रथ सप्तमी 2027 वाराणसी: काशी द्वादश आदित्य यात्रा, स्नान व कैब गाइड
काशी में रथ सप्तमी—जिसे आरोग्य सप्तमी, अचला सप्तमी, सूर्य सप्तमी और सूर्य जयंती के नाम से भी जाना जाता है—शनिवार, 13 फरवरी 2027 को श्रद्धापूर्वक मनाई जाएगी।
बनारस की पावन धरा पर यह केवल गंगा में एक डुबकी लगाने का पर्व नहीं है। शास्त्रों के अनुसार यह भगवान सूर्य के सात घोड़ों वाले रथ (सप्ताश्व रथ) के उत्तरायण की ओर मुड़ने और उनके प्राकट्य का पावन दिवस है।
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे वर्ष में यही वह श्रेष्ठ दिन है, जब श्रद्धालु स्कंद पुराण के काशी खंड में वर्णित काशी द्वादश आदित्य यात्रा (भगवान सूर्य के बारह पावन विग्रहों की परिक्रमा) संपन्न करते हैं।
यदि आप रथ सप्तमी पर बनारस आने की योजना बना रहे हैं, तो यह व्यावहारिक गाइड आपको 2027 के सटीक मुहूर्त, सभी 12 आदित्य मंदिरों के सही पते, गलियों में भटके बिना 1 दिन में यात्रा पूरी करने का सुगम रूट, बुजुर्गों हेतु सावधानियां और पारदर्शी वाहन व नाव किराए की प्रामाणिक जानकारी देती है।
1. मुख्य तथ्य: तिथि, सूर्योदय व अरुणोदय मुहूर्त (2027)
विवरण
पंचांग गणना (2027 संस्करण)
यात्री हेतु व्यावहारिक सलाह
पर्व की तिथि
शनिवार, 13 फरवरी 2027
माघ शुक्ल सप्तमी (उदया तिथि)।
सप्तमी तिथि प्रारंभ
13 फरवरी 2027, तड़के 02:59 AM
व्रत संकल्प एवं भोर की तैयारी का समय।
सप्तमी तिथि समाप्त
14 फरवरी 2027, रात 02:06 AM
शनिवार को दिनभर सप्तमी तिथि का प्रभाव रहेगा।
काशी में प्रात: उषाकाल
06:10 AM IST
पूर्व दिशा में लालिमा फूटती है; घाटों की बत्तियां मंद होती हैं।
काशी में सूर्योदय समय
06:33 AM IST
तांबे के पात्र से भगवान भाष्कर को अर्घ्य देने का मुख्य क्षण।
अरुणोदय स्नान मुहूर्त
05:05 AM से 06:33 AM
सूर्योदय से पूर्व का 4 घटी (~96 मिनट) का सर्वश्रेष्ठ स्नान समय।
प्रमुख पवित्र जल स्रोत
लोलार्क कुंड (भदैनी), सूर्य कुंड (लक्सा), दशाश्वमेध घाट, असी घाट
तड़के 05:00 से 07:00 बजे के बीच कुंडों पर कतारें लग जाती हैं।
दोपहर मंदिर विश्राम
12:30 PM से 04:30 PM
मोहल्लों के छोटे आदित्य मंदिरों के कपाट दोपहर में बंद रहते हैं। इस दौरान भोजन या दूर के मंदिर की यात्रा रखें।
मौसम का मिजाज
न्यूनतम 11°C (भोर) / अधिकतम 26°C (दोपहर)
सुबह हल्की ठंडक व हल्का कोहरा (08:30 बजे तक साफ); दोपहर में सुहावनी धूप।
2. काशी में सूर्य पूजा और द्वादश आदित्य का पौराणिक रहस्य
अधिकांश लोग बनारस को केवल देवाधिदेव महादेव की नगरी मानते हैं। परंतु बहुत कम लोग जानते हैं कि स्कंद पुराण के अनुसार काशी भगवान सूर्य की भी परम प्रिय राजधानी है।
काशी खंड (अध्याय 9) की कथा के अनुसार:
राजा दिवोदास का धर्मराज: जब भगवान शिव मंदराचल पर्वत पर थे, तब काशी में पुण्यात्मा राजा दिवोदास का शासन था। ब्रह्मा जी के वरदान स्वरूप काशी में किसी देवता का हस्तक्षेप वर्जित था। शिव जी काशी लौटने को व्याकुल थे, अतः उन्होंने दिवोदास के शासन में कोई त्रुटि ढूंढने हेतु चौंसठ योगिनियों को भेजा। परंतु वे काशी के दिव्य सौंदर्य पर ऐसी मुग्ध हुईं कि यहीं रम गईं।
सूर्य देव का आगमन: इसके बाद महादेव ने सूर्य देव को काशी भेजा कि वे वहां कोई दोष निकालें। सूर्य देव ने भिक्षुक, ज्योतिषी, विद्वान और व्यापारी के वेष में काशी का कोना-कोना छान मारा। परंतु उन्हें काशी में सर्वत्र धर्म, सत्य, विद्या और संतोष ही दिखाई दिया।
द्वादश रूप में प्रतिष्ठा: न तो वे शिव जी की आज्ञा भंग करना चाहते थे और न ही काशी का त्याग। अंततः सूर्य भगवान ने निर्णय लिया कि वे सदा-सदा के लिए काशी में ही निवास करेंगे। उन्होंने काशी के चारों दिशा-खंडों में अपने बारह पावन स्वरूप (द्वादश आदित्य) स्थापित किए, जो काशी के रक्षा कवच कहलाए।
सात पत्तों से स्नान का विधान (अर्क पत्र स्नान)
रथ सप्तमी के दिन काशी में भोर के स्नान के समय सिर और कंधों पर मदार (आक/अर्क) के सात पत्ते और सात बेर के पत्ते रखकर स्नान करने की प्राचीन परंपरा है।
धार्मिक मान्यता है कि अर्क का पौधा सूर्य देव का साक्षात प्रतीक है। इस विधि से अरुणोदय में स्नान करने पर सात प्रकार के पाप कटते हैं—जाने में, अनजाने में, वाणी द्वारा, शरीर द्वारा, मन द्वारा, इस जन्म के और पूर्व जन्मों के।
स्नान के पश्चात श्रद्धालु गंगा जल में रक्त चंदन, लाल गुड़हल का फूल और अक्षत मिलाकर तांबे के लोटे से सूर्य देव को तीन बार अर्घ्य अर्पित करते हैं।
3. काशी के 12 आदित्य मंदिर (द्वादश आदित्य): संपूर्ण निर्देशिका
इन 12 मंदिरों में से कई मंदिर पुराने मोहल्लों की संकरी गलियों या बड़े शिवालयों के प्रांगण में स्थित हैं। स्थानीय जानकारी के अभाव में इन्हें खोजना कठिन होता है:
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आदित्य का नाम
सही पता व निकटतम पहचान
काशी खंड माहात्म्य
वाहन पहुंच व पैदल दूरी
1
लोलार्क आदित्य
लोलार्क कुंड, भदैनी / तुलसी घाट के समीप (दक्षिण वाराणसी)
शारीरिक तेज, नेत्र ज्योति, असाध्य चर्म रोग से मुक्ति व संतान प्राप्ति।
गाड़ी मारवाड़ी सेवा संघ (भदैनी) तक जाती है। वहां से 180 मीटर समतल रास्ता। कुंड में 35 सीढ़ियां नीचे उतरना पड़ता है।
2
सांबा आदित्य
D-51/90, सूर्य कुंड (सूरज कुंड), लक्सा रोड
श्रीकृष्ण पुत्र सांब द्वारा कुष्ठ रोग से मुक्ति हेतु स्थापित; आरोग्य व दीर्घायु।
लक्सा मुख्य मार्ग पर सूर्य कुंड के प्रवेश द्वार तक कार पहुंचती है। मात्र 40 मीटर चलना पड़ता है।
3
विमल आदित्य
D-35/273, खारी कुआं के पीछे गली, जंगमबाड़ी (गोदौलिया के पास)
मानसिक शुद्धता, आत्मिक शांति और पाप वृत्तियों का शमन।
वाहन बेनियाबाग मल्टी-लेवल पार्किंग में लगाएं। गिरिजाघर होते हुए जंगमबाड़ी तक 700 मीटर पैदल मार्ग।
4
द्रौपद आदित्य
अक्षय वट प्रांगण, श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर
महारानी द्रौपदी द्वारा स्थापित; सूर्य देव ने अक्षय पात्र दिया था। कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती।
गेट नंबर 4 (ज्ञानवापी) या गेट 1 (बांसफाटक) से प्रवेश। सुलभ दर्शन पास के साथ सीधा समतल रास्ता।
5
गंगा आदित्य
No. 1/68, नेपाली मंदिर के नीचे, ललिता घाट
नदी किनारे पूर्वाभिमुख; दुर्घटना, विश्वासघात, धोखे व अकाल संकट से रक्षा।
विश्वनाथ कॉरिडोर के रैंप/एस्केलेटर से ललिता घाट उतरें, या सीधे नाव से ललिता घाट सीढ़ियों पर पहुंचें।
6
वृद्ध आदित्य
D-3/15, मीर घाट के पास (बड़े हनुमान जी के दक्षिण, धर्मेश्वर महादेव के ऊपर)
वृद्धावस्था में शारीरिक बल, स्मरण शक्ति और व्याधियों से सुरक्षा।
ललिता घाट से दक्षिण की ओर घाट के पक्के फर्श पर मात्र 150 मीटर समतल पैदल चलें।
7
यम आदित्य
Ck. 7/135, संकटा घाट की सीढ़ियों पर (मां संकटा मंदिर के समीप)
यमराज द्वारा स्थापित; अकाल मृत्यु (अपमृत्यु) के भय और घोर संकटों से मुक्ति।
मणिकर्णिका/सिंधिया घाट से उत्तर दिशा में घाट पर 300 मीटर, या नाव से सीधे संकटा घाट सीढ़ियों पर उतरें।
8
मयूख आदित्य
K-24/34, मंगला गौरी मंदिर परिसर, पंचगंगा घाट
सूर्य की प्रखर किरणों (मयूख) का स्वरूप; विग्रह सदा शीतल व नम रहता है। ज्वर व पित्त दोष शांति।
पंचगंगा घाट से सीढ़ियां चढ़ें (100+ सीढ़ियां) या चौखंभा/भैरोंनाथ गली से 20 मिनट पैदल चलें।
9
अरुण आदित्य
त्रिलोचन घाट / त्रिलोचनेश्वर महादेव गली (A-2/80 क्षेत्र)
सूर्य के सारथी अरुण का पावन स्वरूप; नेत्र रोग, स्नायु दुर्बलता और कार्यों में बाधा निवारण।
पंचगंगा से उत्तर की ओर घाट-घाट 400 मीटर, या सीधे नाव से त्रिलोचन घाट के सामने उतरें।
10
खखोल्ख आदित्य
कामेश्वर महादेव मंदिर, A-2/9, त्रिलोचन के उत्तर, मछोदरी पार्क
प्राचीन पिलपिला तीर्थ के पास; महर्षि खखोल्ख द्वारा वंदित; पितृ दोष व पारिवारिक कलह से मुक्ति।
त्रिलोचन घाट से ऊपर मछोदरी पार्क की ओर 350 मीटर चढ़ें। यहां आपकी समर्पित कैब आपकी प्रतीक्षा करेगी!
11
उत्तरार्क आदित्य
अलाईपुर, बकरिया कुंड, वाराणसी सिटी रेलवे स्टेशन के पास
ब्राह्मण प्रियव्रत की कथा; सूर्य दोष, नवग्रह पीड़ा शांति और सुयोग्य संतान सुख।
पूर्णतः सुगम! समर्पित एसी कैब सीधे बकरिया कुंड के द्वार तक जाती है। गलियों में नहीं भटकना।
12
केशवादित्य
A-37/51, आदि केशव मंदिर, राजघाट किला (वरुणा-गंगा संगम)
यात्रा की पूर्णाहुति; भगवान विष्णु ने सूर्य देव को यहां शिव लिंग पूजन का उपदेश दिया था।
पूर्णतः सुगम! कैब सीधे राजघाट पठार पर आदि केशव मंदिर परिसर के द्वार तक पहुंचाती है। वरुणा संगम का विहंगम दृश्य।
4. एक दिन में पूरी 12 आदित्य यात्रा कैसे करें: मास्टर रूट प्लान
यदि आप बिना योजना के निकलेंगे, तो बनारस की गलियों और जाम में उलझकर दोपहर तक थक जाएंगे। 12 मंदिर लगभग 22 किलोमीटर के दायरे में फैले हैं।
हमारी सुझाई गई "कुंड-कॉरिडोर-घाट-उत्तरी लिंक" कार्ययोजना से आपकी यात्रा बिना किसी भागदौड़ के सुगमता से संपन्न होगी:
चरण 1: भोर का स्नान व दक्षिणी कुंड (05:00 AM – 07:30 AM)
05:30 AM: सबसे पहले लोलार्क कुंड (भदैनी) पहुंचें। मदार के पत्तों के साथ अरुणोदय स्नान करें या चबूतरे से आचमन लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य दें। लोलार्क आदित्य (मंदिर 1) के दर्शन करें।
06:45 AM: कैब से 10 मिनट में सूर्य कुंड (लक्सा) पहुंचें। कुंड में हाथ-मुंह धोकर सांबा आदित्य (मंदिर 2) के दर्शन करें।
चरण 2: पुराना शहर व विश्वनाथ धाम (07:45 AM – 10:30 AM)
07:45 AM: कैब आपको बेनियाबाग पार्किंग पर छोड़ेगी। गिरिजाघर होकर जंगमबाड़ी गली में विमल आदित्य (मंदिर 3) के दर्शन करें।
08:30 AM: बांसफाटक होकर गेट नंबर 4 (ज्ञानवापी) से श्री काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर में प्रवेश करें। अक्षय वट के पास द्रौपद आदित्य (मंदिर 4) के दर्शन करें।
बाबा विश्वनाथ के सुलभ दर्शन का लाभ लें।
09:45 AM: कॉरिडोर के पक्के रैंप से ललिता घाट उतरें और नेपाली मंदिर के नीचे गंगा आदित्य (मंदिर 5) के दर्शन करें।
चरण 3: घाटों का पैदल मार्ग अथवा निजी बोट विकल्प (10:30 AM – 12:45 PM)
ललिता घाट से आगे आपके पास दो विकल्प हैं:
विकल्प अ (घाटों पर पैदल चलना): ललिता घाट से 150 मीटर दक्षिण जाकर मीर घाट पर वृद्ध आदित्य (मंदिर 6) के दर्शन करें। फिर उत्तर की ओर चलकर संकटा घाट पर यम आदित्य (मंदिर 7), पंचगंगा पर मयूख आदित्य (मंदिर 8) और त्रिलोचन पर अरुण आदित्य (मंदिर 9) के दर्शन करें।
विकल्प ब (बुजुर्गों हेतु सर्वोत्तम — निजी मोटर बोट): ललिता घाट से हमारी पूर्व-आरक्षित निजी बोट में सवार हों। बोट आपको मीर घाट, संकटा घाट और त्रिलोचन घाट की सीढ़ियों तक सीधे ले जाएगी, जिससे गलियों की ऊंची चढ़ाई और भीड़ से पूरी तरह बचाव हो जाता है।
चरण 4: उत्तरी मंदिर व भव्य संगम पूर्णाहुति (01:00 PM – 04:30 PM)
01:00 PM: त्रिलोचन से ढलान चढ़कर मछोदरी पार्क पहुंचें (350 मी)। आपकी समर्पित एसी कैब यहां पहले से खड़ी मिलेगी।
कामेश्वर मंदिर में खखोल्ख आदित्य (मंदिर 10) के दर्शन करें।
01:30 PM: शुद्ध सात्विक भोजन अथवा बनारसी जलपान ग्रहण करें (दोपहर में मंदिरों के पट कुछ समय विश्राम हेतु बंद रहते हैं)।
02:45 PM: कैब से 12 मिनट में अलाईपुर स्थित बकरिया कुंड पहुंचकर उत्तरार्क आदित्य (मंदिर 11) के दर्शन करें।
03:45 PM: कैब से राजघाट पहुंचकर वरुणा-गंगा संगम पर स्थित ऐतिहासिक आदि केशव मंदिर में केशवादित्य (मंदिर 12) के दर्शन करें।
यहां 12 आदित्य यात्रा की विधिवत पूर्णाहुति प्रार्थना करें और सूर्य देव से आरोग्य व सुख-शांति का आशीष लें।
05:00 PM: कैब आपको शाम की गंगा आरती हेतु दशाश्वमेध/असी घाट अथवा सीधे आपके होटल पर सकुशल छोड़ देगी।
☀️ रथ सप्तमी व द्वादश आदित्य यात्रा 2027: सूर्योदय स्नान नाव, 12-मंदिर कैब व सुलभ दर्शन
रथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी एवं काशी द्वादश आदित्य यात्रा (शनिवार, 13 फरवरी 2027) हेतु यात्रा की योजना बना रहे हैं? 12 आदित्य मंदिरों हेतु फुल-डे एसी कैब, गंगा तट के लिए निजी सनराइज नाव और श्री काशी विश्वनाथ सुलभ दर्शन बिना किसी पीक सर्ज के निश्चित दरों पर बुक करें।
₹2,499 में 8h/80km समर्पित एसी सेडान / ₹2,800 अर्टिगा — संपूर्ण 12 आदित्य तीर्थ परिक्रमा (लोलार्क, बकरिया कुंड, सूर्य कुंड, आदि केशव)
ERP-सत्यापित निजी सूर्योदय नाव (₹3,500 में 6 सवारी / ₹4,500 में 15 सवारी) — गंगा तट के आदित्य मंदिरों (ललिता, संकटा, त्रिलोचन, राजघाट) हेतु
बाबतपुर एयरपोर्ट (₹899) व कैंट स्टेशन (₹650) से होटल/घाट पिकअप — प्लेकार्ड अगवानी सहित
द्रौपदादित्य हेतु ₹500 श्री काशी विश्वनाथ सुलभ दर्शन सहायता (₹300 आधिकारिक टिकट + ₹200 सेवा शुल्क)
लोलार्क कुंड व सूर्य कुंड में भोर 05:00 AM से आरोग्य स्नान हेतु लचीली पिकअप सुविधा
☀️ 12-आदित्य फुल-डे कैब ₹2,499·🌅 सूर्योदय स्नान नाव ₹3,500·🛕 विश्वनाथ सुलभ दर्शन ₹500·🛡️ पारदर्शी लिखित दरें
5. निर्णय मार्गदर्शिका: ठहरने का स्थान व कितने दिन रुकें?
कितने दिन का प्रवास सर्वोत्तम है?
अनुशंसित अवधि:2 रात / 3 दिन (शुक्रवार 12 फरवरी को आगमन, शनिवार 13 फरवरी को द्वादश आदित्य यात्रा व स्नान, और रविवार 14 फरवरी को वापसी)।
प्रयागराज संगम विस्तार: यदि समय हो, तो रविवार सुबह एसी कैब द्वारा 6-लेन NH-19 के रास्ते (125 किमी, 2.5 घंटे) प्रयागराज माघ मेला 2027 जाकर त्रिवेणी संगम में पावन स्नान कर शाम तक बनारस लौट सकते हैं।
ठहरने के क्षेत्रों की व्यावहारिक तुलना
क्षेत्र
लाभ
सीमाएं
किनके लिए उपयुक्त
असी घाट / रविंद्रपुरी
कारों व टैक्सियों की निर्बाध पहुंच; लोलार्क कुंड से मात्र 5 मिनट; समतल सड़कें; शांत वातावरण व अच्छे कैफे।
उत्तरी मंदिरों (अलाईपुर, राजघाट) से 25 मिनट की दूरी।
वरिष्ठ नागरिक, परिवार और शांतिप्रिय श्रद्धालु।
कैंटोनमेंट (नदेसर / छावनी)
प्रतिष्ठित 5-स्टार होटल (ताज, रेडिसन); चौड़ी खुली सड़कें; शहर के किसी भी कोने हेतु त्वरित कैब रवानगी।
पुराने घाटों से 25–35 मिनट की दूरी; हर गतिविधि हेतु कैब आवश्यक।
कॉर्पोरेट ग्रुप, उच्च बजट यात्री और आराम पसंद परिवार।
गोदौलिया / पुराना शहर
विश्वनाथ मंदिर, द्रौपदादित्य व गंगा आरती तक पैदल पहुंच।
सख्त नो-व्हीकल जोन। चार पहिया वाहन अंदर नहीं जा सकते। सामान लेकर 800 मी–1 किमी पैदल चलना पड़ता है।
युवा यात्री, अकेले आने वाले श्रद्धालु और बैकपैकर्स।
6. वरिष्ठ नागरिकों व परिवारों हेतु आवश्यक सावधानियां
सुबह की ठंडी संगमरमर फर्श (11°C की वास्तविकता):
फरवरी के मध्य में भोर का तापमान लगभग 11°C रहता है। विश्वनाथ धाम और पुराने मंदिरों के खुले पत्थर के फर्श नंगे पांवों को बहुत ठंडे लगते हैं।
उपाय: साथ में साफ, मोटे और ग्रिप वाले ऊनी मोजे रखें। सुरक्षा गार्ड कपड़े के मोजे पहनकर प्रांगण में चलने की अनुमति देते हैं।
लोलार्क कुंड की खड़ी सीढ़ियों से बचाव:
लोलार्क कुंड की 35 से अधिक सीढ़ियां बहुत संकरी और खड़ी हैं। जिन बुजुर्गों को घुटने में दर्द या सांस फूलने की समस्या हो, उन्हें सीढ़ियों से नीचे न उतारें। ऊपर ही चबूतरे पर जल मंगवाकर आचमन कराएं।
जूते-चप्पल कैब में ही सुरक्षित रखें:
गलियों में बार-बार जूते उतारने और संभालने की झंझट से बचने के लिए महंगे जूते कैब में ही छोड़ दें और पैरों में सामान्य स्लिपर पहनें, जिसे जरूरत पड़ने पर कॉटन के थैले में रखा जा सके।
बाबतपुर एयरपोर्ट शीतकालीन फ्लाइट बफर:
यद्यपि फरवरी में कोहरा कम हो जाता है, फिर भी सुबह 08:30 बजे से पहले कभी-कभार उड़ानों में विलंब हो सकता है। शुक्रवार, 12 फरवरी को सुबह 10:30 से दोपहर 03:00 बजे के बीच लैंड होने वाली उड़ानें चुनें।
7. पारदर्शी वाहन दरें व बुकिंग निर्देशिका
त्योहारी दिनों में सड़क पर मनमाने मोलभाव से बचाने हेतु हमारी सभी दरें पूर्व-निर्धारित और पारदर्शी हैं।
समर्पित लोकल एसी कैब (8 घंटे / 80 किलोमीटर)
संपूर्ण 12 आदित्य परिक्रमा, कुंड स्नान व दूरस्थ मंदिरों हेतु:
वाहन श्रेणी
मॉडल उदाहरण
बैठने की क्षमता
लगेज स्पेस
8h / 80km फुल-डे किराया
अतिरिक्त शर्तें व नियम
एसी सेडान
स्विफ्ट डिजायर, टोयोटा इटियोस
4 सवारी तक
2 बड़े बैग
₹2,499
चालक, ईंधन व 8h/80km शामिल। अतिरिक्त घंटा: ₹150, अतिरिक्त किमी: ₹12।
एसी मिड-एसयूवी
मारुति अर्टिगा, किआ कैरेंस
6 सवारी तक
3 बड़े बैग
₹2,800
आरामदायक पारिवारिक बैठक, रियर एसी। अतिरिक्त घंटा: ₹200, अतिरिक्त किमी: ₹15।
प्रीमियम एसी एसयूवी
टोयोटा इनोवा क्रिस्टा
6–7 सवारी
4 बड़े बैग
₹3,800
कैप्टन सीटिंग, उत्कृष्ट सस्पेंशन। अतिरिक्त घंटा: ₹250, अतिरिक्त किमी: ₹19।
एसी टेम्पो ट्रैवलर
फोर्स ट्रैवलर 3350
12 / 17 सवारी
10–14 बैग
₹4,250
संयुक्त परिवार व ग्रुप परिक्रमा हेतु। अतिरिक्त घंटा: ₹300, अतिरिक्त किमी: ₹22।
घाट किनारे के 5 आदित्य मंदिरों (ललिता, मीर, संकटा, पंचगंगा, त्रिलोचन) के सुगम दर्शन हेतु:
6 सवारी तक (निजी मोटर बोट):₹3,500 (सूर्योदय स्नान विराम, लाइफ जैकेट व नाविक प्रतीक्षा सहित)।
15 सवारी तक (मध्यम मोटर बोट / बजरा):₹4,500।
30 सवारी तक (डबल-डेकर हेरिटेज बजरा):₹6,500।
श्री काशी विश्वनाथ सुलभ दर्शन सहायता
₹500 प्रति व्यक्ति (₹300 मंदिर न्यास की आधिकारिक रसीद + ₹200 सुगम कतार व लॉकर सहायता शुल्क)। द्रौपदादित्य व गंगा आदित्य दर्शन इसी में सम्मिलित।
8. बनारसी खान-पान व मौसमी स्वाद
रथ सप्तमी की सुबह की यात्रा बनारस के मौसमी स्वादों के बिना अधूरी है:
ओस से तैयार मलय्यो: फरवरी का मध्य बनारस के प्रसिद्ध मलय्यो का अंतिम पखवाड़ा होता है। रातभर ओस की बूंदों में झाग बनाकर तैयार किया गया केसरिया मलय्यो मयूख आदित्य दर्शन के बाद चौखंभा या ठठेरी बाजार में अवश्य चखें।
राम भंडार की चना-कचौड़ी व जलेबी: उड़द दाल भरी खस्ता कचौड़ी, चटपटी कद्दू की सब्जी और गरमा-गरम देशी घी की जलेबी चौक क्षेत्र में विमल आदित्य या द्रौपदादित्य दर्शन के बाद उत्तम नाश्ता है।
कंडे की आंच पर सूर्य खीर: पारंपरिक बनारसी घरों में रथ सप्तमी के दिन गाय के दूध और चावल की मीठी खीर को मिट्टी की हांडी में खुले आंगन में रखकर कंडे की मंद आंच पर पकाया जाता है, जिस पर सुबह की सूर्य किरणें सीधे पड़ती हैं।
9. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
यदि गोदौलिया पर पुलिस बैरिकेड लगा दे तो क्या करें?
त्योहारों पर गोदौलिया-दशाश्वमेध मार्ग पर चार पहिया वाहनों का प्रवेश रोक दिया जाता है। ऐसी स्थिति में आपकी कैब आपको बेनियाबाग मल्टी-लेवल पार्किंग पर उतारेगी, जहां से बांसफाटक होते हुए मात्र 700 मीटर का सीधा समतल मार्ग है। आपका चालक पार्किंग में ही आपकी वापसी की प्रतीक्षा करेगा।
क्या 12 मंदिरों में मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति है?
लोलार्क कुंड, सूर्य कुंड, बकरिया कुंड और आदि केशव सहित अधिकांश स्थानीय मंदिरों में मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति है। केवल श्री काशी विश्वनाथ धाम (जहां द्रौपदादित्य स्थित है) के भीतर मोबाइल, स्मार्टवॉच और चमड़े की वस्तुएं पूर्णतः प्रतिबंधित हैं। इन्हें गेट नंबर 4 जाने से पहले अपनी निजी कैब में ही सुरक्षित छोड़ दें।
क्या लोलार्क कुंड स्नान हेतु सुबह 05:00 बजे कैब मिल जाएगी?
हां। पर्व के अवसर पर पूर्व-आरक्षित कैब सुबह 05:00 बजे आपके होटल से पिकअप करती है। भोर के अंधेरे और ठंड में सड़क पर ऑटो मिलना असंभव होता है, अतः पूर्व-बुकिंग से आप समय पर अरुणोदय स्नान संपन्न कर सकते हैं।
☀️ रथ सप्तमी व द्वादश आदित्य यात्रा 2027: सूर्योदय स्नान नाव, 12-मंदिर कैब व सुलभ दर्शन
रथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी एवं काशी द्वादश आदित्य यात्रा (शनिवार, 13 फरवरी 2027) हेतु यात्रा की योजना बना रहे हैं? 12 आदित्य मंदिरों हेतु फुल-डे एसी कैब, गंगा तट के लिए निजी सनराइज नाव और श्री काशी विश्वनाथ सुलभ दर्शन बिना किसी पीक सर्ज के निश्चित दरों पर बुक करें।
₹2,499 में 8h/80km समर्पित एसी सेडान / ₹2,800 अर्टिगा — संपूर्ण 12 आदित्य तीर्थ परिक्रमा (लोलार्क, बकरिया कुंड, सूर्य कुंड, आदि केशव)
ERP-सत्यापित निजी सूर्योदय नाव (₹3,500 में 6 सवारी / ₹4,500 में 15 सवारी) — गंगा तट के आदित्य मंदिरों (ललिता, संकटा, त्रिलोचन, राजघाट) हेतु
बाबतपुर एयरपोर्ट (₹899) व कैंट स्टेशन (₹650) से होटल/घाट पिकअप — प्लेकार्ड अगवानी सहित
द्रौपदादित्य हेतु ₹500 श्री काशी विश्वनाथ सुलभ दर्शन सहायता (₹300 आधिकारिक टिकट + ₹200 सेवा शुल्क)
लोलार्क कुंड व सूर्य कुंड में भोर 05:00 AM से आरोग्य स्नान हेतु लचीली पिकअप सुविधा