गीता जयंती 2026 वाराणसी: मोक्षदा एकादशी मंदिर सर्किट, समय व यात्रा गाइड
रविवार, 20 दिसंबर 2026 को काशी की पावन धरा पर गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा। सनातन मान्यता के अनुसार, द्वापर युग में मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी के पावन दिन ही कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में भगवान श्रीकृष्ण ने मोहग्रस्त अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता के 700 श्लोकों का उपदेश दिया था। वर्ष 2026 में इस अलौकिक उपदेश की 5,163वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।
काशी को सनातन धर्म में अनादि काल से मोक्ष की नगरी (अविमुक्त क्षेत्र) कहा गया है। हिंदू पंचांग के सभी 24 एकादशियों में केवल मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी ही ऐसी है, जिसके नाम के साथ सीधे 'मोक्ष' जुड़ा है। जिस नगरी में देहावसान पर स्वयं बाबा विश्वनाथ तारक मंत्र देकर जीव को मुक्ति प्रदान करते हैं, उस काशी में मोक्षदा एकादशी का व्रत व गंगा स्नान करना अनंत फलदायी माना जाता है।
अन्य तीर्थों के विपरीत, वाराणसी में गीता जयंती का उत्सव किसी एक मंदिर तक सीमित नहीं रहता। यह दक्षिण में बीएचयू परिसर स्थित श्री विश्वनाथ मंदिर (जिसकी संगमरमरी दीवारों पर गीता के संपूर्ण 18 अध्यायों के श्लोक तराशे गए हैं) से लेकर तुलसी मानस मंदिर की भव्य चलित गीतोपदेश झांकी, इस्कॉन भेलूपुर के महायज्ञ और श्री काशी विश्वनाथ धाम तक लगभग 20 किलोमीटर के एक संपूर्ण आध्यात्मिक सर्किट में फैला हुआ है।
दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बनारस यात्रा के दौरान व्यावहारिक योजना बेहद जरूरी है। सुबह का घना कोहरा बाबतपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स लेट कर सकता है, संगमरमर का ठंडा फर्श बुजुर्गों के घुटनों को पीड़ा दे सकता है, और पुराने शहर की नो-व्हीकल जोन पाबंदियों में सही पार्किंग गेट जानना जरूरी है। यह व्यावहारिक गाइड आपको समय, मंदिर क्रम, फलाहारी भोजन और पारदर्शी वाहन विकल्पों की सटीक जानकारी देती है।
मुख्य तथ्य: गीता जयंती व मोक्षदा एकादशी 2026
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│ गीता जयंती व मोक्षदा एकादशी 2026: एक नज़र में │
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│ मुख्य तारीख: रविवार, 20 दिसंबर 2026 │
│ पंचांग तिथि: मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी │
│ तिथि प्रारंभ: शनिवार, 19 दिसंबर 2026, रात्रि 10:09 बजे │
│ तिथि समाप्त: रविवार, 20 दिसंबर 2026, रात्रि 08:14 बजे │
│ व्रत व पूजन: रविवार, 20 दिसंबर 2026 (उदया तिथि) │
│ व्रत पारण समय: सोमवार, 21 दिसंबर 2026, सुबह 06:47 से 09:08 बजे │
│ प्रमुख तीर्थ: बीएचयू न्यू वीटी, तुलसी मानस, इस्कॉन, विश्वनाथ धाम │
│ स्नान घाट: दशाश्वमेध घाट, असी घाट, पंचगंगा घाट │
│ संभावित मौसम: दिन 23°C / रात 10°C; सुबह के समय घना कोहरा │
│ जरूरी टिप: ठंडे फर्श से बचाव हेतु ऊनी ग्रिप-जुराबें साथ रखें │
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ड्रिक पंचांग के अनुसार दिनचर्या का सटीक समय इस प्रकार रहेगा:
सूर्योदय पूर्व मोक्षदा स्नान (सुबह 05:15 – 06:45 बजे): असी, दशाश्वमेध या पंचगंगा घाट पर ब्रह्म मुहूर्त स्नान। गंगाजल का आचमन, सूर्य अर्घ्य और गीता ध्यानम् का पाठ।
प्रातःकालीन गीता पाठ (सुबह 07:30 – 11:30 बजे): बीएचयू न्यू विश्वनाथ मंदिर और तुलसी मानस मंदिर में विद्वानों, छात्रों व संतों द्वारा गीता के संपूर्ण 18 अध्यायों का समवेत सस्वर पाठ।
मध्याह्न गीता महायज्ञ व व्याख्यान (पूर्वाह्न 11:30 – दोपहर 01:30 बजे): इस्कॉन मंदिर भेलूपुर में आहुतियों के साथ गीता महायज्ञ, पुस्तक दान एवं बीएचयू मालवीय भवन में दार्शनिक संगोष्ठी।
संध्या दीपदान व आरती (शाम 05:15 – 07:30 बजे): घाटों पर दीपदान और दशाश्वमेध घाट पर नाव से शाम की भव्य गंगा आरती का दर्शन।
काशी का 4-मंदिर गीता सर्किट: दर्शन का सही क्रम
यदि आप एक ही दिन में चारों मंदिरों के दर्शन शांति से करना चाहते हैं, तो हमेशा दक्षिण से उत्तर की दिशा में आगे बढ़ें। लंका (बीएचयू) से शुरू करके दुर्गाकुंड, भेलूपुर और अंत में गोदौलिया की ओर बढ़ने से शहर के भारी ट्रैफिक में बार-बार उलझना नहीं पड़ता।
[ बाबतपुर एयरपोर्ट / कैंट स्टेशन ]
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▼ (फोर-लेन / रिंग रोड)
[ पुराने शहर का बाहरी घेरा ]
(बेनियाबाग अंडरग्राउंड पार्किंग में ड्रॉप)
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▼ (700 मी बांसफाटक पैदल मार्ग)
[ 4. श्री काशी विश्वनाथ धाम ]
(तारक मंत्र गर्भगृह व गंगा द्वार)
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│ (15 मिनट कैब / 3 किमी)
[ 3. इस्कॉन मंदिर भेलूपुर ]
(गीता महायज्ञ व एकादशी फलाहारी प्रसाद)
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│ (8 मिनट कैब / 1.8 किमी)
[ 2. तुलसी मानस मंदिर ]
(दूसरी मंजिल पर कुरुक्षेत्र गीतोपदेश झांकी)
▲
│ (10 मिनट कैब / 2.5 किमी)
[ 1. न्यू वीटी (बिरला मंदिर) बीएचयू ]
(संगमरमरी दीवारों पर गीता के 700 श्लोक)
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│ (5 मिनट कैब / 1.5 किमी)
[ असी घाट गंगा तट ]
(सुबह का मोक्षदा स्नान व अदरक चाय)
1. श्री विश्वनाथ मंदिर (बिरला मंदिर / न्यू वीटी), बीएचयू कैंपस
महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जी की प्रेरणा से बिरला परिवार द्वारा निर्मित यह मंदिर काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विशाल परिसर के ठीक मध्य में स्थित है। इसका 77 मीटर ऊंचा शिखर भारत के सबसे ऊंचे मंदिर शिखरों में गिना जाता है।
गीता जयंती के दिन इस मंदिर का महत्व अद्वितीय है: भूतल पर बने विशाल मुख्य मंडप और परिक्रमा मार्ग की सफेद मकराना संगमरमर की दीवारों पर श्रीमद्भगवद्गीता के सभी 18 अध्यायों के 700 संस्कृत श्लोक स्पष्ट देवनागरी लिपि में खुदे हुए हैं। साथ ही महाभारत युद्ध और श्रीकृष्ण-अर्जुन संवाद के सुंदर भित्ति-चित्र बने हैं।
गीता जयंती पर बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय (SVDV) के आचार्य और विद्यार्थी यहाँ बैठकर समवेत स्वर में संपूर्ण गीता का पारायण करते हैं।
दर्शन समय: सुबह 04:00 से दोपहर 12:00 बजे तक एवं दोपहर 01:00 से रात 09:00 बजे तक।
प्रवेश व कतार: प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क है। सामान्य सुरक्षा जांच होती है; कोई लंबी बैरिकेडिंग नहीं होती।
पहुंच मार्ग: गाड़ियाँ विश्वविद्यालय परिसर के अंदर मंदिर के ठीक सामने बनी पार्किंग तक जाती हैं, जहाँ से केवल 100 मीटर समतल पैदल चलना होता है। पश्चिमी द्वार पर व्हीलचेयर रैंप बना है।
2. तुलसी मानस मंदिर, दुर्गाकुंड
बीएचयू से 2.5 किमी उत्तर की ओर दुर्गाकुंड के पास स्थित तुलसी मानस मंदिर का निर्माण 1964 में उसी ऐतिहासिक स्थल पर हुआ था, जहाँ बैठकर गोस्वामी तुलसीदास जी ने 16वीं शताब्दी में कालजयी ग्रंथ श्रीरामचरितमानस की रचना की थी।
सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर की निचली मंजिल पर संपूर्ण रामचरितमानस की चौपाइयां उत्कीर्ण हैं। वहीं इसकी दूसरी मंजिल पर लकड़ी और मोटर से चलने वाली ऐतिहासिक यांत्रिक झांकियां बनाई गई हैं। इनमें सबसे प्रमुख 'कुरुक्षेत्र गीतोपदेश रथ' की विशाल झांकी है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण चार श्वेत घोड़ों वाले स्वर्णिम रथ पर सारथि रूप में बैठे हैं और धनुष बाण रखे विषादग्रस्त अर्जुन को उपदेश दे रहे हैं।
दर्शन समय: सुबह 05:30 से दोपहर 12:00 बजे तक एवं शाम 03:30 से रात 09:00 बजे तक।
प्रवेश: पूर्णतः निःशुल्क। झांकी देखने हेतु ऊपरी तल पर 15–20 मिनट का समय लगता है।
पहुंच मार्ग: संकट मोचन रोड पर मुख्य द्वार के सामने गाड़ी से उतरने की सुविधा है।
3. इस्कॉन मंदिर वाराणसी (श्री श्री राधा गोपाल जी), भेलूपुर
दुर्गाकुंड से भेलूपुर की ओर गुरुधाम रोड पर स्थित इस्कॉन मंदिर में मार्गशीर्ष माह के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'गीता मैराथन' का आयोजन होता है, जिसका मुख्य उत्सव मोक्षदा एकादशी को होता है।
इस दिन मंदिर प्रांगण में विशाल गीता महायज्ञ संपन्न होता है, जिसमें सैकड़ों भक्त वैदिक आहुतियां देते हैं। साथ ही 108 प्रमुख श्लोकों का पाठ और काशी की गलियों में हरिनाम संकीर्तन प्रभातफेरी निकाली जाती है। श्रद्धालुओं को रियायती दर पर श्रीमद्भगवद्गीता की प्रतियां भेंट की जाती हैं। दोपहर 11:30 बजे से यहाँ सभी आगंतुकों के लिए शुद्ध फलाहारी एकादशी महाप्रसाद (साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू के व्यंजन, फल व सावां चावल की खीर) वितरित किया जाता है।
दर्शन समय: सुबह 04:30 से दोपहर 01:00 बजे तक एवं शाम 04:15 से रात 08:30 बजे तक।
पहुंच मार्ग: गुरुधाम रोड पर वाहन ड्रॉप उपलब्ध है, जहाँ से मंदिर केवल 30 मीटर अंदर है।
4. श्री काशी विश्वनाथ धाम व ललिता घाट (गंगा द्वार)
काशी में शैव और वैष्णव परंपरा का अद्भुत समन्वय है। शास्त्रों में भगवान शिव को 'वैष्णवानां यथा शम्भुः' (वैष्णवों में सर्वश्रेष्ठ) कहा गया है। मोक्षदा एकादशी पर बाबा विश्वनाथ के ज्योतिर्लिंग पर विशेष बिल्वपत्र व तुलसी अर्चन किया जाता है। कॉरिडोर के शंकराचार्य चौक पर वेदपाठी ब्राह्मण गीता पाठ करते हैं।
रविवार और एकादशी का संयोग होने के कारण ज्ञानवापी द्वार (गेट 4) पर सामान्य कतार में 2 से 3.5 घंटे का समय लग सकता है।
दर्शन समय: सुबह 03:00 बजे (मंगला आरती) से रात 11:00 बजे (शयन आरती) तक।
प्रतिबंधित वस्तुएं: मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, कैमरा, ईयरफोन और चमड़े की बेल्ट अंदर ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित है। अपने ड्राइवर के पास गाड़ी में सामान छोड़ना सबसे सुरक्षित है।
सुलभ दर्शन सुविधा: यदि परिवार में बुजुर्ग हैं, तो मंदिर की वेबसाइट से ₹300 का आधिकारिक सुगम दर्शन टिकट पहले से बुक कर लें। इससे गेट 1 (ढुंढिराज / छत्ताद्वार) से मात्र 35–45 मिनट में सुगम दर्शन हो जाते हैं।
पहुंच मार्ग: पुराने शहर में गाड़ियाँ प्रतिबंधित हैं। कैब से बेनियाबाग मल्टी-लेवल अंडरग्राउंड पार्किंग पर उतरें (गेट 4 हेतु 700 मीटर समतल पैदल मार्ग) या नमो घाट से नाव लेकर सीधे ललिता घाट स्थित गंगा द्वार एस्केलेटर से प्रवेश करें।
चारों मंदिरों की तुलना व दर्शन सारिणी
मंदिर / स्थल
स्थान
गीता जयंती विशेष महत्व
दर्शन समय
सबसे अच्छा समय
गाड़ी ड्रॉप व पैदल दूरी
श्री विश्वनाथ मंदिर (न्यू वीटी)
बीएचयू परिसर, लंका
संगमरमरी दीवारों पर संपूर्ण 700 श्लोक; संकाय का सस्वर पाठ
सुबह 04:00 – दोपहर 12:00 दोपहर 01:00 – रात 09:00
सुबह 08:00 – 10:30 बजे
कैंपस पार्किंग; 100 मी समतल रास्ता। व्हीलचेयर रैंप उपलब्ध।
तुलसी मानस मंदिर
संकट मोचन रोड, दुर्गाकुंड
दूसरी मंजिल पर कुरुक्षेत्र गीतोपदेश की यांत्रिक चलित झांकी
तारक मंत्र प्रदाता ज्योतिर्लिंग दर्शन; विशेष तुलसी-बिल्व अर्चन
सुबह 03:00 – रात 11:00 बजे
सुबह 06:00 – 07:30 बजे या सुगम दर्शन
बेनियाबाग पार्किंग (700 मी) या ललिता घाट बोट ड्रॉप।
असी / दशाश्वमेध घाट
गंगा तट
ब्रह्म मुहूर्त मोक्षदा स्नान, सूर्य तर्पण व शाम की बोट आरती
24 घंटे खुला
सुबह 05:30 – 06:45 बजे (स्नान)
असी घाट पार्किंग (150 मी पैदल) या दशाश्वमेध।
गीता जयंती हेतु व्यावहारिक यात्रा कार्यक्रम (इटिनरेरी)
विकल्प 1: 1-दिवसीय संपूर्ण गीता सर्किट (रविवार, 20 दिसंबर 2026)
व्यस्त यात्रियों और वीकेंड पर आने वालों के लिए सर्वोत्तम।
सुबह 05:30 – 07:00 बजे: असी घाट पर मोक्षदा गंगा स्नान
सूर्योदय से पूर्व असी घाट पर पहुंचें। सुबह की हल्की ठंड (लगभग 11°C) में तीन पवित्र डुबकी लगाएं, सूर्य को अर्घ्य दें और घाट पर गर्म कुल्हड़ चाय पिएं।
सुबह 07:30 – 08:15 बजे: सात्विक नाश्ता व मलय्यो
दुर्गाकुंड या लंका की ओर चलें। सर्दियों की खास बनारसी सौगात—केसरिया मलय्यो का आनंद लें।
सुबह 08:30 – 10:30 बजे: बीएचयू न्यू विश्वनाथ मंदिर (बिरला मंदिर)
प्रातःकालीन पाठ के समय मंदिर पहुंचें। आंतरिक परिक्रमा में दीवारों पर अंकित 700 श्लोकों का दर्शन करें और मुख्य मंडप में वैदिक मंत्रोच्चार सुनें।
सुबह 10:45 – 11:45 बजे: तुलसी मानस मंदिर
गाड़ी से 10 मिनट में दुर्गाकुंड पहुंचें। मुख्य विग्रह के दर्शन कर ऊपरी मंजिल पर कुरुक्षेत्र गीतोपदेश की यांत्रिक झांकी देखें।
दोपहर 12:00 – 01:30 बजे: इस्कॉन मंदिर भेलूपुर (यज्ञ व महाप्रसाद)
राजभोग आरती और गीता महायज्ञ के साक्षी बनें। घर के लिए गीता की प्रतियां लें और मंदिर में गरम फलाहारी साबूदाना-सावां प्रसाद ग्रहण करें।
दोपहर 02:00 – 03:45 बजे: होटल विश्राम
दोपहर की धूप में होटल लौटकर थोड़ा आराम करें ताकि शाम के दर्शन हेतु ताजगी बनी रहे।
शाम 04:15 – 06:30 बजे: श्री काशी विश्वनाथ धाम
बेनियाबाग पार्किंग से गेट 4 या सुगम दर्शन से प्रवेश करें। बाबा विश्वनाथ के संध्या शृंगार के दर्शन करें।
शाम 06:45 – 07:45 बजे: दशाश्वमेध घाट पर नाव से संध्या गंगा आरती
बांसफाटक से उतरकर ललिता या दशाश्वमेध घाट पहुंचें। पहले से बुक की गई प्राइवेट नाव पर बैठकर सात अर्चकों द्वारा होने वाली भव्य गंगा आरती का दर्शन करें।
📖 गीता जयंती व मोक्षदा एकादशी: मंदिर सर्किट कैब, सुलभ दर्शन व स्नान बोट
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शीतकालीन कोहरा गाइड: बाबतपुर एयरपोर्ट (VNS) व रेलवे स्टेशन
दिसंबर के अंतिम सप्ताह में पूर्वांचल के मैदानी इलाकों में घना कोहरा छाना आम बात है। गंगा बेसिन की नमी और ठंडी हवाओं के कारण लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (बाबतपुर - VNS) पर सुबह के समय रनवे विजिबिलिटी अक्सर 100 मीटर से नीचे गिर जाती है।
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│ बाबतपुर एयरपोर्ट (VNS) शीतकालीन कोहरा एडवाइजरी │
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│ सुबह 06:00 – 10:00 बजे: अत्यधिक जोखिम | घना कोहरा; 60-70% उड़ानें लेट │
│ दोपहर 11:30 – 03:30 बजे: सबसे सुरक्षित | धूप से कोहरा साफ; समय पर संचालन│
│ शाम 04:00 – 07:00 बजे: मध्यम स्थिति | शाम की धुंध; आम तौर पर सुगम │
│ रात 08:00 – मध्यरात्रि: पुनः कोहरा | तापमान गिरते ही कोहरा गहराता है │
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कोहरे से बचाव के 3 नियम:
दोपहर की फ्लाइट चुनें: दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु आदि से आने वाली वे उड़ानें बुक करें जो बाबतपुर पर सुबह 11:30 बजे से दोपहर 03:30 बजे के बीच लैंड करने वाली हों। सुबह 7-8 बजे वाली फ्लाइट्स अक्सर डायवर्ट या 2-3 घंटे लेट होती हैं।
सड़क यात्रा का समय बढ़ाएं: आम दिनों में बाबतपुर से शहर आने में 40 मिनट लगते हैं, लेकिन सुबह के घने कोहरे में NH-31 पर 65 से 80 मिनट का समय लग सकता है।
फ्लाइट ट्रैकिंग युक्त कैब: अपनी एयरपोर्ट कैब पहले से तय रखें, जिसका ड्राइवर आपकी फ्लाइट का लाइव स्टेटस ट्रैक करे और 45 मिनट तक की निःशुल्क देरी की प्रतीक्षा दे।
ठंडे फर्श से बचाव: वरिष्ठ नागरिकों व परिवारों हेतु सुझाव
यदि आपके साथ माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक यात्रा कर रहे हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:
बर्फ जैसा ठंडा संगमरमर फर्श: बीएचयू न्यू वीटी और काशी विश्वनाथ धाम के विशाल प्रांगण में जूते-चप्पल बाहर उतारने होते हैं। सुबह 8 बजे संगमरमर का तापमान 9°C से 12°C तक गिर जाता है। नंगे पैर 45 मिनट खड़े रहने से जोड़ों में अकड़न आ जाती है। अपने साथ साफ ऊनी ग्रिप-जुराबें (thermal socks) रखें। मंदिर सुरक्षा गार्ड बिना चमड़े वाले मोजे पहनकर अंदर जाने की पूरी अनुमति देते हैं।
घाटों की संकरी सीढ़ियों से बचें: जिन बुजुर्गों को घुटने की समस्या है, उन्हें पंचगंगा घाट (120 खड़ी सीढ़ियां) ले जाने की गलती न करें। इसके बजाय असी घाट जाएं, जहाँ पक्के समतल रैंप और चौड़ी, नीची सीढ़ियां हैं।
गंगा द्वार का एस्केलेटर: काशी विश्वनाथ धाम दर्शन हेतु सबसे आसान तरीका ललिता घाट पर नाव से उतरना है। यहाँ गंगा द्वार पर स्वचालित सीढ़ियां (एस्केलेटर), लिफ्ट और ढलवां रैंप बने हैं, जिससे बिना एक भी सीढ़ी चढ़े सीधे मंदिर चौक पहुंचा जा सकता है।
गर्म पानी का थर्मस: एकादशी का निर्जला या फलाहारी व्रत रखने वाले परिजनों के लिए गाड़ी में गर्म पानी या अदरक-तुलसी की चाय का फ्लास्क साथ रखें।
एकादशी फलाहार: कहाँ मिलेगा शुद्ध सात्विक भोजन?
मोक्षदा एकादशी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु अन्न, दाल, चावल, प्याज और लहसुन का पूर्ण त्याग करते हैं। काशी में एकादशी के दिन फलाहार की समृद्ध परंपरा है:
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│ काशी एकादशी फलाहार गाइड │
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│ फलाहारी व्यंजन: सिंघाड़े के आटे की पूरी व सेंधा नमक वाली आलू-सब्जी │
│ कुट्टू के क्रिस्पी पकौड़े व धनिया चटनी │
│ साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना वड़ा व दही │
│ सावां के चावल की खीर व मखाना खीर │
│ प्रमुख केंद्र: दुर्गाकुंड मंदिर के सामने स्थित फलाहारी स्टॉल्स │
│ इस्कॉन गोविंदा'स काउंटर (भेलूपुर) │
│ गैर-व्रती साथियों: शीतकालीन चौखंभा मलय्यो (ओस में मथा केसरिया झाग) │
│ राम भंडार कचौड़ी-सब्जी (सोमवार पारण के लिए) │
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दुर्गाकुंड फलाहार केंद्र: दुर्गा मंदिर कुंड के सामने कई पारंपरिक दुकानें हैं, जहाँ गर्म-गर्म सिंघाड़े की पूरियां, कद्दू की खट्टी-मीठी सब्जी और सेंधा नमक वाला रायता तुरंत तैयार मिलता है।
इस्कॉन प्रसादम: भेलूपुर में इस्कॉन परिसर के अंदर शुद्ध घी से बनी साबूदाना खिचड़ी और भुने मखाने का सुरक्षित व सात्विक भोजन मिलता है।
मलय्यो का स्वाद: जो परिजन उपवास में नहीं हैं, वे सुबह चौखंभा या ठठेरी बाजार में बनारसी मलय्यो का स्वाद ले सकते हैं। रात भर ओस में रखकर मथे गए दूध का यह हल्का झाग केसर और पिस्ते से सजाया जाता है।
होटल कहाँ लें: असी/लंका बनाम कैंट बनाम गोदौलिया
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│ होटल चयन: नफ़ा व नुकसान │
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│ क्षेत्र 1: असी / लंका (गीता जयंती हेतु सबसे उपयुक्त) │
│ • फायदा: बीएचयू व मानस मंदिर 5-10 मिनट दूर; खुला व शांत माहौल │
│ • नुकसान: बाबतपुर एयरपोर्ट से 30 किमी (60-75 मिनट) │
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│ क्षेत्र 2: छावनी (कैंट / नदेसर) │
│ • फायदा: 5-स्टार होटल (ताज, रेडिसन, क्लार्क); चौड़ी सड़कें व रिंग रोड│
│ • नुकसान: घाटों से 8-10 किमी दूर; हर मंदिर हेतु कैब चाहिए │
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│ क्षेत्र 3: गोदौलिया / पुराना शहर │
│ • फायदा: विश्वनाथ मंदिर व दशाश्वमेध घाट पैदल दूरी पर │
│ • नुकसान: चार पहिया वाहन पूर्ण बंद; संकरी गलियों में सामान घसीटना पड़ता│
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गीता जयंती के लिए असी घाट या लंका क्षेत्र सबसे सुविधाजनक ठहरने का स्थान है। यहाँ से बीएचयू और तुलसी मानस मंदिर पास हैं, सुबह के स्नान हेतु असी घाट पैदल जाया जा सकता है और शहर के जाम से मुक्ति रहती है।
पारदर्शी वाहन दरें: संपूर्ण गीता सर्किट व एयरपोर्ट ट्रांसफर
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सेवा / चार्टर
क्षमता / प्रकार
प्रमाणित दर
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6 सवारी तक
₹3,500
प्राइवेट लकड़ी की नाव, अनिवार्य लाइफ जैकेट, 2 घंटे नदी भ्रमण (असी से दशाश्वमेध वापसी)।
शाम की आरती दर्शन बोट (मध्यम)
15 सवारी तक
₹4,500
शाम 06:45 बजे दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती के ठीक सामने नाव लंगर डालने की सुविधा।
बड़ा ग्रुप बजरा / मोटरबोट
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
2026 में गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी कब है?
गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी का पावन पर्व रविवार, 20 दिसंबर 2026 को है। एकादशी तिथि शनिवार, 19 दिसंबर को रात 10:09 बजे प्रारंभ होकर रविवार, 20 दिसंबर की रात 08:14 बजे समाप्त होगी। व्रत का पारण सोमवार, 21 दिसंबर को सुबह 06:47 बजे से 09:08 बजे के मध्य किया जाएगा।
गीता जयंती पर वाराणसी में कौन-से मंदिर दर्शन करना अनिवार्य है?
मुख्य 4-मंदिर गीता सर्किट में श्री विश्वनाथ मंदिर (बिरला मंदिर / न्यू वीटी) बीएचयू परिसर (जहां दीवारों पर संपूर्ण 700 श्लोक उत्कीर्ण हैं), दुर्गाकुंड का तुलसी मानस मंदिर (दूसरी मंजिल पर कुरुक्षेत्र गीतोपदेश की चलित झांकी), भेलूपुर का इस्कॉन मंदिर (गीता महायज्ञ व फलाहारी प्रसाद वितरण) और श्री काशी विश्वनाथ धाम शामिल हैं।
दिसंबर के अंतिम सप्ताह में बनारस में कोहरे का उड़ानों पर क्या असर पड़ता है?
दिसंबर के अंत में बाबतपुर एयरपोर्ट (VNS) पर सुबह 06:00 से 09:30 बजे के बीच घना कोहरा रहता है और दृश्यता 100 मीटर से कम हो जाती है, जिससे उड़ानों में 1 से 3 घंटे की देरी हो सकती है। सुबह 11:30 बजे से दोपहर 03:30 बजे के बीच उतरने वाली उड़ानें बुक करना सबसे सुरक्षित रहता है।
दिसंबर की ठंड में बुजुर्ग यात्रियों को मंदिर दर्शन के समय क्या सावधानी रखनी चाहिए?
बीएचयू न्यू वीटी और काशी विश्वनाथ धाम के संगमरमर व पत्थरों का फर्श सुबह के समय लगभग 10°C तक ठंडा हो जाता है। नंगे पैर चलने से जोड़ों में तेज दर्द हो सकता है। अपने साथ साफ, बिना चमड़े वाले ऊनी ग्रिप-जुराबें (thermal grip socks) अवश्य रखें, जिसे मंदिर सुरक्षा कर्मी अंदर ले जाने देते हैं।
गीता सर्किट के लिए टैक्सी कहाँ तक जा सकती है?
बीएचयू न्यू वीटी के लिए गाड़ी सीधे कैंपस की पार्किंग तक जाती है (100 मीटर समतल पैदल मार्ग)। तुलसी मानस मंदिर के सामने सड़क पर ड्रॉप मिलता है। इस्कॉन भेलूपुर में गुरुधाम मार्ग पर 30 मीटर की दूरी पर ड्रॉप होता है। काशी विश्वनाथ धाम हेतु बेनियाबाग अंडरग्राउंड पार्किंग (गेट 4 के लिए 700 मीटर पैदल) तय ड्रॉप पॉइंट है।
पूरे दिन के काशी गीता मंदिर सर्किट का कैब किराया क्या है?
बीएचयू, दुर्गाकुंड, भेलूपुर और पुराने शहर के परिमाप को कवर करने वाली 8 घंटे / 80 किमी की समर्पित एसी कैब का फिक्स्ड किराया 4-सीटर सेडान (डिजायर) हेतु ₹2,499, 6-सीटर अर्टिगा हेतु ₹2,800, इनोवा क्रिस्टा हेतु ₹3,800 और 17-सीटर टेम्पो ट्रैवलर हेतु ₹4,250 है, जिसमें कोई पीक सर्ज नहीं जुड़ता।