफ्त     | • मंच के ठीक आगे आरक्षित कुर्सियां |
| • सुबह और शाम के कॉन्सर्ट खुले हैं  | • हेरिटेज हवेली में क्यूरेटेड भोजन  |
| • 40 मिनट पहले आएं (सीट चुनें)     | • दोपहर की अंतरंग कबीर बैठकें      |
| • बैठने के लिए शॉल या कुशन लाएं    | • घाटों के बीच प्राइवेट नाव सेवा    |
| • किसी पास या टिकट की जरूरत नहीं   | • कबीर चौरा मठ की गाइडेड वॉक       |
| • खर्च: ₹0                         | • खर्च: ₹44,000 से शुरू (होटल सहित)|
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मुफ्त सामान्य प्रवेश (Free Public Entry)

यदि आप स्वतंत्र रूप से यात्रा कर रहे हैं, तो आपको संगीत सुनने के लिए किसी टिकट की आवश्यकता नहीं है।

  • बनारस के घाट सार्वजनिक नगर निगम संपत्ति हैं। शिवाला घाट पर शाम के कॉन्सर्ट और सुबह के राग सभी के लिए खुले रहते हैं।
  • बैठने की व्यवस्था: आम दर्शक डेलीगेट बैरिकेड के ठीक पीछे उठती हुई चौड़ी पत्थर की सीढ़ियों पर बैठते हैं। क्योंकि सीढ़ियां स्टेडियम की तरह ढलानदार हैं, इसलिए दृश्य बिल्कुल साफ दिखाई देता है।
  • सुझाव: शाम 05:30 बजे के कार्यक्रम के लिए शाम 04:45 से 05:00 बजे तक घाट पहुंच जाएं ताकि अच्छी ऊंचाई वाली पत्थर की चौखट पर जगह मिल सके।

सशुल्क डेलीगेट पैकेज (Paid Delegate Packages)

टीमवर्क आर्ट्स द्वारा आधिकारिक वेबसाइट mahindrakabira.com पर बेचे जाने वाले ये पैकेज उन अतिथियों के लिए हैं जो एक लक्जरी सांस्कृतिक अनुभव चाहते हैं:

  • आवासीय पैकेज (लगभग ₹44,000 से शुरू): इसमें 2 से 3 रातों का हेरिटेज या 5-स्टार होटल में ठहरना (जैसे गुलेरिया कोठी, बृजरमा पैलेस, ताज गैंजेस), तीनों समय का सात्विक बनारसी खान-पान, आगे की आरक्षित कुर्सियां, कबीर बैठक में प्रवेश, प्राइवेट नाव ट्रांसफर और कबीर चौरा वॉक शामिल हैं।
  • डेलीगेट संपर्क: आधिकारिक बुकिंग हेतु ईमेल Delegates@teamworkarts.com या फोन +91 9643302036 पर संपर्क करें।

ड्रॉप-ऑफ पॉइंट्स और पैदल चलने की जमीनी हकीकत

बनारस की तंग गलियों और घाटों की बनावट के कारण कोई भी टैक्सी सीधे नदी के किनारे तक नहीं जा सकती। सही ड्रॉप-ऑफ पॉइंट जानकर आप बेकार की उलझन से बच सकते हैं।

1. शिवाला घाट कैसे पहुंचें (शाम का मुख्य मंच)

मध्य बनारस (दशाश्वमेध) की तुलना में शिवाला घाट तक गाड़ी से पहुंचना बहुत आसान है:

  • शिवाला चौराहा / विजया सिनेमा ड्रॉप (सबसे बढ़िया): अपनी कैब या ऑटो को मुख्य सड़क पर शिवाला चौराहे पर रुकने को कहें। चौराहे से शिवाला लेन सीधे नदी की ओर जाती है:
    • दूरी: मात्र 300 से 400 मीटर (लगभग 5 मिनट की सीधी पैदल वॉक)।
    • रास्ता: पक्का रास्ता, हल्की ढलान के साथ सीधे शिवाला घाट की ऊपरी सीढ़ियों तक पहुंचता है।
  • भेलूपुर चौराहा ड्रॉप: यदि शाम को शिवाला चौराहे पर जाम हो, तो भेलूपुर चौराहे पर उतरें। वहां से शिवाला तक 850 मीटर (10-12 मिनट) की वॉक है या ई-रिक्शा मिल जाता है।
  • अस्सी चौराहा ड्रॉप: दक्षिण की ओर 1.1 किमी की दूरी पर है। वहां से 5 मिनट में साइकिल रिक्शा या 15 मिनट की पैदल वॉक से शिवाला पहुंचा जा सकता है।

2. गुलेरिया कोठी कैसे पहुंचें (गणेश घाट / दरभंगा घाट)

गुलेरिया कोठी पुराने शहर के पूर्णतः नो-व्हीकल पैदल क्षेत्र में है:

  • सड़क मार्ग (कठिन वॉक): निकटतम कार ड्रॉप बेनिया बाग मल्टी-लेवल पार्किंग या गिरजाघर चौराहा (लक्सा रोड) पर है। वहां से आपको तंग गलियों और सीढ़ियों से होते हुए 750 से 900 मीटर पैदल चलना पड़ेगा।
  • जलमार्ग का गुप्त रास्ता (सबसे आसान उपाय):
    • यदि आपके पास सामान है या बुजुर्ग साथ हैं, तो टैक्सी को सीधे अस्सी घाट पर छोड़ने को कहें (जहां पक्की सड़क और गाड़ी पार्किंग की पूरी सुविधा है)।
    • अस्सी घाट से पहले से तय की गई प्राइवेट नाव लें और 12 मिनट में सीधे गुलेरिया कोठी की निजी सीढ़ियों पर उतर जाएं। गलियों की भीड़ और चढ़ाई-उतराई से पूरी मुक्ति मिल जाएगी।

3. दोनों वेन्यू के बीच यात्रा: सड़क बनाम नदी

उत्सव के दौरान गुलेरिया कोठी (सुबह का सत्र) से शिवाला घाट (शाम का सत्र) आने-जाने के लिए सड़क मार्ग चुनना भारी भूल हो सकती है। गोदौलिया और सोनारपुरा का शाम का ट्रैफिक 3.5 किमी की दूरी तय करने में 35 से 45 मिनट ले लेता है।

  • नदी मार्ग से दूरी: मात्र 1.8 किमी। एक शांत लकड़ी की नाव से यह सफर केवल 10 से 12 मिनट में केदार घाट और हरिश्चंद्र घाट के सामने से गुजरते हुए पूरा हो जाता है।
🎶 महिंद्रा कबीर उत्सव 2026: शिवाला घाट कैब, बोट व एयरपोर्ट ट्रांसफर
10वें महिंद्रा कबीर फेस्टिवल (4–6 दिसंबर 2026) के लिए वाराणसी आ रहे हैं? संकरी गलियों के जाम और देर रात ऑटो तलाशने की परेशानी से बचें। हम फिक्स्ड-रेट एयरपोर्ट/स्टेशन पिकअप, शिवाला चौराहा ड्रॉप, कैंटोनमेंट होटलों हेतु 8 घंटे/80 किमी डिस्पोज़ल कैब और गुलेरिया कोठी से शिवाला घाट तक सुगम प्राइवेट बोट सेवा प्रदान करते हैं।
₹899 फिक्स्ड AC सेडान / ₹1,299 अर्टिगा एयरपोर्ट ट्रांसफर — 45 मिनट निःशुल्क फ्लाइट ट्रैकिंग
शिवाला चौराहा ड्रॉप — मुख्य कॉन्सर्ट घाट सीढ़ियों से मात्र 350 मीटर की आसान वॉक
गुलेरिया कोठी व शिवाला घाट के बीच प्राइवेट बोट ट्रांसफर (सड़क जाम से मुक्ति)
8 घंटे / 80 किमी फुल-डे कैब (सुबह के राग, कबीर चौरा मठ दर्शन व सारनाथ टूर)
WhatsApp पर कबीर उत्सव कैब बुक करें या कॉल करें 99354 74730
🎶 शिवाला चौराहा ड्रॉप 🛶 घाट-से-घाट प्राइवेट बोट ⏳ पक्की स्टैंडबाय वेटिंग 🛡️ कोई सरचार्ज या मोलभाव नहीं

दिसंबर की ठंड और घाट पर बैठने के जरूरी नियम

दिसंबर की शुरुआत में बनारस का मौसम बहुत सुहाना होता है, लेकिन नदी किनारे बैठने के लिए खास तैयारी जरूरी है:

  1. ठंडे पत्थर की चेतावनी: गंगा घाट की बलुआ पत्थर की सीढ़ियां रात भर में अत्यधिक ठंडी हो जाती हैं। नंगे पत्थर पर 2 घंटे के प्रातःकालीन राग सत्र या शाम के कॉन्सर्ट में बैठना शरीर की गर्मी खींच लेता है।
    • क्या साथ रखें: एक फोल्डेबल फोम सिटिंग मैट, बैठने के लिए एक मोटी ऊनी शॉल या छोटा कुशन साथ जरूर लाएं।
  2. तापमान का उतार-चढ़ाव:
    • भोर (सुबह 06:00 – 08:00): 10°C से 13°C। नदी की ठंडी हवा के कारण ठंड ज्यादा लगती है। थर्मल इनर, गर्म जैकेट या भारी शॉल और ऊनी मोज़े अनिवार्य हैं।
    • दोपहर (12:00 – 03:00): 24°C से 26°C। खिली हुई धूप में हल्की शर्ट या कुर्ता आरामदायक रहता है।
    • रात (06:00 – 10:00): 14°C से 17°C, कॉन्सर्ट खत्म होते-होते ठंड बढ़ जाती है।
  3. बाबतपुर एयरपोर्ट पर कोहरे का अलर्ट:
    • दिसंबर के पहले हफ्ते से उत्तर भारत में सुबह का कोहरा शुरू हो जाता है।
    • सुबह 10:30 बजे से पहले आने वाली उड़ानों में कभी-कभी देरी हो सकती है।
    • फ्लाइट बुकिंग नियम: सुबह के कोहरे से बचने के लिए दोपहर 11:30 बजे से 03:30 बजे के बीच की उड़ानें चुनें। शहर से एयरपोर्ट जाने के लिए NH-31 से कम से कम 75 मिनट का समय हाथ में रखें।

कहाँ ठहरें: होटल क्षेत्रों की व्यावहारिक तुलना

क्षेत्रशिवाला से दूरीफायदेसीमाएंकिसके लिए सही
घाट हवेलियां (गुलेरिया कोठी, बृजरमा, सूर्योदय)सीधे गंगा किनारे / 1.5 किमी बोटसुबह के राग के लिए सीधा दरवाजा; भव्य नदी दृश्यगाड़ियां नहीं पहुंचतीं; खड़ी सीढ़ियां; कुली जरूरीसंस्कृति प्रेमी, डेलीगेट, कपल
शिवाला व अस्सी (होटल व होमस्टे)300 मी – 1 किमी पैदल5 मिनट में कॉन्सर्ट वॉक; पास में ऑटो स्टैंड; शांत कैफे5-स्टार ब्रांड सीमित; संकरी गलियांस्वतंत्र यात्री, संगीत प्रेमी, परिवार
कैंटोनमेंट / नदेसर (ताज गैंजेस, रेडिसन)6.5 किमी (25–35 मिनट कैब)पूर्ण 5-स्टार लक्जरी; लिफ्ट व बगीचे; कोई पैदल जाम नहींहर सत्र के लिए कैब जरूरीकॉर्पोरेट डेलीगेट, बुजुर्ग जिन्हें लिफ्ट चाहिए
भेलूपुर व सिगरा (बिजनेस होटल व होमस्टे)1.5 – 2.5 किमी (10 मिनट कैब)गाड़ियां होटल के गेट तक; मुख्य खान-पान हब; बजट अनुकूलनदी का दृश्य नहींग्रुप यात्री, सामान्य बजट परिवार

बुजुर्गों और परिवारों के लिए खास सलाह

  1. शिवाला घाट की सीढ़ियां: शिवाला लेन से घाट तक आने वाली सीढ़ियां चौड़ी हैं, लेकिन उन पर रेलिंग नहीं लगी है। वरिष्ठ नागरिकों को शाम 05:00 बजे उजाले में ही घाट पर पहुंच जाना चाहिए। उन्हें सबसे नीचे की सीढ़ियों के बजाय ऊपर के समतल चबूतरे पर बैठाएं।
  2. गुलेरिया कोठी की आंतरिक सीढ़ियां: 18वीं सदी की हवेली होने के कारण गुलेरिया कोठी के अंदर की सीढ़ियां संकरी और ऊंची हैं। यहां व्हीलचेयर ले जाना संभव नहीं है।
  3. शौचालय सुविधा: शिवाला मुख्य सड़क पर नगर निगम का स्मार्ट टॉयलेट उपलब्ध है, लेकिन नीचे घाट की सीढ़ियों पर आम शौचालय सीमित हैं।
  4. बच्चों के कान की सुरक्षा: सुबह के शास्त्रीय सत्र अत्यंत शांत होते हैं, लेकिन शाम को कबीर कैफे या फकीरा के लोक-रॉक कार्यक्रमों में ड्रम्स और बेस का साउंड बहुत तेज होता है। छोटे बच्चों के लिए ईयर-मफ्स साथ रखें।

अधिकृत वाहन व बोट किराया सूची (Authorized Rates)

कॉन्सर्ट के बाद देर रात ऑटो वालों के अत्यधिक मोलभाव और सरचार्ज से बचने के लिए पूर्व-निर्धारित दरें देखें:

सेवा / रूटउपयुक्त गाड़ीयात्री क्षमताट्रिप का प्रकारअधिकृत दरमुख्य शर्तें व सुविधाएं
बाबतपुर एयरपोर्ट ⇄ शिवाला / सिटीAC सेडान (डिज़ायर / इटियोस)4 यात्री तकएक तरफ (One-Way)₹899टोल टैक्स, पार्किंग व 45 मिनट फ्लाइट डिले ट्रैकिंग शामिल
बाबतपुर एयरपोर्ट ⇄ शिवाला / सिटीAC अर्टिगा / SUV6 यात्री तकएक तरफ (One-Way)₹1,299बड़ा बूट स्पेस, टोल व पार्किंग शामिल
एयरपोर्ट ⇄ कैंटोनमेंट लक्जरीइनोवा क्रिस्टा6 यात्री तकएक तरफ (One-Way)₹1,800प्रीमियम कैप्टन सीटें, अराइवल गेट पर ड्राइवर मीट
फेस्टिवल डे डिस्पोज़ल (8 घंटे / 80 किमी)AC सेडान4 यात्री तक8 घंटे / 80 किमी₹2,499होटल से सुबह के राग, कबीर चौरा मठ व शाम का कॉन्सर्ट
फेस्टिवल डे डिस्पोज़ल (8 घंटे / 80 किमी)इनोवा क्रिस्टा6 यात्री तक8 घंटे / 80 किमी₹3,800देर रात शिवाला चौराहे पर ड्राइवर की पक्की वेटिंग
ग्रुप ट्रांसफर (8 घंटे / 80 किमी)17-सीटर टेम्पो ट्रैवलर16 यात्री तक8 घंटे / 80 किमी₹4,250कैंटोनमेंट होटल से शिवाला ड्रॉप तक पूरा ग्रुप एक साथ
प्राइवेट सनराइज रो-बोटपारंपरिक पतवार वाली नाव4 यात्री तक1.5 घंटा₹1,800शिवाला या गुलेरिया कोठी के सामने शांत जल में
प्राइवेट होल-बोट (कवर वाली)लकड़ी की पूरी नाव6 यात्री तक2 घंटे₹3,499अस्सी या शिवाला से बोर्डिंग, लाइफ जैकेट शामिल
प्राइवेट मोटरबोट शटलमोटर चालित लकड़ी की नाव10 यात्री तक2 घंटे₹3,500 – ₹4,500गुलेरिया कोठी व शिवाला के बीच नदी मार्ग से त्वरित आवागमन

नोट: हमारी सभी एयरपोर्ट और डे-कैब दरें फिक्स्ड हैं और फेस्टिवल पीक पर कोई सरचार्ज नहीं लगता। कबीर उत्सव के दिनों में प्राइवेट नाव की भारी मांग रहती है, इसलिए 2-3 दिन पहले व्हाट्सएप पर स्लॉट लॉक करें।

🛶 वाराणसी में प्राइवेट नाव यात्रा की योजना बनाएं
प्राइवेट नाव का कोट पाने के लिए तारीख, यात्रियों की संख्या और सुबह या शाम की पसंद भेजें।
अपनी पार्टी के लिए नाव का आकार और किराया चुनें
चढ़ने का घाट और समय जानें
बच्चों की संख्या और चढ़ने में मदद की जरूरत बताएं
WhatsApp पर नाव का कोट मांगें या 📞 +91 99354 74730
🌅 सुबह या शाम का समय 👥 नाव की क्षमता की पुष्टि 🦺 लाइफ जैकेट की पुष्टि करें 📲 लिखित किराया लें

उत्सव के साथ बनारसी खान-पान का लुत्फ

दिसंबर का महीना बनारस में सर्दियों के खास स्वादों का चरम समय होता है:

  1. मलइयो (सुबह का नाश्ता): केवल सर्दियों (नवंबर से फरवरी) में मिलने वाला बनारस का जादुई ओस-फेन मीठा व्यंजन। दूध के झाग को रात की ओस में फेंटकर केसर, इलायची और पिस्ते से सजाया जाता है। सुबह के राग के बाद चौखंभा या गोदौलिया के पास ताज़ा कुल्हड़ में लें।
  2. राम भंडार की कचौड़ी-सब्जी (सुबह 07:30 – 10:00): थठेरी बाजार में पत्तल पर मिलने वाली हींग की खस्ता कचौड़ी, उड़द दाल-चने की तीखी सब्जी और गरमा-गरम जलेबी।
  3. चूड़ा-मटर: ताज़े हरे मटर, पोहा और गरम मसालों से बना बनारसी जाड़े का खास नाश्ता। शिवाला चौराहे और भेलूपुर के नाश्ता ठेलों पर उपलब्ध।
  4. काशी चाट भंडार की टमाटर चाट: शाम के कॉन्सर्ट से पहले गोदौलिया पर मिट्टी के कुल्हड़ में मिलने वाली खट्टी-मीठी घी वाली टमाटर चाट।
  5. अदरक वाली कुल्हड़ चाय: शिवाला लेन और अस्सी घाट पर रात भर मिलने वाली कुल्हड़ चाय, जो देर रात के कॉन्सर्ट के बाद ठंड भगाने का सर्वोत्तम साधन है।

3-दिन का आदर्श फेस्टिवल वीकेंड प्लान

दिन 1: शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 (आगमन एवं उद्घाटन शाम)
• सुबह 11:30: बाबतपुर एयरपोर्ट पर लैंडिंग; प्री-बुक्ड AC सेडान से होटल प्रस्थान।
• दोपहर 02:00: होटल में चेक-इन, विश्राम और गर्म कपड़ों की तैयारी।
• शाम 04:30: शिवाला चौराहे पर कैब ड्रॉप; 350 मीटर पैदल चलकर शिवाला घाट पहुंचें।
• शाम 05:30: चेत सिंह किले की रोशनी के नीचे उद्घाटन कॉन्सर्ट का आनंद।
• रात 10:00: भेलूपुर में भोजन; शिवाला चौराहे पर खड़ी कैब से होटल वापसी।

दिन 2: शनिवार, 5 दिसंबर 2026 (प्रातःकालीन राग एवं कबीर दर्शन)
• सुबह 06:00: अस्सी घाट से पहले से तय की गई नाव लेकर सीधे गुलेरिया कोठी पहुंचें।
• सुबह 06:30: उगते सूरज के साथ हवेली की छत पर शास्त्रीय राग सत्र।
• सुबह 08:30: मलइयो और चूड़ा-मटर का बनारसी नाश्ता।
• सुबह 11:00: दरभंगा घाट पर 'कबीर बैठक' के दार्शनिक संवाद में भागीदारी।
• दोपहर 02:30: फुल-डे कैब से कबीर चौरा मठ दर्शन (संत कबीर की ऐतिहासिक समाधि व नीरू टीला)।
• शाम 05:30: शिवाला घाट पर कबीर कैफे और फकीरा का धमाकेदार लोक-रॉक कॉन्सर्ट।

दिन 3: रविवार, 6 दिसंबर 2026 (महा-समापन एवं काशी विश्वनाथ दर्शन)
• सुबह 06:30: गंगा किनारे अंतिम प्रातःकालीन संगीत सत्र।
• सुबह 10:00: गेट नंबर 4 (ज्ञानवापी) से श्री काशी विश्वनाथ धाम दर्शन या नाव भ्रमण।
• शाम 05:30: शिखर शास्त्रीय व रहस्यवादी गायकों का महा-समापन कॉन्सर्ट।
• रात 10:00: अस्सी पर कुल्हड़ चाय के साथ उत्सव की सुखद विदाई; सोमवार आउटस्टेशन ट्रिप की तैयारी।

उत्सव के बाद के प्रमुख रोड ट्रिप विकल्प

कई यात्री कबीर उत्सव के 3 दिनों के बाद आसपास के तीर्थ स्थलों का रोड ट्रिप जोड़ते हैं:

  1. सारनाथ हाफ-डे टूर (13 किमी उत्तर): भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली, धमेक स्तूप और अशोक स्तंभ वाला पुरातत्व संग्रहालय। 8 घंटे की लोकल कैब में सारनाथ और उत्सव दोनों आराम से हो जाते हैं।
  2. वाराणसी से अयोध्या डे-ट्रिप (220 किमी / पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से 4.5 घंटे): श्री राम जन्मभूमि मंदिर, कनक भवन और सरयू आरती। सुबह 05:00 बजे निकलकर रात 10:00 बजे तक वापसी।
  3. वाराणसी से प्रयागराज डे-ट्रिप (125 किमी / NH-19 से 2.5 घंटे): त्रिवेणी संगम पर पवित्र स्नान, लेटे हुए बड़े हनुमान जी मंदिर और आनंद भवन दर्शन।
  4. वाराणसी से बोधगया सर्किट (255 किमी / 5.5 घंटे): यूनेस्को विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर और बोधि वृक्ष दर्शन हेतु मल्टी-डे पैकेज।

बनारस आने से पहले की चेकलिस्ट

  • तारीख तय करें: 4 से 6 दिसंबर 2026 (शुक्रवार से रविवार)।
  • पास का निर्णय लें: सीढ़ियों पर मुफ्त बैठना है या mahindrakabira.com से ऑल-इनक्लूसिव डेलीगेट पैकेज लेना है।
  • दोपहर की फ्लाइट चुनें: सुबह के कोहरे से बचने के लिए 11:30 AM से 03:30 PM के बीच की फ्लाइट बुक करें।
  • बैठने के लिए कुशन/शॉल रखें: ठंडी बलुआ पत्थर की सीढ़ियों पर 2 घंटे बैठने के लिए सिटिंग पैड जरूरी है।
  • गर्म कपड़े पैक करें: सुबह नदी पर 10°C की ठंड रहती है; थर्मल, जैकेट, मफलर और ऊनी मोज़े साथ रखें।
  • घाट कैब व बोट पहले से बुक करें: पीक सीजन में एयरपोर्ट टैक्सी, शिवाला ड्रॉप और सनराइज बोट काशी टैक्सी पर पहले से तय कर लें ताकि नो-सर्ज का लाभ मिले।

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एयरपोर्ट ट्रांसफर, शिवाला चौराहा कैब ड्रॉप और सनराइज बोट पहले से बुक करें।