नाग नथैया 2026 वाराणसी: 13 नवंबर तुलसी घाट लीला, बोट व्यूइंग व कैब गाइड

वर्ष में केवल एक बार, कार्तिक शुक्ल चतुर्थी के दिन, तुलसी घाट पर बहती पतित-पावनी गंगा का स्वरूप प्रतीकात्मक रूप से यमुना नदी में परिवर्तित हो जाता है।

आधुनिक रंगमंच की परिकल्पना से सैकड़ों वर्ष पूर्व, संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास जी ने काशी के गंगा तट पर भगवान श्रीकृष्ण द्वारा विषैले कालिया नाग के मान-मर्दन (कालिया दमन) की सजीव लीला की शुरुआत की थी। समूचे पूर्वांचल में इसे नाग नथैया के नाम से जाना जाता है, और यह बनारस के चार ऐतिहासिक लक्खा मेलों में से एक है—ऐसे मेले जहां एक ही स्थान पर एक लाख से अधिक श्रद्धालु एकत्र होते हैं।

शाम को ठीक 04:45 बजे, बाल कृष्ण का रूप धरे एक छोटे बालक गंगा तट पर रोपे गए कदंब के वृक्ष की डाल पर चढ़ते हैं, अथाह जल में निर्भय छलांग लगाते हैं, और कुछ ही पलों में विशालकाय कालिया नाग के सात फनों पर मुरली बजाते हुए प्रकट होते हैं। ठीक उसी समय रामनगर से काशी नरेश (बनारस के महाराजा) अपने भव्य लाल-सुनहरे बजरे पर पधारते हैं और प्रभु को स्वर्ण अशर्फी भेंट करते हैं।

यदि आप शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 को इस ऐतिहासिक उत्सव में सम्मिलित होने की योजना बना रहे हैं, तो यह जमीनी गाइड आपके लिए है: पक्की तिथि, मिनट-दर-मिनट लीला सारिणी, सीढ़ियों की भगदड़ से बचने हेतु नौका दर्शन के नियम, आउटर कैब ड्रॉप और फिक्स्ड किराए।


1. श्रद्धालुओं व पर्यटकों के लिए त्वरित तथ्य

विवरणव्यावहारिक जानकारी
उत्सव का नामनाग नथैया, नाग नथैया लीला, कालिया दमन पर्व, तुलसी घाट लक्खा मेला
2026 की पक्की तारीखशुक्रवार, 13 नवंबर 2026
हिंदू पंचांग तिथिकार्तिक शुक्ल चतुर्थी (प्रारंभ: 12 नवंबर शाम 06:09, समाप्त: 13 नवंबर रात 08:43)
मुख्य आयोजन स्थलतुलसी घाट (साथ ही भदैनी घाट, रीवा घाट व अस्सी घाट)
लीला का मुख्य समयदोपहर 04:30 बजे से शाम 05:30 बजे तक (गोधूलि वेला)
कदंब से पावन छलांगशाम 04:45 बजे से 04:50 बजे के मध्य
अनुमानित जनसमूह1,50,000 से 2,00,000 श्रद्धालु (घाटों व नावों पर)
जल पुलिस बोट कट-ऑफदोपहर 03:30 बजे (इसके बाद नदी में नावों का आवागमन पूरी तरह बंद)
निकटतम टैक्सी ड्रॉपअस्सी चौराहा (450 मीटर पैदल) या रविंद्रपुरी चौराहा (750 मीटर पैदल)
मौसम की स्थितिसुहावनी गुलाबी ठंड; दोपहर में 26°C, सूर्यास्त बाद नदी पर 18°C तक गिरावट

2. शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 ही पक्की तारीख क्यों है?

सोशल मीडिया और पुराने कैलेंडर में कुछ स्थानों पर अक्टूबर के अंत की भ्रामक तारीखें देखने को मिलती हैं, जो कि पूर्णतः गलत हैं।

वाराणसी के स्थानीय अक्षांश व पंचांग के अनुसार:

  • कार्तिक शुक्ल चतुर्थी तिथि का आरंभ गुरुवार, 12 नवंबर 2026 को शाम 06:09 बजे होगा।
  • यह चतुर्थी तिथि अगले दिन शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 को रात 08:43 बजे तक रहेगी।

शास्त्र सम्मत उदया तिथि और अपराह्न (दोपहर/शाम) काल का पूर्ण संयोग शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 को ही मिल रहा है। अतः अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास और पारंपरिक आयोजकों द्वारा नाग नथैया का भव्य मंचन इसी दिन संपन्न कराया जाएगा। यह पर्व दीपावली के चार दिन बाद और देव दीपावली (कार्तिक पूर्णिमा) से 11 दिन पूर्व आता है।


3. गोस्वामी तुलसीदास जी की 450 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक विरासत

नाग नथैया कोई साधारण नाटक नहीं, बल्कि 16वीं शताब्दी (लगभग 1585 ईस्वी) से चली आ रही एक अखंड लोक-साधना है।

वाराणसी में तुलसी घाट और गंगा नदी का मनोरम दृश्य

गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने जीवन का अंतिम पड़ाव इसी घाट (तब लोलार्क घाट) पर बिताया और यहीं रामचरितमानस के कई प्रसंग व विनय पत्रिका रची। आम जनमानस, जो संस्कृत के कठिन ग्रंथों तक नहीं पहुंच पाता था, उसे भगवान के दिव्य चरित्रों से जोड़ने के लिए तुलसीदास जी ने लोकभाषा और खुले तट पर कृष्ण लीलाओं का शुभारंभ किया:

  1. गंगा का यमुना स्वरूप: मान्यता है कि लीला के दिन गंगा का जल यमुना के समान पवित्र और पूजनीय माना जाता है, जिसमें भगवान के बाल स्वरूप ने लीलाएं रची थीं।
  2. परंपरा के संरक्षक: इस लीला का दायित्व आज भी अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास और संकट मोचन फाउंडेशन के पास है। बाल कृष्ण का स्वरूप धारण करने वाले बालक का चयन पारंपरिक ब्राह्मण परिवारों से होता है, जो कई दिनों तक नियमपूर्वक उपवास और साधना करते हैं।
  3. सजीव कदंब वृक्ष: 13 नवंबर की सुबह अखाड़े के सदस्य और मल्लाह गंगा तट पर लाकर कदंब की एक मजबूत हरी शाखा को घाट के पत्थर और जल में मजबूती से रोपते हैं।

4. दोपहर 04:30 बजे की लीला का मिनट-दर-मिनट कार्यक्रम

यदि आप दोपहर 03:30 बजे के बाद घाट पर पहुंचेंगे, तो न तो आपको खड़े होने की जगह मिलेगी और न ही आप नाव में सवार हो सकेंगे।

02:00 PM ─── अस्सी व सोनारपुरा पर पुलिस बैरिकेडिंग सक्रिय
03:00 PM ─── तुलसी घाट की पक्की सीढ़ियां पूरी तरह भर जाती हैं
03:30 PM ─── जल पुलिस ने नावों की आवाजाही रोकी; दर्शक नावें लंगर डालती हैं
04:15 PM ─── पीतांबर व मोर-मुकुट पहने बाल कृष्ण का पावन आगमन
04:30 PM ─── रामनगर से काशी नरेश के शाही लाल बजरे का आगमन
04:45 PM ─── 'हर हर महादेव' के जयघोष संग बाल कृष्ण की कदंब से छलांग
04:50 PM ─── सात फनों वाले कालिया नाग का प्राकट्य; फन पर नृत्य व मुरली वादन
05:00 PM ─── काशी नरेश द्वारा भगवान को स्वर्ण अशर्फी व माला की भेंट
05:15 PM ─── शंखध्वनि व डमरू के नाद के साथ गंगा तट पर महाआरती
05:30 PM ─── भीड़ की वापसी; गलियों व अस्सी चौराहे पर भारी आवागमन

लीला का सजीव विवरण:

  • 03:00 PM – 03:30 PM (नौकाओं का लंगर): हाथ से चलने वाली नावें, मोटरबोट और पारंपरिक बजरे तुलसी घाट से 30 से 50 मीटर की दूरी पर क्रमबद्ध पंक्तियों में लंगर डाल लेते हैं। वाराणसी जल पुलिस और एनडीआरएफ चेत सिंह घाट से अस्सी घाट के बीच जलमार्ग को सील कर देती है।
  • 04:15 PM (बाल कृष्ण का आगमन): रेशमी पीले पीतांबर, मोर-मुकुट और हाथ में बांसुरी लिए बाल स्वरूप बालक अखाड़े के संतों और पहलवानों के संरक्षण में घाट की सीढ़ियों पर उतरते हैं।
  • 04:30 PM (शाही बजरे का आगमन): रामनगर दुर्ग की ओर से काशी नरेश का लाल और सुनहरी मखमली छतरी वाला ऐतिहासिक बजरा शहनाई की मंगल ध्वनि के साथ तुलसी घाट के सामने पहुंचता है।
  • 04:45 PM (कदंब से छलांग): लाखों श्रद्धालुओं के "हर हर महादेव" और "कन्हैया कन्हैया" के गगनभेदी उद्घोष के बीच, बाल कृष्ण कदंब की डाल पर आगे बढ़ते हैं और निडर होकर अथाह गंगा जल में कूद पड़ते हैं।
  • 04:50 PM (कालिया दमन): पानी के नीचे मौजूद अखाड़े के गोताखोर लकड़ी के विशालकाय यांत्रिक कालिया नाग को जल से ऊपर उठाते हैं। सात फनों वाले काले नाग पर खड़े होकर बाल कृष्ण मुस्कराते हुए मुरली बजाने लगते हैं।
  • 05:00 PM (अशर्फी भेंट): काशी नरेश का बजरा नाग के निकट आता है। महाराजा हाथ जोड़कर भगवान को नमन करते हैं और पारंपरिक स्वर्ण अशर्फी व पुष्पमाला अर्पित करते हैं।
  • 05:15 PM (संध्या महाआरती): गंगा की लहरों पर पुरोहितों द्वारा पंचप्रदीपी आरती उतारी जाती है, शंख और घंटों के नाद से समूचा तट गूंज उठता है।

5. जमीनी हकीकत: नाव से दर्शन बनाम घाट की सीढ़ियों की भीड़

नाग नथैया देखने का आपका अनुभव इस बात पर निर्भर करता है कि आपने दर्शन का कौन सा माध्यम चुना है:

पहलूपहले से बुक निजी नाव / बजरातुलसी घाट की सीढ़ियों पर खड़ा होना
दृश्य का कोणबिल्कुल सामने से स्पष्ट दृश्य; कदंब की डाल, छलांग और कालिया नाग सीधा दिखता है।तिरछा या पीछे का कोण; आगे खड़े लंबे लोगों के कारण दृश्य बाधित होता है।
भीड़ का दबावगद्देदार सीट पर आराम से बैठकर बिना किसी धक्के के दर्शन।2 से 3 घंटे तक कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहना; भारी धक्का-मुक्की।
वापसी का अनुभवलीला के बाद नाव सीधे अस्सी घाट या दशाश्वमेध ले जाती है, कोई जाम नहीं।सीढ़ियों की संकरी गलियों में 45 मिनट तक निकलने का भयंकर जाम।
बुजुर्गों व बच्चों की सुरक्षाअत्यधिक सुरक्षित (लाइफ जैकेट और नाव में बैठने में सहायता के साथ)।बुजुर्गों के लिए बिल्कुल उचित नहीं; पत्थरों पर फिसलने और भीड़ में दबने का जोखिम।
पहुंचने की अंतिम समयसीमाअस्सी घाट पर दोपहर 02:30 से 03:00 बजे तक नाव में बैठना जरूरी।तुलसी घाट की सीढ़ियों पर दोपहर 02:00 बजे तक स्थान घेरना अनिवार्य।

जल पुलिस का सख्त निर्देश: वाराणसी जल पुलिस के आदेशानुसार, नाग नथैया के दौरान प्रत्येक नाव पर सवार सभी यात्रियों को लाइफ जैकेट पहनना कानूनी रूप से अनिवार्य है। क्षमता से अधिक सवारी बैठाने वाली नावों को पुलिस तुरंत जब्त कर लेती है।

🐍 नाग नथैया 2026: तुलसी घाट बोट व्यूइंग व अस्सी कैब सेवा
शुक्रवार 13 नवंबर 2026 को तुलसी घाट पर 450 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक कालिया दमन लीला में सम्मिलित हो रहे हैं? घाट की संकरी सीढ़ियों पर 1.5 लाख श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और दोपहर 03:30 बजे जल पुलिस द्वारा नाव आवागमन रोके जाने से पहले बुक करें निजी नौका/बजरा व्यूइंग, लाइफ जैकेट युक्त सुरक्षित नाव और अस्सी चौराहा/रविंद्रपुरी आउटर ड्रॉप हेतु फिक्स्ड-किराया कैब
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6. कैसे पहुंचें व बाहरी ड्रॉप पॉइंट

तुलसी घाट दक्षिणी वाराणसी में स्थित है, जो दक्षिण में अस्सी घाट और उत्तर में भदैनी घाट के बीच पड़ता है। यहां साल के किसी भी दिन चार पहिया वाहन सीधे घाट तक नहीं जा सकते।

नाग नथैया के दिन वाराणसी ट्रैफिक पुलिस दोपहर 02:00 बजे से रात 08:00 बजे तक वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा देती है:

1. अस्सी चौराहा / अस्सी घाट मार्ग (दक्षिणी प्रवेश द्वार)

  • पैदल दूरी: लगभग 450 मीटर (पक्के मार्ग या रीवा घाट होते हुए 6 से 8 मिनट की समतल वॉक)।
  • रूट: अस्सी घाट से उत्तर की ओर रीवा घाट पार करते ही तुलसी घाट आ जाता है।
  • किसके लिए सर्वोत्तम: लंका, बीएचयू या रिंग रोड बाईपास से आने वाले यात्रियों के लिए। यहीं से दर्शनार्थी नावों की बोर्डिंग भी होती है।

2. रविंद्रपुरी / आनंदमयी अस्पताल चौराहा (पश्चिमी प्रवेश द्वार)

  • पैदल दूरी: लगभग 750 मीटर (10 से 12 मिनट की वॉक)।
  • रूट: भेलूपुर की ओर से आकर आवासीय गलियों से होते हुए सीधे तुलसी घाट की ओर।
  • किसके लिए सर्वोत्तम: वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन (6 किमी) या कैंटोनमेंट के बड़े होटलों से आने वाली टैक्सियों के लिए।

3. लंका बीएचयू गेट (बाहरी होल्डिंग पॉइंट)

  • पैदल दूरी: लगभग 1.8 किमी।
  • किसके लिए सर्वोत्तम: 12 सीटर व 17 सीटर बड़े टेम्पो ट्रैवलर के लिए। यहां से परिवार के सदस्य ई-रिक्शा या साइकिल रिक्शा लेकर अस्सी चौराहे तक जा सकते हैं।

7. बुजुर्गों, महिलाओं व बच्चों के लिए सुरक्षा दिशानिर्देश

  1. पानी के किनारे की निचली सीढ़ियों पर न जाएं: तुलसी घाट की निचली सीढ़ियों पर गंगा की गाद और फिसलन भरी काई जमी होती है। बुजुर्गों या बच्चों को कभी भी बिना रेलिंग वाली निचली सीढ़ियों पर न खड़ा करें।
  2. बिछड़ने पर मिलने का स्थान पहले तय करें: शाम 04:30 से 06:00 बजे के बीच अस्सी और तुलसी घाट के मोबाइल नेटवर्क अत्यधिक जाम हो जाते हैं। परिवार के साथ पहले ही एक भौतिक स्थान तय कर लें—जैसे अस्सी घाट पुलिस चौकी या पप्पू चाय की दुकान
  3. शाम की ठंड के लिए शॉल या जैकेट साथ रखें: दोपहर में धूप खिली रहती है, लेकिन शाम 05:15 बजे सूर्यास्त होते ही नदी की ठंडी हवा चलने लगती है। नाव पर हवा का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए गर्म कपड़े अवश्य साथ रखें।
  4. प्रैम या स्ट्रोलर न लाएं: तुलसी घाट की संकरी गलियों और ऊंची-नीची सीढ़ियों पर बच्चों की गाड़ी (स्ट्रोलर) बिल्कुल नहीं चल सकती। छोटे बच्चों के लिए बेबी कैरियर का उपयोग करें।

8. तुलसी घाट के आसपास खान-पान

तुलसी घाट और अस्सी का इलाका बनारसी स्वाद के लिए प्रसिद्ध है:

  • पप्पू चाय की दुकान (अस्सी चौराहा): मिट्टी के कुल्हड़ में अदरक-इलायची वाली कड़क बनारसी चाय और स्थानीय चर्चाओं का केंद्र।
  • लोलार्क कुंड की चना-कचौड़ी: तुलसी घाट के ठीक पीछे स्थित लोलार्क कुंड के पास गरमा-गरम कचौड़ी और तीखे काले चने की सब्जी दोपहर तक मिलती है।
  • पिज़्ज़ेरिया वाटिका कैफे (अस्सी घाट): गंगा किनारे बैठकर ताज़ा वुड-फायर्ड थिन-क्रस्ट पिज़्ज़ा और प्रसिद्ध हॉट एप्पल पाई का आनंद लें।
  • नवंबर का शुरुआती मलइयो: रविंद्रपुरी और अस्सी के मोड़ों पर सुबह और शाम को केसरिया दूध के झाग से बना ताज़ा मलइयो कुल्हड़ में पिस्ते-बादाम के साथ मिलना शुरू हो जाता है।

9. ठहरने के लिए सर्वोत्तम क्षेत्र

क्षेत्रतुलसी घाट से दूरीलाभकमियांकिसके लिए उपयुक्त
अस्सी घाट व नगवा400 मी – 800 मीतुलसी घाट तक पैदल पहुंच; सुंदर कैफे; बिना टैक्सी नाव तक पहुंच।गाड़ियों की पार्किंग सीमित; बड़े सितारा होटलों की जगह बुटीक गेस्टहाउस।उत्सव के निकट रहने और घाट संस्कृति पसंद करने वाले यात्री।
कैंटोनमेंट (कैंट)6 किमी – 7 किमी5-स्टार होटल (ताज, रेडिसन); सुरक्षित कार पार्किंग; लिफ्ट युक्त शांत कमरे।रविंद्रपुरी ड्रॉप गेट तक 35 मिनट की टैक्सी यात्रा; जल्दी निकलना पड़ेगा।बुजुर्गों वाले परिवार और लग्जरी पसंद करने वाले यात्री।
गोदौलिया व चौक3.5 किमीकाशी विश्वनाथ धाम व दशाश्वमेध घाट के बिल्कुल करीब।सोनारपुरा मार्ग पर भारी जाम; संकरी और अत्यधिक शोरगुल वाली गलियां।केवल विश्वनाथ दर्शन को प्राथमिकता देने वाले तीर्थयात्री।
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10. फिक्स्ड रेट तालिका: नाव किराया व टैक्सी शुल्क (नाग नथैया 2026)

उत्सव के दिन अस्सी घाट पर अचानक नाव लेने पर मल्लाह 4-सीटर नाव का ₹6,000 से ₹10,000 तक मांगते हैं। काशी टैक्सी पारदर्शी दरों पर पहले से आरक्षित, लाइफ-जैकेट युक्त नाव और टैक्सी सेवा प्रदान करती है:

क. नाग नथैया नौका पैकेज (दोपहर 02:30 से शाम 06:00 बजे स्टैंडबाय):

  • पारंपरिक हाथ वाली चप्पू नाव (4 से 6 व्यक्ति): ₹2,800 – ₹3,500
    मल्लाह, नदी में सुरक्षित लंगर की जगह और सभी सवारों के लिए लाइफ जैकेट शामिल।
  • निजी मोटरबोट (10 से 15 व्यक्ति): ₹7,000 – ₹9,000
    कवर्ड इंजन बोट, नदी के बीच से बिना रुकावट दृश्य, अस्सी घाट से बोर्डिंग व वापसी।
  • शाही पारंपरिक बजरा (25 से 40 व्यक्ति): ₹16,000 – ₹24,000
    कार्पेट युक्त ऊपरी डेक, गद्देदार बैठक, बड़े परिवार या ग्रुप के लिए राजसी अनुभव।
  • प्रति व्यक्ति शेयर्ड नाव सीट: ₹750 प्रति व्यक्ति (अग्रिम बुकिंग अनिवार्य)।

ख. फिक्स्ड-किराया टैक्सी व टेम्पो ट्रैवलर दरें:

रूट / गाड़ी का प्रकारAC सेडान (Dzire)फैमिली SUV (Ertiga)प्रीमियम SUV (Innova)12 सीटर टेम्पो17 सीटर टेम्पो
बाबतपुर एयरपोर्ट (VNS) ट्रांसफर₹899₹1,299₹1,799₹2,500₹3,000
वाराणसी कैंट (BSB) / बनारस स्टेशन₹599₹899₹1,199₹1,699₹1,999
पीडीडीयू जं. (मुगलसराय) ट्रांसफर₹1,199₹1,599₹2,199₹2,899₹3,499
नाग नथैया हाफ-डे स्टैंडबाय (4 घंटे / 40 किमी)₹1,600₹2,000₹2,400₹3,200₹3,800
फुल-डे काशी दर्शन पैकेज (8 घंटे / 80 किमी)₹2,499₹3,399₹3,800₹4,599₹5,299

सभी टैक्सी दरों में एसी गाड़ी, ड्राइवर भत्ता, ईंधन, टोल और पार्किंग शामिल हैं। स्टैंडबाय गाड़ियां दोपहर 02:00 बजे से पहले अस्सी चौराहा या रविंद्रपुरी छोड़ती हैं और शाम 06:00 बजे लीला समाप्त होने पर वापस पिकअप करती हैं।


11. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

वाराणसी में नाग नथैया 2026 की सही तारीख क्या है?

नाग नथैया का पावन उत्सव शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल चतुर्थी 12 नवंबर शाम 06:09 बजे से 13 नवंबर रात 08:43 बजे तक रहेगी, जिससे दोपहर की लीला 13 नवंबर को ही होगी।

मुख्य लीला कितने बजे शुरू होती है?

लीला के औपचारिक प्रसंग दोपहर 04:30 बजे काशी नरेश के आगमन के साथ शुरू होते हैं। बाल कृष्ण की कदंब से छलांग 04:45 से 04:50 बजे होती है, और गंगा तट पर महाआरती 05:15 बजे संपन्न होती है।

क्या तुलसी घाट पर सीधे जाकर तुरंत नाव मिल सकती है?

नहीं। उत्सव के दिन तुलसी घाट से किसी भी नाव की बुकिंग नहीं होती। सभी दर्शक नावें अस्सी घाट या प्रभु घाट से दोपहर 03:00 बजे से पहले चलती हैं। मौके पर नाव खोजने पर अत्यधिक मनमाना किराया मांगा जाता है या पुलिस द्वारा रास्ता बंद होने के कारण नाव नहीं मिलती।

क्या लीला के दौरान फोटोग्राफी की अनुमति है?

हाँ, फोटोग्राफी की पूरी अनुमति है। नाव से छलांग का स्पष्ट फोटो खींचने के लिए 70–200mm टेलीफोटो लेंस सर्वोत्तम रहता है। बिना पुलिस अनुमति के भीड़ या नदी के ऊपर ड्रोन उड़ाना सख्त वर्जित है।

लीला समाप्ति के बाद होटल वापसी कैसे करें?

यदि आपने नाव बुक की है, तो मल्लाह आपको शांति से अस्सी घाट या दशाश्वमेध घाट ले जाएगा, जिससे सीढ़ियों के भारी जाम से बचाव होगा। यदि पैदल हैं, तो 450 मीटर चलकर अस्सी चौराहा या 750 मीटर चलकर रविंद्रपुरी पहुंचें, जहां आपकी पहले से बुक टैक्सी प्रतीक्षारत रहेगी।


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