गोवर्धन पूजा वाराणसी 2026: मुहूर्त, गोबर गोवर्धन, अखाड़ा दंगल व 56 भोग दर्शन गाइड

सत्यापित 2026 पंचांग विवरण: वाराणसी में गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट महोत्सव का पावन पर्व मंगलवार, 10 नवंबर 2026 (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा) को मनाया जाएगा। प्रातःकाल गोवर्धन पूजा मुहूर्त सुबह 06:40 बजे से 08:50 बजे तक (कुल 2 घंटे 10 मिनट) रहेगा। इसके उपरांत काशी के प्रमुख मंदिरों में दोपहर भोग आरती (11:30 AM – 01:30 PM) के बाद भव्य छप्पन भोग (56 भोग) अन्नकूट दर्शन प्रारंभ होकर रात्रि 10:00 बजे तक चलेगा।

दीपावली की जगमगाहट के ठीक अगली सुबह काशी एक अनूठे और प्राचीन लोक-उत्सव के रंग में रंग जाती है: गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट उत्सव।

बनारस में यह पर्व केवल भव्य मंदिरों के गर्भगृह तक सीमित नहीं है। यह शहर की प्राचीन गलियों, चौपालों, गंगा किनारे के ऐतिहासिक अखाड़ों और अहीर मोहल्लों में पूरी जीवंतता के साथ उतरता है। शुद्ध देशी गाय के गोबर से गढ़े जाने वाले विशालकाय गोबर के गोवर्धन महाराज, गन्ने का मंडप, पारंपरिक गौ-पूजन, तुलसी अखाड़े की लाल मिट्टी में पहलवानों का रोमांचक दंगल, और दोपहर बाद काशी विश्वनाथ धाम से लेकर चौखंभा के गोपाल मंदिर तक सजे 56 भोग के खाद्य पर्वत—यह दिन बनारस की सांस्कृतिक आत्मा का साक्षात्कार कराता है।

यदि आप 2026 की गोवर्धन पूजा व अन्नकूट पर काशी आ रहे हैं, तो यह मार्गदर्शिका आपको सटीक वैदिक मुहूर्त, लोक परंपराओं, अखाड़ा दंगल शिष्टाचार, मंदिरवार 56 भोग दर्शन समय और ट्रैफिक नो-व्हीकल जोन से निपटने के सटीक टैक्सी ड्रॉप प्वाइंट्स की संपूर्ण जानकारी प्रदान करती है।


गोवर्धन पूजा 2026: तिथि, मुहूर्त एवं बनारस का समय चक्र

वाराणसी पंचांग एवं वैदिक गणना के अनुसार कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा का समय चक्र निम्नवत है:

पर्व चरणपंचांग तिथि एवं दिनशुभ मुहूर्त / समयधार्मिक अनुष्ठान एवं स्थान
प्रतिपदा तिथि प्रारंभसोमवार, 9 नवंबर 2026दोपहर 12:31 बजेतिथि का आरंभ; घरों व आंगनों की सफाई एवं गोवर्धन निर्माण की तैयारी।
प्रतिपदा तिथि समाप्तमंगलवार, 10 नवंबर 2026दोपहर 02:00 बजेउदया तिथि के मान से सम्पूर्ण दिन पर्व मनाया जाएगा।
प्रातःकाल गोवर्धन पूजा मुहूर्तमंगलवार, 10 नवंबर 2026सुबह 06:40 से 08:50 बजे (2 घंटे 10 मिनट)मुख्य मुहूर्त: गोबर गोवर्धन निर्माण, गौ-पूजन एवं सात फेरों की परिक्रमा।
बनारसी अखाड़ा दंगलमंगलवार, 10 नवंबर 2026सुबह 07:30 से 10:30 बजेतुलसी अखाड़ा व स्वामीनाथ अखाड़े पर पारंपरिक मिट्टी कुश्ती।
मध्याह्न भोग आरतीमंगलवार, 10 नवंबर 2026सुबह 11:30 से दोपहर 01:30 बजेकाशी के देवालयों में विग्रहों के सम्मुख 56 भोग का समर्पण।
सायंकाल 56 भोग अन्नकूट दर्शनमंगलवार, 10 नवंबर 2026दोपहर 03:30 से रात्रि 10:00 बजेश्रद्धालुओं हेतु अन्नकूट व प्रसाद दर्शन का खुला समय।

तीर्थयात्रियों हेतु उपयोगी सलाह: सुबह 06:40 से 08:50 बजे का समय सबसे जीवंत होता है। यदि आप बनारसी मोहल्लों में पारंपरिक गोबर गोवर्धन और लोकगीतों के साक्षी बनना चाहते हैं, तो सोनारपुरा, मदनपुरा या चौक की गलियों में सुबह 7 से 8 बजे के बीच भ्रमण करें।


🛕 गोवर्धन पूजा व अन्नकूट 2026: मंदिर सर्किट व गौशाला कैब बुकिंग
वाराणसी में गोवर्धन पूजा व अन्नकूट (मंगलवार, 10 नवंबर 2026) के पावन अवसर पर आ रहे हैं? गोदौलिया-चौक क्षेत्र में सख्त नो-व्हीकल जोन रहता है। सुबह कान्हा गौशाला दर्शन, तुलसी अखाड़ा दंगल और दोपहर बाद 56 भोग दर्शन (काशी विश्वनाथ, संकट मोचन, गोपाल मंदिर व इस्कॉन) हेतु बिना किसी सर्ज प्राइस के फिक्स्ड-रेट कैब या टेम्पो ट्रेवलर बुक करें।
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बनारस के 'गोबर के गोवर्धन': लोक शिल्प, गन्ने का मंडप व परिक्रमा

काशी में गोवर्धन पूजा वैदिक कर्मकांड से अधिक प्रकृति और पशुधन के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का लोक पर्व है। स्थानीय बोलचाल में इन्हें गोवर्धन महराज या गिरिराज बाबा कहा जाता है।

             [ शुद्ध देशी गाय के गोबर से निर्मित लेटे हुए गोवर्धन (4–8 फीट) ]
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 गन्ने का इखु मंडप                    नाभि में कुल्हड़ दीप                   नवान्न व ऋतु फल भोग
चारों कोनों पर मौली बंधे ईख          कच्चा दूध, गंगाजल, दही व बताशा        धान की नई बाल, सिंघाड़ा, मूली, बाजरा

1. लोक प्रतिमा का निर्माण (भोर का शिल्प)

प्रतिपदा की भोर में बनारसी घरों के आंगनों, दालानों, सोसायटियों के प्रांगणों और ग्वालटोलियों में जमीन को गंगाजल से धोया जाता है। इसके बाद देशी गाय के ताजे गोबर से 4 से 8 फीट लंबी पुरुष आकृति गढ़ी जाती है, जो भगवान श्रीकृष्ण के गिरिराज रूप का प्रतीक है:

  • चेहरा व मुकुट: आंखों और चेहरे के अंगों को दर्शाने हेतु सीप, कौड़ी, मिट्टी के ढक्कन या चांदी का वर्क लगाया जाता है।
  • नाभि (अमृत कुण्ड): गोवर्धन महाराज के पेट के मध्य (नाभि) में कच्ची मिट्टी का कुल्हड़ या सकोरा दबाया जाता है। इसमें कच्चा गाय का दूध, गंगाजल, गाढ़ा दही, शहद और सफेद बताशे भरे जाते हैं।
  • इखु मंडप (गन्ने की छांव): प्रतिमा के चारों कोनों पर हरी पत्तियों सहित चार ऊंचे गन्ने गाड़े जाते हैं और ऊपर लाल कलावा (मौली) बांधकर सुंदर मंडप बनाया जाता है।
  • नवान्न का अर्पण: गोवर्धन जी के धड़ व हाथों पर पहली शीतकालीन फसल के नमूने रखे जाते हैं—हरे धान की बालियां, बाजरे के भुट्टे, ताजे सिंघाड़े, मूली और गेंदे के पीले फूल।

2. सात फेरों की परिक्रमा व पारंपरिक लोकगीत

नाभि के कुल्हड़ में घी का दीपक प्रज्वलित करने के बाद परिवार के सभी सदस्य पीतल की थाली में खील, बताशा और फूल लेकर गोवर्धन जी की सात बार दक्षिणावर्त (Clockwise) परिक्रमा करते हैं।

इस दौरान घर की महिलाएं पारंपरिक भोजपुरी व अवधी सोहर व लोकगीत गाती हैं, जिसमें इंद्र के मानमर्दन, कनिष्ठिका उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाने और बृजवासियों की रक्षा का भावपूर्ण वर्णन होता है।


गौ-पूजन एवं धेनु सेवा: काशी की गौशालाओं में विशेष अनुष्ठान

गोवर्धन पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण के 'गोपाल' स्वरूप की आराधना की जाती है, इसलिए गायों की सेवा और पूजन इस दिन का अनिवार्य अंग है:

  1. श्रृंगार एवं अभिषेक:
    • सुबह गौशालाओं व खटालों में गायों व बछड़ों को गंगाजल मिले जल से नहलाया जाता है।
    • उनके सींगों पर लाल गेरू या सिंदूर और सरसों का तेल लगाया जाता है।
    • माथे पर चंदन व हल्दी का लेप लगाकर गेंदे की मालाएं पहनाई जाती हैं और सींगों पर मोर पंख व गले में पीतल की घंटियां बांधी जाती हैं।
  2. लापसी का भोग:
    • इस दिन गायों को साधारण चारे के बजाय विशेष लापसी खिलाई जाती है। यह दरदरे गेहूं के दलिये को देशी गुड़ और शुद्ध गाय के घी में धीमी आंच पर पकाकर बनाई जाती है।
    • इसके साथ हरी दूब, कटे हुए गन्ने के टुकड़े और ताजी मौसमी सब्जियां भेंट की जाती हैं।
  3. दर्शनार्थी कहां शामिल हो सकते हैं?
    • श्री काशी विश्वनाथ धाम गौशाला: मंदिर परिसर में सुबह विद्वान पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य गौ-पूजन किया जाता है।
    • कान्हा गौशाला (शहंशाहपुर): शहर से लगभग 22 किमी दूर स्थित यह आधुनिक गौ-अभयारण्य सैकड़ों गायों का आश्रय स्थल है। शांतिपूर्ण गौ-सेवा हेतु परिवार सहित यहां जाने के लिए हाफ-डे कैब सबसे उपयुक्त है।
    • रामेश्वर गौशाला: पंचक्रोशी मार्ग पर वरुणा नदी के तट पर स्थित शांत व ग्रामीण परिवेश वाली गौशाला।

बनारसी अखाड़ा दंगल: गोवर्धन की भोर में लाल मिट्टी की कुश्ती

काशी की गोवर्धन पूजा का एक अत्यंत विशिष्ट और रोमांचक पहलू है गोवर्धन अखाड़ा दंगल। सदियों से काशी के पहलवान इस दिन को अपने शारीरिक बल और धरती माता के प्रति समर्पण के पर्व के रूप में मनाते हैं:

[ भोर में हनुमान पूजन व सूर्य नमस्कार ] 
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[ सरसों तेल, हल्दी व छाछ से अखाड़े की मिट्टी का संस्कार ] 
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[ 40 किलो की लकड़ी की जोरी / गदा फेरना ] 
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[ गंगा तट पर लाल मिट्टी के अखाड़े में लंगोट दंगल ]

बनारस की अखाड़ा संस्कृति

काशी में कुश्ती केवल खेल नहीं, अपितु महावीर हनुमान की अनन्य भक्ति, ब्रह्मचर्य और आत्म-संयम की एक कठिन साधना है। पहलवान पूरे वर्ष कड़ा अनुशासन पालते हैं और गोवर्धन पूजा पर शक्ति प्रदर्शन के साथ दंगल का शुभारंभ करते हैं।

प्रमुख ऐतिहासिक अखाड़े जहां दंगल देखने जाएं:

  • तुलसी अखाड़ा (तुलसी घाट): 16वीं शताब्दी में रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा स्थापित। तुलसी घाट की ऊंची सीढ़ियों पर स्थित यह मिट्टी का अखाड़ा गंगा के विहंगम दृश्य के सम्मुख स्थित है। सुबह 07:30 से 10:00 बजे तक यहां शहर के नामी पहलवानों के मुकाबले होते हैं।
  • स्वामीनाथ अखाड़ा (अस्सी घाट): भारी लकड़ी की जोरी, गदा और पत्थर के 'गरनाल' के अभ्यास हेतु प्रसिद्ध। यहां युवा व अनुभवी पहलवानों की ऊर्जा देखते ही बनती है।
  • गया सेठ अखाड़ा व संत रघुवर दास अखाड़ा: मदनपुरा व रामनगर क्षेत्र के विख्यात अखाड़े, जहां स्थानीय दर्शक बड़ी संख्या में जुटते हैं।

दर्शकों हेतु नियम व शिष्टाचार

  • अखाड़े के पक्के चबूतरे पर प्रवेश करने से पूर्व जूते-चप्पल अवश्य उतारें।
  • अखाड़े की संस्कारित लाल मिट्टी में तभी पैर रखें जब उस्ताद या खलीफा अनुमति दें।
  • वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी सामान्यतः अनुमन्य है, किंतु पहलवानों से शिष्टाचारपूर्वक अनुमति लेना श्रेयस्कर है।

काशी का मंदिर 56 भोग अन्नकूट सर्किट: दोपहर से रात्रि तक

सुबह के लोक व अखाड़ा आयोजनों के बाद, दोपहर 11:30 बजे से काशी 'अन्नकूट' के महाप्रसाद के रंग में रंग जाती है।

जहां विश्वनाथ गली स्थित मां अन्नपूर्णा मंदिर में 100 क्विंटल का लड्डू पर्वत और स्वर्ण प्रतिमा दर्शन मुख्य आकर्षण रहता है (इसकी पूरी जानकारी हमारी मां अन्नपूर्णा स्वर्ण दर्शन व अन्नकूट गाइड में पढ़ें), वहीं काशी के अन्य प्रमुख देवालयों में भी अलौकिक छप्पन भोग दर्शन होते हैं।

          [ 1-दिवसीय 56 भोग अन्नकूट दर्शन सर्किट ]
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पुरातन नगर केंद्र            दक्षिणी काशी केंद्र             पुष्टिमार्गीय केंद्र
• काशी विश्वनाथ धाम          • संकट मोचन मंदिर           • गोपाल मंदिर (चौखंभा)
• मां अन्नपूर्णा मंदिर       • इस्कॉन (भेलूपुर)          • काल भैरव (मैदागिन)
(बेनियाबाग से 700 मी. पैदल)   (सीधे मुख्य मार्ग कैब ड्रॉप)    (मैदागिन से गलियों में पैदल)

1. श्री काशी विश्वनाथ धाम (गर्भगृह छप्पन भोग दर्शन)

  • दर्शन समय: मध्याह्न भोग आरती (11:30 AM – 12:30 PM); सायं श्रृंगार दर्शन (05:00 PM – 09:00 PM)।
  • भोग का स्वरूप: रजत ज्योर्तिलिंग की भव्य पुष्प सज्जा की जाती है और गर्भगृह के संपूर्ण संगमरमरी फर्श पर 56 प्रकार के मिष्ठान, मेवे, पूड़ी, कचौड़ी, खीर और मौसमी साग-सब्जियों का दिव्य भोग बिछाया जाता है।
  • पहुंचने का मार्ग: बेनियाबाग पार्किंग पर उतरकर बांसफाटक (गेट 4) से प्रवेश करें या मैदागिन से गेट 1 (धाम कॉरिडोर) आएं। गर्भगृह में मोबाइल फोन पूर्णतः प्रतिबंधित है।

2. संकट मोचन हनुमान मंदिर (बेसन लड्डू पिरामिड)

  • दर्शन समय: सुबह 05:00 से दोपहर 12:00; सायं 03:30 से रात्रि 10:00 बजे (मुख्य आरती ~07:30 PM)।
  • भोग का स्वरूप: संकट मोचन महाराज को शुद्ध देशी घी के बेसन के लड्डुओं का गगनचुंबी पिरामिड अर्पित किया जाता है। साथ में काजू, पिस्ता, केला व तुलसी दल चढ़ाया जाता है। आरती के बाद श्रद्धालुओं में यह महाप्रसाद वितरित होता है।
  • पहुंचने का मार्ग: दक्षिणी वाराणसी में साकेत नगर मुख्य मार्ग पर स्थित। मंदिर द्वार तक वाहन सीधे पहुंच सकते हैं; कोई पैदल बैरिकेडिंग नहीं है।

3. श्री गोपाल मंदिर, चौखंभा (पुष्टिमार्गीय हवेली अन्नकूट)

  • दर्शन समय: सायं 04:30 से रात्रि 08:30 बजे (अन्नकूट मनोरथ)।
  • भोग का स्वरूप: वल्लभ संप्रदाय का काशी में यह प्रमुख केंद्र है। ठाकुर जी को गोपवेश का विशेष श्रृंगार धराया जाता है। प्रांगण में लकड़ी की सजी हुई गायें रखी जाती हैं और शास्त्रीय हवेली ध्रुपद संगीत के मध्य 56 भोग का भव्य मनोरथ सजता है।
  • पहुंचने का मार्ग: चौखंभा की प्राचीन गलियों में स्थित। मैदागिन या मछोदरी पर कैब से उतरकर लगभग 650 मीटर पैदल चलना होता है।

4. इस्कॉन मंदिर, भेलूपुर (हलवे का गोवर्धन पर्वत व कीर्तन)

  • दर्शन समय: सायं 04:30 से रात्रि 08:30 बजे।
  • भोग का स्वरूप: इस्कॉन के भक्तगण सूजी, मेवे और रबड़ी से विशालकाय खाने योग्य गोवर्धन पर्वत का निर्माण करते हैं। पर्वत के चारों ओर 108 शुद्ध शाकाहारी व्यंजन सजाए जाते हैं और भव्य हरिनाम संकीर्तन के साथ गिरिराज परिक्रमा होती है।
  • पहुंचने का मार्ग: महमूरगंज-भेलूपुर मुख्य मार्ग पर स्थित। बुजुर्गों के लिए सबसे सुगम, वाहन सीधे गेट तक पहुंचता है।

5. काल भैरव मंदिर (काशी के कोतवाल का अन्नकूट)

  • दर्शन समय: सुबह 06:00 से 10:30; सायं 04:00 से रात्रि 09:30 बजे।
  • भोग का स्वरूप: काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव को पारंपरिक बनारसी नमकीन, सूखे मेवे, लड्डू और सरसों के तेल से अभिमंत्रित विशिष्ट भोग अर्पित किया जाता है।
  • पहुंचने का मार्ग: मैदागिन या विशेश्वरगंज से 400 मीटर की दूरी पर भैरवनाथ गली में स्थित।

दीपावली सप्ताह की ट्रैफिक व्यवस्था व तय पेरीमीटर कैब ड्रॉप्स

धनतेरस से भैया दूज तक वाराणसी यातायात पुलिस शहर के मध्य भाग (गिरजाघर-गोदौलिया-चौक-मैदागिन) को सुबह 06:00 से रात्रि 11:00 बजे तक सख्त नो-व्हीकल जोन घोषित करती है।

             [ आउटर रिंग रोड / कैंट रेलवे स्टेशन ]
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 [ बेनियाबाग भूमिगत मल्टी-लेवल पार्किंग ]       [ मैदागिन टाउन हॉल पार्किंग ]
 (बांसफाटक होते हुए विश्वनाथ गेट 4 - 700 मी.)  (चौक होते हुए मंदिर मार्ग - 800 मी.)
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             └──────────────► [ नो-व्हीकल जोन ] ◄────────────────┘
                           (गोदौलिया - चौक गलियां)

अपनी कैब को जाम में फंसाने के बजाय ड्राइवर को इन 4 अधिकृत पेरीमीटर ड्रॉप प्वाइंट्स पर छोड़ने का निर्देश दें:

  1. बेनियाबाग मल्टी-लेवल पार्किंग (पश्चिमी ड्रॉप):
    • निकटतम मंदिर: काशी विश्वनाथ गेट 4 (बांसफाटक) व मां अन्नपूर्णा मंदिर।
    • दूरी: चौड़ी पक्की सड़क पर मात्र 700 मीटर पैदल। वरिष्ठ नागरिकों हेतु अधिकृत ई-रिक्शा शटल उपलब्ध रहते हैं।
  2. गिरजाघर चौराहा / लक्सा रोड (दक्षिण-पश्चिम ड्रॉप):
    • निकटतम स्थल: दशाश्वमेध घाट, गोदौलिया चौराहा व सोनारपुरा की पारंपरिक गलियां।
    • दूरी: गोदौलिया तक 450 मीटर।
  3. मैदागिन टाउन हॉल पार्किंग (उत्तरी ड्रॉप):
    • निकटतम मंदिर: काशी विश्वनाथ गेट 1, गोपाल मंदिर चौखंभा व काल भैरव।
    • दूरी: ऐतिहासिक गलियों में 650 से 800 मीटर।
  4. भेलूपुर / साकेत नगर मार्ग (दक्षिणी खुला कॉरिडोर):
    • निकटतम मंदिर: संकट मोचन मंदिर, दुर्गा कुंड व इस्कॉन।
    • सुविधा: यहां कोई पुलिस बैरिकेड नहीं होता; वाहन सीधे मंदिर परिसर के बाहर पहुंचता है।

फिक्स्ड-रेट कैब व टेम्पो ट्रेवलर दरें (बिना किसी त्योहार सर्ज के)

त्योहारों के दौरान बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं से खुले बाजार में मनमाना किराया वसूला जाता है। काशी टैक्सी सत्यापित स्थानीय चालकों के साथ निर्धारित दरों पर पारदर्शी सेवा प्रदान करती है:

वाहन मॉडलबैठक क्षमतासामान रखने की जगहएयरपोर्ट ट्रांसफर (VNS ⇄ शहर)हाफ-डे लोकल (4 घंटे / 40 किमी)फुल-डे लोकल (8 घंटे / 80 किमी)12 घंटे गौशाला व मंदिर सर्किट (120 किमी)
एसी सेडान (Dzire / Etios)4+12 मध्यम बैग₹899₹1,600₹2,499₹3,200
एसी एसयूवी (Ertiga)6+13 मध्यम बैग₹1,299₹2,000₹2,800₹3,700
प्रीमियम एसयूवी (Innova Crysta)6/7+14 बड़े सूटकेस₹1,800₹2,600₹3,800₹4,800
टेम्पो ट्रेवलर (Force 17-सीटर)16+112+ बड़े बैग₹2,500₹3,200₹4,250₹5,800

दरों की पारदर्शिता: सभी किरायों में ईंधन, चालक भत्ता और सामान्य टोल सम्मिलित हैं। बेनियाबाग अथवा मैदागिन भूमिगत पार्किंग का शुल्क नगर निगम की पर्ची अनुसार वास्तविक (लगभग ₹50-₹100) देय होता है। पहले से बुक की गई सेवाओं पर त्योहार का कोई अतिरिक्त सर्ज चार्ज नहीं लिया जाता।


गोवर्धन पूजा व अन्नकूट का 1-दिवसीय आदर्श भ्रमण प्लान

  • सुबह 06:00 से 07:30 बजे: सोनारपुरा या चौक की गलियों में पैदल भ्रमण कर आंगनों में बनते हुए गोबर के गोवर्धन व गन्ने के मंडप का दर्शन करें।
  • सुबह 07:30 से 09:30 बजे: तुलसी घाट या अस्सी घाट पहुंचें। सीढ़ियों पर बैठकर तुलसी अखाड़े या स्वामीनाथ अखाड़े का रोमांचक गोवर्धन दंगल देखें।
  • सुबह 09:30 से 11:00 बजे: अस्सी या गोदौलिया पर गरमा-गरम बनारसी कचौड़ी-जलेबी और कुल्हड़ वाली चाय का नाश्ता करें।
  • सुबह 11:30 से दोपहर 01:30 बजे: कैब से बेनियाबाग उतरें। बांसफाटक गेट 4 से श्री काशी विश्वनाथ धाम में प्रवेश कर गर्भगृह में सजे 56 भोग दर्शन मध्याह्न भोग आरती के समय करें।
  • दोपहर 01:30 से 03:30 बजे: दोपहर की धूप व भीड़ से बचने हेतु होटल में विश्राम करें।
  • सायं 04:00 से 06:30 बजे: कैब द्वारा संकट मोचन मंदिर (बेसन लड्डू पिरामिड) और इस्कॉन भेलूपुर (हलवे का गोवर्धन पर्वत व कीर्तन) के सुगम दर्शन करें।
  • सायं 07:00 से 08:30 बजे: मैदागिन उतरकर चौखंभा की प्राचीन गलियों में श्री गोपाल मंदिर के पुष्टिमार्गीय अन्नकूट मनोरथ व हवेली संगीत में भाग लें।
  • रात्रि 09:00 बजे: कैंट अथवा सिगरा में सात्विक रात्रि भोज के साथ दिन का समापन करें।

🛕 गोवर्धन पूजा व अन्नकूट 2026: मंदिर सर्किट व गौशाला कैब बुकिंग
वाराणसी में गोवर्धन पूजा व अन्नकूट (मंगलवार, 10 नवंबर 2026) के पावन अवसर पर आ रहे हैं? गोदौलिया-चौक क्षेत्र में सख्त नो-व्हीकल जोन रहता है। सुबह कान्हा गौशाला दर्शन, तुलसी अखाड़ा दंगल और दोपहर बाद 56 भोग दर्शन (काशी विश्वनाथ, संकट मोचन, गोपाल मंदिर व इस्कॉन) हेतु बिना किसी सर्ज प्राइस के फिक्स्ड-रेट कैब या टेम्पो ट्रेवलर बुक करें।
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गोवर्धन पूजा वाराणसी: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

वाराणसी में गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट 2026 कब है?

वाराणसी में गोवर्धन पूजा व अन्नकूट महोत्सव मंगलवार, 10 नवंबर 2026 (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा) को मनाया जाएगा। प्रतिपदा तिथि सोमवार, 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे शुरू होकर मंगलवार, 10 नवंबर को दोपहर 02:00 बजे समाप्त होगी। पूजा का सर्वश्रेष्ठ प्रातःकाल मुहूर्त सुबह 06:40 बजे से 08:50 बजे तक रहेगा।

बनारस में 'गोबर के गोवर्धन' की क्या परंपरा है?

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा की भोर में बनारस के आंगनों व चौराहों पर शुद्ध देशी गाय के गोबर से 4 से 8 फीट के लेटे हुए गोवर्धन महाराज (गिरिराज जी) की लोक-प्रतिमा बनाई जाती है। नाभि में मिट्टी का कुल्हड़ रखकर कच्चा दूध, दही, गंगाजल व बताशा भरा जाता है। चारों कोनों पर गन्ने (इखु) का मंडप सजाकर परिवार सात बार परिक्रमा करता है।

गोवर्धन पूजा पर बनारस के अखाड़ों में दंगल कहां आयोजित होते हैं?

गोवर्धन पूजा की सुबह बनारस के ऐतिहासिक अखाड़ों में पारंपरिक लाल मिट्टी का दंगल होता है। इनमें तुलसी घाट स्थित तुलसी अखाड़ा, अस्सी घाट स्थित स्वामीनाथ अखाड़ा और गया सेठ अखाड़ा प्रमुख हैं। पहलवान अखाड़े की पवित्र मिट्टी की पूजा कर सरसों तेल व हल्दी लगाकर लंगोट में कुश्ती के मुकाबले लड़ते हैं।

अन्नकूट पर काशी में 56 भोग दर्शन हेतु कौन-से मंदिर प्रमुख हैं?

56 भोग दर्शन के प्रमुख केंद्र हैं: श्री काशी विश्वनाथ धाम (गर्भगृह फर्श पर 56 भोग), मां अन्नपूर्णा मंदिर (100 क्विंटल लड्डू पर्वत व स्वर्ण प्रतिमा), संकट मोचन हनुमान मंदिर (बेसन लड्डू पिरामिड), चौखंभा स्थित श्री गोपाल मंदिर (पुष्टिमार्गीय हवेली अन्नकूट व ध्रुपद कीर्तन), और इस्कॉन भेलूपुर (हलवे का गोवर्धन पर्वत)।

दीपावली सप्ताह में ट्रैफिक प्रतिबंधों के बीच मंदिर कैसे पहुंचें?

दीपावली से भैया दूज तक गोदौलिया-चौक क्षेत्र सुबह 06:00 से रात 11:00 बजे तक सख्त नो-व्हीकल जोन रहता है। टैक्सियां यात्रियों को तय बाहरी ड्रॉप प्वाइंट्स पर उतारती हैं: बेनियाबाग पार्किंग (विश्वनाथ गेट 4 हेतु 700 मीटर पैदल), गिरजाघर चौराहा (गोदौलिया हेतु 450 मीटर पैदल), या मैदागिन चौराहा (चौक हेतु 800 मीटर)।

क्या वरिष्ठ नागरिक अन्नकूट 56 भोग दर्शन सुगमता से कर सकते हैं?

हां, यदि दर्शन की योजना सही क्रम में बनाई जाए। दोपहर में संकट मोचन व इस्कॉन जैसे मुख्य मार्ग पर स्थित मंदिरों के दर्शन वाहन से सीधे करें। शाम को विश्वनाथ मंदिर व अन्नपूर्णा दर्शन हेतु बेनियाबाग भूमिगत पार्किंग पर कैब से उतरकर ई-रिक्शा शटल लेकर बांसफाटक तक पहुंचें।

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