बैकुंठ चतुर्दशी 2026 काशी: हरि-हर मिलन, मणिकर्णिका चक्रपुष्करिणी स्नान व कैब
यदि आप देव दीपावली से एक-दो दिन पहले बनारस पहुंचते हैं, तो आपको शहर में एक अनोखी हलचल महसूस होगी। घाटों पर लाखों मिट्टी के दीये सूख रहे होते हैं, नदी में नावें सज रही होती हैं और होटलों में भारी भीड़ जुट चुकी होती है।
अधिकांश यात्री देव दीपावली की पूर्व संध्या को एक सामान्य शाम मानकर होटल में आराम करते हैं। ऐसा करके वे काशी की सबसे भावपूर्ण और रहस्यमयी आध्यात्मिक परंपरा से चूक जाते हैं।
सोमवार, 23 नवंबर 2026 (कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी) की रात काशी में बैकुंठ चतुर्दशी का महापर्व मनाया जाता है।
आधी रात को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में देवाधिदेव महादेव और भगवान श्रीहरि विष्णु का पावन 'हरि-हर मिलन' होता है। यह वर्ष की एकमात्र ऐसी रात है जब बाबा विश्वनाथ को तुलसी दल अर्पित किया जाता है—जो बाकी 364 दिन शास्त्रों में पूरी तरह निषेध है। इसके कुछ ही घंटे बाद, भोर में 04:00 बजे से लेकर सूर्योदय तक, हजारों श्रद्धालु मणिकर्णिका घाट स्थित प्राचीन चक्रपुष्करिणी कुंड की सीढ़ियों पर उतरकर बैकुंठ लोक की प्राप्ति हेतु पावन डुबकी लगाते हैं।
यह मार्गदर्शिका आपको बताएगी कि मध्यरात्रि पूजन का सही समय क्या है, मंदिर में प्रवेश कैसे करें, मणिकर्णिका कुंड की जमीनी हकीकत, बुजुर्गों के लिए सावधानियां और रात 10 बजे के बाद जब शहर का पब्लिक ट्रांसपोर्ट बंद हो जाता है तब सुरक्षित वापसी का उपाय।
बैकुंठ चतुर्दशी का आध्यात्मिक रहस्य: तुलसी और बेलपत्र का आदान-प्रदान
सनातन परंपरा में पूजा के नियम बहुत सख्त हैं:
भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, धतूरा और गंगाजल अर्पित होता है, लेकिन तुलसी कभी नहीं चढ़ाई जाती।
भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय है, लेकिन बेलपत्र सामान्यतः नहीं चढ़ाया जाता।
बैकुंठ चतुर्दशी पर यह नियम श्रद्धापूर्वक पलट जाता है:
स्कंद पुराण के काशी खंड के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चार मास भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में रहते हैं। इस 'चातुर्मास' की अवधि में वे सृष्टि के पालन का संपूर्ण कार्यभार काशी में भगवान शिव को सौंप देते हैं। कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को जब भगवान विष्णु जागते हैं, तो वे काशी पधारकर बाबा विश्वनाथ से मिलते हैं। भगवान शिव सृष्टि का संचालन पुनः भगवान विष्णु को सौंपते हैं।
इस अवसर पर दोनों देवता एक-दूसरे की प्रिय वस्तुएं भेंट करते हैं:
बाबा विश्वनाथ को तुलसी: काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग पर एक हजार तुलसी दलों से सहस्त्रार्चन किया जाता है।
श्रीहरि को बेलपत्र: पंचगंगा घाट स्थित श्री बिंदु माधव मंदिर और नगर के अन्य वैष्णव मंदिरों में भगवान विष्णु को बेलपत्र की मालाएं अर्पित की जाती हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर स्थापना दिवस: 1780 ईस्वी में इंदौर की धर्मपरायण महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार करवाकर इसी कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कराई थी। इसलिए मंदिर न्यास इस दिन को आधिकारिक स्थापना दिवस के रूप में मनाता है, जिसमें विशेष राग-भोग और मेवे के लड्डुओं का प्रसाद बंटता है।
चौदह दीपक दीपदान: शाम को गोधूलि वेला में घर की चौखट और घाटों पर 14 मिट्टी के दीये जलाए जाते हैं, जो 14 लोकों के आशीर्वाद और पितृ दोष से मुक्ति का प्रतीक माने जाते हैं।
2026 की शुभ तिथियां व मुहूर्त (समय-सारणी)
सही मुहूर्त और समय का ध्यान रखकर चलने से आप रात की भीड़ और संकरी गलियों की अव्यवस्था से बच सकते हैं:
धार्मिक अनुष्ठान
तिथि व निश्चित समय
स्थान
क्या होता है
यात्री परामर्श
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ
सोमवार, 23 नव 2026, रात 02:36 बजे
पूरे शहर में
बैकुंठ व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं का उपवास शुरू
हल्का सात्विक भोजन लें; पानी साथ रखें।
गोधूलि 14 दीपदान
सोमवार, 23 नव 2026, शाम 05:15 – 05:45
घाट व मंदिर चौखट
14 दीयों का दीपदान; पंचगंगा पर अंतिम आकाशदीप
पंचगंगा घाट पर बांस की डोलचियों में जलते दीये देखें।
स्थापना दिवस भोग व शयन आरती
सोमवार, 23 नव 2026, रात 09:00 – 10:30
श्री काशी विश्वनाथ गर्भगृह
विशेष रजत श्रृंगार, वैदिक पाठ व लड्डू भोग
रात 10:00 बजे तक ज्ञानवापी (गेट 4) पहुंच जाएं।
हरि-हर मिलन (निशीथ काल)
सोमवार, 23 नव 2026, रात 11:41 – 12:35
श्री काशी विश्वनाथ गर्भगृह
मध्यरात्रि महाआरती; ज्योतिर्लिंग पर तुलसी सहस्त्रार्चन
मुख्य आध्यात्मिक क्षण। चमड़े की वस्तुएं व मोबाइल वर्जित।
भोर चक्रपुष्करिणी कुंड स्नान
मंगलवार, 24 नव 2026, भोर 04:00 – 05:30
मणिकर्णिका चक्रपुष्करिणी कुंड
सूर्योदय से पूर्व प्राचीन कुंड में मोक्षदायिनी डुबकी
सीढ़ियां फिसलन भरी हैं; बुजुर्ग केवल आचमन करें।
देव दीपावली महापर्व
मंगलवार, 24 नव 2026, शाम 05:00 – रात 09:30
सभी 84 घाट
15 लाख से अधिक दीयों का विश्वप्रसिद्ध उत्सव
शहर में ही रहें; नाव पहले से आरक्षित होनी चाहिए।
📌 तिथियों का स्पष्टीकरण: पंचांग अनुसार चतुर्दशी तिथि सोमवार, 23 नवंबर की रात 11:42 बजे समाप्त हो रही है। परंतु धर्मशास्त्रों के अनुसार हरि-हर मिलन का पूजन निशीथ काल (मध्यरात्रि) में ही मान्य होता है, जो 11:41 बजे से 12:35 बजे तक रहेगा। मणिकर्णिका कुंड में स्नान अरुणोदय वेला यानी मंगलवार, 24 नवंबर की भोर 04:00 से 05:30 बजे के बीच संपन्न होता है, जिसके तुरंत बाद उसी शाम देव दीपावली का महापर्व शुरू होता है।
श्री काशी विश्वनाथ मध्यरात्रि दर्शन: व्यवस्था व जमीनी हकीकत
सामान्य दिनों में विश्वनाथ मंदिर रात 11:00 बजे शयन आरती के बाद बंद हो जाता है। लेकिन बैकुंठ चतुर्दशी की रात मंदिर खुला रहता है।
1. प्रवेश द्वार व कतार प्रबंधन
सबसे सुगम प्रवेश द्वार:गेट नंबर 4 (ज्ञानवापी / छत्रपति शिवाजी महाराज द्वार) चौक की ओर से। यहाँ लॉकर की बड़ी सुविधा है और मुख्य होल्डिंग एरिया यहीं बना है।
गंगा तट की ओर से प्रवेश:गेट नंबर 2 (गंगा द्वार)। यदि आप घाट किनारे किसी होटल में ठहरे हैं या नाव से आ रहे हैं, तो मणिकर्णिका/ललिता घाट से सीधे कॉरिडोर में प्रवेश कर सकते हैं।
पहुंचने का सही समय: गेट पर रात 09:45 से 10:15 बजे के बीच पहुंच जाएं। 11:00 बजे के बाद स्थानीय श्रद्धालुओं की भीड़ अचानक बढ़ जाती है।
2. लॉकर व सुरक्षा नियम
पूरी तरह प्रतिबंधित: मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, कैमरा, सिगरेट/माचिस और चमड़े का कोई भी सामान (बेल्ट, पर्स, लेदर के जूते)।
लॉकर सुविधा: गेट 4 और गंगा द्वार पर मंदिर प्रशासन के निःशुल्क टोकन लॉकर उपलब्ध हैं। रात में सामान जमा करने और वापस लेने में 15–20 मिनट लग सकते हैं।
सुगम दर्शन पास: मध्यरात्रि के हरि-हर मिलन के लिए आमतौर पर कोई विशेष वीआईपी पास जारी नहीं होता। सभी को सामान्य बैरिकेडिंग कतार से ही दर्शन कराया जाता है। कतार निरंतर चलती रहती है।
🌿 बैकुंठ चतुर्दशी 2026: मध्यरात्रि दर्शन व भोर स्नान हेतु स्टैंडबाय कैब
23–24 नवंबर 2026 को श्री काशी विश्वनाथ के मध्यरात्रि हरि-हर मिलन या भोर 04:00 बजे मणिकर्णिका चक्रपुष्करिणी कुंड स्नान हेतु आ रहे हैं? रात 10 बजे के बाद ऑटो और ई-रिक्शा बंद हो जाते हैं। मैदागिन मल्टीलेवल पार्किंग ड्रॉप के साथ स्टैंडबाय कैब बुक करें ताकि आधी रात और तड़के होटल वापसी सुरक्षित रहे।
🌙 मैदागिन पर मध्यरात्रि स्टैंडबाय कैब·🪔 भोर 04:00 बजे मणिकर्णिका स्नान ट्रांसफर·🚗 देव दीपावली की पूर्व संध्या पर नो सर्ज·🛡️ पुलिस द्वारा तय सुरक्षित आउटर गेट
मणिकर्णिका चक्रपुष्करिणी कुंड: भोर 04:00 बजे का पावन स्नान
यदि आप भोर में चक्रपुष्करिणी कुंड (मणिकर्णिका कुंड) में स्नान का संकल्प ले रहे हैं, तो वहां की भौगोलिक स्थिति और सावधानियों को पहले समझ लें।
पौराणिक उत्पत्ति
मान्यता है कि सृष्टि के आरंभ में भगवान विष्णु ने हजारों वर्षों तक यहाँ शिवजी की आराधना की थी और अपने सुदर्शन चक्र से इस कुंड को खोदा था। जब एक हजार स्वर्ण कमलों में से एक कमल कम पड़ा, तो श्रीहरि ने अपना कमल नयन ही शिवजी को अर्पित कर दिया था। प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें सुदर्शन चक्र प्रदान किया था।
आज यह पावन कुंड मणिकर्णिका घाट के ऊपरी चबूतरे पर पत्थर की मुंडेरों के बीच स्थित है।
यात्रियों के लिए व्यावहारिक सावधानियां
श्मशान के ठीक बगल में स्थिति: चक्रपुष्करिणी कुंड मणिकर्णिका घाट की जलती हुई चिताओं (महाश्मशान) से मात्र 25-30 मीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ 24 घंटे शवदाह होता है और हवा में धुएं व राख की महक रहती है। यदि परिवार के किसी सदस्य को इससे असहजता होती है, तो मानसिक रूप से तैयार रहें।
खड़ी व फिसलन भरी सीढ़ियां: कुंड के जल तक पहुंचने के लिए पत्थर की संकरी और खड़ी सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं। स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के आने-जाने से पत्थर गीले और काईयुक्त हो जाते हैं।
बुजुर्गों के लिए परामर्श: अधिक उम्र के परिजनों या घुटने के दर्द से पीड़ित यात्रियों को कुंड की निचली सीढ़ियों पर कतई न उतारें। कुंड के ऊपरी चबूतरे पर खड़े होकर पुरोहित के तांबे के पात्र से तीन चम्मच पवित्र जल लेकर सिर पर छिड़क लें (आचमन)। काशी की मान्यता में आचमन का पुण्य भी पूर्ण स्नान के समान ही माना गया है।
फोटोग्राफी का सख्त निषेध: मणिकर्णिका घाट पर चिताओं या शोकग्रस्त परिवारों की ओर कैमरा या मोबाइल करना स्थानीय मर्यादा और मल्लाहों के नियमों के खिलाफ है। घाट परिसर में फोन जेब या बैग में ही रखें।
रात में आवागमन: ड्रॉप गेट व वापसी की व्यवस्था
बैकुंठ चतुर्दशी की रात सबसे बड़ी चुनौती यातायात की होती है।
अगली शाम देव दीपावली होने के कारण वाराणसी ट्रैफिक पुलिस 23 नवंबर की देर शाम से ही गोदौलिया, चौक और मैदागिन की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेडिंग लगाना शुरू कर देती है। रात 10:00 बजे के बाद ऑटो और ई-रिक्शा लगभग बंद हो जाते हैं।
गाड़ियाँ कहाँ तक जा सकती हैं?
पुरानी काशी की गलियों में कोई भी गाड़ी नहीं जा सकती। आपकी टैक्सी आपको बाहरी रिंग पर स्थित इन तीन ड्रॉप गेटों पर ही उतार सकती है:
[एयरपोर्ट / कैंट रेलवे स्टेशन]
│
▼ (रिंग रोड अथवा जीटी रोड होकर)
┌──────────────────────────────────────────────┐
│ मैदागिन मल्टीलेवल पार्किंग (टाउन हॉल) │ ◄── मध्यरात्रि दर्शन हेतु सर्वोत्तम
└──────────────────────────────────────────────┘
│
750 मीटर │ 850 मीटर
चौक होकर │ चौखंभा होकर
▼ ▼
[विश्वनाथ मंदिर गेट 4] [मणिकर्णिका कुंड]
काशी विश्वनाथ गेट 4 से दूरी: मात्र 750 मीटर (बांसफाटक/चौक होकर 10-12 मिनट पैदल)।
मणिकर्णिका कुंड से दूरी: 850 मीटर (चौखंभा व ब्रह्मा नाल होकर 12-15 मिनट पैदल)।
लाभ: कैंट स्टेशन या एयरपोर्ट से आने वाले वाहनों के लिए यह सबसे निकटतम और सुरक्षित पार्किंग है। आपकी बुक की गई टैक्सी पार्किंग के अंदर सुरक्षित खड़ी रहकर आपकी वापसी की प्रतीक्षा कर सकती है।
बेनियाबाग मल्टीलेवल पार्किंग:
गोदौलिया से दूरी: 1.1 किमी (15 मिनट पैदल)।
उपयुक्त: यदि आपका होटल सिगरा, रथयात्रा या लंका की ओर है और आप गेट 1 से प्रवेश करना चाहते हैं।
नमो घाट (उत्तरी जल मार्ग):
यदि मुख्य सड़क पर जाम हो, तो नमो घाट पर गाड़ी छोड़कर वहां से 12 मिनट में नाव द्वारा सीधे ललिता घाट (विश्वनाथ गंगा द्वार) पहुंचा जा सकता है।
🪔 कार्तिक पूर्णिमा व देव दीपावली स्नान घाट ट्रांसफर
भीड़ व नो-व्हीकल जोन से पहले भोर 04:00 बजे की गंगा स्नान कैब व नाव प्री-बुक करें। होटल से सीधा पिकअप व नजदीकी घाट ड्रॉप।
भोर 04:00 बजे राउंड-ट्रिप स्नान कैब
नाव की बुकिंग ₹490 प्रति सीट से
रूट डायवर्जन व बाईपास की जानकारी वाले लोकल ड्राइवर
🪔 भोर 04:00 बजे पिकअप·🛶 बोट सीट ₹490 से·🛡️ लोकल ड्राइवर जानकारी·🚫 कोई सर्ज चार्ज नहीं
रात्रि कार्ययोजना: 23–24 नवंबर का व्यावहारिक कार्यक्रम
बिना किसी थकान के मध्यरात्रि दर्शन और भोर स्नान दोनों का लाभ लेने के लिए यह आदर्श समय-सारणी अपनाएं:
रात 08:30 बजे (भोजन): होटल के पास हल्का सात्विक भोजन करें। देर रात तक जागने के लिए तला-भुना खाना न लें।
रात 09:30 बजे (होटल पिकअप): आपकी आरक्षित कैब होटल (कैंट, सिगरा या लंका) से पिकअप करके मैदागिन मल्टीलेवल पार्किंग पर उतारेगी।
रात 10:00 बजे (मंदिर प्रवेश): मैदागिन से पैदल चौक पहुंचें; गेट नंबर 4 पर जूते व फोन लॉकर में जमा कर कतार में लगें।
रात 10:30 – 11:30 बजे (शयन आरती व रजत दर्शन): शयन आरती के बाद बाबा के अलौकिक रजत श्रृंगार के दर्शन करें।
रात 11:41 – 12:35 बजे (हरि-हर मिलन): मुख्य निशीथ काल मुहूर्त। बाबा विश्वनाथ पर तुलसी सहस्त्रार्चन के दर्शन करें।
रात 01:00 बजे (मध्यरात्रि चाय): लॉकर से सामान लेकर बाहर आएं। बांसफाटक के पास गरमा-गरम बनारसी कुल्हड़ चाय पिएं। यदि आप विश्राम चाहते हैं, तो आपकी स्टैंडबाय कैब आपको तुरंत होटल छोड़ देगी।
भोर 04:00 बजे (मणिकर्णिका स्नान): यदि आप पूरी रात रुक रहे हैं, तो चौखंभा होकर मणिकर्णिका पहुंचें और ब्रह्म मुहूर्त में चक्रपुष्करिणी कुंड में स्नान या आचमन करें।
सुबह 06:00 बजे (बनारसी नाश्ता): चौखंभा क्षेत्र में सुबह का पारंपरिक नाश्ता करें:
कुल्हड़ में केसरिया मलइयो (सर्दियों में ओस की बूंदों से तैयार झागदार मिष्ठान)।
ठठेरी बाजार में राम भंडार की गरमा-गरम कचौड़ी और हींग वाली सब्जी व जलेबी (सुबह 06:45 बजे से)।
सुबह 07:30 बजे (होटल वापसी व विश्राम): मैदागिन से आपकी कैब आपको होटल वापस छोड़ देगी, ताकि आप दोपहर तक आराम कर सकें और शाम को तरोताजा होकर देव दीपावली देख सकें।
फिक्स्ड कैब दरें व वाहन पैकेज
काशी टैक्सी पारदर्शी और पूर्व-निर्धारित किराए पर सेवा उपलब्ध कराती है। देव दीपावली की पूर्व संध्या पर जब शहर में मनमाना किराया मांगा जाता है, हमारी दरें पूरी तरह तय रहती हैं।
सेवा / मार्ग
सेडान (Dzire / Etios)
अर्टिगा (6-सीटर)
इनोवा क्रिस्टा
17-सीटर टेम्पो
क्या शामिल है
एयरपोर्ट ➔ मैदागिन / होटल ड्रॉप
₹899
₹1,299
₹1,600 – ₹1,800
₹2,500
वन-वे एसी टैक्सी, टोल टैक्स, एयरपोर्ट पार्किंग
कैंट / बनारस स्टेशन ➔ मैदागिन
₹550
₹850
₹1,200
₹1,800
स्टेशन पिकअप, सामान सहायता, गेट ड्रॉप
मध्यरात्रि स्टैंडबाय कैब (5 घंटे / 40 किमी)
₹1,800
₹2,200
₹2,800
₹3,800
रात 09:30 बजे पिकअप, मैदागिन पर प्रतीक्षा, रात 02:00 बजे वापसी
रात्रि जुगलबंदी पैकेज (दर्शन + भोर स्नान)
₹2,400
₹2,900
₹3,500
₹4,800
रात 09:30 से सुबह 07:30 बजे तक गाड़ी निरंतर उपलब्ध
फुल-डे कॉम्बो (रात्रि दर्शन + देव दीपावली)
₹3,600
₹4,400
₹5,500
₹7,500
मध्यरात्रि दर्शन + दिन में दर्शनीय स्थल + शाम को देव दीपावली ड्रॉप
📌 किराया नीतियां व नियम:
रात 10:00 बजे से सुबह 05:00 बजे के बीच संचालन हेतु ₹150 का मानक रात्रि चालक भत्ता (नाइट अलाउंस) लागू होता है।
मैदागिन अथवा बेनियाबाग मल्टीलेवल पार्किंग का वास्तविक नगर निगम शुल्क (लगभग ₹30–₹50 प्रति घंटा) सीधे देय होता है।
देव दीपावली (24 नवंबर) के दिन दोपहर 02:00 बजे के बाद शहर में कड़े रूट डायवर्जन लागू हो जाते हैं, अतः उसकी बुकिंग पहले से सुनिश्चित करें।
वाहन बुकिंग में मंदिर का प्रवेश पास या विशेष दर्शन अधिकार शामिल नहीं है।
✈️ वाराणसी एयरपोर्ट ⇄ कैंट / शहर फिक्स्ड कैब
वाराणसी एयरपोर्ट (बाबतपुर) ⇄ कैंट / शहर फिक्स्ड कैब — गेट 3 पर प्लेकार्ड पिकअप और फ्लाइट डिले ट्रैकिंग। कोई सर्ज नहीं, कोई टोल या पार्किंग का अतिरिक्त शुल्क नहीं।
यह सोमवार, 23 नवंबर 2026 को है। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मध्यरात्रि हरि-हर मिलन पूजन 23 नवंबर की रात 11:41 बजे से 24 नवंबर की रात 12:35 बजे तक होगा। मणिकर्णिका चक्रपुष्करिणी कुंड में भोर का पवित्र स्नान मंगलवार, 24 नवंबर की सुबह 04:00 से 05:30 बजे संपन्न होगा।
क्या इस रात शिवजी को तुलसी चढ़ाना पाप नहीं है?
सामान्य दिनों में शिवजी को तुलसी चढ़ाना वर्जित है। केवल बैकुंठ चतुर्दशी ही वह पावन दिन है जब स्वयं भगवान विष्णु काशी आकर शिवजी को तुलसी दल अर्पित करते हैं और शिवजी उन्हें बेलपत्र प्रदान करते हैं। यह दोनों देवताओं की एकात्मकता और परस्पर आदर का महापर्व है।
मध्यरात्रि दर्शन और सुबह स्नान के लिए क्या पहनकर जाएं?
पारंपरिक भारतीय परिधान पहनें: पुरुषों के लिए धोती-कुर्ता या पायजामा-कुर्ता और महिलाओं के लिए साड़ी या सलवार सूट। चमड़े की बेल्ट या पर्स साथ न ले जाएं। यदि मणिकर्णिका कुंड में स्नान करना है, तो एक अतिरिक्त सूखा वस्त्र, तौलिया और गीले कपड़ों के लिए प्लास्टिक की थैली साथ रखें।
क्या टैक्सी सीधे मणिकर्णिका घाट या विश्वनाथ मंदिर तक जा सकती है?
नहीं। प्राचीन बनारस की गलियां पूरी तरह पैदल क्षेत्र हैं। टैक्सी आपको केवल बाहरी मुख्य पार्किंग तक ही छोड़ सकती है। सबसे निकटतम और सुरक्षित स्थान मैदागिन मल्टीलेवल पार्किंग है, जहाँ से मंदिर और मणिकर्णिका घाट मात्र 10–12 मिनट की पैदल दूरी पर हैं।
क्या रात 01:00 बजे या भोर 04:00 बजे गलियों में चलना सुरक्षित है?
हाँ, बिल्कुल सुरक्षित है। देव दीपावली की पूर्व संध्या होने के कारण मैदागिन, चौक, बांसफाटक और घाटों के बीच की गलियों में पूरी रात रोशनी रहती है, उत्तर प्रदेश पुलिस और अर्धसैनिक बल लगातार गश्त करते हैं और मल्लाह व दुकानदार तैयारियों में जुटे रहते हैं। मुख्य रास्तों पर ही चलें।