वेदव्यास मेला 2027 रामनगर किला: व्यास मंदिर दर्शन, तिथियां व यात्रा गाइड
वाराणसी में पीढ़ियों से एक लोक-कहावत प्रचलित है: "काशी यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाती, जब तक रामनगर में व्यास मंदिर के दर्शन न हो जाएं।"
अधिकतर यात्री काशी आते हैं तो उनका ध्यान केवल पश्चिमी तट के 84 घाटों, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और शाम की गंगा आरती तक सीमित रहता है। लेकिन गंगा नदी के पार पूर्वी तट पर एक ऐसा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक तीर्थ विद्यमान है, जिसके दर्शन के बिना शास्त्रों में संपूर्ण काशी यात्रा को अपूर्ण बताया गया है—रामनगर किले में स्थित व्यास मंदिर एवं वार्षिक वेदव्यास मेला।
हिंदू पंचांग के अनुसार पवित्र माघ मास (जनवरी–फरवरी) के दौरान और विशेष रूप से माघ मास के प्रत्येक सोमवार (माघ सोमवारी) को यहां ऐतिहासिक मेला लगता है। इस मेले में पूर्वांचल, बिहार और देश भर से हजारों श्रद्धालु गंगा पार कर महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास और व्यासेश्वर महादेव के दर्शन हेतु पहुंचते हैं।
चाहे आप सामने घाट पुल के रास्ते निजी एसी कैब से जाना चाहें या अस्सी घाट से लकड़ी की पारंपरिक बजरा बोट किराए पर लेकर सीधे किले के जल-द्वार पर उतरना चाहें, यह व्यावहारिक गाइड आपको वर्ष 2027 की प्रमाणित तिथियां, मंदिर समय, किले के रहस्य और खानपान से जुड़ी संपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराती है।
एक नज़र में: वेदव्यास मेला 2027
विवरण
तथ्य / व्यावहारिक जानकारी
मुख्य स्थल
श्री वेदव्यास मंदिर, रामनगर किले का दक्षिणी परकोटा, गंगा नदी का पूर्वी तट, रामनगर, वाराणसी
2027 के मुख्य दिन
माघ मास के चारों सोमवार: 25 जनवरी, 1 फरवरी, 8 फरवरी और 15 फरवरी 2027
प्रारंभिक स्नान
पौष पूर्णिमा (शुक्रवार, 22 जनवरी 2027)
मंदिर दर्शन समय
सुबह 05:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक | शाम 03:30 बजे से 07:30 बजे तक
व्यास मंदिर प्रवेश शुल्क
₹0 (पूर्णतः निःशुल्क)
किला संग्रहालय टिकट
भारतीय वयस्क: ₹75–₹80, बच्चे (5–12 वर्ष): ₹20, विदेशी पर्यटक: ₹200
सुगम आवागमन साधन
सामने घाट पुल मार्ग से एसी कैब (अस्सी से 15–20 मिनट) अथवा अस्सी घाट से प्राइवेट बोट चार्टर
पैदल दूरी
पार्किंग प्लाजा से किले के प्रवेश द्वार तक मात्र 50–100 मीटर समतल पक्का रास्ता
प्रसिद्ध खानपान
शिव प्रसाद लस्सी भंडार (कुल्हड़ रबड़ी-मलाई लस्सी) एवं रामनगर का असली लाल पेड़ा
पौराणिक कथा: व्यास काशी के दर्शन बिना काशी यात्रा अधूरी क्यों?
व्यास मंदिर का धार्मिक इतिहास स्कंद पुराण के 'काशी खंड' में विस्तार से वर्णित है।
शास्त्रों के अनुसार, वेदों के संकलनकर्ता, 18 महापुराणों, महाभारत और ब्रह्मसूत्र के रचयिता महर्षि वेदव्यास एक बार अपने 10,000 शिष्यों के साथ काशी पधारे। महर्षि के त्याग, धैर्य और आध्यात्मिक समत्व की परीक्षा लेने हेतु भगवान शिव और माता पार्वती ने एक लीला रची। पूरे सात दिनों तक काशी के किसी भी गृहस्थ ने महर्षि या उनके भूखे शिष्यों को भिक्षा नहीं दी।
भूख से व्याकुल शिष्यों की दशा देखकर महर्षि वेदव्यास क्रोधित हो गए। उन्होंने गंगाजल हाथ में लेकर काशी को त्रिविध श्राप (ज्ञान, धन और मोक्ष से विहीन होने का श्राप) देने हेतु हाथ उठाया। उसी क्षण जगज्जननी माता पार्वती एक वृद्ध ब्राह्मणी के रूप में प्रकट हुईं। उन्होंने व्यास जी को पुकारा और अपने घर में उन्हें तथा उनके सभी शिष्यों को अमृततुल्य दिव्य भोजन कराकर तृप्त कर दिया।
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│ महर्षि वेदव्यास 10,000 शिष्यों सहित │
│ काशी आगमन │
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│ 7 दिनों तक भिक्षा न मिलना: भूख की परीक्षा │
│ माता अन्नपूर्णा द्वारा दिव्य महाभोग अर्पण │
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│ भगवान शिव द्वारा क्रोध के कारण निष्कासन │
│ अविमुक्त क्षेत्र से "काशी से निष्कासन" │
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│ गंगा पार "व्यास काशी" (रामनगर) की स्थापना │
│ व्यासेश्वर महादेव शिवलिंग की स्थापना │
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│ भगवान शिव का अमर वरदान: │
│ "व्यास दर्शन बिना काशी तीर्थ निष्फल रहेगा!" │
│ माघ मास में पूरे माह दर्शन का विधान │
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इसके उपरांत भगवान विश्वनाथ वहां प्रकट हुए और उन्होंने महर्षि व्यास को कड़ी फटकार लगाई: जो मुनि क्रोध पर नियंत्रण न रख सके, उसका मोक्ष की नगरी काशी में कोई स्थान नहीं। शिव जी ने आदेश दिया: "काशी से निष्कासन"। महर्षि व्यास को अविमुक्त क्षेत्र की सीमा से बाहर जाने का दंड दिया गया।
महर्षि व्यास अत्यंत लज्जित और दुखी होकर गंगा के उस पार पूर्वी तट पर आ गए। इस स्थान पर उन्होंने अपनी कुटिया बनाई, जिसे 'व्यास काशी' कहा गया। वहां उन्होंने 'व्यासेश्वर महादेव' नाम से शिवलिंग स्थापित किया और घोर तपस्या करने लगे।
व्यास जी के पश्चाताप से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें वरदान दिया कि वे प्रत्येक अष्टमी, चतुर्दशी और पूरे माघ मास में काशी के आध्यात्मिक फल के सहभागी होंगे। साथ ही शिव जी ने यह शाश्वत नियम निर्धारित किया:
"जो कोई भी काशी यात्रा पर आएगा, उसकी यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाएगी जब तक वह गंगा पार व्यास काशी आकर महर्षि वेदव्यास के चरणों में प्रणाम न करे।"
सन् 1750 में काशी नरेश महाराजा बलवंत सिंह ने रामनगर किले का निर्माण कराते समय किले के दक्षिणी परकोटे पर बलुआ पत्थरों से इस भव्य व्यास मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। आज मंदिर के गर्भगृह में तीन विग्रह पूजे जाते हैं: महर्षि वेदव्यास की श्याम शिला प्रतिमा, व्यासेश्वर महादेव शिवलिंग और भगवान श्री गणेश।
वर्ष 2027 के लिए माघ सोमवार तिथियां व मेला पंचांग
रामनगर में वेदव्यास मेला पूरे माघ मास में चलता है, लेकिन स्थानीय और दूर-दराज के श्रद्धालुओं का मुख्य जमावड़ा माघ मास के सोमवार को होता है।
माघ सोमवारी मेला कैलेंडर 2027
पौष पूर्णिमा (शुक्रवार, 22 जनवरी 2027) — मेला एवं कल्पवास आरंभ:
इस दिन से माघ स्नान का संकल्प लिया जाता है। सुबह गंगा स्नान कर श्रद्धालु व्यास मंदिर में दर्शन कर महीने भर के नियम प्रारंभ करते हैं।
प्रथम माघ सोमवार (सोमवार, 25 जनवरी 2027) — सकट चौथ का विशेष संयोग:
माघ कृष्ण चतुर्थी (सकट चौथ) के पावन दिन पहला सोमवार पड़ेगा। इस दिन महिलाएं संतान के दीर्घायु व्रत के साथ व्यास मंदिर और व्यासेश्वर महादेव का जलाभिषेक करेंगी।
द्वितीय माघ सोमवार (सोमवार, 1 फरवरी 2027) — षटतिला एकादशी का योग:
इस दिन गंगा तट पर तिल-दान और मंदिर प्रांगण में पुराण कथा श्रवण का विशेष महत्व माना गया है।
तृतीय माघ सोमवार (सोमवार, 8 फरवरी 2027) — गुप्त नवरात्रि प्रारंभ:
साधु-संतों और तांत्रिक साधकों की विशेष उपस्थिति रहती है, जो किले के भीतर स्थित छिन्नमस्ता मंदिर और व्यास मंदिर दोनों में पूजन करते हैं।
चतुर्थ माघ सोमवार (सोमवार, 15 फरवरी 2027) — भीष्म अष्टमी व प्रधान मेला:
यह पूरे महीने का सबसे विशाल मेला दिवस होता है। ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से भारी भीड़ उमड़ती है और किले के बाहर विशाल हाट-बाजार सजता है।
माघ पूर्णिमा (शनिवार, 20 फरवरी 2027) — माघ स्नान पूर्णाहुति:
माघ मास का अंतिम स्नान पर्व, जो संत गुरु रविदास जयंती के पावन अवसर पर संपन्न होता है।
यातायात सूचना: यद्यपि मेले की तिथियां पंचांग द्वारा प्रमाणित हैं, किंतु वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट और रामनगर प्रशासन द्वारा प्रत्येक सोमवार के लिए विशिष्ट वन-वे रूट और बैरिकेडिंग का आदेश लगभग 48 से 72 घंटे पूर्व जारी किया जाता है।
वाराणसी शहर से रामनगर किला: कैब बनाम नौका मार्ग
वाराणसी से रामनगर पहुंचने के लिए दो प्रमुख मार्ग हैं, और अपनी सुविधा के अनुसार सही विकल्प चुनना आपकी यात्रा को आरामदायक बना देता है।
पश्चिमी तट (मुख्य वाराणसी शहर) पूर्वी तट (रामनगर)
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│ दशाश्वमेध / अस्सी घाट │ │ रामनगर किला पार्किंग │
│ होटल व रेलवे स्टेशन │ │ (पैदल दूरी: मात्र 50m)│
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सड़क मार्ग │ सामने घाट पुल से (मात्र 15-20 मिनट) │
(एसी कैब) └─────────────────────────────────────────────┘
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जल मार्ग │ प्राइवेट बोट की सवारी (25-30 मिनट)
(गंगा बोट) └─────────────────────────────────────────────► रामनगर किला घाट
(सीढ़ियां: ~40 कदम)
विकल्प 1: सामने घाट पुल मार्ग से निजी एसी कैब (परिवारों व बुजुर्गों हेतु सर्वोत्तम)
कुछ वर्ष पूर्व तक रामनगर जाने के लिए राजघाट स्थित पुराने मालवीय पुल का लंबा चक्कर काटना पड़ता था। किंतु वर्ष 2018 में सामने घाट पुल (लंका/बीएचयू से रामनगर) चालू होने के बाद यह दूरी बेहद कम हो गई है।
दूरी व समय: अस्सी घाट/लंका से मात्र 5.5 किमी (15 से 20 मिनट); वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन से लगभग 14 किमी (35 से 45 मिनट); बाबतपुर एयरपोर्ट से लगभग 36 किमी।
गाड़ी कहां छोड़ेगी: गोदौलिया की तरह यहां 1 किमी पहले बैरिकेड नहीं होता। निजी कैब सीधे रामनगर किले के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर स्थित पक्के पार्किंग मैदान तक जाती है।
पैदल दूरी: पार्किंग से किले के मुख्य 'सिंह द्वार' और व्यास मंदिर तक मात्र 50 से 100 मीटर समतल पक्का रास्ता है।
सुविधा: समर्पित हाफ-डे अथवा फुल-डे कैब में आपका सामान, गर्म कपड़े व जूते सुरक्षित बंद रहते हैं और ड्राइवर पार्किंग में आपकी प्रतीक्षा करता है।
विकल्प 2: गंगा पार प्राइवेट बोट चार्टर (नौका यात्रा — रमणीक व पारंपरिक)
गंगा के जलमार्ग से नौका द्वारा व्यास काशी पहुंचना बनारस की सबसे पुरानी और सुंदर परंपरा है।
कहा से बैठें: अस्सी घाट (सबसे नजदीक, लगभग 2.5 किमी जलमार्ग) अथवा दशाश्वमेध घाट (लगभग 4.5 किमी जलमार्ग)।
अनुभव: आप पश्चिमी तट के 84 घाटों की छटा देखते हुए गंगा की मुख्य धारा पार करते हैं। सामने रामनगर किले के विशाल बलुआ पत्थरों वाले बुर्ज पानी से उठते हुए दिखाई देते हैं।
उतरने का स्थान: बोट सीधे रामनगर किला घाट पर रुकती है।
सीढ़ियों का ध्यान रखें: पानी के किनारे से व्यास मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 35 से 45 चौड़ी पत्थर की सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। यदि आपके साथ चलने में असमर्थ बुजुर्ग हैं, तो सड़क मार्ग से कैब का विकल्प ही चुनें।
लाइसेंसी बोट किराया: अधिकृत ईआरपी दर तालिका के अनुसार 1.5 से 2 घंटे की वेटिंग सहित प्राइवेट बोट का किराया ₹3,500 (अधिकतम 6 यात्री), ₹4,500 (अधिकतम 15 यात्री) और ₹6,500 (अधिकतम 30 यात्री) है।
विकल्प 3: साझा विक्रम ऑटो (बजट यात्रियों हेतु)
लंका (बीएचयू सिंह द्वार) से रामनगर चौक के बीच साझा विक्रम और ई-रिक्शा चलते हैं (किराया ₹20 से ₹30 प्रति सवारी)। किंतु माघ सोमवार के दिन इनमें अत्यधिक भीड़ होती है, इसलिए परिवार या सामान के साथ यह उपयुक्त नहीं है।
🏰 वेदव्यास मेला 2027: रामनगर किला कैब, बोट बुकिंग व मंदिर दर्शन
माघ मास के पवित्र वेदव्यास मेला एवं व्यास मंदिर दर्शन हेतु रामनगर आ रहे हैं? नगर के पुलों के जाम से बचें और आरामदायक यात्रा करें। हम ₹1,600 में 4 घंटे/40 किमी समर्पित एसी कैब, अस्सी/दशाश्वमेध से रामनगर किला घाट हेतु ₹3,500 से प्राइवेट बोट, ₹899 से एयरपोर्ट पिकअप और ₹500 सुलभ दर्शन सहायता बिना किसी पीक सर्ज के उपलब्ध कराते हैं।
₹1,600 सेडान / ₹2,000 अर्टिगा — रामनगर किला, व्यास मंदिर व दुर्गा मंदिर हेतु 4 घंटे/40 किमी समर्पित एसी कैब
अस्सी अथवा दशाश्वमेध घाट से सीधे रामनगर किला घाट तक प्राइवेट बोट चार्टर (₹3,500 अधिकतम 6 यात्री / ₹4,500 अधिकतम 15 यात्री)
🏰 रामनगर कैब ₹1,600 से·🛶 किला घाट प्राइवेट बोट ₹3,500·✈️ एयरपोर्ट पिकअप ₹899·🛡️ पारदर्शी लिखित किराया व ज़ीरो सर्ज
रामनगर किले के अन्य आकर्षण: व्यास मंदिर के अलावा क्या देखें?
व्यास मंदिर के दर्शन के पश्चात लगभग 1 से 1.5 घंटे का समय निकालकर रामनगर किले के अन्य ऐतिहासिक हिस्सों का भ्रमण अवश्य करें।
1. सरस्वती भवन (शाही संग्रहालय)
किले के भीतर स्थित यह संग्रहालय बनारस राजघराने के समृद्ध इतिहास का सजीव प्रमाण है:
विंटेज कार संग्रह: 1927 की दुर्लभ कैडिलैक, पैकर्ड और पूर्व काशी नरेशों द्वारा उपयोग की गई खुली लग्जरी गाड़ियां।
शाही शस्त्रागार: पुरानी मैचलॉक बंदूकें, हाथीदांत की मूठ वाले कटार, दोमुंही तलवारें और प्राचीन 'बाघ-नख'।
पालकियां व हौदे: चांदी, सोने और हाथीदांत की नक्काशी वाली ऐतिहासिक पालकियों का संग्रह, जिनका उपयोग ऐतिहासिक रामनगर रामलीला के दौरान किया जाता है।
2. सन् 1852 की प्रसिद्ध खगोलीय घड़ी (धरम घड़ी)
किले के एक ऊंचे बुर्ज पर स्थापित यह घड़ी भारतीय विज्ञान और कारीगरी का अनुपम उदाहरण है। इसे सन् 1852 में राज ज्योतिषी व शिल्पकार बी. मूलचंद द्वारा निर्मित किया गया था। यह अद्भुत घड़ी दर्शाती है:
मानक समय (घंटा, मिनट, सेकंड)
सप्ताह का दिन और वर्तमान माह
खगोलीय नक्षत्र और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय
चंद्रमा की कलाएं (तिथि)
सूर्य व ग्रहों की राशि स्थिति
3. किले का गंगा-तट परकोटा
व्यास मंदिर के प्रांगण से बाहर निकलते ही किले की प्राचीर से गंगा का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। यहां से अस्सी घाट और तुलसी घाट के मंदिर सूर्य की रोशनी में अत्यंत मनोहारी दिखाई पड़ते हैं।
रामनगर का खानपान: कुल्हड़ वाली लस्सी और असली लाल पेड़ा
रामनगर आकर दो विशिष्ट बनारसी स्वादों का आनंद लिए बिना यात्रा कभी पूरी नहीं होती।
रामनगर फूड ट्रेल
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│ शिव प्रसाद लस्सी भंडार │ │ रामनगर का असली लाल पेड़ा │
│ किला द्वार के ठीक बाहर (50m) │ │ किला बाजार की मिष्ठान दुकानें │
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│ • पारंपरिक मथानी से मथा गाढ़ा दही │ │ • धीमी आंच पर घंटों भुना भैंस मावा│
│ • मोटी मलाई व रबड़ी की परत │ │ • गहरा लाल-भूरा कैरेमल स्वाद │
│ • मिट्टी के भारी कुल्हड़ व गुलाबजल│ │ • ताजी पिसी हरी इलायची की सुगंध │
│ • ₹60 से ₹90 प्रति कुल्हड़ │ │ • 2 से 3 सप्ताह तक सुरक्षित │
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शिव प्रसाद लस्सी भंडार
किले के मुख्य फाटक से बाहर निकलते ही मात्र 50 मीटर की दूरी पर स्थित यह दुकान दशकों से चल रही है। यहां लस्सी को बिजली के मिक्सी से नहीं, बल्कि लकड़ी की पारंपरिक मथानी से मथा जाता है। मिट्टी के भारी कुल्हड़ में गाढ़ी लस्सी डालने के बाद ऊपर से मलाईदार रबड़ी का बड़ा टुकड़ा, दूध की मोटी मलाई और हल्का सा गुलाबजल डाला जाता है। इसे पीने से पहले लकड़ी के चम्मच से ऊपर की रबड़ी खानी पड़ती है।
रामनगर का अनोखा लाल पेड़ा
मथुरा के सफेद पेड़े या शहर के खोवा पेड़ों के विपरीत, रामनगर का 'लाल पेड़ा' अपनी अलग पहचान रखता है। यहां शुद्ध भैंस के दूध से बने मावे को कोयले की धीमी आंच पर घंटों तक लगातार भुना जाता है, जिससे मावे की प्राकृतिक शर्करा कैरेमेलाइज होकर गहरे लाल-भूरे रंग में बदल जाती है। इसमें ताजी हरी इलायची मिलाई जाती है। अच्छी तरह भुने होने के कारण यह पेड़ा बिना फ्रिज के भी 20 से 25 दिनों तक खराब नहीं होता, जिससे इसे घर ले जाना बहुत आसान है।
वरिष्ठ नागरिकों और परिवारों के लिए जरूरी सुझाव
शहर की गलियों से कहीं अधिक आसान: यदि आपके साथ बुजुर्ग माता-पिता हैं जो गोदौलिया की 1 किमी लंबी भीड़भरी गलियों में पैदल नहीं चल सकते, तो रामनगर उनके लिए सबसे सुखद विकल्प है। गाड़ी सीधे किले के गेट के पास रुकती है और चलना बहुत कम पड़ता है।
बोट की सीढ़ियों का ध्यान रखें: यदि आप नौका मार्ग से आ रहे हैं, तो ध्यान रखें कि रामनगर किला घाट पर लगभग 40 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। सुबह के समय पानी के छींटों से सीढ़ियां नम हो सकती हैं। घुटनों के दर्द से परेशान बुजुर्गों के लिए सड़क मार्ग से कैब ही सर्वश्रेष्ठ है।
दर्शन का सबसे शांत समय: माघ सोमवार के दिन सुबह 07:30 बजे से 09:30 बजे के बीच अथवा दोपहर 02:30 बजे से 04:30 बजे के बीच दर्शन अत्यंत सुगमता से हो जाते हैं। दोपहर 12:30 से 03:30 बजे तक गर्भगृह भोग आरती हेतु बंद रहता है।
ठंडे फर्श से बचाव: मंदिर परिसर में जूते बाहर उतारने होते हैं। जनवरी और फरवरी के महीनों में सुबह का फर्श ठंडा (10°C–14°C) रहता है। बुजुर्गों के लिए ग्रिप वाले साफ ऊनी मोजे अवश्य साथ रखें।
कोहरे की सावधानी: जनवरी के अंतिम सप्ताह में सुबह नदी पर घना कोहरा हो सकता है। यदि आप बोट से जाने की योजना बना रहे हैं, तो सुबह 07:30 बजे के बाद ही निकलें ताकि धूप निकलने पर दृश्यता स्पष्ट रहे।
पारदर्शी ट्रांसपोर्ट एवं बोट सेवा दरें (फिक्स्ड रेट्स)
आपकी यात्रा के सटीक बजट हेतु काशी टैक्सी की अधिकृत, बिना किसी पीक सर्ज वाली दरें नीचे दी गई हैं:
रामनगर किला व व्यास मंदिर दर्शन कैब दरें
वाहन श्रेणी
बैठने की क्षमता
हाफ-डे यात्रा (4 घंटे / 40 किमी)
फुल-डे यात्रा (8 घंटे / 80 किमी)
एयरपोर्ट पिकअप (VNS)
किसके लिए उपयुक्त
सेडान (डिजायर / इटिओस)
1 से 4 यात्री
₹1,600
₹2,499
₹899
युगल, छोटे परिवार, एकल यात्री
अर्टिगा (एसी एमयूवी)
1 से 6 यात्री
₹2,000
₹2,800
₹1,299
परिवार, सामान व बुजुर्गों सहित
इनोवा क्रिस्टा (प्रीमियम)
1 से 6–7 यात्री
₹2,800
₹3,800
₹1,800
आरामदायक व झटके-रहित यात्रा
17-सीटर टेम्पो ट्रैवलर
10 से 16 यात्री
₹3,200
₹4,250
₹2,500
बड़ा परिवार, तीर्थ यात्री समूह
सभी कैब किरायों में एसी गाड़ी, अनुभवी स्थानीय सारथी, ईंधन व रामनगर किला पार्किंग शुल्क शामिल है। कोई अतिरिक्त या छिपा हुआ शुल्क नहीं।
अधिकृत बोट चार्टर एवं दर्शन सहायता शुल्क
सेवा का प्रकार
समूह क्षमता
अधिकृत शुल्क
प्रमुख सुविधाएं
प्राइवेट बोट (अस्सी से किला घाट)
1 से 6 यात्री
₹3,500
अस्सी घाट से राउंड-ट्रिप, लाइफ जैकेट, किले पर 1.5 घंटे वेटिंग
मीडियम ग्रुप बोट चार्टर
7 से 15 यात्री
₹4,500
राउंड-ट्रिप यात्रा, बोट स्टाफ सहायता, 84 घाटों का विहंगम दृश्य
लार्ज ग्रुप बजरा बोट
16 से 30 यात्री
₹6,500
बड़ा खुला बजरा, आरामदायक बैठक, छायादार छत
सुलभ दर्शन सहायता (विश्वनाथ धाम)
प्रति व्यक्ति
₹500
₹300 आधिकारिक ट्रस्ट टिकट + ₹200 व्यक्तिगत गाइडेंस
सुझाई गई 1-दिवसीय एवं 2-दिवसीय यात्रा योजना
1-दिवसीय संपूर्ण काशी यात्रा सर्किट (एक्सप्रेस प्लान)
सुबह 07:30 बजे: होटल से एसी कैब द्वारा प्रस्थान।
सुबह 08:00 – 10:00 बजे: श्री काशी विश्वनाथ धाम सुलभ दर्शन (गेट 4) एवं माता अन्नपूर्णा मंदिर दर्शन।
सुबह 10:30 बजे: लंका में कचौड़ी-जलेबी का पारंपरिक नाश्ता।
सुबह 11:15 बजे: सामने घाट पुल पार कर 15 मिनट में रामनगर किला आगमन।
सुबह 11:30 – दोपहर 01:30 बजे: श्री वेदव्यास मंदिर व व्यासेश्वर महादेव दर्शन, तत्पश्चात सरस्वती भवन शाही संग्रहालय का भ्रमण।
दोपहर 01:30 – 02:15 बजे: शिव प्रसाद लस्सी भंडार पर रबड़ी लस्सी का आनंद और रामनगर का असली लाल पेड़ा खरीद।
दोपहर 02:30 बजे: कैब द्वारा अस्सी घाट वापसी; शाम को अस्सी से दशाश्वमेध हेतु सूर्यास्त नौका विहार व विश्वप्रसिद्ध शाम की गंगा आरती दर्शन।
2-दिवसीय विस्तृत सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक योजना
पहला दिन: काशी विश्वनाथ धाम, अन्नपूर्णा मंदिर, काल भैरव हाजिरी दर्शन, नौका विहार द्वारा 84 घाटों का अवलोकन और दशाश्वमेध गंगा आरती।
दूसरा दिन: सुबह अस्सी घाट पर 'सुबह-ए-बनारस' प्रभाती दर्शन। बीएचयू स्थित नया विश्वनाथ मंदिर (बिरला मंदिर) एवं संकट मोचन हनुमान मंदिर दर्शन। दोपहर में सामने घाट पुल होकर रामनगर किला, व्यास मंदिर दर्शन, खगोलीय घड़ी अवलोकन और ऐतिहासिक रामनगर फूड ट्रेल।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
वर्ष 2027 में रामनगर किले पर वेदव्यास मेला कब आयोजित होगा?
वेदव्यास मेला हिंदू पंचांग के पवित्र माघ मास के प्रत्येक सोमवार को आयोजित किया जाता है। वर्ष 2027 में माघ मास के चारों सोमवार 25 जनवरी, 1 फरवरी, 8 फरवरी और 15 फरवरी 2027 को पड़ेंगे। मेले का प्रारंभिक स्नान पौष पूर्णिमा (शुक्रवार, 22 जनवरी 2027) से प्रारंभ हो जाता है।
रामनगर स्थित व्यास मंदिर के दर्शन के बिना काशी यात्रा अधूरी क्यों मानी जाती है?
स्कंद पुराण के काशी खंड के अनुसार, महर्षि वेदव्यास ने भगवान शिव द्वारा काशी से निष्कासित किए जाने के बाद गंगा के पूर्वी तट पर व्यास काशी की स्थापना की थी। भगवान शिव ने उन्हें वरदान दिया था कि किसी भी श्रद्धालु की काशी यात्रा तब तक पूर्ण नहीं मानी जाएगी जब तक वह व्यास काशी आकर महर्षि वेदव्यास को प्रणाम न करे।
व्यास मंदिर और रामनगर किले का प्रवेश शुल्क क्या है?
व्यास मंदिर और उससे सटे रामनगर किला घाट में प्रवेश पूर्णतः निःशुल्क है। यदि आप किले के भीतर स्थित शाही सरस्वती भवन संग्रहालय देखना चाहते हैं, तो उसका टिकट भारतीय नागरिकों के लिए ₹75 से ₹80 प्रति व्यक्ति और विदेशी पर्यटकों के लिए ₹200 है।
वाराणसी शहर से रामनगर किला कैसे पहुंचें?
आप लंका/बीएचयू से सामने घाट पुल होते हुए मात्र 15 से 20 मिनट में निजी एसी कैब द्वारा रामनगर पहुंच सकते हैं (अस्सी घाट से लगभग 5.5 किमी)। दूसरा सबसे रमणीक विकल्प अस्सी घाट अथवा दशाश्वमेध घाट से सीधे गंगा पार कर रामनगर किला घाट तक 25 मिनट की प्राइवेट बोट की सवारी है।
क्या रामनगर किला बुजुर्गों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुगम है?
जी हां, पुरानी काशी की तंग गलियों की तुलना में रामनगर किला वरिष्ठ नागरिकों के लिए बहुत आसान है। गाड़ियां किले के मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर बने पक्के पार्किंग प्लाजा तक सीधे जाती हैं, जहां से मात्र 50 से 100 मीटर समतल पक्का पैदल मार्ग है।
रामनगर में कौन सा स्थानीय खानपान अवश्य चखना चाहिए?
किले के प्रवेश द्वार के बाहर स्थित दशकों पुराने शिव प्रसाद लस्सी भंडार की कुल्हड़ वाली रबड़ी-मलाई लस्सी अवश्य चखें। साथ ही रामनगर के बाजारों से यहां का प्रसिद्ध लाल पेड़ा (धीमी आंच पर भुने हुए मावे और इलायची से निर्मित) घर ले जाना न भूलें।
🏰 वेदव्यास मेला 2027: रामनगर किला कैब, बोट बुकिंग व मंदिर दर्शन
माघ मास के पवित्र वेदव्यास मेला एवं व्यास मंदिर दर्शन हेतु रामनगर आ रहे हैं? नगर के पुलों के जाम से बचें और आरामदायक यात्रा करें। हम ₹1,600 में 4 घंटे/40 किमी समर्पित एसी कैब, अस्सी/दशाश्वमेध से रामनगर किला घाट हेतु ₹3,500 से प्राइवेट बोट, ₹899 से एयरपोर्ट पिकअप और ₹500 सुलभ दर्शन सहायता बिना किसी पीक सर्ज के उपलब्ध कराते हैं।
₹1,600 सेडान / ₹2,000 अर्टिगा — रामनगर किला, व्यास मंदिर व दुर्गा मंदिर हेतु 4 घंटे/40 किमी समर्पित एसी कैब
अस्सी अथवा दशाश्वमेध घाट से सीधे रामनगर किला घाट तक प्राइवेट बोट चार्टर (₹3,500 अधिकतम 6 यात्री / ₹4,500 अधिकतम 15 यात्री)