2026 मुख्य तिथि व समय:कार्तिक पूर्णिमा (मंगलवार, 24 नवंबर 2026) को सारनाथ स्थित मूलागंध कुटी विहार का 95वाँ वार्षिकोत्सव मनाया जाएगा। इस पावन अवसर पर वर्ष में केवल एक बार भगवान बुद्ध के मूल शारीरिक अस्थि अवशेष (अस्थि धातु) गर्भगृह के भूमिगत स्टील वॉल्ट से बाहर निकालकर सुबह 08:00 बजे से 11:30 बजे तक जनसाधारण के दर्शन हेतु रखे जाते हैं। दोपहर 01:00 बजे सजे हुए हाथी पर धातु मंजूषा रखकर भव्य अंतरराष्ट्रीय शोभायात्रा निकाली जाएगी, और शाम 05:30 बजे से 08:30 बजे तक बोधि वृक्ष परिसर में सहस्र दीपदान (बौद्ध दीपोत्सव) होगा।
साल के 363 दिन सारनाथ आने वाले पर्यटक मूलागंध कुटी विहार में जापानी चित्रकार कोसेत्सु नोसू के सुंदर भित्तिचित्र देखते हैं और मुख्य स्वर्ण प्रतिमा को नमन करते हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को यह पता होता है कि उसी स्वर्ण प्रतिमा के ठीक नीचे एक मजबूत भूमिगत वॉल्ट में तथागत बुद्ध के प्रामाणिक अस्थि अवशेष सुरक्षित हैं, जो तक्षशिला और नागार्जुनकोंडा के पुरातात्विक उत्खनन में मिले थे।
महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के नियमानुसार यह पवित्र वॉल्ट वर्ष में सिर्फ दो दिन खुलता है—वैशाख बुद्ध पूर्णिमा और कार्तिक पूर्णिमा।
वर्ष 2026 में कार्तिक पूर्णिमा मंगलवार, 24 नवंबर को पड़ रही है। यह तारीख एक अद्भुत आध्यात्मिक संगम लेकर आती है: दिन में सारनाथ में वैश्विक शांति व तथागत की धातु वंदना, और शाम को बनारस के घाटों पर 15 लाख दीयों की विश्वप्रसिद्ध देव दीपावली।
यदि आप बिना योजना के निकलेंगे तो दोपहर में सारनाथ के जाम और शहर के नो-व्हीकल जोन में फंस सकते हैं। सही योजना और समय प्रबंधन के साथ आप दोनों का संपूर्ण लाभ उठा सकते हैं।
2026 तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव कार्यक्रम (23–25 नवंबर)
सारनाथ महाबोधि परिसर में 95वें वार्षिकोत्सव का आधिकारिक कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा:
दिवस व तिथि
समय
अनुष्ठान व कार्यक्रम
स्थान व मुख्य विवरण
प्रथम दिन (23 नवंबर 2026, सोमवार)
दोपहर 02:30 – 06:00
अंतरराष्ट्रीय भिक्षु सम्मेलन व धम्म संगोष्ठी
महाबोधि पुस्तकालय सभागार; श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, जापान, कंबोडिया व वियतनाम के प्रतिनिधिमंडलों का आगमन व पालि परित्राण पाठ।
द्वितीय दिन (24 नवंबर 2026, मंगलवार)
प्रातः 04:30 – 06:00
प्रातःकालीन परित्राण पाठ
मूलागंध कुटी विहार गर्भगृह; भिक्षु संघ द्वारा मंगल सुत्त व रतन सुत्त का सस्वर पाठ।
द्वितीय दिन (24 नवंबर 2026, मंगलवार)
प्रातः 06:30 – 07:30
पवित्र अस्थि धातु अनावरण
वरिष्ठ महास्थविरों द्वारा वॉल्ट खोलकर धातु मंजूषा को पुष्प सज्जित वेदी पर स्थापित करना।
द्वितीय दिन (24 नवंबर 2026, मंगलवार)
प्रातः 08:00 – 11:30
सार्वजनिक तथागत अस्थि धातु दर्शन
मुख्य दर्शन खिड़की। श्रद्धालु पंक्तिबद्ध होकर तथागत के पावन अवशेषों के दर्शन करते हैं। प्रवेश निःशुल्क।
द्वितीय दिन (24 नवंबर 2026, मंगलवार)
पूर्वाह्न 11:30 – 12:30
संघ दान (भिक्षु भोजन)
थेरवाद विनय के अनुसार दोपहर से पूर्व भिक्षुओं को भोजन दान। दर्शन पंक्ति कुछ समय हेतु स्थगित।
द्वितीय दिन (24 नवंबर 2026, मंगलवार)
दोपहर 01:00 – 03:30
भव्य अंतरराष्ट्रीय हाथी शोभायात्रा
सजे-धजे हाथी पर धातु करंड रखकर धमेख स्तूप, थाई मंदिर व तिब्बती मठ होते हुए नगर परिक्रमा।
द्वितीय दिन (24 नवंबर 2026, मंगलवार)
सायं 05:30 – 08:30
कार्तिक पूर्णिमा बौद्ध दीपोत्सव
बोधि वृक्ष प्रांगण व विहार परिसर में हजारों मिट्टी के दीयों व मोमबत्तियों का शांत प्रज्वलन।
तृतीय दिन (25 नवंबर 2026, बुधवार)
प्रातः 08:30 – 12:00
समापन धम्म उपदेश व संघ विदाई
आशीर्वाद पाठ, धम्म साहित्य वितरण व विदेशी प्रतिनिधिमंडलों का प्रस्थान।
दर्शन सलाह: प्रातः 08:00 बजे पहुंचने पर लाइन में 20 से 30 मिनट का सामान्य समय लगता है। सुबह 10:00 बजे के बाद भीड़ बढ़ती है। शांतिपूर्वक दर्शन हेतु सुबह 08:00 से 09:30 बजे का समय सबसे उत्तम है।
🪷 सारनाथ बुद्ध अस्थि धातु दर्शन: फिक्स्ड कैब व देव दीपावली बाईपास व्यवस्था
मूलागंध कुटी विहार के 95वें वार्षिकोत्सव व पवित्र तथागत अस्थि धातु दर्शन (23–25 नवंबर 2026) पर सारनाथ आ रहे हैं? दोपहर बाद देव दीपावली के भीषण जाम व नो-व्हीकल जोन में फंसने से बचें। हम सारनाथ गेट पर समर्पित ड्राइवर इंतजार सहित राउंड ट्रिप कैब, एयरपोर्ट/मठ ट्रांसफर और नमो घाट हेतु सीधा बाईपास ड्रॉप उपलब्ध कराते हैं।
₹1,700 फिक्स्ड राउंड ट्रिप सेडान (डिजायर) — सारनाथ में 4–5 घंटे पक्का इंतजार शामिल
परिवार व तीर्थयात्रियों हेतु अर्टिगा (₹2,400) व इनोवा क्रिस्टा (₹3,200)
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध प्रतिनिधिमंडलों हेतु 12 व 17-सीटर टेम्पो ट्रेवलर
दोपहर में देव दीपावली नाव पकड़ने हेतु नमो घाट का सीधा सुगम बाईपास ड्रॉप
🪷 4–5 घंटे समर्पित सारनाथ इंतजार·⏳ नमो घाट सीधा सुगम बाईपास·🚐 ग्रुप टेम्पो व बौद्ध प्रतिनिधिमंडल गाड़ियां·🛡️ लिखित में तय फिक्स्ड किराया
सारनाथ में स्थित बुद्ध अस्थि धातु का पुरातात्विक इतिहास
सारनाथ में रखे अवशेष केवल प्रतीकात्मक नहीं हैं। ये भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा ब्रिटिश काल में वैज्ञानिक ढंग से खोजे गए प्रामाणिक शारीरिक धातु हैं:
┌────────────────────────────────────────────────────────────────────────┐
│ पवित्र अस्थि धातु की पुरातात्विक पृष्ठभूमि │
│ │
│ 1. तक्षशिला (प्राचीन गांधार — उत्खनन 1913–1914): │
│ • सर जॉन मार्शल द्वारा धर्मराजिका स्तूप से प्राप्त │
│ • खरोष्ठी अभिलेख युक्त चांदी की मंजूषा में भगवान बुद्ध के │
│ अस्थि अवशेषों की पुष्टि हुई │
│ │
│ 2. नागार्जुनकोंडा (आंध्र प्रदेश — उत्खनन 1927–1928): │
│ • पुरातत्वविद् ए.एच. लॉन्गहर्स्ट द्वारा महाचैत्य से प्राप्त │
│ • स्वर्ण करंडक में सुरक्षित अस्थि अंश │
│ │
│ 3. सारनाथ में प्रतिष्ठापना (11 नवंबर 1931): │
│ • ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड विलिंगडन ने महाबोधि सोसाइटी के संस्थापक │
│ अनागारिक धर्मपाल को यह पवित्र धातु विधिवत सौंपी │
│ • प्रथम उपदेश स्थली (ऋषिपत्तन) के मूलागंध कुटी विहार में प्रतिष्ठित│
└────────────────────────────────────────────────────────────────────────┘
श्रीलंकाई बौद्ध पुनरुद्धारक अनागारिक धर्मपाल ने जब 1931 में मूलागंध कुटी विहार का निर्माण पूरा कराया, तब भारत सरकार ने ये पवित्र अवशेष उन्हें सौंपे, ताकि भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली (धम्मचक्र प्रवर्तन) पर संसार भर के श्रद्धालु इनके दर्शन कर सकें।
गर्भगृह में दर्शन की व्यवस्था
दर्शन के समय धातु मंजूषा को मुख्य बुद्ध प्रतिमा के ठीक आगे एक ऊँची पुष्प-सुसज्जित चौकी पर रखा जाता है। श्रद्धालु लगभग तीन फीट की दूरी से दर्शन करते हैं। आप श्वेत कमल, गेंदे के फूल या अगरबत्ती अर्पित कर सकते हैं। सुरक्षा और पवित्रता के कारण मंजूषा को स्पर्श करने की सख्त मनाही है।
सारनाथ धातु दर्शन व देव दीपावली: 24 नवंबर की संयुक्त योजना
मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को वाराणसी में दो विशाल आयोजन एक ही दिन हैं:
दिन में सारनाथ (सुबह 08:00 से दोपहर 01:30 बजे तक): पवित्र धातु दर्शन और हाथी शोभायात्रा (शहर से 10 किमी उत्तर)।
शाम को गंगा घाटों पर (शाम 05:00 से रात 09:30 बजे तक): 84 घाटों पर 15 लाख दीयों की भव्य देव दीपावली।
[ मंगलवार, 24 नवंबर 2026 ]
│
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[ सुबह 08:00 – दोपहर 01:30 ] [ शाम 05:00 – रात 09:30 ]
सारनाथ: बुद्ध अस्थि धातु दर्शन गंगा घाट: देव दीपावली
मूलागंध कुटी विहार व हाथी शोभायात्रा 15 लाख दीयों का प्रज्वलन
समतल मार्ग, शांत पालि मंत्रोच्चार महाआरती व घाटों पर 15 लाख भीड़
│
▼
[ चेतावनी: दोपहर 02:00 बजे से शहर में नो-व्हीकल जोन व बैरिकेडिंग ]
सबसे बड़ी भूल: सारनाथ में दोपहर बाद अटक जाना
अक्सर पर्यटक सुबह 09:00 बजे ऑटो करके सारनाथ चले जाते हैं और सोचते हैं कि दोपहर 02:30 बजे वापस ऑटो या ओला/उबर से गोदौलिया आ जाएंगे।
यह योजना हर साल विफल होती है। देव दीपावली के दिन दोपहर 02:00 बजे से वाराणसी पुलिस अंधरापुल, चौकाघाट, सिगरा, मैदागिन और गोदौलिया की ओर जाने वाले सभी रास्तों को वाहनों हेतु पूरी तरह बंद (नो-व्हीकल जोन) कर देती है। सारनाथ के ऑटो वाले या तो शहर जाने से मना कर देते हैं या 1,500 से 2,000 रुपये तक मनमाना किराया मांगते हैं। साथ ही आशापुर-पांडेयपुर मार्ग पर भीषण जाम लग जाता है।
सफल होने के दो व्यावहारिक रास्ते
विकल्प 1: नमो घाट सीधा बाईपास मार्ग (सर्वाधिक अनुशंसित)
सुबह 07:30 बजे: होटल से पहले से बुक की गई एसी कैब लेकर सीधे सारनाथ पहुंचे (35 मिनट)।
सुबह 08:15 – 11:30 बजे: मूलागंध कुटी विहार में शांति से धातु दर्शन करें, डियर पार्क घूमें और जापानी भित्तिचित्र देखें।
दोपहर 12:30 – 01:15 बजे: विहार के बाहर हाथी शोभायात्रा का शुभारंभ देखें।
दोपहर 01:30 बजे सटीक: अपनी प्रतीक्षारत कैब में बैठें और शहर के मुख्य जाम से बचते हुए आउटर रिंग रोड / गाजीपुर मार्ग से सीधे नमो घाट (राजघाट) निकल जाएं (सारनाथ से मात्र 7.5 किमी)।
लाभ: आप शहर के जाम में फंसे बिना दोपहर 02:30 बजे तक नमो घाट पहुंच जाएंगे। वहां अपनी पूर्व-आरक्षित देव दीपावली बोट पर सवार हों और शाम को पूरे 84 घाटों की जगमगाहट का शांत दर्शन करें।
विकल्प 2: सारनाथ का शांत दीपोत्सव (बुजुर्गों हेतु श्रेष्ठ)
यदि आपके साथ वरिष्ठ नागरिक हैं जो देव दीपावली की 15 लाख लोगों की धक्का-मुक्की सहन नहीं कर सकते, तो शाम को सारनाथ में ही रुकें।
शाम 05:30 बजे मूलागंध कुटी विहार और बोधि वृक्ष के चारों ओर हजारों मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं।
पूर्णिमा के चांद के नीचे भिक्षुओं का पालि मंत्रोच्चार और शांत वातावरण एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव देता है, जहां कोई भगदड़ नहीं होती।
मूलागंध कुटी विहार परिसर के अन्य मुख्य आकर्षण
अस्थि धातु दर्शन के साथ परिसर में इन तीन विशेष स्थलों को अवश्य देखें:
1. जापानी चित्रकार कोसेत्सु नोसू के भित्तिचित्र
विहार की दीवारों और छतों पर 1932 से 1935 के बीच प्रसिद्ध जापानी कलाकार कोसेत्सु नोसू और उनके सहयोगी जितोकुनो द्वारा बनाए गए भव्य फ्रेस्को भित्तिचित्र हैं। ये आठ विशाल पैनल भगवान बुद्ध के जीवन के प्रमुख प्रसंगों को दर्शाते हैं—महारानी माया का स्वप्न, महाभिनिष्क्रमण, ज्ञान प्राप्ति, सारनाथ में प्रथम उपदेश और महापरिनिर्वाण। यह 20वीं सदी की बौद्ध कला का अद्वितीय नमूना है।
2. 1931 का पावन बोधि वृक्ष
विहार के दक्षिणी प्रांगण में एक विशाल बोधि वृक्ष है, जिसे 1931 में अनागारिक धर्मपाल ने रोपा था। यह पौधा श्रीलंका के अनुराधापुर स्थित 'जय श्री महाबोधि' की शाखा से लाया गया था। अनुराधापुर का वृक्ष स्वयं 249 ईसा पूर्व में सम्राट अशोक की पुत्री संघमित्रा द्वारा बोधगया के मूल बोधि वृक्ष से ले जाकर लगाया गया था। अतः सारनाथ का यह वृक्ष सीधे तौर पर मूल बोधि वृक्ष का वंशज है। इसके नीचे भगवान बुद्ध और उनके पांच शिष्यों की कांस्य प्रतिमाएं स्थापित हैं।
3. हाथी पर भव्य शोभायात्रा (दोपहर 01:00 बजे)
कार्तिक पूर्णिमा दोपहर ठीक 01:00 बजे पवित्र धातु मंजूषा को एक सुसज्जित हाथी पर रखी स्वर्ण हौदा में स्थापित किया जाता है। पीत व रक्त वस्त्रधारी भिक्षु शंख और तिब्बती दुंगचेन बाजे बजाते हैं। भारत, श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार व जापान के बौद्ध ध्वजों के साथ यह जुलूस धमेख स्तूप, थाई मंदिर और तिब्बती मठ के मार्गों से परिक्रमा करता हुआ लौटता है।
बुजुर्गों व परिवारों हेतु उपयोगी नियम व सुविधाएं
सारनाथ की भौगोलिक स्थिति बनारस के पुराने घाटों की तुलना में बहुत अधिक सुविधाजनक है:
समतल और पक्के रास्ते: बनारस के घाटों पर 80 से 120 खड़ी और फिसलन भरी सीढ़ियां हैं, जबकि सारनाथ पूरी तरह समतल और सीढ़ी-रहित है।
व्हीलचेयर सुलभता: मूलागंध कुटी विहार के मुख्य द्वार पर रैंप बना हुआ है। व्हीलचेयर से पूरा प्रांगण और मुख्य हॉल आसानी से देखा जा सकता है।
निकटतम पार्किंग: गाड़ियाँ सारनाथ टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स पार्किंग में रुकती हैं, जो मुख्य मंदिर द्वार से मात्र 200 मीटर की समतल दूरी पर है।
जूते-चप्पल व मोजे: मंदिर में प्रवेश से पूर्व जूते बाहर स्टैंड पर उतारने होते हैं। नवंबर के अंत में फर्श दिन में सामान्य रहता है, लेकिन वरिष्ठ नागरिकों हेतु मोटे सूती या ऊनी मोजे पहनना आरामदायक रहता है।
पहनावा: कंधे और घुटने ढके हुए शालीन वस्त्र पहनें। सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनना बौद्ध परंपरा में आदर का प्रतीक माना जाता है।
सात्विक भोजन: संग्रहालय चौराहे के पास वैशाली रेस्टोरेंट और थाई मंदिर के समीप बोधी कैफे में शुद्ध शाकाहारी भोजन मिलता है। सुबह विहार प्रांगण में निःशुल्क खीर व मिष्ठान प्रसाद भी बंटता है।
पारदर्शी फिक्स्ड वाहन किराया तालिका (नो-सर्ज गारंटी)
24 नवंबर को देव दीपावली के कारण स्थानीय ऑटो और प्राइवेट गाड़ियां मनमाना किराया वसूलती हैं। Kashi Taxi पर ड्राइवर प्रतीक्षा सहित पूर्व-निर्धारित फिक्स्ड दरें:
वाहन श्रेणी
मॉडल उदाहरण
क्षमता
सारनाथ राउंड ट्रिप (4–5 घंटे इंतजार शामिल)
सारनाथ + फुल डे सिटी टूर (8 घंटे / 80 किमी)
एयरपोर्ट ⇄ सारनाथ (NH-31 बाईपास)
एसी सेडान
डिजायर / इटिओस
4 व्यक्ति + 2 बैग
₹1,700
₹2,499
₹899
एसी कॉम्पैक्ट SUV
मारुति अर्टिगा
6 व्यक्ति + 3 बैग
₹2,400
₹2,800
₹1,299
प्रीमियम SUV
टोयोटा इनोवा
6 व्यक्ति + 4 बैग
₹2,800
₹3,200
₹1,500
लक्जरी MPV
इनोवा क्रिस्टा
6/7 व्यक्ति + 4 बैग
₹3,200
₹3,800
₹1,800
महाराजा टेम्पो
फ़ोर्स 12-सीटर
11 व्यक्ति + लगेज
₹3,200
₹3,800
₹2,200
एग्जीक्यूटिव टेम्पो
फ़ोर्स 17-सीटर
16 व्यक्ति + लगेज
₹3,800
₹4,250
₹2,500
मिनी कोच
फ़ोर्स 26-सीटर
25 व्यक्ति + लगेज
₹4,500
₹5,200
₹3,200
लक्जरी कोच
फ़ोर्स अर्बानिया
12/16 लक्जरी सीटें
₹5,000
₹5,800
₹3,500
किराया नियम: इसमें एसी गाड़ी, ड्राइवर भत्ता, ईंधन और टोल शामिल हैं। सारनाथ टूरिस्ट पार्किंग की म्युनिसिपल पर्ची (₹50–₹100) वास्तविक रसीद पर देय होती है। अग्रिम बुकिंग पर कोई त्योहारी पीक सर्ज नहीं लिया जाता।
एक दिवसीय आदर्श यात्रा कार्यक्रम (24 नवंबर 2026)
सुबह 07:30 – 08:15: होटल से पूर्व-आरक्षित कैब द्वारा सारनाथ प्रस्थान (पांडेयपुर-आशापुर होकर 35 मिनट)।
सुबह 08:15 – 09:30: मूलागंध कुटी विहार में प्रवेश; भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थि धातु के दर्शन, कमल पुष्प अर्पण व कोसेत्सु नोसू के भित्तिचित्रों का अवलोकन।
सुबह 09:30 – 10:45: पावन बोधि वृक्ष के दर्शन, परिक्रमा और संलग्न पुरातत्व पार्क में 5वीं सदी के धमेख स्तूप व अशोक स्तंभ अवशेषों का भ्रमण।
सुबह 10:45 – 11:45: निकटवर्ती थाई मंदिर (80 फीट विशाल बुद्ध प्रतिमा) और तिब्बती मठ का भ्रमण।
दोपहर 12:00 – 12:45: बोधी कैफे या वैशाली रेस्टोरेंट में शुद्ध शाकाहारी दोपहर का भोजन।
दोपहर 01:00 – 01:30: मूलागंध कुटी विहार के बाहर हाथी शोभायात्रा का शुभारंभ दर्शन।
दोपहर 01:30 बजे सटीक: अपनी प्रतीक्षारत कैब में बैठकर आउटर रिंग रोड से सीधे नमो घाट प्रस्थान।
दोपहर 02:30 – 04:30: नमो घाट पर सुरक्षित आगमन, विस्तृत प्रोमेनेड पर चहलकदमी व पूर्व-आरक्षित नाव पर सवार होना।
शाम 05:15 – 08:30: नमो घाट से अस्सी घाट तक 84 घाटों पर 15 लाख प्रज्वलित दीयों और दशाश्वमेध घाट की भव्य महाआरती का गंगा की शांत लहरों से नाव द्वारा अद्भुत दर्शन।
🪷 सारनाथ बुद्ध अस्थि धातु दर्शन: फिक्स्ड कैब व देव दीपावली बाईपास व्यवस्था
मूलागंध कुटी विहार के 95वें वार्षिकोत्सव व पवित्र तथागत अस्थि धातु दर्शन (23–25 नवंबर 2026) पर सारनाथ आ रहे हैं? दोपहर बाद देव दीपावली के भीषण जाम व नो-व्हीकल जोन में फंसने से बचें। हम सारनाथ गेट पर समर्पित ड्राइवर इंतजार सहित राउंड ट्रिप कैब, एयरपोर्ट/मठ ट्रांसफर और नमो घाट हेतु सीधा बाईपास ड्रॉप उपलब्ध कराते हैं।
₹1,700 फिक्स्ड राउंड ट्रिप सेडान (डिजायर) — सारनाथ में 4–5 घंटे पक्का इंतजार शामिल
परिवार व तीर्थयात्रियों हेतु अर्टिगा (₹2,400) व इनोवा क्रिस्टा (₹3,200)
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध प्रतिनिधिमंडलों हेतु 12 व 17-सीटर टेम्पो ट्रेवलर
दोपहर में देव दीपावली नाव पकड़ने हेतु नमो घाट का सीधा सुगम बाईपास ड्रॉप
🪷 4–5 घंटे समर्पित सारनाथ इंतजार·⏳ नमो घाट सीधा सुगम बाईपास·🚐 ग्रुप टेम्पो व बौद्ध प्रतिनिधिमंडल गाड़ियां·🛡️ लिखित में तय फिक्स्ड किराया
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सारनाथ में भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थि धातु के दर्शन कब होते हैं?
सारनाथ के मूलागंध कुटी विहार में भगवान बुद्ध के दुर्लभ अस्थि धातु के दर्शन कार्तिक पूर्णिमा, मंगलवार, 24 नवंबर 2026 को सुबह 08:00 बजे से 11:30 बजे तक गर्भगृह में होते हैं।
क्या अस्थि धातु दर्शन के लिए कोई टिकट या पास लगता है?
नहीं। महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित यह दर्शन पूर्णतः निःशुल्क है। कोई वीआईपी पास या टिकट नहीं बिकता। मुख्य द्वार से श्रद्धालु कतारबद्ध होकर दर्शन करते हैं।
सारनाथ में रखी बुद्ध अस्थि धातु का ऐतिहासिक प्रमाण क्या है?
यह वास्तविक शारीरिक अवशेष हैं जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा तक्षशिला के धर्मराजिका स्तूप (1913–14) और नागार्जुनकोंडा (1927–28) से मिले थे। नवंबर 1931 में ब्रिटिश सरकार ने इसे मूलागंध कुटी विहार में स्थाई रूप से स्थापित करने हेतु महाबोधि सोसाइटी को सौंपा था।
क्या 24 नवंबर 2026 को सारनाथ दर्शन और देव दीपावली दोनों एक साथ किए जा सकते हैं?
हाँ। सुबह 08:00 से 11:30 बजे के बीच सारनाथ में धातु दर्शन करें, दोपहर 01:00 बजे शोभायात्रा देखें और दोपहर 01:30 बजे तक सारनाथ से निकल जाएं। पूर्व-आरक्षित कैब से रिंग रोड होकर सीधे नमो घाट पहुंचें, जिससे शहर के नो-व्हीकल जोन के जाम से बचकर आसानी से देव दीपावली नाव पकड़ी जा सके।
सारनाथ में गाड़ियां कहाँ तक जा सकती हैं?
गाड़ियां सारनाथ टूरिस्ट कॉम्प्लेक्स व डियर पार्क पार्किंग तक जाती हैं, जहाँ से मंदिर केवल 200 मीटर समतल दूरी पर है। यह पूरा मार्ग वरिष्ठ नागरिकों और व्हीलचेयर हेतु सुगम है।
कार्तिक पूर्णिमा की शाम को सारनाथ में क्या होता है?
शाम 05:30 से 08:30 बजे तक बोधि वृक्ष प्रांगण और मूलागंध कुटी विहार में भव्य बौद्ध दीपोत्सव होता है। भिक्षुओं द्वारा हजारों मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं और पालि परित्राण पाठ होता है, जो घाटों की भारी भीड़ से दूर एक परम शांत आध्यात्मिक विकल्प प्रदान करता है।