वाराणसी में दिवाली 2026: 5-दिवसीय काशी दीपोत्सव, घाट, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त व जमीनी हकीकत
हर साल अक्टूबर के आखिरी हफ्तों में काशी टैक्सी के हमारे कार्यालय में एक जैसा फोन लगातार आता है:
"भैया, हमें दिवाली की रात के लिए होटल और नाव बुक करनी है ताकि घाटों पर जलने वाले वो 15 लाख दीये देख सकें।"
मैं हमेशा फोन पर सबसे पहले यही बात साफ करता हूँ: आप दिवाली और देव दीपावली में भ्रमित हो रहे हैं।
घाटों पर 15 लाख मिट्टी के दीयों की वो विश्वप्रसिद्ध रोशनी 'देव दीपावली' को होती है, जो इस साल कार्तिक पूर्णिमा (मंगलवार, 24 नवंबर 2026) को मनाई जाएगी। यदि आप बड़ी दिवाली की रात (रविवार, 8 नवंबर 2026) यह सोचकर बनारस आते हैं कि पूरे 84 घाटों पर दीपों की अंतहीन चादर बिछी होगी, तो आपकी उम्मीद टूट जाएगी।
लेकिन जैसे ही मैं यह संशय दूर करता हूँ, मैं उन्हें अपनी दूसरी बात बताता हूँ: बनारस में दिवाली का सप्ताह असल में मेरा सबसे पसंदीदा समय है।
यह समय पूरी तरह स्थानीय, आत्मीय और पारंपरिक होता है। इसमें आपको देव दीपावली जैसी 15 लाख लोगों की जानलेवा भगदड़ और धक्का-मुक्की नहीं झेलनी पड़ती। वर्ष में सिर्फ इन्हीं 5 दिनों के लिए मां अन्नपूर्णा का ठोस सोने का गर्भगृह खुलता है, चौक के चौखंभा में सर्दियों की पहली मलाईयो का झाग कुल्हड़ों में घुलता है, दशाश्वमेध घाट की विशेष दीपोत्सव आरती आप शांत नाव पर बैठकर देख सकते हैं, और गंगा पार रेती पर आसमान को रंगीन करती आतिशबाजी का नजारा ले सकते हैं।
मैंने यह दिनवार विवरण इसलिए तैयार किया है ताकि आप जान सकें कि इन 5 दिनों में शहर में क्या होता है, हमारी गाड़ियां आपको कहाँ तक छोड़ सकती हैं, और किस तरह आप बिना किसी परेशानी के इस पावन पर्व का आनंद ले सकते हैं।
1. सबसे बड़ा भ्रम दूर करें: दिवाली बनाम देव दीपावली
होटल या टिकट बुक करने से पहले यह तय कर लें कि आपकी प्राथमिकता क्या है:
विवरण
वाराणसी में दिवाली (बड़ी दिवाली)
देव दीपावली (कार्तिक पूर्णिमा)
2026 की तारीख
रविवार, 8 नवंबर 2026 (कार्तिक अमावस्या)
मंगलवार, 24 नवंबर 2026 (कार्तिक पूर्णिमा)
धार्मिक मान्यता
भगवान राम का अयोध्या आगमन; माता लक्ष्मी व गणेश जी का गृह-प्रवेश पूजन; यम दीपदान; मां अन्नपूर्णा स्वर्ण दर्शन।
भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर का वध; देवताओं का स्वर्ग से उतरकर गंगा तट पर दीपोत्सव मनाना।
घाटों पर दीयों की संख्या
दशाश्वमेध, अस्सी और विभिन्न आश्रमों पर हजारों दीये व दीपदान। पवित्र और शांत माहौल, पर 84 घाटों पर एकमुश्त कतार नहीं।
10 से 15 लाख मिट्टी के दीये सभी 84 पक्के घाटों पर एक साथ प्रज्वलित होते हैं। सरकारी लेजर व भव्य ड्रोन शो।
भीड़ का स्तर
मध्यम से व्यस्त: स्थानीय परिवार, क्षेत्रीय श्रद्धालु और खरीदारी की भीड़। बाज़ारों में चहल-पहल, घाटों पर सामान्य आवाजाही।
अत्यधिक भीषण: घाटों पर 12 से 15 लाख की विशाल भीड़। गोदौलिया और दशाश्वमेध पर पांव रखने की जगह नहीं; मोबाइल नेटवर्क जाम।
मां अन्नपूर्णा स्वर्ण दर्शन
खुला रहता है: ठोस सोने की मूल प्रतिमा व खजाना सिक्का वितरण सिर्फ इन्हीं 5 दिनों (6–11 नवंबर) होता है।
पूरी तरह बंद: प्रथम तल का स्वर्ण गर्भगृह बंद और सील रहता है; केवल भूतल की पीतल प्रतिमा दिखती है।
होटल का किराया व उपलब्धता
सामान्य शीतकालीन दरें (₹2,500 – ₹7,000 प्रति रात)। 2 से 4 सप्ताह पहले आसानी से कमरे उपलब्ध।
पीक हॉलिडे सर्ज: कमरे 3 से 5 गुना महंगे (₹12,000 – ₹35,000 प्रति रात); 2-3 महीने पहले ही फुल।
शाम की नाव का किराया
सामान्य निर्धारित दरें: ₹490 प्रति सीट (शेयरिंग मोटरबोट); ₹1,800 (प्राइवेट पारंपरिक नाव)।
फेस्टिवल सर्ज: बजड़े व मोटरबोट पर ₹3,999 से ₹7,999 प्रति सीट की मनमानी दरें।
किसके लिए सर्वोत्तम है?
बुजुर्गों, बच्चों वाले परिवारों, शांतिपूर्ण मंदिर दर्शन चाहने वालों, और भारी भगदड़ से बचने वाले यात्रियों के लिए।
फोटोग्राफरों, विशाल कार्निवल उत्सव प्रेमियों और महीनों पहले योजना बनाने वाले पर्यटकों के लिए।
यदि आप मां अन्नपूर्णा के स्वर्ण दर्शन, पारंपरिक खरीदारी और बिना जानलेवा भीड़ के काशी दर्शन करना चाहते हैं, तो दिवाली सप्ताह आपके लिए देव दीपावली से कहीं अधिक सुकून भरा विकल्प है।
2. पंचांग तिथियां और 2026 का शुभ पूजन मुहूर्त
मैंने स्थानीय बनारस पंचांग के जानकारों से परामर्श करके 2026 के लिए यह सटीक समय सारणी तैयार की है (वाराणसी अक्षांश-देशांतर: 25.3176° N, 82.9739° E):
पंचगंगा/दशाश्वमेध पर भाई-बहन का पवित्र स्नान; चित्रगुप्त पूजन; मध्यरात्रि में मां अन्नपूर्णा के स्वर्ण कपाट का वर्ष भर हेतु सील होना।
3. काशी में 5 दिनों की दिनवार योजना
दिन 1: धनतेरस व मां अन्नपूर्णा स्वर्ण दर्शन (शुक्रवार, 6 नवंबर 2026)
सुबह (06:00 से 08:00 बजे): सीधे विश्वनाथ गली स्थित श्री काशी अन्नपूर्णा मंदिर पहुँचें। सुबह 5:00 बजे मंदिर के प्रथम तल के लोहे के कपाट खुलते हैं। सीढ़ियां चढ़कर माता की ठोस सोने की प्रतिमा के दर्शन करें, जिनके हाथ में सोने की कलछी और भिक्षा-पात्र सुशोभित रहता है। यहाँ मिलने वाला अन्नपूर्णा खजाना (चांदी का सिक्का व अक्षत) अवश्य प्राप्त करें, जिसे तिजोरी में रखने से कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती।
दोपहर (11:00 से 03:00 बजे): चौक के ठठेरी बाजार में टहलें। यह 300 वर्ष पुरानी गली पीतल के लोटों, तांबे की थालियों और पूजा बर्तनों की खरीदारी से गूंजती है। यदि बर्तन न भी खरीदने हों, तो भी यहाँ की बनारसी रौनक देखने लायक होती है।
गोधूलि वेला (शाम 05:35 बजे): बनारसी घरों के मुख्य द्वार पर कच्चे मिट्टी के चौमुखी दीये में सरसों का तेल भरकर दक्षिण दिशा की ओर यम दीपम जलाया जाता है, ताकि परिवार को अकाल मृत्यु से सुरक्षा मिले।
दिन 2: छोटी दिवाली व संकट मोचन हनुमान जयंती (शनिवार, 7 नवंबर 2026)
ब्रह्म मुहूर्त (सुबह 05:00 से 06:30 बजे): अस्सी या दशाश्वमेध घाट पर अभ्यंग स्नान करें। श्रद्धालु तिल के तेल और उबटन से शरीर को मलकर गंगा में डुबकी लगाते हैं।
शाम: घर की चौखटों और जल स्रोतों पर 14 छोटे मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं।
मध्यरात्रि (रात 11:30 से 01:00 बजे): उत्तर भारत में दिवाली की पूर्व संध्या पर हनुमान जयंती मनाई जाती है। संकट मोचन मंदिर में रात के समय भारी भीड़ उमड़ती है, जहाँ सिंदूर व चांदी के वर्क से सजे मारुति नंदन के सामने सुंदरकांड का अखंड पाठ गूंजता है।
दिन 3: बड़ी दिवाली (रविवार, 8 नवंबर 2026)
सुबह (06:30 से 08:30 बजे): काशी विश्वनाथ धाम में दर्शन करें। दिवाली की सुबह ज्योतिर्लिंग को गेंदे व कमल के फूलों से भव्य रूप से सजाया जाता है। बांसफाटक गेट 4 से सुबह जल्दी प्रवेश करना सबसे सुगम रहता है।
शाम प्रदोष काल (05:30 से 08:00 बजे): गोदौलिया, विश्वनाथ गली और लहुराबीर के बाज़ार शांत हो जाते हैं। व्यापारी अपनी दुकानों के शटर गिराकर बही-खाता पूजन करते हैं और महालक्ष्मी की आरती गाते हैं।
शाम की दीपोत्सव आरती (06:30 बजे): दशाश्वमेध घाट के सामने नाव पर सवार रहें। गंगा सेवा निधि के अर्चक सात विशाल पीतल के दीपकों से भव्य आरती करते हैं। श्रद्धालु नदी में दीपदान करते हैं, जिससे पानी की सतह पर तैरते दीये अद्भुत दिखते हैं।
रेती पर आतिशबाजी: पुरानी गलियों में पटाखे चलाने की जगह नहीं होती, इसलिए स्थानीय नौजवान गंगा पार रेती पर जाकर रॉकेट और पटाखे जलाते हैं। नाव से इसे देखना बेहद सुरक्षित और सुंदर अनुभव होता है।
मध्यरात्रि बंगाली टोला काली पूजा: यदि आपमें उत्साह बाकी है, तो रात 12 बजे के बाद पांडेय घाट और मानमंदिर के पास बंगाली टोला में निकलें। यहाँ ढाक की थाप और शंखध्वनि के बीच पारंपरिक मिट्टी की प्रतिमाओं की निशा पूजा होती है।
दिन 4: गोवर्धन पूजा व शहरभर का अन्नकूट (मंगलवार, 10 नवंबर 2026)
सुबह: बनारस के आंगनों में महिलाएं गाय के ताजे गोबर से 4 से 8 फीट ऊंचे गोवर्धन भगवान की आकृति बनाती हैं, जिन्हें गन्ने और कपास के फूलों से सजाया जाता है।
मध्याह्न 56 भोग (पूर्वाह्न 11:30 से दोपहर 02:00 बजे): काशी विश्वनाथ, मां अन्नपूर्णा मंदिर, चौखंभा के गोपाल मंदिर और इस्कॉन में भगवान को 56 भोग अर्पित किए जाते हैं। शाम को 'लड्डू पर्वत' का प्रसाद भक्तों में बंटता है।
दोपहर बाद अखाड़ा दंगल: तुलसी घाट और स्वामीनाथ अखाड़े पर जाएं, जहाँ मिट्टी के अखाड़े में पारंपरिक कुश्ती दंगल होते हैं।
दिन 5: भाई दूज व अन्नपूर्णा कपाट बंदी (बुधवार, 11 नवंबर 2026)
सुबह: पंचगंगा और दशाश्वमेध घाट पर भाई-बहन का युगल स्नान होता है। मान्यता है कि यम द्वितीया पर बहन के साथ पवित्र जल में स्नान करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है।
दोपहर: कायस्थ समाज अपने घरों में कलम-दवात और नई बहियों का पूजन करके भगवान चित्रगुप्त की वंदना करता है।
मध्यरात्रि: रात ठीक 12:00 बजे मंदिर ट्रस्ट और जिला प्रशासन की उपस्थिति में मां अन्नपूर्णा के स्वर्ण गर्भगृह को अगले एक वर्ष के लिए सील कर दिया जाता है।
🪔 वाराणसी में दीपावली: फिक्स्ड किराया कैब व पेरीमीटर ड्रॉप सहायता
दीपावली सप्ताह (धनतेरस से भाई दूज, 6–11 नवंबर 2026) पर काशी आ रहे हैं? त्योहारों पर मनमाने किराए व बाज़ारों के भीषण जाम से बचें। हम एयरपोर्ट/स्टेशन ट्रांसफर, बेनियाबाग व मैदागिन निकटतम पार्किंग ड्रॉप, वरिष्ठ नागरिकों हेतु स्टैंडबाय कैब और शाम की आरती नाव व्यवस्था बिना किसी पीक सर्ज के उपलब्ध कराते हैं।
🪔 बेनियाबाग व मैदागिन निकटतम पेरीमीटर ड्रॉप·🚫 बिना किसी पीक हॉलिडे सर्ज के·🛶 शाम की गंगा आरती नाव सहायता·🛡️ लिखित में पहले से तय फिक्स्ड किराया
4. दिवाली की शाम नाव पर क्यों बैठना चाहिए?
दिवाली की शाम (8 नवंबर) को यदि आप दशाश्वमेध घाट की सीढ़ियों पर खड़े होंगे, तो आपको 15,000 से 20,000 लोगों के बीच धक्का-मुक्की सहनी पड़ेगी। सैकड़ों दीपकों की गर्मी और अगरबत्तियों का धुआं भी सीढ़ियों पर जमा हो जाता है।
जब मैं अपने अतिथियों के लिए नाव की व्यवस्था करता हूँ, तो उनका पूरा अनुभव बदल जाता है:
सामने से साफ और शांत दृश्य: घाट से 40-50 मीटर दूर पानी पर खड़ी नाव से सातों अर्चकों की आरती बिल्कुल सीधी और स्पष्ट दिखती है।
गलियों के पटाखों और धुएं से मुक्ति: गलियों में चलने वाले पटाखों के कानफोड़ू धमाकों और बारूद के धुएं से दूर, गंगा के खुले पानी पर शुद्ध ठंडी हवा चलती है और सामने रेती की आतिशबाजी साफ दिखती है।
स्वयं दीपदान करने की सुविधा: हमारे नाविक पत्तों के दोने में मिट्टी के दीये देते हैं, जिन्हें आप सुरक्षित रूप से जल की धारा में प्रवाहित कर सकते हैं।
दिवाली शाम की निर्धारित नाव दरें (कोई हॉलिडे सर्ज नहीं)
साझा मोटरबोट / बजड़ा सीट:₹490 प्रति व्यक्ति (लाइफ जैकेट, 20+ रोशन घाटों का 90 मिनट का भ्रमण, और दशाश्वमेध आरती के सामने 45 मिनट का ठहराव)।
प्राइवेट पारंपरिक चप्पू वाली नाव (1 से 6 सवारी):₹1,800 फिक्स्ड (शांत और परिवार हेतु सुरक्षित)।
प्राइवेट मोटरबोट (15–20 लोगों का समूह):₹3,500 फिक्स्ड।
नाव पर बैठने का सही समय: अस्सी या दशाश्वमेध घाट पर शाम 05:15 से 05:30 बजे तक सवार हो जाएं, ताकि 06:30 बजे आरती शुरू होने से पहले आपकी नाव सही जगह पर लग सके।
🛶 दशाश्वमेध गंगा आरती नाव से देखें — बिना धक्का-मुक्की
घाटों की भीड़ और दलालों से बचें। गंगा की शांत लहरों से सीधे आरती के दर्शन करें: सिंगल सीट ₹490 प्रति सीट · परिवार हेतु प्राइवेट नाव ₹1,800 से।
₹490 प्रति सीट — पानी से लाइव भव्य गंगा आरती व घाट दर्शन
प्राइवेट नाव (1–6 व्यक्ति) ₹1,800 · मोटरबोट ₹3,500
अनुभवी स्थानीय नाविक · सभी यात्रियों के लिए प्रमाणित लाइफ जैकेट
✅ ₹490 सिंगल सीट·🛶 प्राइवेट नाव ₹1,800·🦺 लाइफ जैकेट अनिवार्य·🛡️ घाट पर दलालों से मुक्ति
5. ट्रैफिक का सच और हमारी गाड़ियां आपको कहाँ छोड़ेंगी?
मैं साफ बता दूँ: बनारस की प्राचीन गलियां पैदल चलने वालों और पालकियों के लिए बनी थीं, बड़ी गाड़ियों के लिए नहीं। धनतेरस से दिवाली रात तक (6–8 नवंबर) स्थानीय खरीदारी के कारण सड़कों पर लाखों की भीड़ होती है।
पुलिस पाबंदियां (प्रतिदिन दोपहर 02:00 से रात 11:00 बजे तक)
गोदौलिया से दशाश्वमेध घाट: चारपहिया, ऑटो और ई-रिक्शा पूरी तरह प्रतिबंधित। केवल पैदल आवाजाही।
मैदागिन से चौक होते हुए गोदौलिया: सभी चारपहिया वाहनों के लिए बंद।
लहुराबीर से नई सड़क व बेनियाबाग: शाम के समय यातायात का डायवर्जन।
4 सुरक्षित पेरीमीटर ड्रॉप पॉइंट्स
कोई भी टैक्सी आपको गलियों के भीतर होटल के दरवाजे तक नहीं पहुंचा सकती। जब हमारे ड्राइवर आपको बाबतपुर एयरपोर्ट या रेलवे स्टेशन से लेते हैं, तो वे आपको आपके होटल के सबसे नजदीकी पेरीमीटर पॉइंट पर उतारते हैं:
[ बाबतपुर एयरपोर्ट / कैंट रेलवे स्टेशन ]
│
┌──────────────┴──────────────┐
▼ ▼
[ बेनियाबाग मल्टी-लेवल पार्किंग ] [ मैदागिन टाउन हॉल पार्किंग ]
• 650 मी बांसफाटक होते हुए पैदल • 750 मी चौक होते हुए पैदल
• विश्वनाथ गेट 4 के सबसे नजदीक • विश्वनाथ गेट 1 के सबसे नजदीक
• अन्नपूर्णा मंदिर हेतु उत्तम • ठठेरी बाजार हेतु उत्तम
│ │
▼ ▼
[ गिरजाघर (चर्च) चौराहा ] [ भेलूपुर / सोनारपुरा चौराहा ]
• 700 मी गोदौलिया तक पैदल • 800 मी केदार घाट तक पैदल
• लक्सा रोड के होटलों हेतु • अस्सी व दक्षिणी घाटों हेतु
बेनियाबाग मल्टी-लेवल भूमिगत पार्किंग: मध्य पुराने शहर के होटलों के लिए सबसे बेहतरीन ड्रॉप। यहाँ से बांसफाटक मार्ग होते हुए विश्वनाथ धाम गेट 4 और मां अन्नपूर्णा मंदिर की दूरी केवल 650 मीटर सपाट पैदल है।
मैदागिन टाउन हॉल पार्किंग: यदि आपका प्रवास चौक, ठठेरी बाजार, काल भैरव मंदिर या गेट 1 (ढुंढिराज गणेश) के निकट है, तो यहाँ उतरना सही है।
गिरजाघर चौराहा (लक्सा रोड): गोदौलिया चौराहे से 700 मीटर पहले। लक्सा रोड पर स्थित होटलों के लिए यह सबसे सही जगह है।
भेलूपुर / सोनारपुरा चौराहा: यदि आप अस्सी, केदार, हरिश्चंद्र या शिवाला घाट के पास ठहरे हैं, तो यहाँ उतरें। इससे आप गोदौलिया के भीषण जाम से पूरी तरह बच जाते हैं।
6. बुजुर्गों और बच्चों के साथ यात्रा करने वालों के लिए जरूरी बातें
यदि आपके साथ परिवार के बुजुर्ग या छोटे बच्चे हैं, तो इन व्यावहारिक बातों का ध्यान रखें:
गलियों के धुएं से बचाव: ठठेरी बाजार और विश्वनाथ गली 4 से 8 फीट चौड़ी हैं। बच्चे गलियों में फुलझड़ियां और चरखियां जलाते हैं, जिससे धुआं भर जाता है। यदि किसी को सांस या दमे की परेशानी है, तो हल्का मास्क साथ रखें और शाम के समय खुली हवा में घाटों या नाव पर रहें।
मां अन्नपूर्णा मंदिर की सीढ़ियां: प्रथम तल पर स्थित स्वर्ण प्रतिमा तक पहुंचने के लिए संगमरमर की संकरी सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। हजारों नंगे पांव चलने के कारण सीढ़ियां फिसलनी हो जाती हैं। यहाँ कोई लिफ्ट नहीं है। यदि बुजुर्गों के घुटनों में गंभीर दर्द है, तो उन्हें भूतल के गर्भगृह के ही दर्शन कराएं और चरणामृत लें।
दर्शन का सबसे शांत समय: शाम 05:30 से 08:30 बजे के बीच विश्वनाथ गली में अत्यधिक भीड़ होती है। मंदिर दर्शन हेतु सबसे शांत समय सुबह 06:00 से 07:30 बजे या दोपहर में 02:00 से 03:30 बजे के बीच का है।
जूते-चप्पल की व्यवस्था: मंदिरों में बार-बार जूते उतारने पड़ते हैं। फीते वाले जूतों की जगह आसानी से उतरने वाली चप्पलें पहनें और एक कपड़े का झोला साथ रखें।
7. बनारसी खान-पान और मिठाइयों के प्रामाणिक ठिकाने
दिवाली का सप्ताह बनारस के स्वाद को चखने का सबसे बेहतरीन मौसम है:
पारंपरिक मिठाइयों के ठिकाने:
क्षीर सागर (गोदौलिया व सिगरा): शुद्ध दूध के ताजे छेने की मिठाइयों, काजू कतली और रसमलाई के लिए शहर का सबसे भरोसेमंद नाम।
राजबंधु (कचौड़ी गली, चौक): 160 वर्ष पुरानी दुकान, जो अपनी 'मलाई गिलौरी' के लिए जानी जाती है।
श्री राम भंडार (ठठेरी बाजार): सुबह के नाश्ते के लिए मेरी पसंदीदा जगह—हींग की खस्ता कचौड़ी, तीखी कद्दू-आलू की सब्जी और गरमा-गरम जलेबी।
सर्दियों की पहली मलाईयो:
नवंबर की शुरुआत के साथ बनारस में मलाईयो मिलने लगती है। कच्चे दूध को रात भर खुले आसमान के नीचे ओस की बूंदों में रखा जाता है और सुबह मथकर केसरिया झाग बनाया जाता है। सुबह 06:30 से 10:30 बजे के बीच चौखंभा या गोपाल मंदिर की गलियों में इसका कुल्हड़ अवश्य चखें।
काशी चाट भंडार (गोदौलिया):
शाम को देसी घी में छनती टमाटर चाट, जिस पर भुना जीरा, हींग और हल्की चाशनी डालकर मिट्टी के कुल्हड़ में परोसा जाता है।
8. काशी टैक्सी की अधिकृत दरें (शून्य हॉलिडे सर्ज)
त्योहारों के दिनों में ऐप कैब और सड़क के ऑटो मनमाना किराया मांगते हैं। काशी टैक्सी में हम आपको लिखित बुकिंग पर्ची, स्थानीय अनुभवी चालक और बिना किसी त्योहारी बढ़ोतरी के पारदर्शी सेवाएं देते हैं।
फिक्स्ड रेट कार्ड (दिवाली सप्ताह 2026)
सेवा का प्रकार
गाड़ी का मॉडल
क्षमता
निर्धारित किराया (₹)
मार्ग व सुविधाएं
एयरपोर्ट पिकअप / ड्रॉप
मारुति डिजायर (सेडान)
4 सवारी, 2 बैग
₹899
बाबतपुर एयरपोर्ट से बेनियाबाग या मैदागिन पार्किंग तक, टोल शामिल
एयरपोर्ट पिकअप / ड्रॉप
मारुति अर्टिगा (SUV)
6 सवारी, 3 बैग
₹1,299
परिवार हेतु आरामदायक, लगेज स्पेस, नजदीकी पेरीमीटर ड्रॉप
एयरपोर्ट पिकअप / ड्रॉप
टोयोटा इनोवा
6 सवारी, 4 बैग
₹1,500
बुजुर्गों के अनुकूल सस्पेंशन, लगेज बूट स्पेस, पार्किंग शुल्क शामिल
8 घंटे / 80 किमी: पूरे दिन का दर्शन, मंदिर के बाहर एसी वेटिंग शामिल
फुल डे लोकल दर्शन
17-सीटर टेम्पो ट्रैवलर
16 सवारी
₹4,250
8 घंटे / 80 किमी: बड़े परिवार का टूर, लिखित कोटेशन, कोई गुप्त शुल्क नहीं
दिवाली शाम नौकायन
शेयरिंग मोटरबोट / बजड़ा
1 सवारी
₹490
90 मिनट का सफर, लाइफ जैकेट, दशाश्वमेध आरती के सामने ठहराव
दिवाली शाम नौकायन
प्राइवेट चप्पू नाव
6 सवारी तक
₹1,800
निजी नाव, केवल आपका परिवार, रेती की आतिशबाजी व दीपदान का नजारा
🚕 एक ही आराम भरे दिन में सभी घाट व मंदिर
फिक्स्ड किराए वाली फुल-डे वाराणसी सिटी टूर कैब — लोकल ड्राइवर जो वन-वे गलियां, पार्किंग व दर्शन समय जानता है, ताकि आप काशी विश्वनाथ, घाट, सारनाथ हर जगह बिना मोलभाव घूम सकें।
✅ फिक्स्ड किराया, ड्राइवर रुकेगा·🕉️ मंदिर + घाट + सारनाथ·❄️ AC · टोल · पार्किंग शामिल·🛡️ वेरिफाइड लोकल ड्राइवर
9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वाराणसी में दीपावली 2026 कब मनाई जाएगी?
वाराणसी में 5 दिवसीय दीपोत्सव शुक्रवार, 6 नवंबर (धनतेरस) से बुधवार, 11 नवंबर 2026 (भाई दूज) तक चलेगा। मुख्य दीपावली (लक्ष्मी पूजन) रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। वाराणसी में लक्ष्मी पूजा हेतु सर्वोत्तम प्रदोष काल शाम 05:30 बजे से 08:08 बजे तक रहेगा, जिसमें स्थिर वृषभ लग्न शाम 05:58 बजे से 07:54 बजे के बीच रहेगा।
क्या वाराणसी में दिवाली और देव दीपावली एक ही हैं?
नहीं। ये दोनों 15 दिनों के अंतराल पर मनाए जाने वाले बिल्कुल अलग पर्व हैं। दिवाली (8 नवंबर) अमावस्या पर घर-परिवार की पूजा, बाज़ारों की सजावट और मंदिर दीपदान का पर्व है। देव दीपावली (24 नवंबर) कार्तिक पूर्णिमा को होती है, जब सभी 84 घाटों पर 10 से 15 लाख दीये जलाए जाते हैं।
क्या दिवाली पर मां अन्नपूर्णा की स्वर्ण प्रतिमा के दर्शन होते हैं?
हां। मां अन्नपूर्णा की ठोस सोने की प्रतिमा और अन्नपूर्णा खजाना (सिक्का व अक्षत) का वितरण वर्ष में केवल 5 दिन दिवाली सप्ताह (धनतेरस सुबह 6 नवंबर से भाई दूज मध्यरात्रि 11 नवंबर तक) ही होता है। देव दीपावली के दिन यह स्वर्ण गर्भगृह बंद रहता है।
दिवाली के ट्रैफिक में काशी विश्वनाथ मंदिर कैसे पहुंचें?
क्योंकि पुलिस गोदौलिया और दशाश्वमेध के बीच गाड़ियों का प्रवेश रोक देती है, इसलिए अपनी टैक्सी को बेनियाबाग भूमिगत पार्किंग (बांसफाटक गेट 4 हेतु 650 मी पैदल) या मैदागिन टाउन हॉल पार्किंग (चौक गेट 1 हेतु 750 मी पैदल) पर छोड़ने के लिए कहें।
दिवाली की रात बिना भीड़ में फंसे गंगा आरती कैसे देखें?
दशाश्वमेध या अस्सी घाट से शाम 05:15 बजे तक नाव बुक कर लें। पानी पर 40 से 50 मीटर दूर से आपको सातों अर्चकों की आरती बिल्कुल साफ दिखेगी, आप गंगा में दीपदान कर सकेंगे, और घाट की सीढ़ियों के धक्के व गलियों के पटाखों से सुरक्षित रहेंगे।