पहला सीआईआई बनारस बिनाले 2026 शुक्रवार, 27 नवंबर से गुरुवार, 31 दिसंबर 2026 तक आयोजित हो रहा है। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII), काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), संस्कृति मंत्रालय और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त तत्वावधान में होने वाला यह 35-दिवसीय आयोजन पूरे शहर को एक जीवंत सांस्कृतिक मंच में बदल देगा।
सामान्य कला प्रदर्शनियों की तरह इसे किसी बंद गैलरी तक सीमित नहीं रखा गया है। भारत कला भवन के दुर्लभ ऐतिहासिक संग्रह से लेकर चेत सिंह घाट के बलुआ पत्थरों और सराय मोहाना के पारंपरिक हथकरघा करघों तक, पूरी काशी "KASHI / LIGHT – City as Sensorium" (काशी / प्रकाश: संवेदी अनुभव के रूप में नगर) थीम पर कला और विचार का जीवंत केंद्र बनेगी।
यदि आप इस आयोजन में शामिल होने के लिए वाराणसी आ रहे हैं, तो शहर के फैलाव को समझना बहुत आवश्यक है। बीएचयू कैंट रेलवे स्टेशन से 10 किमी दक्षिण में है, जबकि बुनकर बस्तियां 15 किमी उत्तर में। इस गाइड में तारीखें, प्रमुख स्थल, ठहरने के विकल्प, वाहन व्यवस्था और सर्दियों के मौसम से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां दी गई हैं।
एक नज़र में: बिनाले से जुड़े मुख्य तथ्य
विवरण
वर्तमान आधिकारिक स्थिति
आधिकारिक तारीखें
27 नवंबर – 31 दिसंबर 2026 (35 लगातार दिन)
उद्घाटन सप्ताहांत
27–29 नवंबर 2026 (उद्घाटन समारोह, मुख्य संगोष्ठियां व आर्ट वॉक)
क्यूरेटोरियल थीम
"KASHI / LIGHT – City as Sensorium"
मुख्य क्यूरेटर
गायत्री सिन्हा (प्रसिद्ध कला समीक्षक व क्यूरेटर)
वस्त्र व शिल्प क्यूरेटर
प्रमोद कुमार केजी (प्रबंध निदेशक, एका आर्काइविंग)
संग्रह व परंपरा क्यूरेटर
अंजन चक्रवर्ती (कला इतिहासकार व ज्ञान प्रवाह सहयोगी)
मुख्य संस्थागत स्थल
भारत कला भवन (BHU परिसर) व ज्ञान प्रवाह (सामने घाट)
खुले सार्वजनिक स्थल
अस्सी घाट, चेत सिंह घाट, मान महल आभासी संग्रहालय, सराय मोहाना
प्रवेश शुल्क नीति
सार्वजनिक व नदी तट स्थलों पर निःशुल्क प्रवेश; संग्रहालयों में सामान्य टिकट
हजारों वर्षों से काशी तीर्थयात्रियों, दार्शनिकों और संगीतज्ञों की तपोभूमि रही है। इस बिनाले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह प्राचीन परंपराओं और आधुनिक कलात्मक दृष्टिकोण के बीच एक सीधा संवाद स्थापित करता है।
मुख्य क्यूरेटर गायत्री सिन्हा के अनुसार, यह आयोजन काशी और प्रकाश (Luminosity) के गहरे संबंध को उजागर करता है—गंगा की सुबह की धुंध से छनती धूप, शाम की महाआरती की ज्वाला और बनारसी साड़ियों के ताने-बाने में चमकती जरी। बीएचयू का भारत कला भवन अपने 1,00,000 से अधिक दुर्लभ लघु चित्रों, मुग़लकालीन वस्त्रों और प्राचीन मूर्तियों के संग्रह को आधुनिक कलाकारों के काम के साथ प्रस्तुत कर रहा है।
वहीं प्रमोद कुमार केजी के निर्देशन में सराय मोहाना और शहर के बुनकर केंद्रों में पारंपरिक कढ़ुआ व तनछोई बुनाई की जीवित कला को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जा रहा है।
आयोजन स्थलों का नक्शा और पहुंचने का तरीका
आयोजन स्थल शहर के चार अलग-अलग हिस्सों में बंटे हैं। इनकी भौगोलिक स्थिति जानकर आप जाम और थकान से बच सकते हैं:
[बाबतपुर एयरपोर्ट (VNS)]
│ 26 किमी
▼
[सराय मोहाना बुनकर] ◄─── [कैंट / रेलवे स्टेशन] ───► [पुराना शहर / घाट]
(उत्तर-पूर्व) │ 10 किमी (पैदल क्षेत्र)
▼
[बीएचयू / लंका]
(भारत कला भवन)
│ 2 किमी
▼
[ज्ञान प्रवाह]
(सामने घाट)
1. ज़ोन 1: काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) व भारत कला भवन
क्या होगा यहां: मुख्य इनडोर चित्रकला प्रदर्शनियां, छात्र दीर्घाएं, अकादमिक परिचर्चाएं और व्याख्यान।
स्थान: बीएचयू परिसर में अर्ध-वृत्ताकार मार्ग पर, लंका मुख्य द्वार से लगभग 1.2 किमी अंदर।
वाहन पहुंच: कार और टैक्सियां लंका गेट या हैदराबाद गेट से सीधे परिसर में प्रवेश कर सकती हैं। संग्रहालय के ठीक बाहर पक्का पार्किंग स्थल है।
बुजुर्गों के लिए सुविधा: पूरी तरह सपाट जमीन और ग्राउंड फ्लोर पर रैंप उपलब्ध हैं, जिससे बुजुर्गों और व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए यह सबसे आसान स्थल है।
2. ज़ोन 2: ज्ञान प्रवाह (सामने घाट / नगवा)
क्या होगा यहां: सांस्कृतिक शोध गोष्ठियां, पांडुलिपि प्रदर्शनियां और विचार सत्र।
स्थान: लंका से 2 किमी दक्षिण, सामने घाट बाईपास मार्ग पर स्थित प्रतिष्ठित शोध केंद्र।
वाहन पहुंच: मुख्य सड़क से कार द्वारा सीधा प्रवेश। केंद्र के गेट के बाहर गाड़ियां पार्क हो सकती हैं।
3. ज़ोन 3: ऐतिहासिक गंगा तट (अस्सी घाट से चेत सिंह किला व मान महल)
क्या होगा यहां: नदी तट पर बड़ी मूर्तियां, प्रकाश-ध्वनि आधारित कलाकृतियां और सांध्य शास्त्रीय संगीत।
प्रमुख स्थल:
अस्सी घाट: खुला विस्तृत घाट; सुबह का सुगम संगीत और सार्वजनिक संवाद।
चेत सिंह घाट: 18वीं सदी का ऐतिहासिक बलुआ पत्थर का दुर्ग, जहां शाम को प्रकाश व संगीत प्रस्तुतियां होंगी।
मान महल वेधशाला: राजा मानसिंह द्वारा निर्मित वेधशाला और एएसआई आभासी संग्रहालय।
वाहन पहुंच: पूरी तरह पैदल क्षेत्र। टैक्सियां अस्सी चौराहे, बेनियाबाग या गिरजाघर पर ड्रॉप करती हैं, जहां से 500 से 800 मीटर पैदल चलना पड़ता है।
बुजुर्गों हेतु सलाह: अस्सी घाट से पहले से बुक की गई मोटरबोट या बजरे द्वारा चेत सिंह व मान महल पहुंचना सीढ़ियों की चढ़ाई से बचने का सबसे सुगम उपाय है।
35-दिवसीय बनारस बिनाले (27 नवंबर – 31 दिसंबर 2026) में भाग ले रहे हैं? भारत कला भवन (BHU), ज्ञान प्रवाह, बुनकर बस्तियों और गंगा घाटों तक फैले इस भव्य कला उत्सव में आवागमन हेतु विश्वसनीय वाहन आवश्यक है। हम फिक्स्ड एयरपोर्ट/स्टेशन ट्रांसफर, 8 घंटे/80 किमी मल्टी-वेन्यू डिस्पोजल कैब, लंका/बीएचयू गेट ड्रॉप और कला प्रतिनिधिमंडलों हेतु लग्जरी गाड़ियां (क्रिस्टा, अर्बानिया, टेम्पो ट्रेवलर) उपलब्ध कराते हैं।
🎨 मल्टी-वेन्यू डिस्पोजल कैब·🏛️ बीएचयू व भारत कला भवन ड्रॉप·🚐 ग्रुप व डेलिगेशन गाड़ियां·🛡️ लिखित में तय फिक्स्ड किराया
कहां ठहरें: तीन प्रमुख क्षेत्रों की तुलना
रुकने की जगह चुनते समय यह तय करें कि आपकी प्राथमिकता बिनाले के पास रहना है, 5-स्टार होटल की लग्जरी चाहिए या पारंपरिक घाटों का माहौल:
क्षेत्र
बिनाले से दूरी
फायदे
सीमाएं
किसके लिए उपयुक्त
लंका / अस्सी / रवींद्रपुरी
निकटतम (बीएचयू व अस्सी से 5–10 मिनट)
परिसर व दक्षिणी घाटों तक पैदल पहुंच; कैफे संस्कृति; आसान कैब उपलब्धता
बड़े 5-स्टार होटल कम; अधिकांश बुटीक होटल व गेस्ट हाउस
कला प्रेमी, शोधार्थी, क्यूरेटर
कैंटोनमेंट (नदेसर / कैंट)
मध्यम (सड़क मार्ग से बीएचयू तक 35–45 मिनट)
बड़े लक्जरी होटल (ताज गंगेज, रेडिसन); खुला हरा-भरा परिसर; एयरपोर्ट से निकटता
बीएचयू पहुंचने के लिए रोजाना 10–12 किमी का शहर का ट्रैफिक
कॉरपोरेट प्रतिनिधिमंडल, वीआईपी अतिथि
पुराने शहर के घाट (दशाश्वमेध)
दूर (बीएचयू तक 40–50 मिनट पैदल व ऑटो)
काशी विश्वनाथ मंदिर और गंगा आरती के बिल्कुल नजदीक
नो-व्हीकल जोन; गलियों में सामान पैदल ले जाना; दैनिक सफर कठिन
धार्मिक तीर्थयात्री व सामान्य पर्यटक
शहर में आवागमन: मल्टी-वेन्यू ट्रांसपोर्ट की हकीकत
पहली बार बनारस आने वाले कई लोग सोचते हैं कि वे मौके पर ही ऐप-कैब या ऑटो कर लेंगे। लेकिन जमीनी हकीकत अलग है:
ऑटो का मनमाना किराया: लंका या गोदौलिया पर ऑटो चालक अक्सर मनमाना किराया मांगते हैं और सराय मोहाना जैसे उत्तरी गांवों में जाने से मना कर देते हैं।
ऐप-कैब कैंसिलेशन: जाम और संकरी गलियों के कारण लंका और गोदौलिया के आसपास ओला/उबर के ड्राइवर अक्सर बुकिंग कैंसिल कर देते हैं।
बिखरा हुआ कार्यक्रम: यदि सुबह 11 बजे भारत कला भवन, दोपहर 2:30 बजे ज्ञान प्रवाह और शाम को चेत सिंह घाट जाना हो, तो बार-बार सवारी ढूंढना समय बर्बाद करता है।
व्यावहारिक समाधान: पहले से 8 घंटे / 80 किमी की फुल-डे डिस्पोजल कैब बुक कर लें। आपकी गाड़ी पार्किंग में इंतजार करती है और आप बिना तनाव के अपने पूरे दिन का शेड्यूल पूरा कर सकते हैं।
बिनाले यात्रियों हेतु तय फिक्स्ड वाहन किराया
यह सारा किराया अधिकृत प्राइसिंग इंजन के अनुसार पूरी तरह पारदर्शी और फिक्स्ड है, जिसमें कोई पीक या हॉलिडे सर्ज नहीं जोड़ा जाता:
यात्रा का प्रकार
AC सेडान (डिजायर)
AC SUV (अर्टिगा)
इनोवा क्रिस्टा
17-सीटर टेम्पो
एयरपोर्ट ⇄ होटल ट्रांसफर
₹899
₹1,299
₹1,800
₹2,500
रेलवे स्टेशन ⇄ होटल
₹790
₹1,050
₹1,650
₹2,150
हाफ-डे डिस्पोजल (4 घंटे / 40 किमी)
₹1,600
₹2,000
₹2,800
₹3,200
फुल-डे डिस्पोजल (8 घंटे / 80 किमी)
₹2,499
₹2,800
₹3,800
₹4,250
पूरा दिन विस्तार (12 घंटे / 120 किमी)
₹3,200
₹3,900
₹5,200
₹5,500
सराय मोहाना बुनकर क्लस्टर टूर
₹2,000
₹2,600
₹3,400
₹4,000
शामिल सुविधाएं: वातानुकूलित वाहन, अनुभवी चालक, ईंधन, बीएचयू/होटल पार्किंग और एयरपोर्ट पिकअप पर 45 मिनट तक कोहरे की वजह से फ्लाइट देरी का निःशुल्क इंतजार।
बनारस बिनाले हेतु 3-दिवसीय सुगम यात्रा योजना
दिन 1: विश्वविद्यालय व संग्रहालय केंद्र
सुबह 10:30 – दोपहर 01:30: बीएचयू स्थित भारत कला भवन पहुंचें। लघु चित्रों, टेराकोटा संग्रह और आधुनिक कलाकृतियों का अवलोकन करें।
दोपहर 01:30 – 02:45: लंका गेट के पास भोजन व विश्राम।
दोपहर 03:00 – शाम 05:00: सामने घाट स्थित ज्ञान प्रवाह केंद्र जाकर अकादमिक चर्चाओं व पांडुलिपियों को देखें।
शाम 05:30 – 07:00: अस्सी घाट आकर शाम की सांस्कृतिक हलचल और गंगा किनारे चाय का आनंद लें।
दिन 2: जीवित हथकरघा व ऐतिहासिक दुर्ग
सुबह 09:30 – दोपहर 01:00: कैब द्वारा सराय मोहाना बुनकर गांव जाएं। पारंपरिक करघों पर कढ़ुआ बनारसी साड़ियों की बुनाई को करीब से देखें।
दोपहर 01:30 – 03:00: शहर के केंद्र में दोपहर का भोजन।
दोपहर 03:30 – शाम 05:30: मान मंदिर घाट पर मान महल वेधशाला और आभासी संग्रहालय का भ्रमण।
शाम 05:45 – 07:30: चेत सिंह घाट पर ऐतिहासिक दुर्ग के बैकड्रॉप में लाइट इंस्टॉलेशन और संगीत प्रस्तुति देखें।
दिन 3: गंगा दर्शन, स्वाद व सारनाथ
सुबह 06:30 – 08:30: अस्सी से पंचगंगा घाट तक सुबह की नाव यात्रा।
सुबह 09:00 – 11:00: चौक व ठठेरी बाजार में कचौड़ी-जलेबी और सर्दियों का मशहूर बनारसी मलइयो।
दोपहर 12:00 – शाम 04:30: सारनाथ (12 किमी उत्तर) का दौरा—धमेख स्तूप, मूलगंध कुटी विहार और पुरातात्विक संग्रहालय।
शाम 06:30: कैंटोनमेंट के हेरिटेज रेस्तरां में विदाई डिनर।
35-दिवसीय बनारस बिनाले (27 नवंबर – 31 दिसंबर 2026) में भाग ले रहे हैं? भारत कला भवन (BHU), ज्ञान प्रवाह, बुनकर बस्तियों और गंगा घाटों तक फैले इस भव्य कला उत्सव में आवागमन हेतु विश्वसनीय वाहन आवश्यक है। हम फिक्स्ड एयरपोर्ट/स्टेशन ट्रांसफर, 8 घंटे/80 किमी मल्टी-वेन्यू डिस्पोजल कैब, लंका/बीएचयू गेट ड्रॉप और कला प्रतिनिधिमंडलों हेतु लग्जरी गाड़ियां (क्रिस्टा, अर्बानिया, टेम्पो ट्रेवलर) उपलब्ध कराते हैं।
🎨 मल्टी-वेन्यू डिस्पोजल कैब·🏛️ बीएचयू व भारत कला भवन ड्रॉप·🚐 ग्रुप व डेलिगेशन गाड़ियां·🛡️ लिखित में तय फिक्स्ड किराया
शीतकालीन कोहरा व मौसम से जुड़ी सावधानियां
यदि आपकी यात्रा 15 दिसंबर से 31 दिसंबर 2026 के बीच है, तो इन बातों का ध्यान रखें:
तापमान में गिरावट: दिन का तापमान 22°C से 24°C रहता है जो धूप में बहुत सुखद है, लेकिन शाम ढलते ही पारा 8°C से 11°C तक गिर जाता है। गर्म स्वेटर, जैकेट और ऊनी मफलर साथ रखें।
एयरपोर्ट पर कोहरे का असर: लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (बाबतपुर) पर सुबह दृश्यता 100 मीटर से कम हो जाती है। सुबह 10:30 बजे से पहले की उड़ानों में 1 से 3 घंटे की देरी आम है। दोपहर 11:30 से 3:30 बजे के बीच की फ्लाइट बुक करें।
ट्रेन में देरी: उत्तर भारत से आने वाली वंदे भारत, शिव गंगा या पुरुषोत्तम एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें घने कोहरे में 2 से 4 घंटे लेट हो सकती हैं। होटल से निकलने से पहले लाइव रनिंग स्टेटस जरूर जांचें।
बुजुर्गों व पारिवारिक समूहों हेतु विशेष सलाह
बीएचयू परिसर में आवागमन: बीएचयू 1,300 एकड़ में फैला है। लंका गेट से भारत कला भवन तक बुजुर्गों का पैदल चलना थका देने वाला हो सकता है। सुनिश्चित करें कि आपकी कैब परिसर के अंदर सीधे संग्रहालय तक जाए।
घाटों पर फिसलन: चेत सिंह घाट और मान मंदिर घाट की पत्थर की सीढ़ियों पर सुबह की ओस से फिसलन हो सकती है। अच्छी रबर ग्रिप वाले आरामदायक जूते पहनें।
प्रतिनिधिमंडल व ग्रुप ट्रेवल: 8 से 17 सदस्यों के दल के लिए अलग-अलग छोटी गाड़ियां करने से समन्वय बिगड़ता है। एक 17-सीटर टेम्पो ट्रेवलर या फोर्स अर्बानिया पूरे समूह को एक साथ सुगमता से ले जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सीआईआई बनारस बिनाले 2026 कब से कब तक है?
पहला सीआईआई बनारस बिनाले 27 नवंबर से 31 दिसंबर 2026 तक कुल 35 दिनों के लिए आयोजित हो रहा है। इसके शुरुआती सप्ताहांत में उद्घाटन सत्र, संगोष्ठियां और हेरिटेज वॉक होंगी, जबकि प्रदर्शनियां पूरे दिसंबर माह खुली रहेंगी।
बनारस बिनाले का आयोजन कहां-कहां हो रहा है?
यह पूरे शहर में फैला नगर-व्यापी कला उत्सव है। इसके मुख्य केंद्र काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का भारत कला भवन, सामने घाट स्थित ज्ञान प्रवाह, अस्सी व चेत सिंह घाट के गंगा तट और सराय मोहाना की बुनकर बस्तियां हैं।
क्या बनारस बिनाले में प्रवेश के लिए टिकट या रजिस्ट्रेशन जरूरी है?
घाटों और सार्वजनिक स्थलों पर कला प्रदर्शनियों का दीदार पूरी तरह निःशुल्क है। भारत कला भवन जैसे संग्रहालयों में सामान्य संस्थागत टिकट नियम लागू होंगे। विशेष संगोष्ठियों और कार्यशालाओं के लिए आधिकारिक पोर्टल पर पूर्व-पंजीकरण की सलाह दी जाती है।
बिनाले के दौरान रुकने के लिए कौन सा क्षेत्र सबसे बेहतर है?
लंका, अस्सी और रवींद्रपुरी रुकने के लिए सबसे सुविधाजनक हैं क्योंकि यहां से बीएचयू और दक्षिणी घाट 5 से 10 मिनट की दूरी पर हैं। यदि आप 5-स्टार लक्जरी होटल चाहते हैं, तो कैंटोनमेंट में रुकें और परिसर तक 35 मिनट का सफर तय करें।
विभिन्न आयोजन स्थलों के बीच आवागमन कैसे करें?
बिनाले के आयोजन स्थल शहर में 10 से 15 किमी की दूरी पर फैले हैं। बार-बार ऑटो रिक्शा से मोलभाव करने के बजाय 8 घंटे / 80 किमी की समर्पित फुल-डे डिस्पोजल कैब लेना सबसे व्यावहारिक रहता है।
दिसंबर के कोहरे से यात्रा पर क्या असर पड़ता है?
15 दिसंबर के बाद बाबतपुर एयरपोर्ट और वाराणसी के रेलवे स्टेशनों पर सुबह घना कोहरा रहता है, जिससे सुबह 10:30 बजे से पहले की उड़ानों में 1 से 3 घंटे की देरी हो सकती है। दोपहर 11:30 से 3:30 बजे के बीच की फ्लाइट बुक करना सुरक्षित है।
बिनाले यात्रा हेतु वाहन व व्यवस्था बुक करें
विश्वसनीय एयरपोर्ट पिकअप, आयोजन स्थलों के बीच 8 घंटे की समर्पित फुल-डे कैब या सांस्कृतिक प्रतिनिधिमंडलों हेतु टेम्पो ट्रेवलर की आवश्यकता है? अपनी तारीख, पिकअप स्थल और यात्रियों की संख्या के साथ काशी टैक्सी से संपर्क करें और बिना किसी पीक सर्ज के तय फिक्स्ड किराए पर वाहन आरक्षित करें।