पौष पूर्णिमा 2027 वाराणसी: गंगा स्नान, शाकंभरी जयंती व कैब गाइड
पौष पूर्णिमा शुक्रवार, 22 जनवरी 2027 को मनाई जाएगी। काशी की सनातन परंपरा में इस पूर्णमासी का असाधारण आध्यात्मिक महत्व है: यह पौष मास के नियमों का समापन करती है, 30 दिवसीय माघ मास स्नान का विधिवत संकल्प कराती है, नदी तट पर कल्पवास की शुरुआत करती है और पोषण की देवी मां शाकंभरी की जयंती के रूप में मनाई जाती है।
इस पावन अवसर पर 3 लाख से अधिक श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त में गंगा के शीतल जल में पुण्य की डुबकी लगाने काशी के घाटों पर पहुंचते हैं। इसी दिन राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर मात्र 125 किमी दूर प्रयागराज माघ मेला 2027 का पहला प्रमुख शाही स्नान और कल्पवास भी आरंभ होता है।
यदि आप पौष पूर्णिमा पर सपरिवार काशी यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यह व्यावहारिक गाइड आपको स्नान मुहूर्त, सुगम घाटों के चयन, कड़ाके की ठंड से बचाव, वाहन ड्रॉप पॉइंट्स और पारदर्शी ट्रांसपोर्ट दरों की सही जानकारी देती है।
मां अन्नपूर्णा मंदिर (विश्वनाथ गली), मां विशालाक्षी शक्तिपीठ, संकटा देवी मंदिर
अनुमानित तीर्थयात्री भीड़
नगर के घाटों पर 3 से 5 लाख; सुबह 05:00 से 10:00 बजे के बीच चरम भीड़
यातायात व नो-व्हीकल जोन
गोदौलिया–दशाश्वमेध व मैदागिन–चौक मार्ग सुबह 05:00 से रात 09:00 बजे तक पैदल क्षेत्र
पंचांग सलाह: चूंकि पूर्णिमा तिथि में सूर्योदय (उदया तिथि) 22 जनवरी को है, अतः समस्त प्रातःकालीन स्नान संकल्प, शाक दान, सत्यनारायण व्रत और सांझ का दीपदान शुक्रवार को ही संपन्न होगा।
पौष पूर्णिमा पर काशी में क्या-क्या होता है?
इस पावन तिथि पर काशी में तीन प्रमुख धार्मिक व सांस्कृतिक धाराएं एक साथ प्रवाहित होती हैं:
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│ पौष पूर्णिमा (22 जनवरी 2027) │
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│ माघ मास स्नान व │ │ शाकंभरी जयंती व │ │ प्रयागराज संगम │
│ कल्पवास संकल्प │ │ शाक दान महोत्सव │ │ एक दिवसीय यात्रा │
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│ • ब्रह्म मुहूर्त │ │ • ताजी हरी │ │ • 6-लेन NH-19 पर │
│ गंगा स्नान │ │ सब्जियों का दान │ │ 125 किमी सफर │
│ • 30 दिन का संकल्प│ │ • मां अन्नपूर्णा │ │ • माघ मेला शाही │
│ • शीत निवारक दान │ │ विशेष श्रृंगार │ │ स्नान व कल्पवास │
│ (कंबल/तिल/गुड़) │ │ • सत्यनारायण कथा │ │ • शाम तक काशी वापसी│
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1. माघ मास स्नान व कल्पवास का शुभारंभ
पद्म पुराण (उत्तर खंड) और स्कंद पुराण (काशी खंड) में माघ मास के पवित्र जल स्नान की महिमा गाई गई है:
"माघे निमग्नाः सलिले सुशीते विमुक्तपापास्त्रिदिवं प्रयान्ति"
(अर्थात जो मनुष्य माघ मास में शीतल जल में डुबकी लगाते हैं, वे समस्त पापों से मुक्त होकर परम पद को प्राप्त होते हैं।)
पौष पूर्णिमा को संकल्प दिवस माना जाता है। श्रद्धालु गंगातट पर हाथ में जल व कुश लेकर 30 दिनों तक (माघ पूर्णिमा, 20 फरवरी 2027 तक) नित्य प्रातः स्नान करने का संकल्प लेते हैं।
इसके अतिरिक्त, गृहस्थ व साधु-संत इस दिन से कल्पवास व्रत प्रारंभ करते हैं:
गंगा किनारे धर्मशाला, मठ या आश्रम में 30 दिनों का प्रवास।
दिन में तीन बार स्नान (त्रिसंध्या स्नान)।
दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन (एकभुक्त), जो बिना लहसुन-प्याज और अत्यंत सादगी से बना हो।
मौन, सत्य, ब्रह्मचर्य और नियमित सत्संग व भागवत श्रवण।
2. शाकंभरी जयंती व शाक दान
पौष पूर्णिमा को मां शाकंभरी की प्राकट्य तिथि के रूप में मनाया जाता है, जो 8 दिवसीय शाकंभरी नवरात्रि का पूर्णाहुति पर्व है। देवी भागवत महापुराण के अनुसार, जब दुर्गमासुर के अत्याचार से पृथ्वी पर 100 वर्षों का भयंकर सूखा पड़ा और जीव-जंतु त्राहि-त्राहि करने लगे, तब आदिशक्ति ने सहस्राक्षी रूप धरकर अपने आंसुओं से नदियों को भरा और अपनी देह से विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां, फल व हरी सब्जियां उत्पन्न कर सृष्टि की भूख मिटाई।
काशी में इस दिन शाक दान का विशेष विधान है:
श्रद्धालु टोकरियों में मौसमी हरी सब्जियां—पालक, मेथी, सरसों, मूली, फूलगोभी, मटर, गाजर, बथुआ और आंवला—सजाकर गंगा तट पर संतों, ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान करते हैं।
मां अन्नपूर्णा मंदिर और मां विशालाक्षी शक्तिपीठ में मां का ताजी सब्जियों और फलों से विशेष श्रृंगार किया जाता है तथा भक्तों में पौष्टिक खिचड़ी व शाक का महाप्रसाद वितरित होता है।
3. पुण्य दान: शीत निवारक वस्तुओं का दान
चूंकि पौष का महीना कड़ाके की ठंड (शिशिर ऋतु) का समय होता है, अतः शास्त्रों में शीत निवारक वस्तुओं के दान को महापुण्यकारी कहा गया है:
कंबल दान: जरूरतमंदों और साधुओं को ऊनी कंबल व गर्म शॉल भेंट करना।
तिल-गुड़ दान: काले और सफेद तिल, शुद्ध गुड़, कच्चा चावल और देसी घी का दान।
दीपदान: सायंकाल गोधूलि बेला में पत्तों के दोने में मिट्टी का दीपक प्रज्वलित कर गंगा की जलधारा में प्रवाहित करना।
स्नान हेतु घाटों की तुलना: आपके लिए कौन सा घाट सही है?
काशी के 84 घाटों में से पौष पूर्णिमा पर स्नान हेतु सही घाट का चयन करना अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर यदि आपके साथ वृद्ध माता-पिता या बच्चे हों:
उत्तरी घाट (आधुनिक, पक्के, सीढ़ी-मुक्त)
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├─ नमो घाट ────────── घाट किनारे तक सीधी गाड़ी; पक्के रैंप; मोटरबोट का मुख्य केंद्र
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├─ पंचगंगा घाट ───── 5 नदियों का संगम; 120 खड़ी सीढ़ियां; नाव द्वारा जाना ही सुरक्षित
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मध्य घाट (ऐतिहासिक केंद्र, भारी भीड़, खड़ी सीढ़ियां)
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├─ मणिकर्णिका घाट ── चक्रपुष्करिणी कुंड; मोक्ष स्नान; संकरी गलियां
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├─ दशाश्वमेध घाट ─── स्नान का मुख्य केंद्र; पुलिस बैरिकेडिंग; अत्यधिक भीड़
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दक्षिणी घाट (समतल मार्ग, पारिवारिक माहौल)
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└─ असी घाट ────────── सड़क से मात्र 150 मीटर समतल पैदल; सीढ़ियां नहीं; सुबह-ए-बनारस
1. असी घाट (वरिष्ठ नागरिकों व परिवारों के लिए सर्वश्रेष्ठ)
पहुंच: गाड़ियां असी चौराहे या रविंद्रपुरी तक जाती हैं। वहां से मात्र 150 मीटर का समतल पक्का रास्ता है, जहां कोई खड़ी सीढ़ियां नहीं उतरनी पड़तीं।
माहौल: चौड़ा खुला पाट, सुबह-ए-बनारस के वैदिक मंत्रोच्चार, शांतिपूर्ण यज्ञ और स्नान के बाद वस्त्र बदलने हेतु पर्याप्त स्थान।
सलाह: बुजुर्गों के साथ स्नान करने के लिए यह नगर का सबसे सुरक्षित घाट है।
2. दशाश्वमेध व राजेंद्र प्रसाद घाट (मुख्य धार्मिक केंद्र)
पहुंच: बेनियाबाग पार्किंग से बांसफाटक होकर 900 मीटर का पैदल सफर।
माहौल: अत्यधिक भक्तिमय ऊर्जा, हजारों घंटियों की ध्वनि, चौकी पर बैठे तीर्थ पुरोहित और पुलिस के सुरक्षा कॉरिडोर।
कठिनाई: अत्यधिक भीड़भाड़। 40 से अधिक खड़ी और गीली सीढ़ियां, जहां फिसलने का डर रहता है।
3. पंचगंगा घाट (साधना व कल्पवासियों का संगम)
पहुंच: चौखंभा की तरफ से जाने पर 120 से अधिक संकरी व खड़ी सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं।
माहौल: पांच पवित्र गुप्त नदियों (गंगा, यमुना, सरस्वती, किरणा, धूतपापा) का संगम। यहां कल्पवासी और साधु-संत ध्यानमग्न रहते हैं।
सुरक्षित सुझाव: यदि बुजुर्गों को पंचगंगा का पुण्य स्नान कराना हो, तो दशाश्वमेध या असी घाट से निजी नाव लेकर सीधे पंचगंगा की निचली सीढ़ियों पर उतरें; ऊपर गली से पैदल न जाएं।
4. मणिकर्णिका घाट व चक्रपुष्करिणी कुंड (मोक्ष स्नान)
पहुंच: मैदागिन से चौक होकर 750 मीटर पैदल।
माहौल: भगवान विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से खोदे गए चक्रपुष्करिणी कुंड में स्नान व पितृ तर्पण।
सावधानी: कुंड की सीढ़ियां काई और गीलेपन से बहुत फिसलनी होती हैं। बुजुर्ग केवल ऊपर से आचमन लें। दाह संस्कार क्षेत्र की तस्वीरें खींचना पूर्णतः वर्जित है।
5. नमो घाट व राजघाट (गाड़ी से सीधे घाट तक सुगम पहुंच)
पहुंच:शून्य मीटर पैदल। आपकी टैक्सी सीधे नमो घाट के पक्के पार्किंग प्लाजा तक जाती है।
माहौल: आधुनिक स्कल्पचर, स्वच्छ शौचालय, व्हीलचेयर रैंप और बिल्कुल शांत वातावरण।
बोट बाईपास: यहां से निजी मोटरबोट लेकर आप सीधे ललिता घाट (विश्वनाथ धाम गंगा द्वार) या दशाश्वमेध जा सकते हैं, जिससे शहर के जाम से पूरी तरह बचा जा सकता है।
कड़ाके की ठंड व कोहरे से बचाव के नियम
जनवरी के उत्तरार्ध में काशी में सुबह का तापमान 7°C से 10°C के बीच रहता है, और गंगा का जल लगभग 14°C–16°C ठंडा होता है।
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│ पौष पूर्णिमा शीतकालीन सुरक्षा चेकलिस्ट │
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│ [ ] 3-मिनट ड्राई चेंज: पन्नी में पैक सूखे गर्म कपड़े घाट पर साथ रखें। │
│ [ ] ऊनी ग्रिप-जुराबें: विश्वनाथ धाम के 8°C संगमरमर पर जुराबें मान्य हैं। │
│ [ ] कोहरा व नाव सुरक्षा: नाव में लाइफ जैकेट व टॉर्च की मौजूदगी सुनिश्चित करें।│
│ [ ] दोपहर की फ्लाइट: बाबतपुर हेतु 11:30 AM से 03:30 PM वाली फ्लाइट चुनें। │
│ [ ] स्नान बाद तुरंत आहार: 15 मिनट के भीतर गर्म अदरक चाय व चूड़ा-मटर लें। │
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3 मिनट में सूखे कपड़े बदलने का नियम: 8°C की खुली हवा में गीले सूती कपड़ों में खड़े रहने से शरीर तेजी से ठंडा पड़ जाता है। असी व दशाश्वमेध घाट पर बने अस्थायी तंबू में जाकर 3 मिनट के भीतर गीले कपड़े उतारें, शरीर पोंछें और थर्मल इनर पहन लें। गीले कपड़ों को तुरंत वाटरप्रूफ थैली में सील कर दें।
मंदिर फर्श हेतु ऊनी ग्रिप-जुराबें: श्री काशी विश्वनाथ धाम और मां अन्नपूर्णा मंदिर में चमड़े के जूते-चप्पल वर्जित हैं। वहां का संगमरमर का फर्श सुबह 8°C–10°C तक ठंडा रहता है। नंगे पैर चलने पर बुजुर्गों के पैरों में अकड़न हो सकती है। विशेष सलाह: अपने साथ साफ, बिना चमड़े वाली रबड़-ग्रिप ऊनी जुराबें रखें, जिन्हें मंदिर के अंदर पहनकर चलने की पूरी अनुमति है।
गंगा पर सुबह का घना कोहरा: सुबह 05:00 से 08:30 बजे तक नदी में दृश्यता (विजिबिलिटी) 50 मीटर से भी कम हो जाती है। जल पुलिस के सख्त निर्देश हैं कि बिना लाइफ जैकेट और बिना टॉर्च किसी नाव को न चलाया जाए। अत्यधिक कोहरे की स्थिति में सुबह 07:15 बजे के बाद ही नौकायन करें।
बाबतपुर एयरपोर्ट फ्लाइट में कोहरा बफर: सुबह के समय कोहरे के कारण बाबतपुर हवाई अड्डे पर उड़ानों में देरी हो सकती है। कोशिश करें कि आपकी फ्लाइट दोपहर 11:30 बजे से 03:30 बजे के बीच लैंड करे। यदि ट्रेन से आ रहे हैं, तो कैंट (BSB) या बनारस स्टेशन से होटल तक सुबह के सफर हेतु 1 घंटे का अतिरिक्त समय मानकर चलें।
वाहन कहां तक जाएगा? ड्रॉप गेट्स व पैदल दूरी
पौष पूर्णिमा पर नगर के मध्यवर्ती क्षेत्र (गोदौलिया से दशाश्वमेध और मैदागिन से चौक) में सुबह 05:00 बजे से रात 09:00 बजे तक चौपहिया वाहनों और ऑटो का प्रवेश वर्जित रहता है।
निजी कैब और टैक्सियां प्रशासन द्वारा निर्धारित बाहरी पार्किंग स्थलों पर यात्रियों को छोड़ती हैं:
बाहरी पार्किंग / ड्रॉप गेट
गंतव्य तक पैदल मार्ग
दूरी व समय
किसके लिए सबसे सही
बेनियाबाग मल्टी-लेवल पार्किंग
बांसफाटक होकर विश्वनाथ गेट 4 व दशाश्वमेध घाट
700–900 मीटर (10–12 मिनट)
काशी विश्वनाथ दर्शन, दशाश्वमेध स्नान
मैदागिन मल्टी-लेवल पार्किंग
चौक होकर विश्वनाथ गेट 1, काल भैरव व बड़ा गणेश
450–850 मीटर (6–10 मिनट)
काल भैरव दर्शन, चौखंभा खानपान गली
असी चौराहा / रविंद्रपुरी
सीधा समतल चौड़ा मार्ग, सीधे असी घाट की सीढ़ियों तक
150 मीटर (मात्र 2 मिनट)
वरिष्ठ नागरिक, सुबह का गंगा स्नान, योग
नमो घाट पार्किंग प्लाजा
गाड़ी सीधे नदी तट पर लगती है; पैदल चलना शून्य
0 मीटर (डोरस्टेप ड्रॉप)
व्हीलचेयर वाले यात्री, नाव से विश्वनाथ धाम जाना
🪔 पौष पूर्णिमा व शाकंभरी जयंती 2027: गंगा स्नान बोट, कैब व प्रयागराज संगम यात्रा
पौष पूर्णिमा एवं माघ मास स्नान संकल्प (शुक्रवार, 22 जनवरी 2027) हेतु काशी आ रहे हैं? सत्यापित सनराइज प्राइवेट बोट, एयरपोर्ट/स्टेशन कैब, मंदिर दर्शन हेतु फुल-डे वाहन और प्रयागराज माघ मेला शाही स्नान ट्रांसफर बिना किसी पीक सर्ज के निश्चित दरों पर बुक करें।
बाबतपुर एयरपोर्ट (₹899) व कैंट स्टेशन (₹650) से घाट ड्रॉप — 45 मिनट शीतकालीन कोहरा ट्रैकिंग सहित
ERP-सत्यापित निजी सूर्योदय स्नान नाव (₹3,500 में 6 सवारी / ₹4,500 में 15 सवारी) — लाइफ जैकेट व घाट सुरक्षा सहित
₹2,499 में 8h/80km समर्पित एसी कैब — श्री काशी विश्वनाथ, मां अन्नपूर्णा व संकटा देवी दर्शन हेतु
₹3,500 में प्रयागराज त्रिवेणी संगम शाही स्नान राउंड-ट्रिप (6-लेन NH-19, टोल व ड्राइवर खर्च सहित)
₹500 श्री काशी विश्वनाथ सुलभ दर्शन सहायता (₹300 ट्रस्ट रसीद + ₹200 सेवा शुल्क)
🌅 सूर्योदय स्नान नाव ₹3,500·🚗 एयरपोर्ट पिकअप ₹899·🌊 प्रयागराज संगम कैब ₹3,500·🛡️ पारदर्शी लिखित किराया
एक दिवसीय यात्रा: प्रयागराज माघ मेला शाही स्नान
चूंकि पौष पूर्णिमा (22 जनवरी 2027) को ही प्रयागराज माघ मेले का प्रथम प्रमुख शाही स्नान व कल्पवास प्रारंभ होता है, अतः अनेक भक्त काशी में रुककर एक ही दिन में प्रयागराज जाकर लौट आते हैं।
03:30 AM 06:30 AM 10:00 AM 02:30 PM 05:30 PM
वाराणसी होटल से प्रयागराज मेला लेटे हुए बड़े हनुमान जी सिविल लाइंस में दोपहर वाराणसी वापसी
कैब प्रस्थान ──────────► पार्किंग आगमन ────────► व अलोपी देवी दर्शन ────► का भोजन व वापसी ─────► होटल / गंगा आरती
(125 किमी NH-19) (त्रिवेणी संगम स्नान) (ऐतिहासिक मंदिर) (हाईवे सफर) (शाम का विश्राम)
राजमार्ग स्थिति: वाराणसी से प्रयागराज को जोड़ने वाला 6-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) अत्यंत सुगम है (दूरी 125 किमी)। सुबह के समय यह दूरी 2.5 से 3 घंटे में तय हो जाती है।
मेला पार्किंग से संगम: पौष पूर्णिमा के दिन प्रयागराज में गाड़ियां बाहरी पार्किंग (अड़ैल या झूसी छोर) पर रोकी जाती हैं। वहां से पांटून पुल या लोहे की प्लेटों से बने पीपे के रास्तों पर 1.5 से 2 किमी पैदल चलकर संगम स्नान किया जाता है।
निजी कैब का लाभ: अपनी आरक्षित कैब होने से परिवार के बुजुर्गों के सूखे गर्म कपड़े, जूते और दवाइयां गाड़ी में सुरक्षित रहती हैं और स्नान के तुरंत बाद हीटर ऑन करके गर्म गाड़ी में आराम मिल जाता है।
पौष पूर्णिमा पर काशी का प्रामाणिक शीतकालीन खानपान
प्रातःकालीन गंगा स्नान और दर्शन के उपरांत काशी के प्रसिद्ध शीतकालीन जायके का आनंद अवश्य लें:
काशी का मलइयो (चौखंभा व ठठेरी बाजार): काशी का विश्वप्रसिद्ध विंटर डिलाइट। रातभर खुले ओस में रखी ताजी झाग, केसर, इलायची और पिस्ते से सजी मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी जाती है (उपलब्धता: केवल सुबह 06:00 से 11:30 बजे तक)।
चूड़ा-मटर: ताजी हरी मटर को देसी घी, हींग, अदरक और गरम मसाले में भूनकर पोहे के साथ तैयार किया जाने वाला बनारसी नाश्ता। दशाश्वमेध के पास मधुर मिलन या ठठेरी बाजार में राम भंडार पर चखें।
शाकंभरी भोग खिचड़ी: शाकंभरी जयंती के उपलक्ष्य में मंदिरों और भंडारों में मूंग दाल की गरमा-गरम सात्विक खिचड़ी और पंचमेल तरकारी का प्रसाद मिलता है।
कुल्हड़ वाली अदरक चाय: घाट से निकलते ही हर नुक्कड़ पर मिलने वाली गाढ़ी, कुल्हड़ वाली चाय स्नान के बाद शरीर में तुरंत ऊर्जा भर देती है।
पारदर्शी ट्रांसपोर्ट व सेवा दरें
नीचे हमारी अधिकृत फिक्स्ड दरें दी गई हैं। इनमें किसी भी प्रकार का पीक-सर्ज या छिपा हुआ शुल्क शामिल नहीं है:
संयुक्त परिवार हेतु निजी व्यवस्था; घाट की सीढ़ियों पर नो-मोलभाव।
निजी सूर्योदय नाव (30 सवारी तक)
2 घंटे का बड़ा डबल-डेकर बजरा
₹6,500
समूह हेतु गद्देदार सीटिंग व खुला ऊपरी डेक।
श्री काशी विश्वनाथ सुलभ दर्शन
प्रति व्यक्ति सुगम दर्शन व्यवस्था
₹500
₹300 मंदिर ट्रस्ट की अधिकृत रसीद + ₹200 लॉकर/जूता सेवा सहायता।
प्रामाणिकता नोट: नाव और दर्शन की दरें 13 अक्टूबर 2026 को मान्य data/erpServicePricing.json के अनुरूप हैं। कैब का किराया data/localPricing.json के अनुसार तय है।
पौष पूर्णिमा हेतु 1-दिवसीय आदर्श यात्रा कार्यक्रम
05:15 AM 07:30 AM 10:30 AM 02:00 PM 05:30 PM
प्रातःकालीन गंगा स्नान बनारसी नाश्ता श्री काशी विश्वनाथ धाम मां अन्नपूर्णा व सायंकालीन दीपदान
असी या दशाश्वमेध घाट ──► चौखंभा मलइयो व ──► सुलभ दर्शन ──► विशालाक्षी शाक दान ──► व गंगा आरती
(ब्रह्म मुहूर्त स्नान) चूड़ा-मटर (बेनियाबाग से गेट 4) (सब्जी दान परंपरा) (असी या दशाश्वमेध)
सुबह 05:15 – 06:30: असी घाट पहुंचें या अपनी पहले से बुक नाव पर सवार हों। तीन डुबकी लगाकर सूर्य देव को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें और 3 मिनट में सूखे गर्म कपड़े पहन लें।
सुबह 07:30 – 09:00: चौखंभा या ठठेरी बाजार की गलियों में जाकर ताजे केसरिया मलइयो, खस्ता कचौड़ी और अदरक वाली कुल्हड़ चाय का आनंद लें।
सुबह 10:00 – 12:30: बेनियाबाग पार्किंग से बांसफाटक मार्ग होकर श्री काशी विश्वनाथ धाम गेट 4 पहुंचें और सुलभ दर्शन का लाभ लें।
दोपहर 01:30 – 03:30: मां अन्नपूर्णा मंदिर और मां विशालाक्षी शक्तिपीठ जाकर शाकंभरी जयंती पर मौसमी हरी सब्जियों का शाक दान करें।
शाम 05:15 – 06:45: घाट पर आकर पूर्णिमा के चंद्रोदय पर अर्घ्य दें, गंगा में दीपदान करें और दशाश्वमेध या असी घाट की दिव्य संध्या गंगा आरती का दर्शन करें।
🪔 पौष पूर्णिमा व शाकंभरी जयंती 2027: गंगा स्नान बोट, कैब व प्रयागराज संगम यात्रा
पौष पूर्णिमा एवं माघ मास स्नान संकल्प (शुक्रवार, 22 जनवरी 2027) हेतु काशी आ रहे हैं? सत्यापित सनराइज प्राइवेट बोट, एयरपोर्ट/स्टेशन कैब, मंदिर दर्शन हेतु फुल-डे वाहन और प्रयागराज माघ मेला शाही स्नान ट्रांसफर बिना किसी पीक सर्ज के निश्चित दरों पर बुक करें।
बाबतपुर एयरपोर्ट (₹899) व कैंट स्टेशन (₹650) से घाट ड्रॉप — 45 मिनट शीतकालीन कोहरा ट्रैकिंग सहित
ERP-सत्यापित निजी सूर्योदय स्नान नाव (₹3,500 में 6 सवारी / ₹4,500 में 15 सवारी) — लाइफ जैकेट व घाट सुरक्षा सहित
₹2,499 में 8h/80km समर्पित एसी कैब — श्री काशी विश्वनाथ, मां अन्नपूर्णा व संकटा देवी दर्शन हेतु
₹3,500 में प्रयागराज त्रिवेणी संगम शाही स्नान राउंड-ट्रिप (6-लेन NH-19, टोल व ड्राइवर खर्च सहित)
₹500 श्री काशी विश्वनाथ सुलभ दर्शन सहायता (₹300 ट्रस्ट रसीद + ₹200 सेवा शुल्क)