सनातन परंपरा में माघ मास की अमावस्या को सर्वश्रेष्ठ स्नान पर्व (मौनी अमावस्या) का दर्जा प्राप्त है।
मान्यता है कि इस दिन पवित्र गंगा और त्रिवेणी संगम का जल अमृतमय हो जाता है। मौन रहकर किया गया स्नान, सूर्य अर्घ्य और पितरों को दिया गया तिल-जल जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति दिलाकर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
वर्ष 2027 में इस पर्व के साथ एक अत्यंत दुर्लभ और फलदायी संयोग जुड़ रहा है—यह पर्व शनिवार, 6 फरवरी 2027 को पड़ रहा है, जिससे यह शनि अमावस्या (शनिचरी अमावस्या) बन गई है।
यदि आप काशी के घाटों पर भोर स्नान का संकल्प ले रहे हैं या प्रयागराज माघ मेला के शाही स्नान हेतु गाड़ी की योजना बना रहे हैं, तो यहां पढ़ें ज़मीनी हकीकत: पंचांग अनुसार पुख्ता मुहूर्त, भीड़ से बचने के उपाय, आउटर ड्रॉप गेट्स और तय कैब किराया।
माघ कृष्ण अमावस्या: 5 फरवरी शाम 07:06 बजे से 6 फरवरी रात 09:26 बजे तक
ब्रह्म मुहूर्त स्नान
भोर 05:05 बजे से 05:55 बजे तक (अमृत योग)
काशी सूर्योदय
सुबह 06:42 बजे
प्रातः स्नान अवधि
भोर 05:05 बजे से सुबह 08:30 बजे तक
दुर्लभ संयोग
शनिवार का दिन होने से शनि अमावस्या (शनि दोष निवारण व पितृ तर्पण)
अनुमानित भीड़
वाराणसी घाटों पर 10 से 15 लाख; प्रयागराज संगम पर 1.5 से 2.5 करोड़
काशी वाहन ड्रॉप गेट्स
बेनियाबाग पार्किंग (850 मी पैदल), गिरजाघर (600 मी), मैदागिन (500 मी) या नमो घाट (सीधी पार्किंग)
मौसम
सुबह की ठंडी बयार; न्यूनतम तापमान 9°C से 12°C, दोपहर में खिली धूप (23°C)
2. शनिवार, 6 फरवरी 2027 को ही स्नान क्यों?
वैदिक पंचांग के उदया तिथि सिद्धांत के अनुसार, यदि अमावस्या तिथि रात्रि में व्याप्त होकर अगले दिन के संपूर्ण सूर्योदय को स्पर्श करती है, तो पर्व का मुख्य स्नान उसी दिन मान्य होता है।
माघ कृष्ण अमावस्या तिथि का आरंभ: शुक्रवार, 5 फरवरी 2027 को शाम 07:06 बजे
अमावस्या तिथि का समापन: शनिवार, 6 फरवरी 2027 को रात 09:26 बजे
चूंकि शनिवार को पूरे दिन अमावस्या विद्यमान रहेगी, अतः मौन व्रत, पवित्र गंगा स्नान, अन्न-वस्त्र दान और पितृ श्राद्ध केवल शनिवार, 6 फरवरी 2027 को ही संपन्न किए जाएंगे।
शनि अमावस्या का महासंयोग
माघ अमावस्या का शनिवार को पड़ना ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इसे शनिचरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन गंगा स्नान के उपरांत पीपल के वृक्ष पर सरसों के तेल का दीपक जलाना, काले तिल, काले कंबल और लोहे की वस्तुओं का दान करना शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या के कष्टों से राहत दिलाता है।
3. मौन व्रत का विधान: कैसे करें साधना
'मौनी' शब्द की उत्पत्ति 'मुनि' और 'मौन' से हुई है। इस दिन वाणी पर संयम रखकर अंतर्मुखी होना ही सबसे बड़ी तपस्या है।
वाङ्मौन (वाणी का मौन):
परंपरानुसार श्रद्धालु प्रातः सोकर उठने से लेकर गंगा स्नान और सूर्य को तांबे के लोटे से अर्घ्य देने तक किसी से बातचीत नहीं करते। यदि आप परिवार के साथ हैं, तो इशारों में संवाद की पहले से सहमति बना लें ताकि घाट की भीड़ में आपका मौन व्रत न टूटे।
मनोमौन (मन का संयम):
मुंह से चुप रहने से भी अधिक आवश्यक है कि मन में क्रोध, विवाद या चिंता न लाई जाए। डुबकी लगाते समय मन ही मन ॐ नमः शिवाय, गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
स्नान और तर्पण की विधि:
पूर्व दिशा (उगते सूर्य) की ओर मुख करके तीन पवित्र डुबकियां लगाएं।
दोनों हाथों की अंजुलि अथवा तांबे के पात्र से भगवान सूर्य को जल अर्पित करें।
इसके पश्चात दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल, कुशा और गंगाजल से अपने पितरों का स्मरण करते हुए तिलांजलि (तर्पण) दें।
घाट पर बने वस्त्र बदल कक्ष में तुरंत सूखे ऊनी वस्त्र पहनें और किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद को अन्न-तिल का दान देकर अपना मौन व्रत खोलें।
4. वाराणसी में किस घाट पर जाएं? घाटों की तुलना
काशी में 84 घाट हैं, और मौनी अमावस्या पर आपका अनुभव इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कौन सा घाट चुना है:
[नमो घाट / राजघाट] <--- सीधी गाड़ी पार्किंग व रैंप सुविधा (बुजुर्गों के लिए सर्वोत्तम)
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[पंचगंगा घाट] <--- आध्यात्मिक शांति, मौन साधक व 5 नदियों का पावन संगम
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[दशाश्वमेध घाट] <--- महाकुंभ जैसी भीड़ (भोर 03:30 बजे से खचाखच भरा)
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[केदार व हरिश्चंद्र] <--- पारंपरिक स्नान व मोक्ष चिंतन
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[अस्सी घाट] <--- चौड़े पक्के घाट, सुबह-ए-बनारस व आसान निकासी
1. दशाश्वमेध घाट: आस्था का महासागर
स्थिति: काशी का सबसे प्रमुख और केंद्रीय घाट। यहां भोर 03:00 बजे से ही तिल धरने की जगह नहीं बचती।
सलाह: यदि आप भारी भीड़ और जयकारों के बीच सामूहिक आस्था का अनुभव करना चाहते हैं तभी जाएं। छोटे बच्चों या वृद्ध परिजनों के साथ यहां जाने से बचें।
2. पंचगंगा घाट: एकांत और मौन साधना का केंद्र
महत्व: मान्यता है कि यहां गंगा, यमुना, सरस्वती, किरणा और धूतपापा—इन पांच पवित्र नदियों का गुप्त संगम है। तैलंग स्वामी और कबीर की साधना स्थली होने के कारण गंभीर मौन व्रत रखने वाले साधक इसी घाट को चुनते हैं।
पहुंच: चौखंभा और रामघाट की संकरी गलियों से होकर प्राचीन सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं।
3. अस्सी घाट: खुला वातावरण और वैदिक ऋचाएं
स्थिति: दक्षिण छोर पर स्थित विशाल पक्का घाट। सीढ़ियां चौड़ी होने के कारण भीड़ का दबाव तेजी से फैलता नहीं है।
सलाह: स्नान के साथ सुबह-ए-बनारस की भव्य आरती और वैदिक मंगलाचरण का आनंद लेने के लिए यह सबसे संतुलित विकल्प है।
4. नमो घाट: वरिष्ठ नागरिकों व गाड़ी वालों के लिए नंबर-1
स्थिति: उत्तरी छोर पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त नया पक्का घाट।
फायदा:यहां तक आपकी टैक्सी सीधे घाट परिसर की पक्की पार्किंग तक जाती है। व्हीलचेयर रैंप, साफ शौचालय और चौड़े पाथवे उपलब्ध हैं। गलियों में पैदल चलने की कोई आवश्यकता नहीं होती।
मौनी अमावस्या 2027: कैब, घाट ड्रॉप व प्रयागराज संगम डे-ट्रिप व्यवस्था
भोर के गंगा स्नान (सुबह 04:30 बजे), बेनियाबाग व मैदागिन आउटर ड्रॉप, कोहरा बफर सहित एयरपोर्ट ट्रांसफर, और प्रयागराज त्रिवेणी संगम शाही स्नान हेतु सेम-डे राउंड ट्रिप कैब फिक्स्ड किराए पर प्री-बुक करें। कोई हिडन चार्ज नहीं।
भोर 04:30 बजे स्नान पिकअप·बेनियाबाग व मैदागिन बाहरी ड्रॉप·प्रयागराज संगम सेम-डे राउंड ट्रिप·कोहरे में एयरपोर्ट फ्लाइट ट्रैकिंग
5. पुलिस ट्रैफिक व्यवस्था व गाड़ी ड्रॉप प्वाइंट्स
त्योहार पर पैदल चलने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट कड़ा ट्रैफिक प्लान लागू करता है।
नो-व्हीकल जोन के नियम:
भोर 04:00 बजे से रात तक गोदौलिया-दशाश्वमेध मार्ग और मैदागिन-चौक मार्ग पर चार पहिया वाहन, ऑटो और ई-रिक्शा पूरी तरह बंद रहते हैं।
यदि आप होटल से कैब बुक करते हैं, तो ड्राइवर आपको निकटतम स्वीकृत ड्रॉप प्वाइंट पर उतारेगा:
आउटर ड्रॉप गेट
घाट की दूरी
पैदल मार्ग की स्थिति
किसके लिए उपयुक्त
बेनियाबाग मल्टीलेवल पार्किंग
850 मीटर (10–12 मिनट)
नई सड़क होते हुए समतल पक्की सड़क
दशाश्वमेध घाट व श्री काशी विश्वनाथ मंदिर
गिरजाघर चौराहा
600 मीटर (7–8 मिनट)
गोदौलिया की ओर हल्की ढलान
दशाश्वमेध घाट
मैदागिन टाउन हॉल
500 मीटर (6–7 मिनट)
पारंपरिक बाज़ार की पक्की गली
काल भैरव, मणिकर्णिका व पंचगंगा घाट
भेलूपुर जलकल / सोनारपुरा
1.2 किमी (ई-रिक्शा सुलभ)
सोनारपुरा होते हुए केदार घाट मार्ग
केदार घाट व हरिश्चंद्र घाट
नमो घाट पार्किंग
50 मीटर (शून्य पैदल)
पक्का रैंप व सीधा रिवरफ्रंट
वरिष्ठ नागरिक, परिवार व निजी गाड़ियां
स्थानीय बनारसी सलाह: होटल से निकलने के लिए अपनी कैब भोर 03:30 से 04:15 बजे के बीच तय करें। सुबह 04:30 बजे से पहले शहर की सड़कें खुली रहती हैं और आप पुलिस बैरिकेडिंग सख्त होने से पहले घाट किनारे पहुंचकर 05:05 बजे के ब्रह्म मुहूर्त में आराम से स्नान कर सकते हैं।
6. प्रयागराज माघ मेला संगम डे-ट्रिप (वाराणसी से)
वाराणसी आने वाले अधिकांश श्रद्धालुओं की दिली इच्छा होती है कि वे मौनी अमावस्या का मुख्य शाही स्नान प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर करें।
मौनी अमावस्या 52 दिवसीय माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान दिवस है, जहां एक ही दिन में 2 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। वाराणसी से NH-19 (सिक्स-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग) द्वारा प्रयागराज की दूरी लगभग 120 किमी है।
हाईवे की जमीनी सच्चाई:
सामान्य दिनों में वाराणसी से संगम पहुंचने में 2.5 से 3 घंटे लगते हैं।
मौनी अमावस्या के दिन लाला नगर, हंडिया टोल प्लाजा और शहर में प्रवेश वाले शास्त्री पुल पर भारी दबाव रहता है।
त्योहार के दिन एक तरफ की यात्रा के लिए 3.5 से 4.5 घंटे का समय मानकर चलें।
सटीक सेम-डे यात्रा कार्यक्रम:
भोर 02:30 से 03:00 बजे प्रस्थान: वाराणसी होटल से कैब में बैठें। इस समय निकलने से आप हंडिया टोल प्लाजा पर लगने वाले भोर के जाम से पहले निकल जाएंगे।
सुबह 06:30 बजे प्रयागराज आउटर पार्किंग: निजी गाड़ियां मेला प्रशासन द्वारा झूंसी अथवा अंदावा की ओर तय आउटर पार्किंग में रोकी जाती हैं।
सुबह 07:00 से 09:30 बजे संगम स्नान: पांटून पुल अथवा स्थानीय ई-रिक्शा द्वारा रेतीले कछार तक जाएं। वहां से प्रमाणित लकड़ी की नौका लेकर त्रिवेणी संगम के मुख्य नोज (गंगा-यमुना-सरस्वती मिलन स्थल) पर डुबकी लगाएं और पितृ तर्पण करें।
सुबह 10:00 से 11:30 बजे दर्शन: संगम के निकट स्थित लेटे हुए बड़े हनुमान जी और अलोपी देवी शक्तिपीठ के दर्शन करें।
दोपहर 12:30 बजे वापसी मिलन: तय पार्किंग में खड़े अपने ड्राइवर से संपर्क कर गाड़ी में बैठें।
दोपहर 01:30 बजे वाराणसी वापसी: NH-19 पर किसी स्वच्छ वैष्णव ढाबे पर दोपहर का भोजन करें।
शाम 05:30 से 06:30 बजे होटल ड्रॉप: सुरक्षित और तनावमुक्त रूप से शाम तक अपने वाराणसी होटल वापस लौट आएं।
7. बुजुर्गों और बच्चों के लिए आवश्यक सुरक्षा सावधानियां
फरवरी के पहले सप्ताह में नदी किनारे कड़ाके की ठंडी हवाएं चलती हैं। परिवार के स्वास्थ्य हेतु इन बातों का ध्यान रखें:
ऊनी कपड़े और हवा से बचाव: सुबह के समय नदी किनारे तापमान 9°C से 12°C तक गिर जाता है। विंडप्रूफ जैकेट, कान ढकने वाली टोपी और मफलर अवश्य पहनें।
फिसलन भरी सीढ़ियों से सतर्क रहें: पानी और सरसों के तेल के कारण सीढ़ियां बेहद चिकनी हो जाती हैं। पानी के किनारे तक अच्छी ग्रिप वाले जूते या सैंडल पहनकर जाएं; भीगी सीढ़ियों पर नंगे पांव संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है।
सुरक्षा जंजीरों के भीतर ही रहें: जल पुलिस और एनडीआरएफ द्वारा नदी में लोहे की जंजीरें और फ्लोटिंग बैरिकेड लगाए जाते हैं। धारा में आगे न बढ़ें और जंजीर पकड़कर ही स्नान करें।
नौका द्वारा स्नान (वरिष्ठ नागरिकों हेतु सर्वोत्तम): यदि बुजुर्गों के लिए सीढ़ियां उतरना-चढ़ना कठिन हो, तो अस्सी या नमो घाट से निजी बजरा नाव बुक करें। नाव शांत जल में लंगर डालती है और बुजुर्ग लाइफ जैकेट पहनकर नाव की मजबूत सीढ़ी पकड़कर सुरक्षित डुबकी लगा सकते हैं।
8. मौनी अमावस्या पर कहां ठहरें?
क्षेत्र
नदी से दूरी
लाभ
सीमाएं
किसके लिए उत्तम
घाट व गोदौलिया
50 से 400 मीटर
बिना गाड़ी के सीधे पैदल घाट पर पहुंचकर भोर स्नान।
टैक्सी नहीं जा सकती; तेज शोर; संकरी गलियों में सामान ढोना पड़ता है।
स्वतंत्र युवा यात्री जो भोर स्नान को प्राथमिकता दें।
भोर में आउटर ड्रॉप गेट तक पहुंचने हेतु 25 मिनट की कैब यात्रा।
परिवार, बुजुर्ग और आरामदेह प्रवास चाहने वाले श्रद्धालु।
लंका व बीएचयू
2 से 3 किमी
चौड़ी सड़कें, अस्सी घाट से निकटता और NH-19 प्रयागराज हाईवे का सुगम निकास।
पुराने शहर के मध्य घाटों के लिए मध्यम दूरी।
अस्सी स्नान और प्रयागराज यात्रा दोनों की योजना बनाने वाले।
🏨 सही इलाके में ठहरें — डोर-टू-डोर ट्रांसफर के साथ
हमें अपनी पसंद (घाट किनारे, शांत बाहरी इलाका, या साफ-सुथरा कैंट) व बजट बताएं। हम भरोसेमंद होटल चुनते हैं और फिक्स्ड किराए वाला एयरपोर्ट/स्टेशन पिकअप जोड़ते हैं ताकि गलियों में सामान न घसीटना पड़े।
✅ भरोसेमंद होटल, सही इलाके·🧳 डोर-टू-डोर ट्रांसफर·📍 घाट / शांत / साफ ज़ोन·🛡️ कोई कमीशन झटका नहीं
9. मौनी अमावस्या हेतु फिक्स्ड कैब किराया सूची
त्योहारों पर चौराहों पर मनमाना किराया मांगने का चलन रहता है। काशी टैक्सी बिना किसी सर्ज प्राइस के पहले से फिक्स्ड और पारदर्शी दरों पर वाहन उपलब्ध कराती है:
लोकल वाराणसी भोर स्नान व तीर्थ दर्शन कैब:
सेवा / पैकेज
AC सेडान (Dzire)
फैमिली SUV (Ertiga)
प्रीमियम SUV (Innova Crysta)
12-सीटर टेम्पो
17-सीटर टेम्पो
पैकेज विवरण
भोर 03:30 बजे स्नान ट्रांसफर (4 घंटे / 40 किमी)
₹1,600
₹2,000
₹2,400
₹3,200
₹3,800
होटल से भोर पिकअप, निकटतम आउटर गेट ड्रॉप, ड्राइवर वेटिंग व वापसी।
पूरे दिन का काशी दर्शन (8 घंटे / 80 किमी)
₹2,499
₹3,399
₹3,800
₹4,599
₹5,299
भोर स्नान, काशी विश्वनाथ, अन्नपूर्णा, काल भैरव, संकट मोचन व शाम की गंगा आरती।
बाबतपुर एयरपोर्ट (VNS) ट्रांसफर
₹899
₹1,299
₹1,799
₹2,500
₹3,000
रिंग रोड बाईपास से शहर ड्रॉप। कोहरे में फ्लाइट डिले ट्रैकिंग शामिल।
कैंट (BSB) / बनारस (BSBS) स्टेशन पिकअप
₹599
₹899
₹1,199
₹1,699
₹1,999
स्टेशन पिकअप से आउटर गेट या होटल ड्रॉप। ड्राइवर सामान में मदद करेगा।
AC गाड़ी, ईंधन, ड्राइवर भत्ता, हाईवे टोल, स्नान भर वेटिंग।
संगम नाव टिकट, घाट पार्किंग (₹50–₹100)।
फैमिली SUV (Ertiga)
4–6 सवारी
₹4,125
~250 किमी राउंड ट्रिप (NH-19)
AC गाड़ी, ईंधन, ड्राइवर भत्ता, हाईवे टोल, स्नान भर वेटिंग।
संगम नाव टिकट, घाट पार्किंग शुल्क।
प्रीमियम SUV (Innova Crysta)
5–7 सवारी
₹5,375
~250 किमी राउंड ट्रिप (NH-19)
हाईवे का बेहतरीन सस्पेंशन, टोल, ड्राइवर, दिन भर वेटिंग।
संगम नाव टिकट, घाट पार्किंग शुल्क।
12-सीटर टेम्पो ट्रैवलर
8–12 सवारी
₹6,750
~250 किमी राउंड ट्रिप (NH-19)
पुशबैक सीट, डुअल AC, सभी टोल, ड्राइवर भत्ता, वेटिंग।
संगम नाव टिकट, पार्किंग शुल्क।
17-सीटर टेम्पो ट्रैवलर
12–17 सवारी
₹7,500
~250 किमी राउंड ट्रिप (NH-19)
बड़ा सामान केबिन, डुअल ब्लोअर AC, सभी टोल, ड्राइवर भत्ता।
संगम नाव टिकट, पार्किंग शुल्क।
सभी किरायों में AC वाहन, ईंधन, ड्राइवर खर्च और टोल टैक्स शामिल हैं। पैकेज के अतिरिक्त चलने पर दरें: सेडान ₹12/किमी, SUV ₹15/किमी, टेम्पो ट्रैवलर ₹22/किमी।
10. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
वाराणसी में मौनी अमावस्या 2027 की सही तारीख क्या है?
मौनी अमावस्या शनिवार, 6 फरवरी 2027 को मनाई जाएगी। पंचांग अनुसार अमावस्या तिथि 5 फरवरी शाम 07:06 बजे शुरू होकर 6 फरवरी रात 09:26 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 6 फरवरी को ही संपूर्ण स्नान पर्व मान्य है।
इस बार की मौनी अमावस्या पर शनिवार का क्या महत्व है?
शनिवार को अमावस्या पड़ने से यह शनि अमावस्या (शनिचरी अमावस्या) बन गई है। काशी में इस दिन पीपल पूजन, सरसों के तेल का दीपदान और काले तिल से पितृ तर्पण करने से शनि साढ़ेसाती और पितृ दोषों की शांति होती है।
6 फरवरी 2027 को गंगा स्नान का श्रेष्ठ मुहूर्त कब है?
सर्वश्रेष्ठ अमृत काल ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 05:05 बजे से 05:55 बजे तक है। प्रातः काल 08:30 बजे तक स्नान करना आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना गया है।
बुजुर्गों के लिए काशी का कौन सा घाट सबसे सुरक्षित है?
वरिष्ठ नागरिकों के लिए नमो घाट सबसे सुरक्षित और सुलभ है क्योंकि यहां गाड़ियां सीधे घाट परिसर तक पहुंचती हैं और व्हीलचेयर रैंप बने हैं। इसके अतिरिक्त अस्सी घाट से निजी नाव लेकर नदी के बीच से स्नान करना भी बहुत सुरक्षित रहता है।
क्या वाराणसी से प्रयागराज संगम के लिए सेम-डे कैब मिल सकती है?
जी हां, काशी टैक्सी सेडान (₹3,275) और अर्टिगा (₹4,125) में टोल टैक्स और दिन भर की वेटिंग सहित सेम-डे राउंड ट्रिप प्रदान करती है। हाईवे के जाम से बचने हेतु सुबह 02:30 से 03:00 बजे के बीच प्रस्थान करें।
काशी टैक्सी के साथ अपनी मौनी अमावस्या कैब बुक करें
दशाश्वमेध अथवा नमो घाट के लिए भोर 03:30 बजे की पिकअप हो, या प्रयागराज त्रिवेणी संगम के लिए पूरे दिन की निजी फैमिली कैब—काशी टैक्सी तय किराए और अनुभवी स्थानीय ड्राइवरों के साथ 24 घंटे सेवा में उपलब्ध है।