गंगा महोत्सव 2026 वाराणसी: तारीख, वेन्यू, राजघाट व संपूर्ण यात्रा गाइड
पुष्ट योजना अवधि:शुक्रवार, 20 नवंबर से सोमवार, 23 नवंबर 2026, जिसके तुरंत बाद मंगलवार, 24 नवंबर 2026 (कार्तिक पूर्णिमा) को भव्य देव दीपावली होगी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां प्रतिदिन शाम 05:30 बजे से रात 10:00 बजे तक राजघाट और नमो घाट पर होंगी। आम दर्शकों के लिए प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क है। तारीख और वेन्यू जिला प्रशासन की योजना के अनुसार तय हैं, जबकि दिनवार कलाकारों की अंतिम सूची उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा आयोजन से 10–14 दिन पूर्व जारी की जाती है।
हर साल नवंबर के महीने में बनारस की पावन गंगा के किनारे उत्तर प्रदेश का सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक उत्सव—काशी गंगा महोत्सव—सजता है। चार रातों तक चलने वाला यह आयोजन देव दीपावली के महाकुंभ का सांस्कृतिक प्रवेश द्वार है।
देव दीपावली की रात जहाँ 15 लाख दीयों और लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है, वहीं गंगा महोत्सव में आप खुले घाट की सीढ़ियों पर बैठकर देश के शीर्ष शास्त्रीय गायकों, सितार-शहनाई वादकों और कथक नर्तकों को सुकून से सुन और देख सकते हैं। साथ ही राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला, मल्लाहों की नाव दौड़ और अखाड़ों का पारंपरिक दंगल इस उत्सव को जीवंत बनाते हैं।
यदि आप देव दीपावली देखने बनारस आ रहे हैं, तो 3–4 दिन पहले (20 नवंबर तक) आकर गंगा महोत्सव का आनंद लेना यात्रा का सबसे समझदारी भरा निर्णय साबित होगा। इस गाइड में जानें कार्यक्रम का स्वरूप, राजघाट पहुँचने के रास्ते, पार्किंग, बोट रूट और बजट।
गंगा महोत्सव में क्या-क्या होता है?
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग और वाराणसी जिला प्रशासन द्वारा आयोजित गंगा महोत्सव भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोककला और बनारसी अखाड़ा संस्कृति का अनूठा संगम है:
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│ काशी गंगा महोत्सव 2026 │
│ 20–23 नवंबर (प्रतिदिन शाम 5:30–10:00 बजे) │
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│ राजघाट मुख्य मंच │ │ नमो घाट │ │ गंगा जलमार्ग │
│ शास्त्रीय गायन, │ │ गांधी शिल्प बाजार,│ │ पारंपरिक मल्लाह │
│ सितार, शहनाई व │ │ बनारसी खान-पान व │ │ नौका दौड़ व │
│ कथक नृत्य प्रस्तुतियां│ │ काशी दंगल कुश्ती │ │ साहसिक खेल │
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महोत्सव मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बँटा होता है:
1. राजघाट का मुख्य सांस्कृतिक मंच
मालवीय पुल (डफरिन ब्रिज) की पृष्ठभूमि में गंगा की लहरों के ठीक सामने भव्य खुला मंच बनाया जाता है। प्रतिदिन शाम 05:30 बजे गंगा पूजन और वैदिक मंगलाचरण से कार्यक्रम आरंभ होता है:
शास्त्रीय गायन: ध्रुपद, ख्याल और बनारस अंग की ठुमरी, दादरा, चैती व कजरी।
वाद्य वृंद: सितार, शहनाई, सरोद, संतूर, बाँसुरी और तबला-पखावज की जुगलबंदी।
शास्त्रीय नृत्य: बनारस व लखनऊ घराने की कथक प्रस्तुतियां, साथ ही भरतनाट्यम व ओडिसी नृत्य।
2. नमो घाट (गांधी शिल्प बाजार व पारंपरिक खेल)
राजघाट से पक्के रिवरफ्रंट वॉकवे द्वारा जुड़े नमो घाट पर दोपहर से रात तक मेले का माहौल रहता है:
गांधी शिल्प बाजार (सुबह 11:00 से रात 09:30 बजे): देशभर के 100 से अधिक हस्तशिल्पियों के स्टॉल—जीआई टैग वाली बनारसी साड़ियां, भदोही के कालीन, मिर्जापुर के पीतल के बर्तन और लकड़ी के खिलौने।
बनारसी खान-पान: गरमा-गरम कुल्हड़ चाय, टमाटर चाट, बाटी-चोखा और इस मौसम की पहली सौगात—गुलाबी ठंड वाली मलाईयो।
काशी दंगल: दोपहर में बनारस के पारंपरिक अखाड़ों (तुलसी अखाड़ा, गया सेठ अखाड़ा) के पहलवानों के बीच मिट्टी के अखाड़े में कुश्ती प्रतियोगिता।
3. गंगा जलमार्ग (पारंपरिक नौका दौड़)
निर्धारित दिन दोपहर में दशाश्वमेध घाट से राजघाट के बीच स्थानीय मल्लाहों की पारंपरिक नाव दौड़ (नौका प्रतियोगिता) आयोजित होती है, जिसे देखने घाटों पर भारी उत्साह रहता है।
2026 महोत्सव का कार्यक्रम व देव दीपावली टाइमलाइन
गंगा महोत्सव अकेले नहीं आता; यह कार्तिक माह के 5 सबसे पावन दिनों की अटूट सांस्कृतिक कड़ी है:
तारीख
पर्व / कार्यक्रम
मुख्य वेन्यू
प्रमुख आकर्षण
शुक्रवार, 20 नव 2026
गंगा महोत्सव दिवस 1 व देवोत्थान एकादशी
राजघाट व नमो घाट
शाम 05:30 बजे उद्घाटन; घाटों पर ईख के मंडप में भगवान विष्णु का जागरण।
शनिवार, 21 नव 2026
गंगा महोत्सव दिवस 2 व तुलसी विवाह
राजघाट व नमो घाट
शाम को कथक व शास्त्रीय गायन; नमो घाट पर शिल्प बाजार; तुलसी विवाह पूजन।
रविवार, 22 नव 2026
गंगा महोत्सव दिवस 3 व नौका दौड़
राजघाट व गंगा नदी
दोपहर में गंगा में पारंपरिक नाव दौड़; शाम को संतूर/शहनाई वादन।
सोमवार, 23 नव 2026
गंगा महोत्सव समापन व बैकुंठ चतुर्दशी
राजघाट व विश्वनाथ धाम
महोत्सव का भव्य सांस्कृतिक समापन; आधी रात को विश्वनाथ मंदिर में हरि-हर मिलन।
मंगलवार, 24 नव 2026
देव दीपावली व कार्तिक पूर्णिमा
सभी 84 घाट व सारनाथ
सुबह सारनाथ में भगवान बुद्ध की अस्थि धातु दर्शन; शाम को 84 घाटों पर 15 लाख दीये।
[!NOTE]
कलाकार सूची की स्थिति: उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा दिनवार कलाकारों (गायक/वादक/नर्तक) की आधिकारिक सूची कार्यक्रम से 10–14 दिन पूर्व (अनुमानतः 8–10 नवंबर) जारी की जाती है। किसी भी अनधिकृत सोशल मीडिया सूची पर भरोसा न करें।
प्रवेश नियम, बैठने की व्यवस्था व दलालों से बचाव
प्रवेश 100% निःशुल्क: गंगा महोत्सव में प्रवेश के लिए कोई टिकट या शुल्क नहीं लगता। यह सरकार द्वारा प्रायोजित सार्वजनिक उत्सव है।
बैठने की व्यवस्था: आगे की 4–6 कतारें प्रशासनिक अधिकारियों, आमंत्रित अतिथियों और पत्रकारों के लिए आरक्षित रहती हैं। इसके पीछे सैकड़ों कुर्सियां और राजघाट की पक्की सीढ़ियां आम जनता के लिए पूरी तरह खुली रहती हैं।
कब पहुँचें: यदि आप मंच के सामने कुर्सी पर बैठना चाहते हैं, तो शाम 05:00 बजे तक पहुँच जाएँ। 06:15 बजे के बाद पहुँचने पर आपको सीढ़ियों पर बैठना होगा।
"वीआईपी पास" के नाम पर ठगी से बचें: हर साल गोलगड्डा और सोशल मीडिया पर कुछ दलाल ₹1,500 से ₹3,000 में "गंगा महोत्सव वीआईपी पास" बेचने का झांसा देते हैं। ऐसे किसी झांसे में न आएं; आम लोगों के लिए व्यवस्था पूरी तरह मुफ्त है।
राजघाट कैसे पहुँचें: ट्रैफिक प्रतिबंध व ड्रॉप पॉइंट
महोत्सव के दिनों में शाम 04:30 बजे से रात 10:30 बजे तक गोलगड्डा से राजघाट जाने वाले रास्ते पर ऑटो और व्यावसायिक वाहनों पर रोक रहती है।
यहाँ आपकी गाड़ी वास्तविक रूप से कहाँ तक जा सकती है:
ड्रॉप पॉइंट 1: नमो घाट समर्पित पार्किंग (कैब के लिए सर्वोत्तम)
रास्ता: जीटी रोड बाईपास या पड़ाव-राजघाट लिंक से होकर सीधे नमो घाट पार्किंग तक।
पैदल दूरी: पार्किंग से नमो घाट तक 150 मीटर समतल रास्ता; वहाँ से राजघाट मुख्य मंच तक रोशनी वाले रिवरफ्रंट से लगभग 400 मीटर।
लाभ: पूरे बनारस में नमो घाट ही एकमात्र ऐसा घाट है जहाँ पक्की 4-पहिया पार्किंग मौजूद है। आपकी बुक की गई कैब यहाँ कार्यक्रम खत्म होने तक आसानी से इंतज़ार कर सकती है।
ड्रॉप पॉइंट 2: गोलगड्डा चौराहा / काशी रेलवे स्टेशन गेट
रास्ता: कैंट या मैदागिन की तरफ से आने वाली सामान्य गाड़ियां।
पैदल दूरी: गोलगड्डा से राजघाट की ओर लगभग 650 मीटर पैदल चलना होगा।
ड्रॉप पॉइंट 3: मछोदरी पार्क
रास्ता: यदि गोलगड्डा पर पुलिस बैरिकेडिंग सख्त हो जाए, तो गाड़ियां मछोदरी पर रोक दी जाती हैं (लगभग 1.1 किमी पैदल)।
🎶 काशी गंगा महोत्सव 2026: राजघाट व नमो घाट सुगम कैब व बोट सेवा
4-दिवसीय गंगा महोत्सव (20–23 नवंबर) और देव दीपावली (24 नवंबर) के लिए काशी आ रहे हैं? शहर के जाम और रात में ऑटो की किल्लत से बचें। हम फिक्स्ड किराए वाले एयरपोर्ट/स्टेशन ट्रांसफर, नमो घाट पार्किंग में ड्राइवर वेटिंग सहित राउंड-ट्रिप फेस्टिवल कैब, 8 घंटे/80 किमी फुल-डे कैब (सारनाथ + महोत्सव) और दशाश्वमेध/अस्सी से सीधे राजघाट मंच तक प्राइवेट बोट ट्रांसफर प्रदान करते हैं।
🎶 राजघाट व नमो घाट समर्पित ड्रॉप·⏳ नमो घाट पार्किंग में पक्का इंतज़ार·🛶 दशाश्वमेध से राजघाट डायरेक्ट बोट·🛡️ कोई सरचार्ज या मोलभाव नहीं
सबसे सुगम रास्ता: नाव से राजघाट पहुँचना
शाम के वक्त बनारस की सड़कों पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से बचने का सबसे सुकून भरा और सुंदर तरीका जलमार्ग है।
अस्सी या गोदौलिया से शाम 5 बजे सड़क से राजघाट जाने में 45 से 60 मिनट का समय जाम में लग सकता है। इसके विपरीत:
[ अस्सी घाट ] ──── (शाम 4:15 बजे सवार हों) ───┐
│
[ दशाश्वमेध ] ─── (शाम 4:35 बजे सवार हों) ───┼──► 35–45 मिनट शांत गंगा जलयात्रा
│ 84 घाटों के सूर्यास्त दर्शन
│
[ राजघाट सीढ़ियाँ ] ◄── (शाम 5:15 बजे पहुँचें)┘ (सीधे कार्यक्रम मंच पर उतरें!)
नाव से जाने के बड़े फायदे:
ट्रैफिक जाम से मुक्ति: सड़क के शोर और धुआं-धक्कड़ से दूर गंगा की शांत लहरों पर यात्रा।
84 घाटों का मनोरम दृश्य: डूबते सूरज की सुनहरी रोशनी में काशी के सभी अर्धचंद्राकार घाटों का विहंगम नजारा।
मंच के ठीक सामने ड्रॉप: नाव आपको सीधे राजघाट की सीढ़ियों पर उतारेगी, जहाँ से मंच मात्र 50 मीटर दूर है।
सामान्य दरें (कोई सरचार्ज नहीं): देव दीपावली (24 नवंबर) की रात जहाँ नाव के दाम 5 से 10 गुना बढ़ जाते हैं, वहीं 20 से 23 नवंबर के दौरान नाव का किराया सामान्य रहता है। दशाश्वमेध से राजघाट की प्राइवेट नाव लगभग ₹1,800 से ₹2,500 (6 व्यक्तियों तक) में मिल जाती है।
बुजुर्गों और परिवारों के लिए खास सावधानियां
यदि आपके साथ माता-पिता, वरिष्ठ नागरिक या छोटे बच्चे हैं:
नमो घाट (ग्रेड A सुगमता): पुराने शहर की संकरी गलियों और खड़ी सीढ़ियों के उलट, नमो घाट पर पार्किंग से लेकर घाट तक समतल, चौड़े रैंप बने हुए हैं। यहाँ व्हीलचेयर आसानी से चल सकती है।
राजघाट मुख्य मंच (ग्रेड B सुगमता): राजघाट मंच तक जाने के लिए सीढ़ियाँ उतरनी पड़ती हैं। बुजुर्गों को अंधेरे में सीढ़ियाँ उतरने की असुविधा से बचाने के लिए शाम 05:00 बजे से पहले पहुँच जाएँ, ताकि वे दिन की रोशनी में आराम से उतरकर समतल मैदान की कुर्सी पर बैठ सकें।
शाम की ठंड व सर्द हवा: नवंबर के अंत में शाम 7:30 बजे के बाद गंगा किनारे ठंडी हवा चलती है और तापमान 14°C–16°C तक गिर जाता है। बुजुर्गों के लिए ऊनी स्वेटर, मफलर/शॉल और मोजे अनिवार्य रूप से साथ रखें। सीढ़ियाँ ठंडी हो जाती हैं, इसलिए बैठने के लिए एक छोटा फोम पैड या शॉल साथ रखना बहुत मददगार होता है।
शौचालय सुविधा: नमो घाट पर वाराणसी स्मार्ट सिटी द्वारा संचालित साफ-सुथरे सार्वजनिक शौचालय परिसर मौजूद हैं।
कहाँ ठहरें: होटल चुनने की व्यावहारिक सलाह
इलाका
राजघाट पहुँचने का समय
किसके लिए सही
क्या ध्यान रखें
कैंटोनमेंट (कैंट) / नदेसर
कैब से 20–25 मिनट (रिंग रोड से)
लक्जरी होटल, परिवार, एयरपोर्ट की सुगमता
घाटों से दूर; हर बार जाने के लिए कैब जरूरी।
राजघाट / काशी स्टेशन के पास
पैदल 5–10 मिनट
शास्त्रीय संगीत प्रेमी, बजट यात्री
लक्जरी होटलों की कमी; अधिकतर साधारण गेस्टहाउस।
अस्सी घाट / लंका
सड़क से 35–45 मिनट (नाव से 40 मिनट)
सांस्कृतिक माहौल, सुबह-ए-बनारस के दर्शक
दक्षिणी छोर; शाम को सड़क से राजघाट जाने में समय लगता है।
गोदौलिया / चौक
सड़क से 20–30 मिनट (नाव से 25 मिनट)
विश्वनाथ मंदिर दर्शन, मुख्य घाट
शाम को वाहनों पर रोक; मुख्य सड़क तक पैदल चलना होगा।
5-दिवसीय संपूर्ण यात्रा प्लान (20 से 24 नवंबर)
पहला दिन (शुक्रवार, 20 नव): आगमन, देवोत्थान एकादशी व उद्घाटन निशा
वाराणसी एयरपोर्ट या स्टेशन पर आगमन। होटल में चेक-इन। दोपहर में घाटों पर देवोत्थान एकादशी के पारंपरिक ईख के मंडप और पूजा के दर्शन। शाम 04:30 बजे कैब या नाव से राजघाट प्रस्थान। शाम 05:30 बजे गंगा महोत्सव का भव्य उद्घाटन, गंगा पूजन व शास्त्रीय गायन का आनंद लें। रात 10 बजे होटल वापसी।
दूसरा दिन (शनिवार, 21 नव): सुबह-ए-बनारस, तुलसी विवाह व शिल्प बाजार
सुबह 06:00 बजे अस्सी घाट पर सुबह-ए-बनारस (शास्त्रीय प्रभाती राग व यज्ञ)। दोपहर 02:00 बजे नमो घाट पर गांधी शिल्प बाजार में खरीदारी और बनारसी व्यंजनों का स्वाद। शाम 05:30 बजे राजघाट पर कथक नृत्य व शास्त्रीय वाद्य संगीत की प्रस्तुतियां।
तीसरा दिन (रविवार, 22 नव): सारनाथ भ्रमण व गंगा नौका दौड़
सुबह कैब से सारनाथ (राजघाट से मात्र 8 किमी) जाएँ। चौखंडी स्तूप, धमेक स्तूप और पुरातत्व संग्रहालय देखें। दोपहर 02:30 बजे तक गंगा किनारे लौटकर मल्लाहों की रोमांचक नौका दौड़ देखें। शाम को राजघाट पर संतूर/शहनाई वादन का आनंद लें।
दौथा दिन (सोमवार, 23 नव): विश्वनाथ धाम, काशी दंगल व बैकुंठ चतुर्दशी
सुबह काशी विश्वनाथ धाम में सुगम दर्शन। दोपहर में नमो घाट पर पारंपरिक काशी दंगल (कुश्ती) देखें। शाम 05:30 बजे गंगा महोत्सव की समापन संध्या। रात 11:30 बजे बैकुंठ चतुर्दशी के अवसर पर विश्वनाथ धाम में दुर्लभ हरि-हर मिलन दर्शन।
पाँचवाँ दिन (मंगलवार, 24 नव): सारनाथ धातु दर्शन व भव्य देव दीपावली
सुबह सारनाथ के मूलगंध कुटी विहार में भगवान बुद्ध की पावन अस्थि धातु के वार्षिक दर्शन। दोपहर 03:00 बजे घाट पर पहुंचकर अपनी प्री-बुक्ड नाव पर सवार हों और शाम को सभी 84 घाटों पर 15 लाख दीपों की जगमगाहट (देव दीपावली) के साक्षी बनें।
🚕 वाराणसी से सारनाथ एसी कैब (4–5 घंटे इंतजार सहित राउंड ट्रिप ₹1,700 से)
आशापुर मार्ग की गर्मी और धूल से बचें। होटल से पिकअप, सुरक्षित सामान और 4–5 घंटे पक्का ड्राइवर इंतजार। कोई मीटर या मोलभाव नहीं।
🛶 प्राइवेट नाव·👥 क्षमता पक्का करें·🦺 लाइफ जैकेट पूछें·📲 पूरा कोटेशन लें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. गंगा महोत्सव 2026 की तारीख क्या है?
गंगा महोत्सव 20 से 23 नवंबर 2026 तक चार दिनों तक आयोजित होगा। इसके ठीक अगले दिन 24 नवंबर 2026 को देव दीपावली मनाई जाएगी।
2. क्या गंगा महोत्सव देखने के लिए कोई टिकट खरीदना पड़ता है?
बिल्कुल नहीं। यह कार्यक्रम आम जनता के लिए पूरी तरह मुफ्त है। किसी दलाल से वीआईपी पास खरीदने की भूल न करें।
3. राजघाट पहुँचने के लिए सबसे अच्छा साधन क्या है?
शाम के ट्रैफिक से बचने के लिए दशाश्वमेध या अस्सी घाट से नाव लेकर सीधे राजघाट मंच तक पहुँचना सबसे सुखद है। यदि गाड़ी से आ रहे हैं, तो उत्तरी बाईपास से सीधे नमो घाट की पक्की पार्किंग में गाड़ी पार्क करें।
4. क्या कार्यक्रम में बुजुर्गों के बैठने की अच्छी व्यवस्था है?
हाँ, मंच के पास समतल जमीन पर सैकड़ों कुर्सियां लगाई जाती हैं। बुजुर्गों के साथ शाम 5:00 बजे तक पहुँचकर कुर्सी सुरक्षित कर लेना सबसे अच्छा रहता है।
5. क्या गंगा महोत्सव के साथ सारनाथ घूमना संभव है?
हाँ। राजघाट से सारनाथ मात्र 8 किलोमीटर दूर है। दिन में 10 से 2 बजे तक सारनाथ के स्तूप व संग्रहालय देखकर शाम को 5 बजे गंगा महोत्सव में शामिल हुआ जा सकता है।